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  "type": "article",
  "title": "ढाई दशक के लंबे इंतजार के बाद ताइपे को मिले आधुनिक अमेरिकी ब्लॉक 70 फाइटर जेट",
  "summary": "ताइवान को अमेरिका से आधुनिक एफ-16 ब्लॉक 70 लड़ाकू विमानों की पहली खेप हासिल हुई है, जिससे द्वीप की हवाई निगरानी और पूर्वी समुद्री मोर्चे की रक्षा तैयारियों में इजाफा होगा।",
  "content": "ताइवान के हवाई सुरक्षा तंत्र को 25 वर्षों के लंबे अंतराल के पश्चात बिल्कुल नए लड़ाकू विमानों की खेप प्राप्त हुई है। अमेरिका निर्मित दो उन्नत एफ-16सी/डी ब्लॉक 70 जेट 2 अक्टूबर 2026 को ताइवान के चिहहांग एयर बेस पर लैंड कर गए। यह कदम ऐसे नाजुक मोड़ पर उठाया गया है जब द्वीप के आसपास चीनी युद्धपोतों और सैन्य उड़ानों की हलचल लगातार बनी हुई है। रक्षा विशेषज्ञों की दृष्टि में यह हस्तांतरण केवल हथियारों का साधारण आगमन भर नहीं है, बल्कि ताइपे के समग्र वायु रक्षा ढांचे को नया रूप देने की दिशा में एक ठोस कदम है।\n\nताइवान के दक्षिण-पूर्वी समुद्री किनारे पर ताइतुंग के निकट स्थित चिहहांग एयर बेस पर पहुंचने वाले इन दोनों विमानों के टेल नंबर 6727 और 6728 दर्ज हैं। यहां अपनी अंतिम लैंडिंग करने से पूर्व इन नए विमानों के स्वागत और सहयोग के लिए अपग्रेड किए जा चुके एफ-16एएम तथा टी-बीई-5 एडवांस्ड प्रशिक्षण विमानों ने भी आसमान में साथ उड़ान भरी थी।\n\nविलंब की वजहें और खरीद प्रक्रिया की पृष्ठभूमि\nइस सैन्य खरीद की आधारशिला 2019 में रखी गई थी, जब ताइवान ने अमेरिका के साथ लगभग 8 अरब अमेरिकी डॉलर का एक विस्तृत समझौता किया था। मूल योजना के अनुसार इन जेट्स की पहली खेप करीब 2023 के आसपास मिलनी तय मानी जा रही थी, परंतु वैश्विक कोविड महामारी के कारण उत्पन्न हुई सप्लाई चेन की बाधाओं और कार्यबल की कमियों ने समयसीमा को प्रभावित किया। इसके साथ ही उत्पादन लाइन में किए गए फेरबदल तथा नए एफ-16 संस्करण के सॉफ्टवेयर से जुड़े तकनीकी पहलुओं के चलते कार्यक्रम में देरी होती चली गई।\n\nइन तमाम तकनीकी और लॉजिस्टिक रुकावटों के चलते आपूर्ति निर्धारित समय से करीब तीन वर्ष पीछे चली गई। दक्षिण कैरोलिना में लॉकहीड मार्टिन के एफ-16 केंद्र पर पहला जेट आधिकारिक रूप से मार्च 2025 में सार्वजनिक मंच पर देखा गया था।\n\nपुराने बेड़े की तुलना में ब्लॉक 70 के आधुनिक फीचर्स\nताइपे के लिए यह नया बेड़ा इसलिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें कारखाने से ही कई अत्याधुनिक प्रणालियां एकीकृत होकर आ रही हैं। ताइवान को पूर्व में जो 150 एफ-16 ब्लॉक 20 विमान मिले थे, उनमें से 139 विमान वर्तमान में सक्रिय सेवा में मौजूद हैं। हालांकि इन पुराने लड़ाकू विमानों को 2010 के दशक के अंतिम वर्षों से लेकर 2020 के दशक के शुरुआती दौर में कई आधुनिक उपकरणों से अपग्रेड किया जा चुका था, फिर भी नए ब्लॉक 70 में लगा हार्डवेयर कहीं अधिक शक्तिशाली है।\n\nब्लॉक 70 वेरिएंट में जनरल इलेक्ट्रिक एफ110-जीई-129 इंजन लगाया गया है। पुराने ब्लॉक 20 के प्रैट एंड व्हिटनी इंजन के मुकाबले यह नया इंजन अधिकतम आफ्टरबर्नर के साथ 20 प्रतिशत यानी पांचवें हिस्से से भी अधिक ताकत पैदा करता है। इसके अलावा जेट में कंफॉर्मल फ्यूल टैंक लगाने की विशेष व्यवस्था दी गई है। यह फ्यूल टैंक विमान के ढांचे के साथ ही फिट हो जाते हैं और बिना अतिरिक्त बाहरी ड्रैग के भारी मात्रा में अतिरिक्त ईंधन ले जाने की सुविधा देते हैं। ताइवान के पास हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर जहाजों की भारी किल्लत है, लिहाजा अधिक ईंधन ले जाने की यह खूबी उसके विमानों को अधिक देर तक हवा में गश्त जारी रखने में मदद करती है।\n\nरडार, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली की स्थिति\nहवाई खतरों को भांपने के लिए नए एफ-16 विमानों को आईआरएसटी21 लीजन-ईएस इन्फ्रारेड सर्च एंड ट्रैक प्रणाली से लैस किया जाना तय है। यह खास सेंसर लड़ाकू विमान को अपने प्राथमिक रडार को चालू किए बिना ही दुश्मन के विमानों की थर्मल सिग्नेचर पकड़कर उन्हें ट्रैक करने की इजाजत देता है। इस तकनीक के माध्यम से चीन के जे-20 और जे-35 जैसे कम रडार क्रॉस-सेक्शन वाले आधुनिक स्टील्थ विमानों की निगरानी में सहायता मिल सकेगी। इस सेंसर के साथ विमान का मुख्य एएन/एपीजी-83 एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे रडार मिलकर काम करेगा।\n\nहालांकि इन विमानों के साथ इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की पूरी क्षमता तुरंत नहीं मिल पाई है। विमानों में एल3हैरिस वाइपर शील्ड इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर उपकरण लगाया जाना निर्धारित है, लेकिन शुरुआती डिलीवरी वाले विमानों में यह सिस्टम मौजूद नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक यह प्रणाली अभी विमान के साथ इंटीग्रेशन के लिए पूर्णतः तैयार नहीं हो सकी थी, जिस कारण प्रारंभिक इकाइयों में यह सुरक्षा परत बाद में जोड़ी जाएगी।\n\nआगामी मिसाइल पैकेज और तटीय रक्षा की रणनीति\nभविष्य में इन विमानों के लिए उन्नत हथियारों की आपूर्ति भी होनी है। ताइवान को आगे चलकर एआईएम-120सी-8 लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, एजीएम-84एच स्लैम-ईआर क्रूज मिसाइलें और एजीएम-154सी जेएसओडब्ल्यू ग्लाइड बम सौंपे जाएंगे। इन आधुनिक अस्त्रों के एकीकरण के बाद यह बेड़ा केवल आत्मरक्षा या डॉगफाइट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सतही युद्धपोतों और जमीनी ठिकानों पर भी सटीक हमले करने में सक्षम हो जाएगा।\n\nताइवान के पास नए लड़ाकू विमानों की अंतिम खेप वर्ष 2001 में आई थी जब एफ-16ए/बी ब्लॉक 20 की डिलीवरी पूरी की गई थी। इसके बाद करीब 25 वर्षों तक ताइपे को कोई नया फाइटर जेट नहीं मिला। ताइवान ने 2006 में भी 66 एफ-16सी/डी विमान खरीदने की औपचारिक पेशकश की थी, लेकिन वह मांग वर्षों तक लटकी रही और अंततः 2019 के सौदे में तब्दील हुई।\n\nचिहहांग एयर बेस पर इन विमानों की स्थायी तैनाती सामरिक दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील है। यह बेस बाशी चैनल के निकट पड़ता है, जो फिलीपीन सागर में चीनी नौसैनिक जहाजों और विमानों के प्रवेश का मुख्य समुद्री गलियारा माना जाता है। यहां से उड़ान भरने वाले नए लड़ाकू जेट दक्षिण और पूर्वी समुद्री क्षेत्र में त्वरित वायु शक्ति तैनात करने की क्षमता प्रदान करेंगे। हालांकि यह छोटी खेप विशाल चीनी वायुसेना के मुकाबले संतुलन पूरी तरह नहीं पलट सकती, लेकिन यह ताइपे को चीनी गतिविधियों पर नजर रखने और अपनी हवाई सीमा की हिफाजत करने के पुख्ता विकल्प जरूर देती है।\n\nअमेरिका से ताइवान तक का लंबा सफर\nइन दोनों विमानों की ताइवान यात्रा भी काफी लंबी और पेचीदा रही। दोनों जेट 17 अगस्त को अमेरिका के ग्रीनविल स्थित संयंत्र से रवाना हुए थे और प्रशांत महासागर के रास्ते हवाई पहुंचे थे। इस लंबी यात्रा में अमेरिकी वायुसेना के केसी-135 टैंकर विमान ने हवा में ईंधन भरने में मदद दी थी। हवाई पहुंचने के बाद दोनों विमानों को वहां छह सप्ताह से भी अधिक समय तक रुकना पड़ा। प्रारंभिक तौर पर मौसम की खराबी को इसकी वजह बताया गया, लेकिन बाद में कुछ तकनीकी दिक्कतों के चलते यह ठहराव लंबा खिंच गया, जिसके सुलझने के बाद ही इन्होंने ताइवान के लिए उड़ान भरी।\n\nइसका आप पर असर\nताइवान को नए लड़ाकू विमानों की आपूर्ति से क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन पर सीधा असर पड़ेगा।\n\n• वैश्विक सुरक्षा पर: ताइवान जलडमरूमध्य में सैन्य तनाव और निगरानी गतिविधियों में तेजी देखी जा सकती है। इससे पूर्वी एशियाई समुद्री व्यापार मार्गों और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा को लेकर देशों की सतर्कता बढ़ेगी।\n• रक्षा उद्योग पर: अमेरिकी हथियारों के लंबित ऑर्डरों के पूरा होने से सहयोगी देशों का रक्षा समझौतों पर भरोसा मजबूत होगा। आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों और लंबी दूरी की मिसाइलों के एकीकरण पर अब अन्य खरीदार देशों की भी नजर रहेगी।\n• सैन्य संतुलन पर: नए उन्नत विमान मिलने से ताइवान की पूर्वी तटवर्ती हवाई निगरानी क्षमता में प्रत्यक्ष सुधार होगा। बाशी चैनल के निकट गश्त बढ़ने से चीनी नौसेना और वायुसेना की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा सकेगी।\n• कूटनीतिक संबंधों पर: इस हस्तांतरण से वाशिंगटन और बीजिंग के बीच कूटनीतिक तल्खी और बयानबाजी बढ़ सकती है। दोनों महाशक्तियों के बीच ताइवान को हथियारों की आपूर्ति हमेशा से तनाव का एक बड़ा मुद्दा बनी रही है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह हस्तांतरण 2019 के द्विपक्षीय रक्षा समझौते के तहत हुआ, जिसे महामारी और तकनीकी अड़चनों के कारण लगभग तीन साल की देरी का सामना करना पड़ा। ताइवान की पुरानी वायु रक्षा प्रणाली को आधुनिक चीनी हवाई संपत्तियों के बढ़ते दबाव से निपटने के लिए उन्नत तकनीक की सख्त जरूरत थी।\n\n• अनुबंध की पुरानी प्रतिबद्धता: ताइवान ने 2019 में करीब 8 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च कर 66 नए एफ-16 विमानों का सौदा तय किया था। 2006 से लंबित इस मांग को पूरा करने के लिए अमेरिकी प्रशासन ने अंततः मंजूरी दी थी।\n• सप्लाई चेन और सॉफ्टवेयर की रुकावटें: वैश्विक महामारी के दौरान कर्मचारियों की कमी और कलपुर्जों की अनुपलब्धता ने उत्पादन की गति धीमी कर दी थी। इसके अतिरिक्त आधुनिक ब्लॉक 70 के सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन में आई मुश्किलों ने डिलीवरी को 2023 से खींचकर 2026 तक पहुंचा दिया।\n• रणनीतिक दबाव और चीनी गतिविधियां: ताइवान के हवाई और समुद्री क्षेत्र के करीब चीनी युद्धपोतों और विमानों की निरंतर आवाजाही ने रक्षा आधुनिकीकरण की आवश्यकता बढ़ा दी। पुराने ब्लॉक 20 विमानों की आयु और घटती संख्या के मद्देनजर नए विमानों की तैनाती अनिवार्य हो गई थी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ताइवान को कौन से नए लड़ाकू विमान मिले हैं?\nताइवान को अमेरिका से दो एफ-16सी/डी ब्लॉक 70 लड़ाकू विमान मिले हैं, जिनके टेल नंबर 6727 और 6728 हैं।\n\n2. यह डिलीवरी कितने साल बाद हुई है?\nताइवान को नए लड़ाकू विमानों की डिलीवरी करीब 25 साल बाद हुई है, इससे पहले आखिरी बार 2001 में नए विमान मिले थे।\n\n3. 2019 में हुए सौदे के बावजूद डिलीवरी में देरी क्यों हुई?\nकोविड महामारी से जुड़ी सप्लाई चेन समस्याओं, कर्मचारियों की कमी, उत्पादन लाइन में बदलाव और सॉफ्टवेयर चिंताओं के कारण डिलीवरी में करीब तीन साल की देरी हुई।\n\n4. इन नए विमानों को किस एयर बेस पर तैनात किया जाएगा?\nइन दोनों विमानों को ताइवान के दक्षिण-पूर्वी तट पर ताइतुंग के निकट स्थित चिहहांग एयर बेस पर तैनात किया जाएगा।\n\n5. पुराने ब्लॉक 20 के मुकाबले ब्लॉक 70 के इंजन में क्या अंतर है?\nब्लॉक 70 में लगा जनरल इलेक्ट्रिक एफ110-जीई-129 इंजन पुराने प्रैट एंड व्हिटनी इंजन की तुलना में अधिकतम आफ्टरबर्नर के साथ 20 प्रतिशत से अधिक ताकत देता है।\n\n6. शुरुआती विमानों में कौन सा मुख्य सिस्टम अभी नहीं लगाया गया है?\nइन शुरुआती विमानों में एल3हैरिस वाइपर शील्ड इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर प्रणाली नहीं लगी है क्योंकि यह अभी इंटीग्रेशन के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है।",
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  "category": "चीन",
  "publishedAt": "2026-10-05",
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    "एफ-16 ब्लॉक 70",
    "लड़ाकू विमान",
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