# 36 देशों के सर्वे में अमेरिका पर भारी पड़ा चीन, ट्रंप से ज्यादा भरोसा शी जिनपिंग पर

> प्यू रिसर्च सेंटर के एक नए सर्वे में 36 में से 25 देशों के लोगों ने अमेरिका के मुकाबले चीन के प्रति ज्यादा सकारात्मक राय जताई है, और 22 देशों में डोनाल्ड ट्रंप से ज्यादा भरोसा शी जिनपिंग पर जताया गया है।

**Type:** article · **Category:** चीन · **Published:** 2026-07-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/china/36-deshon-ke-sarve-men-america-para-bhari-para-china-trump-se-jyada-bharosa-xi-jinping-para-8102 · **Language:** Hindi
**Tags:** प्यू रिसर्च सर्वे, अमेरिका चीन संबंध, डोनाल्ड ट्रंप, शी जिनपिंग, वैश्विक जनमत, अमेरिका की छवि

दुनिया भर में अमेरिका की छवि को लेकर एक नया सर्वे सामने आया है, जिसमें साफ दिख रहा है कि उसकी साख़ अब पहले जैसी मजबूत नहीं रह गई है। प्यू रिसर्च सेंटर की तरफ से कराए गए इस सर्वे में शामिल 36 देशों में से 25 देशों के लोगों ने अमेरिका के मुकाबले चीन को लेकर ज्यादा सकारात्मक राय जताई है। यह वही अमेरिका है जिसे बीते कई सालों से दुनिया में चीन से बेहतर छवि वाला देश माना जाता रहा है, लेकिन इस साल यह तस्वीर पूरी तरह पलट गई है।

## सर्वे का दायरा और अहम आंकड़े
यह सर्वेक्षण फरवरी से मई के बीच किया गया, यानी उस दौर में जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। इस दौरान 36 देशों और क्षेत्रों के लोगों से उनकी राय पूछी गई, और नतीजों में 25 देशों ने चीन के पक्ष में झुकाव दिखाया। इनमें अमेरिका के करीबी पड़ोसी कनाडा और मेक्सिको भी शामिल हैं, जो खुद उसकी सीमा से सटे देश हैं। बुधवार को जारी हुए इस सर्वे के मुताबिक सिर्फ छह देश ऐसे बचे हैं जहां लोगों की राय अब भी चीन के मुकाबले अमेरिका के पक्ष में ज्यादा सकारात्मक है।

## ट्रंप बनाम शी जिनपिंग: 22 देशों में भारी पड़े चीनी राष्ट्रपति
सिर्फ देशों की छवि ही नहीं, दोनों देशों के राष्ट्रपतियों को लेकर भी लोगों की राय बदल चुकी है। सर्वे में शामिल 36 देशों और क्षेत्रों में से 22 में लोगों ने डोनाल्ड ट्रंप के मुकाबले शी जिनपिंग के प्रति ज्यादा भरोसा जताया। इस सूची में कनाडा और मेक्सिको के अलावा फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे यूरोप के बड़े और अमेरिका के पुराने सहयोगी देश भी शामिल हैं। हालांकि सर्वे यह भी बताता है कि कुछ देशों में लोगों का भरोसा दोनों ही नेताओं पर कम पाया गया, यानी नाराजगी सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं बल्कि चीन के नेतृत्व को लेकर भी है।

## लॉरा सिल्वर बोलीं, दो दशकों में पहली बार ऐसा हुआ
प्यू रिसर्च सेंटर की ग्लोबल एटीट्यूड्स रिसर्च की एसोसिएट डायरेक्टर लॉरा सिल्वर, जो इस अध्ययन से सीधे जुड़ी हैं, ने कहा कि करीब दो दशक से वैश्विक जनमत को ट्रैक करने के दौरान यह पहला मौका है जब चीन को अमेरिका से ज्यादा सकारात्मक रूप में देखा गया है। उनके मुताबिक अतीत में भी कई बार दोनों देशों के प्रति लोगों की राय लगभग बराबर रही, लेकिन चीन के पक्ष में इतना साफ झुकाव पहले कभी सामने नहीं आया था।

## कोविड का असर घटा, लेकिन अमेरिका की नीतियों ने बढ़ाई दूरी
सिल्वर के मुताबिक इस बदलाव के पीछे दो बड़ी वजहें हैं। पहली, कोविड-19 महामारी की यादें अब धुंधली पड़ चुकी हैं, जिसका सीधा फायदा चीन की छवि को मिला है। दूसरी और बड़ी वजह यह है कि दुनिया भर में अमेरिका को लेकर लोगों की धारणा कमजोर हुई है। सिल्वर ने कहा कि हाल की जंगों और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के बाद कई देशों के लोगों को लगने लगा है कि अमेरिका वैश्विक शांति और स्थिरता में उतना योगदान नहीं दे रहा जितनी उससे उम्मीद की जाती थी, और इसी वजह से राष्ट्रपति ट्रंप पर भरोसा भी घटा है।

सिल्वर ने आगे बताया कि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण को लेकर ट्रंप के दावे, वेनेजुएला के तत्कालीन नेता निकोलस मादुरो के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और गाजा में इजराइल-हमास युद्ध को लेकर अमेरिका की भूमिका, इन सबने भी कई देशों में अमेरिका के प्रति समर्थन को कमजोर किया है। उनका कहना है कि बीते कुछ महीनों और सालों में अमेरिका की कई नीतियों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सकारात्मक रूप से नहीं लिया, और इसी नाराजगी का असर अब सर्वे के आंकड़ों में साफ दिख रहा है। वहीं दूसरी तरफ चीन को महामारी की धुंधली पड़ती यादों के अलावा सीधी तुलना का भी फायदा मिला है, क्योंकि कई देशों में उसे अब ज्यादा भरोसेमंद साझेदार और वैश्विक शांति व स्थिरता में योगदान देने वाला देश माना जाने लगा है।

## कनाडा में सबसे बड़ा उलटफेर, ब्रिटेन की बढ़त भी खत्म
सर्वे के मुताबिक अमेरिका के कुछ करीबी सहयोगी देशों में तो पिछले कुछ सालों में लोगों की राय पूरी तरह पलट गई है। कनाडा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां अमेरिका के प्रति सकारात्मक राय रखने वालों की संख्या 2023 के 57 प्रतिशत से घटकर सिर्फ 33 प्रतिशत रह गई है। ठीक इसी दौरान चीन के प्रति सकारात्मक राय रखने वालों का आंकड़ा 14 प्रतिशत से बढ़कर 44 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसकी एक बड़ी वजह पिछले साल ट्रंप का वह फैसला भी माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने कनाडा से आयातित सामानों पर कई तरह के शुल्क लगाए थे और यह तक कह दिया था कि कनाडा अमेरिका का 51वां राज्य बन सकता है।

सिर्फ कनाडा ही नहीं, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली, स्वीडन और नीदरलैंड जैसे यूरोप के कई बड़े देशों में भी दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं, यानी अमेरिका और चीन को लेकर लोगों की राय में साफ बदलाव दर्ज हुआ है। ब्रिटेन की स्थिति भी हैरान करने वाली है। 2023 में वहां करीब 60 प्रतिशत लोग अमेरिका के प्रति सकारात्मक राय रखते थे, जबकि अब वहां अमेरिका और चीन को लेकर लोगों की राय लगभग बराबर हो गई है। तीन साल पहले तक इसी मामले में अमेरिका को चीन पर 32 प्रतिशत अंकों की बड़ी बढ़त हासिल थी, जो अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है।

## सिर्फ छह देश जहां अब भी चीन से आगे है अमेरिका
इस पूरे सर्वे में सिर्फ छह देश ऐसे हैं जहां अमेरिका के प्रति चीन से ज्यादा सकारात्मक राय दर्ज की गई। इनमें सबसे ऊपर इजराइल का नाम है, जहां करीब 80 प्रतिशत लोगों ने अमेरिका के प्रति सकारात्मक राय जताई जबकि चीन के लिए यह आंकड़ा सिर्फ 19 प्रतिशत रहा। इजराइल के अलावा जापान, भारत, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस और पोलैंड भी उन पांच देशों में शामिल हैं जहां अभी भी अमेरिका को चीन से बेहतर माना जाता है। हालांकि सिल्वर के मुताबिक इन छह देशों में भी हाल के सालों में अमेरिका के प्रति सकारात्मक धारणा में कमी दर्ज की गई है, यानी यह बढ़त भी पहले जितनी मजबूत नहीं रह गई है।

## व्यक्तिगत आजादी के मामले में अभी भी आगे है अमेरिका
प्यू की इस रिपोर्ट में एक पहलू ऐसा भी है जहां अमेरिका अब भी चीन से आगे नजर आता है। रिपोर्ट के मुताबिक व्यक्तिगत स्वतंत्रता यानी लोगों की निजी आजादी के सम्मान के मामले में लोग अब भी अमेरिका को चीन से बेहतर मानते हैं। हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि इस मोर्चे पर भी दोनों देशों के बीच का फासला अब पहले जितना बड़ा नहीं रह गया है और लगातार घटता जा रहा है।

## इसका आप पर असर
**वैश्विक मामलों में दिलचस्पी रखने वालों के लिए:** इस सर्वे से पता चलता है कि दुनिया के ज्यादातर देशों में चीन को अब अमेरिका से बेहतर भरोसेमंद देश माना जाने लगा है, जबकि भारत उन गिने-चुने छह देशों में शामिल है जहां लोग अब भी चीन के मुकाबले अमेरिका को ज्यादा सकारात्मक तौर पर देखते हैं। आने वाले समय में जनमत का यह बदलाव व्यापार समझौतों, कूटनीतिक गठजोड़ और सुरक्षा नीतियों की दिशा तय करने में भी असर दिखा सकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. यह सर्वे किसने किया और कब जारी हुआ?
प्यू रिसर्च सेंटर ने फरवरी से मई के बीच यह सर्वे किया था, और इसके नतीजे बुधवार को जारी किए गए।

### 2. कुल कितने देशों में सर्वे हुआ और कितनों में चीन को अमेरिका से बेहतर आंका गया?
सर्वे में 36 देश और क्षेत्र शामिल थे, इनमें से 25 देशों के लोगों ने अमेरिका के मुकाबले चीन के प्रति ज्यादा सकारात्मक राय जताई।

### 3. ट्रंप और शी जिनपिंग को लेकर लोगों की राय कैसी रही?
36 में से 22 देशों में लोगों ने डोनाल्ड ट्रंप के मुकाबले शी जिनपिंग के प्रति ज्यादा भरोसा जताया, इनमें कनाडा, मेक्सिको, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन शामिल हैं।

### 4. कनाडा में अमेरिका को लेकर राय कैसे बदली?
कनाडा में अमेरिका के प्रति सकारात्मक राय रखने वालों का प्रतिशत 2023 के 57 प्रतिशत से घटकर 33 प्रतिशत रह गया, जबकि चीन के प्रति सकारात्मक राय 14 प्रतिशत से बढ़कर 44 प्रतिशत हो गई।

### 5. किन छह देशों में अब भी अमेरिका को चीन से बेहतर माना जाता है?
इजराइल, जापान, भारत, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस और पोलैंड में लोगों ने चीन के मुकाबले अमेरिका के प्रति ज्यादा सकारात्मक राय जताई, इजराइल में यह अंतर सबसे बड़ा रहा।

### 6. लॉरा सिल्वर ने इस बदलाव की क्या वजहें बताईं?
उन्होंने कोविड-19 महामारी की धुंधली पड़ती यादों, अमेरिका के प्रति कमजोर होती वैश्विक धारणा और ग्रीनलैंड, वेनेजुएला व गाजा जैसे मुद्दों पर अमेरिका की भूमिका को इसकी वजह बताया।

### 7. किस मामले में अमेरिका अब भी चीन से आगे है?
व्यक्तिगत आजादी और स्वतंत्रता के सम्मान के मामले में लोग अब भी अमेरिका को चीन से बेहतर मानते हैं, हालांकि यह अंतर लगातार घट रहा है।

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