{
  "type": "article",
  "title": "दक्षिण चीन सागर में तनातनी के बीच फिलीपींस ने तैनात की भारतीय ब्रह्मोस मिसाइलें, चीन ने दी कड़ी चेतावनी",
  "summary": "दक्षिण चीन सागर में सेकेंड थॉमस शोल पर रसद आपूर्ति रोकने के चीनी प्रयासों के बीच फिलीपींस ने अपनी तटीय सीमा पर भारत निर्मित ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलें तैनात की हैं, जिससे क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ गया है।",
  "content": "दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय संप्रभुता और वर्चस्व को लेकर चीन और फिलीपींस के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। कुछ समय की अस्थाई शांति के बाद इस समुद्री इलाके में पिछले कुछ महीनों के दौरान सैन्य गतिविधियां और गतिरोध तेजी से बढ़े हैं। इस बार सामरिक समीकरण पूरी तरह बदले हुए हैं क्योंकि फिलीपींस की सेना अब भारत द्वारा निर्मित ब्रह्मोस सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल प्रणाली से लैस हो चुकी है। फिलीपींस ने इस शक्तिशाली मिसाइल प्रणाली को अपने तटीय सुरक्षा घेरे में तैनात कर दिया है। इस तैनाती के बाद दोनों देशों के बीच का यह समुद्री विवाद केवल साधारण जहाजों की आपसी भिड़ंत तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह एक गंभीर और संवेदनशील सैन्य गतिरोध में तब्दील हो चुका है।\n\nहालिया तनाव की शुरुआत फिलीपींस द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद हुई है। फिलीपींस के सैन्य अधिकारियों का दावा है कि चीनी नौसेना और तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड) के जहाजों ने उनके एक नियमित रसद आपूर्ति और सैनिकों के रोटेशन मिशन को बीच में ही रोक दिया। यह अभियान सेकेंड थॉमस शोल में तैनात फिलीपीनी सैनिकों तक आवश्यक खाद्य सामग्री, पानी और अन्य जीवन रक्षक सामान पहुंचाने के लिए चलाया जा रहा था। फिलीपींस के अनुसार चीनी जहाजों ने बेहद खतरनाक तरीके से उनके जहाजों का रास्ता रोका, जिसके कारण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस मिशन को अस्थाई रूप से स्थगित करना पड़ा।\n\n \n\nविवाद की मुख्य जड़: सेकेंड थॉमस शोल और बीआरपी सिएरा माद्रे\nइस पूरे विवाद का मुख्य केंद्र दक्षिण चीन सागर में स्थित सेकेंड थॉमस शोल नामक रेतीला द्वीप है। इस जगह पर दोनों देशों के बीच टकराव का इतिहास काफी पुराना है। साल 1999 में फिलीपींस ने इस इलाके पर अपना भौतिक नियंत्रण और दावा मजबूत करने के लिए दूसरे विश्व युद्ध के समय के अपने एक पुराने युद्धपोत बीआरपी सिएरा माद्रे को जानबूझकर यहां रेत पर उतार दिया था। तब से यह जर्जर जहाज वहां फिलीपींस की एक सैन्य चौकी के रूप में काम कर रहा है और इस पर हमेशा कुछ सैनिक तैनात रहते हैं।\n\nइस जहाज पर मौजूद सैनिकों के जीवित रहने के लिए नियमित रूप से भोजन, पानी और चिकित्सा आपूर्ति भेजना बेहद जरूरी होता है। दूसरी ओर चीन इस पूरे समुद्री क्षेत्र पर अपनी संप्रभुता का दावा करता है और वहां फिलीपीनी सेना की मौजूदगी का कड़ा विरोध करता है। इसी कारण दोनों देशों के नौसैनिक जहाज अक्सर आमने-सामने आ जाते हैं। इस साल जुलाई में भी यहां दोनों पक्षों के बीच बेहद हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें चीनी और फिलीपीनी सैनिकों के बीच लाठी-डंडों से मारपीट हुई और एक फिलीपीनी सैनिक का सिर गंभीर रूप से फट गया था। इसके बाद सितंबर में भी दोनों देशों के जहाजों के बीच समुद्री टक्कर की कई घटनाएं सामने आई थीं, जिसने तनाव को और हवा दी थी।\n\nयह जर्जर जहाज भले ही कमजोर हो चुका हो, लेकिन यह एक रणनीतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। अमेरिका और फिलीपींस के बीच साल 1951 में हुई पारस्परिक रक्षा संधि के तहत, यदि फिलीपींस के किसी सैन्य जहाज या बलों पर कोई सशस्त्र हमला होता है, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप करने के लिए बाध्य है। यही कारण है कि चीन सीधे सैन्य हमले से बचते हुए फिलीपीनी रसद जहाजों को रोकने के लिए पानी की बौछारें करने या खतरनाक तरीके से टक्कर मारने जैसी अप्रत्यक्ष रणनीतियों (ग्रे-जोन रणनीति) का सहारा ले रहा है ताकि फिलीपींस खुद इस जगह को खाली करने पर मजबूर हो जाए।\n\nफिलीपींस के लिए भारतीय ब्रह्मोस का सुरक्षा कवच\nचीन की विशाल नौसैनिक शक्ति का मुकाबला करने के लिए फिलीपींस ने भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल प्रणाली खरीदी है। दोनों देशों के बीच साल 2022 में करीब 37.5 करोड़ डॉलर का यह ऐतिहासिक रक्षा सौदा हुआ था, जिसकी पहली खेप साल 2024 में फिलीपींस को सौंप दी गई थी। लगभग 290 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली यह मिसाइल दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइलों में से एक मानी जाती है, जिसे रोक पाना चीनी नौसेना के लिए बेहद कठिन चुनौती है।\n\nफिलीपींस की मरीन कॉर्प्स अब इस मिसाइल प्रणाली को अपनी तटीय रक्षा रणनीति का मुख्य हिस्सा बना रही है। हाल ही में सितंबर के महीने में अमेरिकी और फिलीपीनी मरीन सैनिकों ने एक संयुक्त युद्ध अभ्यास भी किया था, जिसमें ब्रह्मोस जैसी तटीय मिसाइल प्रणालियों के संचालन और सुरक्षा रणनीतियों का अभ्यास किया गया। हालांकि फिलीपींस ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि उसकी इस सैन्य तैयारी का उद्देश्य चीन पर हमला करना नहीं है। फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने कहा है कि सेना का आधुनिकीकरण और हथियारों की खरीद केवल देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए है, न कि किसी युद्ध की शुरुआत करने के लिए।\n\nचीन की कड़ी चेतावनी और आगे की राह\nचीन ने फिलीपींस के इन दावों को खारिज करते हुए उस पर लगातार उकसावे वाली कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। चीन के सरकारी मीडिया संस्थान ग्लोबल टाइम्स ने 27 सितंबर, 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा की। इस पोस्ट में कहा गया कि फिलीपींस साल 2023 से चीनी द्वीपों और चट्टानों के आसपास अवैध घुसपैठ और उकसावे की गतिविधियों को बढ़ा रहा है और चीन का कोस्ट गार्ड अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए ऐसी कार्रवाइयां जारी रखेगा।\n\nबीजिंग ने सेकेंड थॉमस शोल पर फिलीपींस की सैन्य मौजूदगी को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। चीन का कहना है कि वह सैनिकों की बुनियादी मानवीय जरूरतों के लिए सीमित रसद आपूर्ति की अनुमति तो दे सकता है, लेकिन फिलीपींस को वहां किसी भी प्रकार का नया निर्माण करने या बीआरपी सिएरा माद्रे की मरम्मत करके उसे मजबूत बनाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। चूंकि यह पुराना युद्धपोत लगातार जर्जर और कमजोर होता जा रहा है, इसलिए यदि फिलीपींस को इसकी मरम्मत करने की अनुमति नहीं मिलती है, तो भविष्य में वहां अपने सैनिकों को लंबे समय तक तैनात रखना उसके लिए एक बेहद कठिन चुनौती बन जाएगा।\n\nइसका आप पर असर\nयह भू-राजनीतिक गतिरोध भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र और वैश्विक व्यापार दोनों को प्रभावित करता है।\n\n• भारत में प्रभाव: ब्रह्मोस मिसाइलों का यह सफल निर्यात भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में एक बड़े खिलाड़ी के रूप में स्थापित करता है। इससे भारत के अन्य देशों के साथ भी रक्षा समझौतों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।\n• वैश्विक स्तर पर: दक्षिण चीन सागर एक व्यस्त अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्ग है। यदि यहां तनाव बढ़ता है, तो माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है जिससे वैश्विक मुद्रास्फीति पर असर पड़ेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह तनाव दक्षिण चीन सागर में भौगोलिक संप्रभुता के परस्पर विरोधी दावों के कारण उत्पन्न हुआ है।\n\n• सामरिक दावे: चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना ऐतिहासिक हक जताता है, जबकि फिलीपींस अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत इसे अपना विशेष आर्थिक क्षेत्र मानता है।\n• सैन्य चौकी का विवाद: फिलीपींस द्वारा 1999 में बीआरपी सिएरा माद्रे को जानबूझकर रेत पर उतारकर सैन्य चौकी बनाना विवाद का मुख्य कारण है, क्योंकि चीन इसके पुनर्निर्माण का कड़ा विरोध करता है।\n• सुरक्षा आधुनिकीकरण: फिलीपींस द्वारा भारतीय ब्रह्मोस मिसाइलों को तैनात करने से चीन के सैन्य वर्चस्व को क्षेत्र में नई चुनौती मिली है, जिससे चीन की आक्रामकता बढ़ी है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. चीन और फिलीपींस के बीच हालिया विवाद की तात्कालिक वजह क्या है?\nताजा विवाद तब शुरू हुआ जब फिलीपींस ने चीन पर उसके सेकेंड थॉमस शोल में मौजूद सैनिकों के लिए जा रहे रसद आपूर्ति मिशन को खतरनाक तरीके से रोकने का आरोप लगाया।\n\n2. बीआरपी सिएरा माद्रे युद्धपोत का इस विवाद में क्या महत्व है?\nफिलीपींस ने सेकेंड थॉमस शोल पर अपना दावा बनाए रखने के लिए 1999 में इस जहाज को वहां रेत पर उतारा था, जो अब उसके सैनिकों के लिए एक सैन्य चौकी का काम करता है।\n\n3. फिलीपींस ने भारत से कौन सी मिसाइल प्रणाली खरीदी है?\nफिलीपींस ने भारत से लगभग 37.5 करोड़ डॉलर में ब्रह्मोस सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल प्रणाली खरीदी है, जिसकी पहली खेप 2024 में पहुंची थी।\n\n4. जर्जर हो चुके युद्धपोत को लेकर चीन की क्या चेतावनी है?\nचीन ने स्पष्ट किया है कि वह सैनिकों के लिए मानवीय आधार पर बुनियादी रसद की अनुमति दे सकता है, लेकिन बीआरपी सिएरा माद्रे के पुनर्निर्माण या वहां किसी भी स्थाई ढांचे के निर्माण को बर्दाश्त नहीं करेगा।",
  "url": "https://trendkia.com/china/dakshina-china-sagara-men-tanatani-ke-bicha-philippines-ne-tainata-ki-bharatiya-brahmos-misailen-china-ne-di-kari-chetavani-39411",
  "category": "चीन",
  "publishedAt": "2026-09-27",
  "tags": [
    "चीन",
    "फिलीपींस",
    "ब्रह्मोस मिसाइल",
    "दक्षिण चीन सागर",
    "बीआरपी सिएरा माद्रे",
    "भारत फिलीपींस रक्षा सौदा"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}