ठोस वजह होने पर बीवी को पति के साथ रहने के लिए विवश नहीं किया जा सकता, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की दो टूक छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 26 वर्षीय पति की याचिका खारिज करते हुए व्यवस्था दी है कि अलग रहने के वाजिब कारण मौजूद हों तो पत्नी को दांपत्य संबंध बहाल करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। वैवाहिक रिश्तों में जबरन साथ रहने को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण न्यायिक टिप्पणी सामने आई है, जिसमें छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी महिला के पास अपने ससुराल से दूर रहने की ठोस और उचित वजहें मौजूद हैं, तो उसे पति के साथ रहने के लिए कतई विवश नहीं किया जा सकता। इस तल्ख टिप्पणी के साथ अदालत ने अपने जीवनसाथी को वापस बुलाने और दांपत्य अधिकारों की बहाली चाहने वाले एक व्यक्ति की अपील को पूरी तरह नामंजूर कर दिया। फैमिली कोर्ट के आदेश को रखा गया बरकरार यह कानूनी विवाद छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से जुड़ा हुआ था, जहां 26 वर्षीय पति ने अपनी 22 वर्षीय पत्नी को मायके से ससुराल वापस लाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले की विस्तृत सुनवाई जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की संयुक्त खंडपीठ ने की। दोनों जजों की बेंच ने मामले के रिकॉर्ड और परिस्थितियों की समीक्षा करने के उपरांत निचली अदालत यानी नवंबर 2023 में आए फैमिली कोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें पति के इस अनुरोध को खारिज कर दिया गया था। कानूनी नोटिस और फेरों की दलीलें नहीं आईं काम याचिकाकर्ता पति ने अपनी दलीलों में अदालत के समक्ष यह रेखांकित करने का प्रयास किया था कि वह अपनी पत्नी को घर वापस लाने के लिए लगातार सक्रिय था। उसने तर्क रखा कि वह अपनी जीवनसाथी को मनाकर लाने के लिए कई मर्तबा उसके मायके गया और विधिवत कानूनी नोटिस भी भिजवाए, लेकिन इसके बावजूद पत्नी ने ससुराल लौटने से इनकार कर दिया। पति का कहना था कि उसकी ओर से वैवाहिक संबंध सुधारने के गंभीर प्रयास किए गए थे। हालांकि, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पति के इन तर्कों को नाकाफी करार दिया। बेंच ने स्पष्ट तौर पर टिप्पणी की कि किसी पति का बार-बार ससुराल का चक्कर लगाना या कानूनी नोटिस जारी करना इस बात का सबूत नहीं बन सकता कि पत्नी बिना किसी पुख्ता वजह के अलग रह रही है। जजों ने कहा कि ऐसे व्यवहारों को बाकी परिस्थितियों से काटकर अलग-थलग नहीं देखा जा सकता, बल्कि दोनों पक्षों के बीच उपजे पूरे परिवेश और अदालत में पेश साक्ष्यों के संदर्भ में ही इन्हें परखा जाना आवश्यक है। दहेज मांग और दस्तावेज दबाने पर कोर्ट की फटकार सुनवाई की कार्यवाही के दौरान 22 वर्षीय पत्नी ने पति के आचरण को लेकर बेहद गंभीर खुलासे किए। पत्नी ने अदालत को अवगत कराया कि उसके साथ मारपीट की जाती थी और लगातार प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। उसने स्पष्ट आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष की तरफ से दहेज के रूप में क्रेटा कार और 5 लाख रुपये नकद की निरंतर मांग की जा रही थी, जिसकी वजह से उसका वहां रहना दूभर हो गया था। अदालत ने इन हालात और पति के आचरण पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। सुनवाई के दौरान जब यह बात सामने आई कि पति ने पत्नी के अहम शैक्षणिक और व्यक्तिगत दस्तावेजों को अपने कब्जे में दबाकर रखा हुआ है, तो हाईकोर्ट ने इस अनुचित आचरण के लिए पति को कड़ी फटकार लगाई। खंडपीठ ने अंततः अपने फैसले में दोहराया कि केवल वापस बुलाने की कोशिशें दिखाना कानूनन पर्याप्त नहीं है, और यदि अलग रहने के पीछे उत्पीड़न जैसे वाजिब कारण हैं तो किसी भी महिला को पति के साथ जीवन बिताने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इसका आप पर असर यह फैसला वैवाहिक प्रताड़ना और दांपत्य अधिकारों से जुड़े विवादों का सामना कर रहे परिवारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी नजीर स्थापित करता है। • भारत में: यह निर्णय स्पष्ट करता है कि हिंदू विवाह कानून या दांपत्य अधिकारों की बहाली की आड़ लेकर प्रताड़ित पत्नी को जबरन ससुराल वापस नहीं बुलाया जा सकता। यदि महिला के पास उत्पीड़न, हिंसा या दहेज की मांग जैसे ठोस प्रमाण हैं, तो केवल नोटिस भेजना या मायके जाने का दिखावा पति के पक्ष में काम नहीं करेगा। • छत्तीसगढ़ में: राज्य की सभी पारिवारिक अदालतों और निचली अदालतों के लिए यह फैसला एक स्पष्ट दिशा तय करता है कि महिलाओं के व्यक्तिगत दस्तावेजों को दबाने और दहेज प्रताड़ना के मामलों में सख्त रुख अपनाया जाए। जशपुर समेत प्रदेश भर के पीड़ितों के लिए यह स्पष्ट हो गया है कि ऐसे विवादों में कागजी दावों से ज्यादा जमीनी आचरण और साक्ष्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। • महिलाओं के अधिकारों पर: शैक्षणिक या व्यक्तिगत कागजात जब्त कर दबाव बनाने की कोशिशों को अदालत ने कड़ा अपराध माना है। कोई भी पत्नी अब ऐसे अनुचित दबाव के खिलाफ अपने दस्तावेजों की वापसी और सुरक्षा के लिए मजबूती से कानूनी गुहार लगा सकती है। • वैवाहिक मुकदमों की रणनीति: कानूनी नोटिस भेजना या मायके चक्कर लगाना अब अदालत में यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जाएगा कि पति निर्दोष है। मुकदमों में दोनों पक्षों को अपने समग्र आचरण और विवाद के मूल कारणों का न्यायिक परीक्षण कराना अनिवार्य होगा। ऐसा क्यों हुआ यह फैसला तब आया जब फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ पति ने अपनी पत्नी को वापस बुलाने के लिए उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। अदालत ने दोनों पक्षों के साक्ष्यों और आचरण की जांच के बाद यह व्यवस्था दी। • दहेज उत्पीड़न और हिंसा: पत्नी ने अदालत में प्रमाण और बयान दर्ज कराए कि ससुराल में उसके साथ मारपीट की गई थी। साथ ही पति और उसके परिवार द्वारा 5 लाख रुपये नकद और क्रेटा कार की लगातार मांग की जा रही थी। • निजी दस्तावेज दबाने का आचरण: पति ने पत्नी के शैक्षणिक और निजी प्रमाण पत्र अपने पास जबरन रख लिए थे ताकि उस पर दबाव बनाया जा सके। हाईकोर्ट ने इस आचरण को गंभीर उत्पीड़न और गलत इरादा माना। • फैमिली कोर्ट की पुष्टि: जशपुर की फैमिली कोर्ट ने नवंबर 2023 में ही पति की मांग को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट का आकलन पूरी तरह सही था और उसमें दखल देने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता। सवाल-जवाब 1. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने किस मामले में यह फैसला सुनाया? हाईकोर्ट ने जशपुर के एक 26 वर्षीय पति की उस याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया, जिसमें उसने अपनी 22 वर्षीय पत्नी को वापस ससुराल बुलाने की मांग की थी। 2. अदालत में किस बेंच ने इस मामले की सुनवाई की? इस मामले की सुनवाई जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की संयुक्त खंडपीठ ने की। 3. पति ने अपनी याचिका में क्या मुख्य दलील दी थी? पति का कहना था कि उसने पत्नी को वापस लाने के लिए कई बार मायके जाकर कोशिशें कीं और कानूनी नोटिस भी भेजे, फिर भी पत्नी नहीं लौटी। 4. हाईकोर्ट ने पति के नोटिस और प्रयासों पर क्या टिप्पणी की? कोर्ट ने कहा कि केवल नोटिस भेजना या मायके जाना यह साबित नहीं करता कि पत्नी बिना वजह अलग रह रही है, बल्कि पूरे हालात और साक्ष्यों को देखना जरूरी है। 5. पत्नी ने पति और ससुराल पक्ष पर क्या आरोप लगाए थे? पत्नी ने मारपीट, प्रताड़ना और दहेज के रूप में 5 लाख रुपये नकद व क्रेटा कार मांगने के गंभीर आरोप लगाए। 6. हाईकोर्ट ने पति को किस बात के लिए कड़ी फटकार लगाई? कोर्ट ने पत्नी के जरूरी शैक्षणिक और व्यक्तिगत दस्तावेज अपने पास दबाकर रखने के लिए पति के रवैये पर सख्त नाराजगी जताते हुए उसे फटकार लगाई। https://trendkia.com/chhattisgarh/thosa-vajaha-hone-para-bivi-ko-pati-ke-satha-rahane-ke-lie-vivasha-nahin-kiya-ja-sakata-chhattisgarh-high-court-ki-do-tuka-35814 TrendKia — Har trend, sabse pehle.