सरगुजा के पोस्ट ग्रेजुएट युवक ने बेरोजगारी को दी मात, खाली पड़ी जमीन पर आधुनिक तरीके से शुरू की टमाटर की खेती नौकरी न मिलने पर सरगुजा के २९ वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट रविंद्र कुमार रजवाड़ा ने अपनी एक एकड़ जमीन पर आधुनिक तकनीकों से टमाटर की खेती शुरू की है। सरगुजा जिले के सुपलगा गांव के रहने वाले २९ वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट युवा रविंद्र कुमार रजवाड़ा ने आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल पेश की है। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद जब उन्हें मनमुताबिक नौकरी नहीं मिली, तो उन्होंने घर पर खाली बैठने या हताश होने के बजाय अपनी बंजर और खाली पड़ी जमीन का सदुपयोग करने का फैसला किया। रविंद्र ने नौकरी की लंबी तलाश छोड़कर मिट्टी से नाता जोड़ा और अपनी एक एकड़ पैतृक भूमि पर व्यावसायिक स्तर पर टमाटर की खेती शुरू की। उनका यह अनूठा प्रयास अब क्षेत्र के अन्य बेरोजगार युवाओं के लिए एक बड़ा प्रेरणास्रोत बन रहा है। मोबाइल इंटरनेट और आधुनिक तकनीकों का सहारा व्यावसायिक स्तर पर बागवानी या खेती का कोई पुराना व्यावहारिक अनुभव न होने के बावजूद, रविंद्र कुमार रजवाड़ा ने आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने में कोई संकोच नहीं किया। उन्होंने अपने मोबाइल फोन पर उपलब्ध इंटरनेट का उपयोग करके टमाटर की उन्नत खेती से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी जुटाई। इसी डिजिटल अध्ययन के आधार पर उन्होंने पहली बार खेतों में ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) और मल्चिंग तकनीक का सफल प्रयोग किया है। मल्चिंग तकनीक का उपयोग खेत में नमी को सुरक्षित रखने और अनचाहे खरपतवार को उगने से रोकने के लिए किया जाता है, जबकि ड्रिप तकनीक पानी की एक-एक बूंद को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाकर सिंचाई को बेहद कुशल बनाती है। जुलाई से शुरू हुई तैयारी और लागत का विवरण रविंद्र ने टमाटर की खेती के लिए प्रारंभिक तैयारियां इसी साल जुलाई के महीने में शुरू की थीं। इसके बाद, अगस्त महीने में उन्होंने टमाटर के नन्हे पौधों की रोपाई का काम पूरा किया। वर्तमान समय में इस रोपाई को एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है और टमाटर के पौधों में अब सुंदर फूल आने लगे हैं, जो एक स्वस्थ और अच्छी फसल का संकेत हैं। फसल को बेहतर पोषण प्रदान करने के लिए उन्होंने यूरिया, डीएपी, इको खाद जैसी रासायनिक खादों के साथ-साथ पारंपरिक गोबर की खाद का भी संतुलित इस्तेमाल किया है। इस पूरी कृषि परियोजना में अब तक उनकी कुल लागत ५० हजार रुपये से अधिक आ चुकी है। हालांकि, उन्हें होने वाला मुनाफा पूरी तरह से आने वाले दिनों में फसल की कुल पैदावार और बाजार में टमाटर के मिलने वाले दामों पर निर्भर करेगा। बेरोजगार युवाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का संदेश अपनी मेहनत से खाली पड़ी जमीन को हरा-भरा करने वाले रविंद्र रजवाड़ा आज उन सभी शिक्षित युवाओं के लिए एक बड़ा उदाहरण बन चुके हैं, जो डिग्री हासिल करने के बाद नौकरियों की कमी के कारण निराश बैठे हैं। उनका मानना है कि यदि किसी के पास अपनी खुद की जमीन खाली पड़ी है, तो उस पर मेहनत करके एक सम्मानजनक आजीविका कमाई जा सकती है और आत्मनिर्भर बना जा सकता है। फिलहाल यह खेती एक एकड़ के सीमित दायरे में की जा रही है, लेकिन रविंद्र का कहना है कि यदि पहली बार का यह प्रयोग सफल रहा और बेहतर परिणाम मिले, तो वे भविष्य में अपनी टमाटर की खेती का रकबा और अधिक बढ़ाएंगे। इसका आप पर असर यह कहानी ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं के लिए स्वरोजगार की असीम संभावनाओं को रेखांकित करती है। • स्वरोजगार का विकल्प: पारंपरिक नौकरियों पर निर्भर रहने के बजाय युवा अपनी खाली पड़ी जमीनों पर आधुनिक खेती कर सकते हैं। इससे वे स्वयं आत्मनिर्भर बनकर दूसरों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकते हैं। • डिजिटल लर्निंग का महत्व: इंटरनेट का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि नई कौशल सीखने और कृषि तकनीकों जैसे कि ड्रिप और मल्चिंग को समझने के लिए किया जा सकता है। इससे खेती की लागत कम और उत्पादन बेहतर होता है। • सरगुजा जिले में: स्थानीय स्तर पर खाली पड़ी अनुपयोगी जमीनों का व्यावसायिक उपयोग बढ़ेगा। इससे क्षेत्र में टमाटर और अन्य सब्जियों की आपूर्ति सुधरेगी और स्थानीय बाजारों को बढ़ावा मिलेगा। ऐसा क्यों हुआ रविंद्र कुमार रजवाड़ा द्वारा टमाटर की खेती शुरू करने के पीछे मुख्य कारण उच्च शिक्षा के बाद रोजगार के अवसरों की कमी और उनकी निजी जमीन का खाली होना था। • नौकरी की कमी: पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद भी रविंद्र को कोई उपयुक्त नौकरी नहीं मिल पाई थी। नौकरी न मिलने के कारण वे कुछ समय तक बेरोजगार रहे, जिससे उन्होंने खुद का काम शुरू करने का फैसला किया। • खाली पड़ी जमीन का उपयोग: रविंद्र के पास अपनी एक एकड़ खाली जमीन थी जो बिना किसी उपयोग के पड़ी हुई थी। उन्होंने इस पैतृक संसाधन का सही इस्तेमाल करने का निर्णय लिया। • तकनीक की उपलब्धता: मोबाइल इंटरनेट के जरिए आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी आसानी से उपलब्ध होना भी एक मुख्य कारण था। इसके माध्यम से उन्होंने बिना किसी पूर्व अनुभव के वैज्ञानिक तरीके से टमाटर उगाना सीखा। सवाल-जवाब 1. रविंद्र कुमार रजवाड़ा कौन हैं और वे कहां के निवासी हैं? रविंद्र कुमार रजवाड़ा एक २९ वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट युवा हैं, जो छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के ग्राम सुपलगा के निवासी हैं। 2. रविंद्र ने टमाटर की खेती कब शुरू की और वर्तमान में फसल की क्या स्थिति है? उन्होंने जुलाई में खेती की तैयारी शुरू की और अगस्त में टमाटर के पौधों की रोपाई की थी। वर्तमान में फसल को एक महीने से अधिक हो चुका है और पौधों में फूल आने लगे हैं। 3. उन्होंने खेती के लिए कौन सी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया है? उन्होंने टमाटर की खेती में ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया है, जिसके बारे में उन्होंने मोबाइल से जानकारी जुटाई थी। 4. टमाटर की खेती में अब तक कितनी लागत आई है और वे कौन सी खादों का उपयोग कर रहे हैं? इस खेती में अब तक ५० हजार रुपये से अधिक की लागत आई है। उन्होंने फसल में यूरिया, डीएपी, इको खाद और गोबर खाद का उपयोग किया है। 5. रविंद्र का भविष्य को लेकर क्या प्लान है? यदि वर्तमान में एक एकड़ में किए गए टमाटर की खेती के परिणाम अच्छे रहे, तो वे भविष्य में इस खेती का रकबा और बढ़ाएंगे। प्रेरणा और सबक रविंद्र रजवाड़ा की यात्रा से युवाओं को मेहनत और आधुनिक सोच के जरिए आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। • संसाधनों का सदुपयोग: विपरीत परिस्थितियों में निराश होने के बजाय उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल करना चाहिए। रविंद्र ने खाली पड़ी जमीन का उपयोग कर अपनी किस्मत बदली। • सीखने की ललक: किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए औपचारिक कृषि डिग्री की नहीं, बल्कि सीखने की इच्छा की जरूरत होती है। रविंद्र ने बिना किसी पूर्व अनुभव के मोबाइल के जरिए पूरी तकनीक सीखी। • बदलाव की पहल: दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय खुद का रास्ता खुद बनाना ही असली सफलता है। बंजर या खाली पड़ी जमीन को उपजाऊ बनाकर आत्मनिर्भर बनना एक बेहतरीन उदाहरण है। https://trendkia.com/chhattisgarh/surguja-ke-posta-grejueta-yuvaka-ne-berojagari-ko-di-mata-khali-pari-jamina-para-adhunika-tarike-se-shuru-ki-tamatara-ki-kheti-32255 TrendKia — Har trend, sabse pehle.