# सरगुजा ओलंपिक में अंबिकापुर की बेटियों ने बास्केटबॉल में फिर जीता गोल्ड, कोच राजेश प्रताप की निशुल्क ट्रेनिंग से संभाग में लहराया परचम

> छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में आयोजित सरगुजा ओलंपिक में जूनियर बालिका बास्केटबॉल टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक जीता है। ग्रामीण बेटियों को निशुल्क प्रशिक्षण देने वाले कोच राजेश प्रताप के मार्गदर्शन में क्षेत्र की चारों टीमों ने पहला स्थान हासिल किया।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-11-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/surguja-olnpika-men-ambikapur-ki-betiyon-ne-basketabola-men-phira-jita-golda-kocha-rajesh-pratap-ki-nishulka-treninga-se-snbhaga-m-57441 · **Language:** Hindi
**Tags:** सरगुजा ओलंपिक, अंबिकापुर, बास्केटबॉल, राजेश प्रताप, गोल्ड मेडल, छत्तीसगढ़ खेल, महिला खिलाड़ी

छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में खेल प्रतिभाओं का जबरदस्त संगम देखने को मिला, जहां आयोजित सरगुजा ओलंपिक में स्थानीय खिलाड़ियों ने मैदान पर अपनी चमक बिखेरी। खेल जगत में समर्पण, अनुशासन और पसीने की ताकत क्या होती है, यह अंबिकापुर की जूनियर बालिका बास्केटबॉल टीम ने अपने खेल से साबित कर दिखाया है। संभाग भर के विभिन्न क्षेत्रों से आई मजबूत और अनुभवी टीमों को कड़े मुकाबलों में पीछे छोड़ते हुए इन बेटियों ने लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। पिछले साल की तरह इस बार भी पहला स्थान हासिल कर इस टीम ने यह दर्शा दिया है कि निरंतर अभ्यास और सही मार्गदर्शन से किसी भी स्तर पर जीत का सिलसिला कायम रखा जा सकता है।

## मैदान पर दिखा कड़ा मुकाबला और बेटियों का तालमेल
प्रतियोगिता के दौरान कोर्ट पर रोमांचक दृश्य देखने को मिले, जहां संभाग के अलग-अलग कोनों से पहुंची टीमों ने खिताब जीतने के लिए पूरा जोर लगाया। अंबिकापुर की जूनियर बालिकाओं की टीम ने हर मैच में रणनीतिक खेल दिखाया और सटीक पासिंग के साथ विपक्षी टीमों के डिफेंस को ध्वस्त किया। टीम की सदस्यों ने बताया कि टूर्नामेंट में मुकाबला आसान नहीं था क्योंकि हर टीम पूरी तैयारी के साथ आई थी। इसके बावजूद खिलाड़ियों ने संयम और एकता के बल पर हर चुनौती को पार किया। नेट पर नियमित अभ्यास और गेंद पर बेहतरीन नियंत्रण ने उन्हें निर्णायक पलों में बढ़त दिलाई और अंततः उन्होंने प्रतियोगिता का शीर्ष स्थान हासिल करके ही दम लिया।

## साक्षी का चार साल का समर्पण लाया रंग
गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम की प्रमुख खिलाड़ी साक्षी ने अपनी खेल यात्रा को साझा करते हुए बताया कि वह बीते 4 वर्षों से लगातार बास्केटबॉल के मैदान में समय बिता रही हैं। साक्षी के अनुसार, सरगुजा ओलंपिक जैसा मंच खिलाड़ियों के भीतर छुपी प्रतिभा को सामने लाने का एक बहुत बड़ा जरिया बनकर उभरा है। इस टूर्नामेंट में खेलने से न केवल आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि अन्य जिलों के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने से खेल की बारीकियों को समझने में भी मदद मिलती है। साक्षी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनकी टीम ने पिछले वर्ष भी इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था और इस बार भी उस जीत की निरंतरता को बनाए रखने का लक्ष्य तय किया गया था, जिसे सभी साथियों ने अपनी एकजुटता से पूरा कर दिखाया।

## राजेश प्रताप का निशुल्क प्रशिक्षण और चार वर्गों में स्वर्णिम सफलता
खिलाड़ियों की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे उनके कोच राजेश प्रताप का निस्वार्थ समर्पण सबसे बड़ा आधार बनकर सामने आया है, जिन्हें स्थानीय खेल प्रेमी सम्मान से द्रोणाचार्य पुकारते हैं। साक्षी ने जानकारी दी कि संभाग स्तर पर इस बार चार अलग-अलग श्रेणियों में गोल्ड मेडल जीतने का रिकॉर्ड बना है। इन श्रेणियों में सीनियर बालक वर्ग, जूनियर बालक वर्ग, सीनियर बालिका वर्ग और जूनियर बालिका वर्ग शामिल हैं। इन चारों वर्गों में खिलाड़ियों ने शानदार खेल दिखाते हुए पहले स्थान पर कब्जा किया, जिससे खेल गलियारों में अंबिकापुर का दबदबा स्थापित हो गया है। कोच राजेश प्रताप का मानना है कि मैदान पर बहाया गया पसीना कभी व्यर्थ नहीं जाता और जब खिलाड़ी जी जान से अभ्यास करते हैं तो पदक अपने आप उनके हिस्से में आ जाते हैं।

## ग्रामीण बेटियों को खेल की मुख्यधारा से जोड़ने की अनूठी मुहिम
अंबिकापुर की बास्केटबॉल अकादमी केवल शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सबसे प्रेरणादायक पहलू ग्रामीण अंचल से आने वाली बेटियों का सशक्तिकरण है। कोच राजेश प्रताप के अनुसार, अंबिकापुर शहर में शिक्षा प्राप्त करने के लिए आसपास के दूरदराज गांवों से कई छात्राएं आती हैं। इन ग्रामीण बेटियों को खेल के प्रति जागरूक करना और उन्हें खेल की मुख्यधारा में लाकर आगे बढ़ने का बराबर मौका देना ही उनके इस अभियान का केंद्रीय मकसद है। इसके लिए एक निशुल्क प्रशिक्षण केंद्र का संचालन किया जा रहा है, ताकि आर्थिक तंगी या संसाधनों की कमी किसी भी प्रतिभाशाली बेटी के सपनों में बाधा न बन सके। कई ऐसी लड़कियां, जिन्होंने हाल ही में गांव से आकर खेलना शुरू किया था, उन्होंने बेहद कम समय में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक अपनी पहचान स्थापित कर ली है।

## राष्ट्रीय पटल पर पहचान बनाने की दिशा में मजबूत कदम
सरगुजा ओलंपिक में मिली यह दोहरी स्वर्णिम सफलता केवल एक क्षेत्रीय पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के बड़े लक्ष्यों की मजबूत नींव साबित हो रही है। कोच राजेश प्रताप ने आशा व्यक्त की है कि जिस लगन और मेहनत के साथ ये बच्चे रोजाना अभ्यास कर रहे हैं, वह दिन दूर नहीं जब इनमें से कई खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। निशुल्क प्रशिक्षण केंद्र के जरिए नए बच्चों को बास्केटबॉल से जोड़ने का कार्य लगातार आगे बढ़ रहा है, जिससे सरगुजा संभाग अब खेल के मानचित्र पर एक नई पहचान गढ़ रहा है। बेटियों की यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के युवाओं को खेलों में अपनी दिशा तलाशने और आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरने के लिए प्रेरित कर रही है।

## इसका आप पर असर
अंबिकापुर की बेटियों की यह स्वर्णिम जीत और निशुल्क कोचिंग व्यवस्था स्थानीय युवाओं के लिए खेल में करियर बनाने के नए रास्ते खोलती है।

- **छत्तीसगढ़ में:** ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की लड़कियों को खेलों में आगे आने और जिला स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए सीधा प्रोत्साहन मिलेगा। यह सफलता राज्य के अन्य खेल संघों को भी जमीनी स्तर पर मुफ्त और सुलभ प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने के लिए प्रेरित करेगी।
- **अंबिकापुर और सरगुजा संभाग में:** संभाग के ग्रामीण अंचलों से शहर में पढ़ने आने वाली छात्राओं के लिए खेल सुविधाओं तक पहुंच पूरी तरह आसान हो जाएगी। आर्थिक तंगी से जूझ रहे प्रतिभावान बच्चे अब बिना किसी प्रशिक्षण शुल्क के कोच राजेश प्रताप के केंद्र से जुड़कर बास्केटबॉल में नियमित अभ्यास शुरू कर सकते हैं।
- **खिलाड़ियों और छात्रों के लिए:** स्थानीय स्तर पर लगातार स्वर्ण पदक जीतने से खिलाड़ियों को राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। खेल कोटे के जरिए इन एथलीटों के लिए भविष्य में उच्च शिक्षा और सरकारी नियुक्तियों के दरवाजे भी खुल सकेंगे।
- **अभिभावकों के नजरिए से:** ग्रामीण समाज में बालिकाओं को खेलों में भेजने को लेकर बनी पुरानी हिचकिचाहट और संकोच में उल्लेखनीय कमी आएगी। जब ग्रामीण बेटियां संभाग और राष्ट्रीय पटल पर पदक जीतकर सम्मान पाती हैं, तो अन्य परिवार भी अपनी बेटियों को मैदान में भेजने के लिए प्रेरित होते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
सरगुजा ओलंपिक में अंबिकापुर की जूनियर बालिका टीम की लगातार दूसरी खिताबी जीत वर्षों के सुनियोजित प्रशिक्षण, नियमित कोर्ट अभ्यास और एक समर्पित निशुल्क कोचिंग मॉडल का प्रत्यक्ष परिणाम है।

- **नियमित और अनुशासित कोर्ट अभ्यास:** खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता से पहले अंबिकापुर बास्केटबॉल अकादमी में घंटों पसीना बहाया और गेंद नियंत्रण पर लगातार काम किया। नेट पर नियमित अभ्यास और सामरिक समझ के कारण खिलाड़ियों ने निर्णायक मैचों में मानसिक दबाव को आसानी से संभाल लिया।
- **निस्वार्थ और निशुल्क कोचिंग मॉडल:** कोच राजेश प्रताप ने आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण बच्चों के लिए बिना किसी शुल्क के निरंतर कोचिंग की व्यवस्था की। इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि की बेटियों को भी आधुनिक खेल तकनीक सीखने का समान अवसर मिला।
- **चार साल का दीर्घकालिक अनुभव:** साक्षी जैसी खिलाड़ियों ने पिछले 4 वर्षों से बास्केटबॉल के कोर्ट पर लगातार खेलकर अपनी क्षमता और रणनीतिक समझ को परिपक्व किया। पिछले साल के गोल्ड मेडल के अनुभव ने इस बार भी पूरे दल को शांत रहकर जीतने का आत्मविश्वास दिया।
- **चारों श्रेणियों में समग्र दबदबा:** सीनियर और जूनियर दोनों वर्गों में बालक और बालिकाओं की टीमों का एक साथ जीतना दर्शाता है कि यह जीत किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं थी, बल्कि एक मजबूत प्रशिक्षण प्रणाली का हिस्सा थी। संभाग स्तर पर चारों स्वर्ण पदक जीतने की इस परंपरा ने पूरी टीम के मनोबल को शीर्ष पर बनाए रखा।

## सवाल-जवाब

### 1. सरगुजा ओलंपिक में किस टीम ने लगातार दूसरी बार गोल्ड मेडल जीता?
अंबिकापुर की जूनियर बालिका बास्केटबॉल टीम ने संभाग की अन्य टीमों को हराकर लगातार दूसरी बार गोल्ड मेडल जीता।

### 2. अंबिकापुर के बास्केटबॉल खिलाड़ियों के कोच कौन हैं?
खिलाड़ियों के कोच राजेश प्रताप हैं, जिन्हें स्थानीय लोग सम्मान से 'द्रोणाचार्य' के नाम से भी पुकारते हैं।

### 3. कोच राजेश प्रताप की प्रशिक्षण प्रणाली की क्या खासियत है?
वह ग्रामीण अंचल से आने वाली बेटियों और जरूरतमंद बच्चों को बास्केटबॉल का निशुल्क प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।

### 4. संभाग स्तर पर अंबिकापुर की किन टीमों ने गोल्ड मेडल हासिल किए?
अंबिकापुर ने चार वर्गों में गोल्ड जीता, जिनमें सीनियर बालक, जूनियर बालक, सीनियर बालिका और जूनियर बालिका वर्ग शामिल हैं।

### 5. खिलाड़ी साक्षी कितने वर्षों से बास्केटबॉल खेल रही हैं?
साक्षी पिछले 4 वर्षों से नियमित रूप से बास्केटबॉल खेल रही हैं और लगातार दूसरी बार गोल्ड जीतने वाली टीम का हिस्सा रही हैं।

### 6. कोच राजेश प्रताप का मुख्य लक्ष्य क्या है?
उनका मुख्य लक्ष्य अधिक से अधिक ग्रामीण और स्थानीय बच्चों को बास्केटबॉल से जोड़ना और उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है।

## प्रेरणा और सबक
अंबिकापुर की बेटियों और उनके कोच राजेश प्रताप की यह यात्रा साबित करती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद निस्वार्थ समर्पण और अनुशासन से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

- **साधनों से बड़ा संकल्प:** ग्रामीण परिवेश से आकर कम समय में नेशनल स्तर तक पहुंचना यह सिखाता है कि सुविधाओं की कमी कभी भी प्रतिभा की सीमा तय नहीं कर सकती।
- **निस्वार्थ सेवा का प्रभाव:** कोच राजेश प्रताप द्वारा बच्चों को निशुल्क प्रशिक्षण देना यह दर्शाता है कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए व्यक्तिगत पहल सबसे ताकतवर माध्यम है।
- **निरंतरता ही सफलता की कुंजी:** चार साल तक मैदान पर लगातार पसीना बहाने वाली साक्षी का अनुभव यह साबित करता है कि सफलता किसी एक दिन का परिणाम नहीं, बल्कि रोज की मेहनत का जोड़ है।
- **समान अवसर से सशक्तिकरण:** जब गांव से शहर आने वाली बेटियों को खेल का खुला मंच और सही मार्गदर्शन मिला, तो उन्होंने संभाग की सभी मजबूत टीमों को पछाड़कर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर दी।

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