# बीजिंग के सीक्रेट बेस पर रूसी फौज को मिली परमाणु और केमिकल हमलों से निपटने की ट्रेनिंग, लीक रिपोर्ट ने मचाई हलचल

> एक गोपनीय रूसी दस्तावेज के हवाले से दावा किया गया है कि चीन ने अपने सुरक्षित सैन्य ठिकानों पर रूसी सैनिकों को परमाणु और रासायनिक युद्ध से निपटने की ट्रेनिंग दी, जिसने पश्चिमी देशों में हलचल मचा दी है।

**Type:** article · **Category:** चीन · **Published:** 2026-07-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/china/bijinga-ke-sikreta-besa-para-russian-phauja-ko-mili-paramanu-aura-kemikala-hamalon-se-nipatane-ki-treninga-lika-riporta-ne-machai--3894 · **Language:** Hindi
**Tags:** चीन रूस सैन्य सहयोग, परमाणु केमिकल ट्रेनिंग, पीएलए रूसी सैनिक, यूक्रेन युद्ध चीन, रॉयटर्स लीक रिपोर्ट, काजा कलास यूरोपीय संघ

रूस-यूक्रेन जंग के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि चीन ने अपनी धरती पर रूसी सैनिकों को परमाणु और रासायनिक हमलों से जुड़ी गुप्त सैन्य ट्रेनिंग दी है। रॉयटर्स के हाथ लगे एक गोपनीय रूसी दस्तावेज के हवाले से यह जानकारी सामने आई है कि चीन के सुरक्षित सैन्य ठिकानों पर रूसी जवानों को रेडिएशन और घातक केमिकल हमलों से निपटने के साथ-साथ इनके इस्तेमाल के तरीके भी सिखाए गए। इस खुलासे के बाद पश्चिमी देशों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इसे रूस और चीन के बीच बढ़ती सैन्य नजदीकी का सीधा सबूत माना जा रहा है और इससे यूक्रेन जंग को लेकर चीन के दावे किए गए तटस्थ रुख पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

## अगस्त 2025 में जारी हुआ था गुप्त आदेश
रॉयटर्स को मिले दस्तावेज के मुताबिक, रूस के रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलोसोव ने अगस्त 2025 में एक इंटरनल आदेश जारी किया था। इस सरकारी आदेश में साफ लिखा गया था कि रक्षा मंत्री के निर्देश पर रूसी सेना का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी पीएलए के ठिकानों पर खास ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा। भले ही रूस इसे अपनी सीमाओं और सुरक्षा जरूरतों से जोड़कर पेश करे, लेकिन इतने ऊंचे स्तर के जनरलों और अफसरों की इस गोपनीय मिशन में शिरकत यह संकेत देती है कि चीन इस मौके का इस्तेमाल रूस को अपने रणनीतिक खेल में और गहराई से शामिल करने के लिए कर रहा है। ऐसे संवेदनशील मिशन के लिए आमतौर पर सबसे ऊंचे स्तर की मंजूरी चाहिए होती है, इसलिए विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला रूस और चीन दोनों की सरकारों की जानकारी और सहमति के बिना संभव नहीं था। चीन अब तक दुनिया के सामने इस पूरे मामले से इनकार करता रहा है, लेकिन अब सामने आए दस्तावेजों ने इस दावे की पोल खोल दी है।

## बीजिंग के सीक्रेट बेस पर तीन हफ्ते का खतरनाक कोर्स
लीक रिपोर्ट में जो बात सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाने वाली है, वह है इस ट्रेनिंग का विषय। यह सामान्य हथियार चलाने या टैंक ऑपरेट करने की ट्रेनिंग नहीं थी, बल्कि पिछले साल नवंबर में बीजिंग के एक अत्यंत सुरक्षित सैन्य परिसर में तीन हफ्ते का एक खास और बेहद संवेदनशील कोर्स आयोजित किया गया था। इस कोर्स का पूरा केंद्र बिंदु रेडियोलॉजिकल, बायोलॉजिकल और केमिकल प्रोटेक्शन यानी परमाणु, जैविक और रासायनिक युद्ध से बचाव और उससे जुड़े हमलावर तरीके थे।

दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि इस दौरान रूसी सैनिक एक चीनी प्रशिक्षक के सामने बैठकर लेक्चर लेते थे। क्लासरूम के बीचोंबीच एक मॉडल न्यूक्लियर रिएक्टर रखा गया था, जिसकी मदद से रूसी जवानों को परमाणु तकनीक की बारीकियां समझाई जाती थीं। इसके अलावा उन्हें समंदर और जमीन दोनों जगह केमिकल रीकॉनिसेंस और रेडिएशन रीकॉनिसेंस के तरीके सिखाए गए। साथ ही यह भी बताया गया कि किसी संभावित परमाणु हमले के दौरान बंकरों के वेंटिलेशन सिस्टम को जहरीली हवा और रेडिएशन से कैसे बचाया जाए।

यूरोपीय अधिकारियों का कहना है कि किसी भी देश की सेना के लिए बायोलॉजिकल और न्यूक्लियर वॉरफेयर की ट्रेनिंग बेहद संवेदनशील और रणनीतिक मानी जाती है। चीन जिस तरह से परमाणु और केमिकल युद्ध की ट्रेनिंग को बढ़ावा दे रहा है, उससे यह आशंका गहरी हो गई है कि वह किसी बड़े सैन्य टकराव की जमीन पहले से तैयार कर रहा है। ऐसी ट्रेनिंग को आमतौर पर सिर्फ करीबी सैन्य सहयोगियों के साथ ही साझा किया जाता है, इसलिए विशेषज्ञ इसे रूस-चीन संबंधों में एक नए और गहरे चरण के तौर पर देख रहे हैं।

## 200 रूसी सैनिकों को मिली ट्रेनिंग, सीधे मोर्चे पर तैनाती
लीक हुई खुफिया रिपोर्टों में जो टाइमलाइन सामने आई है, उसने पश्चिमी देशों की चिंता और बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल नवंबर में चीन ने करीब 200 चुनिंदा रूसी सैन्यकर्मियों को यह खतरनाक ट्रेनिंग दी थी। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद इन सैनिकों को अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए सीधे मोर्चे पर तैनात कर दिया गया, यानी चीन में सीखी गई तकनीकें अब असल मैदान-ए-जंग में इस्तेमाल हो रही होंगी।

इस पूरे मामले पर जब यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास से सवाल पूछे गए, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनकी खुफिया एजेंसियों और कूटनीतिक जरियों ने इस बात की पूरी तरह पुष्टि कर दी है कि यह गुप्त ट्रेनिंग चीन की ही धरती पर हुई थी। उन्होंने बताया कि अब इस बात का बारीकी से आकलन किया जा रहा है कि आने वाले समय में इसके कितने गंभीर सैन्य और रणनीतिक नतीजे सामने आ सकते हैं।

## चीन बोला, यह बदनाम करने की साजिश है
यूरोप के सख्त रुख के बाद बीजिंग बचाव की मुद्रा में आ गया। चीन ने इन आरोपों को तुरंत खारिज करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसे बदनाम करने की एक साजिश करार दिया। चीन के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यूक्रेन संकट पर उसका रुख हमेशा से साफ और तटस्थ रहा है और यह सारे आरोप पूरी तरह झूठे और मनगढ़ंत हैं। यह पहली बार नहीं है जब चीन पर रूस के साथ छिपे हुए सैन्य सहयोग के आरोप लगे हों, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी उसने इनसे साफ इनकार किया है। हालांकि लीक हुए दस्तावेजों ने चीन के इस दावे के उलट एक अलग ही तस्वीर पेश की है, जो बताती है कि पर्दे के पीछे वह किस तरह की सैन्य साझेदारी निभा रहा है।

## रूस ने भी झाड़ा पल्ला, कहा चीन से सीखने की जरूरत नहीं
दिलचस्प बात यह है कि रूस के अधिकारियों ने भी इस मामले पर सफाई देने में देर नहीं लगाई। रूस की संसद की रक्षा समिति के अध्यक्ष आंद्रेई कार्तपोलोव से जब इस सीक्रेट ट्रेनिंग को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज करते हुए इसे सरासर बकवास और मनगढ़ंत कहानी बताया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि रूसी सेना को चीन से कुछ भी नया सीखने की जरूरत नहीं है।

रूस की अंदरूनी समीक्षा रिपोर्टों में भी चीनी सेना की कमजोरी को खुलकर सामने रखा गया है। इन रिपोर्टों के मुताबिक चीन के पास भले ही आधुनिक हथियार, हाई-टेक सिमुलेटर और किताबी ज्ञान भरपूर हो, लेकिन उसके पास असली युद्ध के मैदान का व्यावहारिक अनुभव नहीं है, जो रूस जैसे लंबे समय से जंग लड़ रहे देश के पास मौजूद है। यही वजह है कि रूसी अधिकारी सार्वजनिक तौर पर चीन को सैन्य मामलों में बराबरी का साझेदार मानने से बचते नजर आते हैं, भले ही जमीनी स्तर पर दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार गहरा होता जा रहा हो।

## आगे क्या हो सकता है असर
इस पूरे मामले ने यह साफ कर दिया है कि रूस और चीन के बीच सैन्य सहयोग सिर्फ हथियारों की खरीद-फरोख्त या राजनयिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें परमाणु और रासायनिक युद्ध जैसी बेहद संवेदनशील तकनीकों की साझेदारी भी शामिल हो सकती है। पश्चिमी देश अब इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं और आने वाले दिनों में इसकी वजह से वैश्विक कूटनीतिक समीकरण भी बदल सकते हैं। दोनों देशों के बार-बार के इनकार के बावजूद लीक हुए दस्तावेज यह साफ संकेत देते हैं कि रूस-चीन की सैन्य साझेदारी अब सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह जमीनी स्तर पर बेहद संवेदनशील क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है।

## इसका आप पर असर
- **वैश्विक स्तर पर:** रूस-चीन की गहराती सैन्य साझेदारी यूक्रेन जंग को और लंबा खींच सकती है, जिससे वैश्विक कच्चे तेल और रक्षा खर्च पर असर पड़ने की आशंका है।
- **भारत के लिए:** तेल के प्रमुख आयातक होने के नाते भारत को भी इस तरह के भू-राजनीतिक तनाव से जुड़ी अस्थिरता की आंच महसूस हो सकती है।

## सवाल-जवाब

### 1. रॉयटर्स की रिपोर्ट में क्या दावा किया गया है?
दावा है कि चीन ने अपने गुप्त सैन्य ठिकानों पर रूसी सैनिकों को रेडिएशन और केमिकल हमलों से निपटने की ट्रेनिंग दी।

### 2. यह ट्रेनिंग कब और कहां हुई?
पिछले साल नवंबर में बीजिंग के एक सुरक्षित सैन्य ठिकाने पर तीन हफ्ते का कोर्स चलाया गया।

### 3. कितने रूसी सैनिकों को यह ट्रेनिंग दी गई?
करीब 200 चुनिंदा रूसी सैनिकों को यह ट्रेनिंग दी गई, जो बाद में सीमा पर तैनात हुए।

### 4. रूस के रक्षा मंत्री का गुप्त आदेश कब जारी हुआ?
रूस के रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलोसोव ने अगस्त 2025 में इंटरनल आदेश जारी किया था।

### 5. चीन ने इन आरोपों पर क्या जवाब दिया?
चीन के विदेश मंत्रालय ने इसे बदनाम करने की साजिश बताते हुए सभी आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत करार दिया।

### 6. रूस ने इस दावे पर क्या प्रतिक्रिया दी?
रूसी संसद की रक्षा समिति के अध्यक्ष आंद्रेई कार्तपोलोव ने इसे मनगढ़ंत कहानी बताकर खारिज किया और कहा कि रूस को चीन से सीखने की जरूरत नहीं है।

### 7. यूरोपीय संघ ने इस मामले में क्या कहा?
यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने कहा कि उनकी खुफिया एजेंसियों ने इस ट्रेनिंग की पुष्टि कर दी है और इसके नतीजों का आकलन किया जा रहा है।

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