# चीन के जंगलों में मिला साढ़े छह करोड़ साल पुराना विशालकाय फंगस, डायनासोर के विनाश के बाद हुआ था पैदा

> दक्षिण-पश्चिमी चीन के जंगलों में शोधकर्ताओं ने डायनजुनस रेक्स नामक एक विशालकाय कवक प्रजाति की पहचान की है, जिसका वजन 2.2 किलोग्राम तक पहुंचता है। आनुवंशिक विश्लेषण बताता है कि यह अनोखा जीव डायनासोर के विलुप्त होने के करीब दस लाख साल बाद सड़ी-गली लकड़ियों के सहारे विकसित हुआ था।

**Type:** article · **Category:** चीन · **Published:** 2026-10-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/china/china-ke-jngalon-men-mila-6-5-karora-sala-purana-vishala-phngasa-dinosaur-ke-khatme-ke-bada-hua-paida-47412 · **Language:** Hindi
**Tags:** डायनजुनस रेक्स, विशाल फंगस, डायनासोर विलोपन, कुनमिंग बॉटनी, युन्नान जंगल, कवक विज्ञान, एस्कोमाइकोटा

प्राचीन काल में पृथ्वी से डायनासोरों का अस्तित्व मिटने के बाद जैव विविधता के संतुलन में जो भारी फेरबदल हुआ, उसकी एक दुर्लभ कड़ी दक्षिण-पश्चिमी चीन के घने जंगलों में सामने आई है। वानस्पतिक वैज्ञानिकों ने एक ऐसा असामान्य और विशालकाय कवक खोज निकाला है, जिसका उद्भव करीब साढ़े 6 करोड़ वर्ष पहले हुआ था। इस जीव को वैज्ञानिकों ने डायनजुनस रेक्स अथवा संक्षेप में डी-रेक्स नाम दिया है। एस्कोमाइकोटा फाइलम से ताल्लुक रखने वाला यह जीव अपने विशालकाय ढांचे के कारण अब तक के सभी ज्ञात कवक रिकॉर्ड तोड़ चुका है। इस प्रजाति के फलने वाले अंग यानी फ्रूटिंग बॉडीज जमीन से सीधे पचास सेंटीमीटर या करीब बीस इंच की ऊंचाई तक बढ़ जाते हैं, जबकि इनका वजन 2.2 किलोग्राम यानी लगभग 4.9 पाउंड तक दर्ज किया गया है। डीएनए परीक्षणों से संकेत मिलता है कि धरती से डायनासोरों के महाविनाश के ठीक 10 लाख साल बाद इस कवक का क्रमिक विकास हुआ था।

## युन्नान के बीहड़ों में मिला दुर्लभ नमूना
इस अद्भुत जीव की खोज युन्नान प्रांत के विभिन्न भौगोलिक इलाकों में किए गए गहन मैदानी अन्वेषण के दौरान हुई। कुनमिंग इंस्टीट्यूट ऑफ बॉटनी के वैज्ञानिकों ने दमाइदी और यिपिंगलांग के आसपास फैले शीतोष्ण शंकुधारी वन क्षेत्रों में व्यापक पड़ताल की। इसके अलावा नानबांग के निकटवर्ती ट्रॉपिकल रेनफॉरेस्ट में भी नमूनों की तलाश की गई। इसी दौरान वानस्पतिक दल की नजर सफेद रंग के असाधारण आकार वाले फ्रूटिंग बॉडीज पर पड़ी, जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में स्ट्रोमाटा कहा जाता है। ये कवक चाइनीज कॉर्क ओक प्रजाति के पेड़ों की काष्ठीय जड़ों पर पनप रहे थे और जमीन के राइजोस्फीयर हिस्से को चीरते हुए सीधे बाहर की ओर उभरे हुए थे।

जीव विज्ञान में स्कोमाइसेट्स कवक का सबसे विस्तृत और विविधतापूर्ण समूह माना जाता है, जिसमें वर्तमान में 64 हजार से अधिक प्रजातियां दर्ज हैं। सामान्यतः बगीचों या जंगलों में छतरी के आकार में नजर आने वाले मशरूमों के विपरीत, यह वर्ग किसी छत्रक जैसी आकृति नहीं बनाता। इसके बजाए, ये कवक अपने फ्रूटिंग बॉडीज के भीतर अथवा उनकी बाहरी सतह पर मौजूद सूक्ष्म थैलीनुमा संरचनाओं के जरिए बीजाणु यानी स्पोर्स हवा में छोड़ते हैं। फील्डवर्क के उपरांत शोध दल ने इन नमूनों को सुरक्षित रूप से संस्थान के हर्बेरियम संग्रह में संरक्षित किया, जिसके बाद कवक की आंतरिक संरचना, ऊतक संगठन और स्पोर्स उगाने की प्रक्रिया को प्रयोगशाला में परखा गया तथा इसका संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण संपन्न हुआ।

## प्राचीन डायन साम्राज्य और शाही कद से जुड़ा नामकरण
आनुवंशिक विश्लेषण और शारीरिक संरचना के गहन अध्ययन से पुष्टि हुई कि यह फंगस जाइलैरिएल्स ऑर्डर के तहत एक सर्वथा अज्ञात प्रजाति तथा जीनस का निर्माण करता है। इससे भी बढ़कर, यह खोज डायनजुनेसी नामक एक पूर्णतः नई कवक कुल या फंगल फैमिली को स्थापित करती है। क्षेत्र के ऐतिहासिक डायन साम्राज्य की विरासत और इसके विशाल आकार के सम्मान में इसे डायनजुनस रेक्स नाम प्रदान किया गया। टैक्सोनॉमिक वर्गीकरण के अनुसार, डी-रेक्स का सबसे नजदीकी ज्ञात संबंधी ग्राफोस्ट्रोमा प्लैटिस्टोमा है, जो मुख्य रूप से उत्तरी गोलार्ध के जंगलों में मृत काष्ठ पर उगने के लिए जाना जाता है।

कुनमिंग इंस्टीट्यूट ऑफ बॉटनी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. इंदुनिल सी. सेनानायके ने इस खोज के महत्व को स्पष्ट करते हुए रेखांकित किया कि यह अनोखा कवक विशाल संरचना वाले फंगस के क्रमिक विकास को समझने का एक अभूतपूर्व अवसर प्रदान करता है। उनके मुताबिक, पूर्वी एशिया के दुर्गम वनों में जैविक विविधता के ऐसे अनगिनत पहलू अब भी छिपे हैं जिनका वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण होना बाकी है। जाइलैरिएल्स वर्ग के कवक विशिष्ट पाचक एंजाइम्स और सेकेंडरी कंपाउंड्स का निर्माण करने में माहिर होते हैं। ये शक्तिशाली जैविक रसायन मृत पौधों के जटिल सेल्यूलोज तथा लिग्निन मॉलिक्यूल्स को विघटित कर देते हैं, जिससे यह कवक सूखी और कठोर काष्ठ को भी सुगमता से ऊर्जा में परिवर्तित कर लेता है।

## डायनासोरों के महाविनाश और फंगस के विकास की कड़ी
शोधकर्ताओं ने जब डी-रेक्स के आनुवंशिक कोड का आणविक घड़ी यानी मॉलिक्यूलर क्लॉक विश्लेषण किया और सैकड़ों अन्य समकालीन कवक जीनोमों से इसका तुलनात्मक अध्ययन किया, तो इसकी उत्पत्ति का समय लगभग 6.5 करोड़ वर्ष पूर्व निर्धारित हुआ। यह भूवैज्ञानिक कालखंड पृथ्वी पर क्रेटेशियस-पैलियोजीन सामूहिक विलोपन की महाप्रलयंकारी घटना के ठीक 10 लाख वर्ष पश्चात का है। इस युगांतरकारी उथल-पुथल के दौरान एक क्षुद्रग्रह के आघात अथवा भीषण पर्यावरणीय संकट से न केवल डायनासोर हमेशा के लिए समाप्त हो गए, बल्कि वैश्विक स्तर पर अनगिनत वनस्पतियां और घने जंगल भी नष्ट हो गए थे।

प्रकृति के इस विध्वंस ने लकड़ी सड़ाने वाले सूक्ष्मजीवों के लिए भोजन का एक असीमित भंडार खोल दिया था। डॉ. सेनानायके के अनुसार, वनों के बड़े पैमाने पर ढहने और मृत वनस्पति के भारी जमाव ने उस दौर में काष्ठ-अपघटक फंगस के तेजी से फलने-फूलने के लिए अनुकूल परिस्थितियां उत्पन्न कीं। भोजन की प्रचुरता और पर्यावरणीय रिक्तता के कारण कवक की इस नई शाखा ने असाधारण आकार ग्रहण किया। जमीन पर पड़े पत्तों और वनस्पतियों के ढेर से कई गुना ऊपर उठने वाले पचास सेंटीमीटर ऊंचे अंग इस कवक को घने जंगलों में हवा के बहाव का उपयोग करके अपने स्पोर्स को दूर-दूर तक फैलाने में भारी बढ़त दिलाते थे। हालांकि इतनी विशाल संरचना को निर्मित करने में अत्यधिक ऊर्जा व्यय होती है, किंतु उस विरल पारिस्थितिकी तंत्र में इसके लाभ जैविक लागत से कहीं अधिक सिद्ध हुए।

## सबट्रॉपिकल जंगलों में छिपी अनसुलझी जैव विविधता
कुनमिंग इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस शोध के निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘फ्रंटियर्स इन फंगल बायोलॉजी’ में प्रकाशित किए गए हैं। वैज्ञानिक दल का मानना है कि दक्षिणी और उप-उष्णकटिबंधीय चीन के विविध भू-भागों में अब भी अनेक अज्ञात कवक प्रजातियों का अस्तित्व बना हुआ है। इस क्षेत्र का स्थिर तापमान, प्रचुर आर्द्रता और अत्यंत समृद्ध वनस्पति तंत्र कवक जगत के निरंतर विकास को पोषित करते हैं।

विगत दशकों में अधिकांश वैज्ञानिक अभियानों का ध्यान आर्थिक या औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण कवक प्रजातियों पर केंद्रित रहा था। इसके अतिरिक्त, घने और दुर्गम जंगलों में नमूनों को एकत्र करने की शारीरिक एवं तकनीकी जटिलताओं के कारण भी कवक जगत की वास्तविक विविधता का सही आकलन नहीं हो सका था। डी-रेक्स का सामने आना यह सिद्ध करता है कि करोड़ों वर्षों के भूवैज्ञानिक परिवर्तनों के बावजूद पृथ्वी के जंगलों ने अपने भीतर जीवन के प्राचीनतम रहस्यों को आज भी सहेज कर रखा है।

## इसका आप पर असर
चीन के जंगलों में मिले इस साढ़े 6 करोड़ साल पुराने कवक से वैज्ञानिकों को पृथ्वी के प्राचीन पारिस्थितिकी तंत्र और काष्ठ अपघटन की प्राकृतिक प्रणालियों को गहराई से समझने में मदद मिलेगी।

- **वैज्ञानिक समझ:** यह खोज प्राचीन महाविनाश के बाद जीवन के पुनर्निर्माण और कवक के विकास को नए सिरे से परिभाषित करती है। इससे शोधकर्ताओं को यह जानने में मदद मिलेगी कि विषम जलवायु परिवर्तनों के दौरान सूक्ष्मजीव कैसे अनुकूलन करते हैं।
- **औद्योगिक एंजाइम:** मृत कठोर लकड़ी को आसानी से पचाने वाले इस कवक के एंजाइम्स भविष्य में जैव प्रौद्योगिकी के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं। बायोमास रिसाइक्लिंग और पर्यावरण अनुकूल अपघटन प्रक्रियाओं में इन शक्तिशाली प्रोटीनों का उपयोग किया जा सकता है।
- **पर्यावरण संरक्षण:** युन्नान के प्राचीन जंगलों की जैव विविधता को बचाने के लिए नए संरक्षण प्रयासों को गति मिलेगी। आम जनता और पर्यावरणविदों के बीच वनों के सूक्ष्म पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने की जागरूकता बढ़ेगी।
- **औषधीय संभावनाएं:** जाइलैरिएल्स वर्ग के फंगस में पाए जाने वाले अद्वितीय रासायनिक यौगिक नए प्राकृतिक मॉलिक्यूल्स की खोज का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। फार्मास्युटिकल शोधकर्ता भविष्य में इन घटकों से नई एंटीफंगल या एंटीबैक्टीरियल दवाओं की संभावना तलाश सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह विशालकाय कवक धरती पर उस समय विकसित हुआ जब डायनासोरों के महाविनाश ने जंगलों को मलबे के ढेर में बदल दिया था। भोजन की असीमित उपलब्धता और घने जंगलों में बीजाणु फैलाने की रणनीतिक आवश्यकता ने इसे इतना बड़ा आकार दिया।

- **महाविनाश और भोजन की प्रचुरता:** क्रेटेशियस-पैलियोजीन सामूहिक विलोपन के दौरान घने जंगल नष्ट हो गए और पृथ्वी पर भारी मात्रा में मृत लकड़ियां जमा हो गईं। लकड़ी सड़ाने वाले इस कवक के पूर्वजों को भोजन की कोई कमी नहीं रही, जिससे उनकी नई प्रजातियां तेजी से विकसित हुईं।
- **बीजाणु प्रसार की ऊंचाई:** घने जंगलों के निचले धरातल पर पत्तों और वनस्पतियों का जमाव हवा के बहाव को रोक देता है। अपने फ्रूटिंग बॉडी को 50 सेंटीमीटर तक ऊंचा उठाकर इस कवक ने बीजाणुओं को वायु प्रवाह के जरिए दूर तक पहुंचाने की शारीरिक क्षमता हासिल की।
- **अनुकूल प्राकृतिक आवास:** दक्षिण-पश्चिमी चीन का उप-उष्णकटिबंधीय वातावरण, स्थिर तापमान और समृद्ध आर्द्रता कवक प्रजातियों के पनपने के लिए आदर्श मानी जाती है। चाइनीज कॉर्क ओक के पेड़ों की जड़ों ने इस विशाल कवक को सदियों तक सुरक्षित पोषक आधार उपलब्ध कराया।
- **अन्वेषण में देरी का कारण:** वैज्ञानिकों के अनुसार, घने बीहड़ों में फील्डवर्क की मुश्किलें और पहले केवल आर्थिक महत्व वाले कवकों पर ध्यान दिए जाने के कारण यह अनोखा जीव अब तक आधुनिक विज्ञान की नजरों से छिपा रहा।

## सवाल-जवाब

### 1. चीन में खोजे गए इस नए कवक का नाम क्या है?
इस अनोखे कवक को वैज्ञानिकों ने डायनजुनस रेक्स या संक्षेप में डी-रेक्स नाम दिया है, जिसका नामकरण प्राचीन डायन साम्राज्य के आधार पर किया गया है।

### 2. डी-रेक्स कवक का आकार और वजन कितना है?
इसके सीधे खड़े होने वाले अंग 50 सेंटीमीटर या 20 इंच तक ऊंचे होते हैं और इसका कुल वजन 2.2 किलोग्राम यानी करीब 4.9 पाउंड तक पहुंचता है।

### 3. यह कवक किस वैज्ञानिक समूह और कुल से संबंधित है?
यह एस्कोमाइकोटा फाइलम के जाइलैरिएल्स ऑर्डर के तहत डायनजुनेसी नामक एक सर्वथा नई फंगल फैमिली का प्रतिनिधित्व करता है।

### 4. वैज्ञानिकों को यह कवक किस जगह और किन पेड़ों पर मिला?
यह कवक युन्नान प्रांत में चाइनीज कॉर्क ओक के पेड़ों की लकड़ी वाली जड़ों पर उगता हुआ पाया गया।

### 5. डायनासोरों के खात्मे से इस कवक का क्या संबंध है?
डीएनए जांच से पता चला है कि इस कवक की उत्पत्ति क्रेटेशियस-पैलियोजीन महाविनाश के ठीक 10 लाख साल बाद, करीब 6.5 करोड़ वर्ष पूर्व हुई थी।

### 6. यह कवक सूखी लकड़ियों को कैसे पचा लेता है?
यह जाइलैरिएल्स वर्ग का कवक है, जो विशेष पाचक एंजाइम्स और सेकेंडरी कंपाउंड्स बनाकर पौधों के जटिल मॉलिक्यूल्स को विघटित कर देता है।

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