हुबेई में 800 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी ट्रेन, चीन ने 1 किमी लंबे ट्रैक पर रचा नया रिकॉर्ड चीन के हुबेई प्रांत में चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ने मैग्लेव और वैक्यूम ट्यूब तकनीक की मदद से 1,110 किलोग्राम वजनी मॉडल ट्रेन को 800 किलोमीटर प्रति घंटे की गति तक पहुंचाया। चीन के वैज्ञानिकों ने हुबेई प्रांत में तैयार किए गए 1 किलोमीटर लंबे प्रयोगात्मक टेस्ट ट्रैक पर एक हाई-स्पीड मॉडल ट्रेन का सफल परीक्षण किया है। इस परीक्षण के दौरान ट्रेन ने 800 किलोमीटर प्रति घंटे की रिकॉर्ड गति हासिल की। चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉरपोरेशन यानी सीएएसआईसी (CASIC) द्वारा संचालित इस हाई-स्पीड फ्लाइंग ट्रेन प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य भविष्य के लिए 1,000 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक की व्यावसायिक रफ्तार वाली परिवहन प्रणाली का निर्माण करना है। इस परियोजना ने बीते 6 महीनों के भीतर तीसरी बार विश्व रिकॉर्ड बनाकर वैक्यूम ट्यूब मैग्लेव तकनीक के क्षेत्र में अपनी तकनीकी श्रेष्ठता साबित की है। हुबेई परीक्षण और मॉडल ट्रेन के तकनीकी आंकड़े इस ऐतिहासिक गति परीक्षण में इस्तेमाल की गई ट्रेन का कुल वजन लगभग 1,110 किलोग्राम था। वैज्ञानिकों ने इसे विशेष रूप से डिजाइन किए गए 1 किलोमीटर लंबे स्टील और कंक्रीट के टेस्ट ट्रैक पर दौड़ाया। महज 5.3 सेकंड के भीतर 800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार छूने की क्षमता रखने वाली यह तकनीक लंबी दूरी की जमीनी यात्रा को हवाई जहाज से भी ज्यादा तेज बनाने का मार्ग प्रशस्त कर रही है। उदाहरण के तौर पर, यदि इस रफ्तार को भारत के संदर्भ में देखा जाए तो दिल्ली से पटना जैसी लंबी दूरी का सफर महज सवा घंटे में पूरा किया जा सकता है। फिलहाल यह एक प्रयोगात्मक मॉडल ट्रेन है जिसका इस्तेमाल उच्च गति पर डेटा और सुरक्षा मानकों को परखने के लिए किया जा रहा है। मैग्लेव तकनीक और घर्षणमुक्ति की कार्यप्रणाली पारंपरिक ट्रेनों में लोहे के पहिए और रेल की पटरियां आपस में सीधे संपर्क में रहते हैं, जिससे भारी घर्षण पैदा होता है। गति बढ़ाने के साथ-साथ यह घर्षण ऊर्जा की खपत और रखरखाव की लागत को काफी बढ़ा देता है। इसके विपरीत, इस फ्लाइंग ट्रेन में चुंबकीय उत्थापन यानी मैग्लेव (Maglev) तकनीक का प्रयोग किया गया है। शक्तिशाली इलेक्ट्रोमैग्नेट्स की मदद से ट्रेन को पटरी से ऊपर हवा में उठा दिया जाता है। पटरी और ट्रेन के बीच भौतिक संपर्क खत्म हो जाने के कारण घर्षण लगभग शून्य हो जाता है। इसके बाद इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें ही ट्रेन को अत्यधिक गति के साथ आगे की तरफ धकेलती हैं। कम दबाव वाली वैक्यूम ट्यूब से एयर ड्रैग का समाधान केवल मैग्लेव तकनीक के बल पर 800 से 1,000 किलोमीटर प्रति घंटे की गति हासिल करना संभव नहीं होता, क्योंकि इतनी अधिक रफ्तार पर सामान्य हवा की रुकावट यानी एयर ड्रैग सबसे बड़ी बाधा बन जाती है। इस चुनौती से निपटने के लिए चीन के इंजीनियरों ने ट्रेन को एक पूरी तरह से बंद कम दबाव वाली ट्यूब के भीतर चलाने का ढांचा तैयार किया है। वैक्यूम पंपों के जरिए इस ट्यूब के भीतर की अधिकांश हवा बाहर निकाल दी जाती है। हवा का घनत्व और दबाव न्यूनतम हो जाने के कारण ट्रेन के सामने वायु प्रतिरोध न के बराबर रह जाता है, जिससे ट्रेन बहुत ही कम ऊर्जा खपत में बेहद तेज गति प्राप्त कर लेती है। 0.5 मिलीमीटर अलाइनमेंट की सटीकता और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रपल्शन अत्यधिक गति पर थोड़ी सी भी शारीरिक असमानता या ट्रैक की गड़बड़ी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसी जोखिम को समाप्त करने के लिए 1 किलोमीटर लंबे कंक्रीट और स्टील ट्रैक के अलाइनमेंट में गलती की सीमा को अधिकतम 0.5 मिलीमीटर तक सीमित रखा गया है। ट्रेन को आगे धकेलने के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है, जो एक अदृश्य चुंबकीय शक्ति की तरह वाहन को लगातार आगे खींचती हैं। इस उच्च सटीकता और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रपल्शन के तालमेल से ही ट्रेन इतनी कम दूरी में 800 किलोमीटर प्रति घंटे की चरम गति हासिल करने में सफल रही है। छह महीने में तीन विश्व रिकॉर्ड और चरणबद्ध रोडमैप यह प्रोजेक्ट पिछले 6 महीनों के दौरान लगातार नए मील के पत्थर स्थापित कर रहा है। इससे पहले चीन में कम दबाव वाली ट्यूब के भीतर एक पूर्ण आकार (फुल-साइज) के मैग्लेव वाहन ने 623 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार हासिल कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। अब 1,110 किलोग्राम वाले मॉडल वाहन ने 800 किलोमीटर प्रति घंटे की गति हासिल करके अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया है। चीन इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से विकसित कर रहा है। पहले चरण में 600 किलोमीटर प्रति घंटे की सामान्य मैग्लेव तकनीक पर ध्यान केंद्रित किया गया था, जबकि वर्तमान चरण में कम दबाव वाली ट्यूब के साथ 1,000 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक की गति का लक्ष्य रखा गया है। व्यावसायिक यात्रा की संभावनाएं और सुरक्षात्मक चुनौतियां यदि 1,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली यह प्रणाली व्यावसायिक रूप से सफल होती है, तो यह बीजिंग और शंघाई जैसे प्रमुख शहरों के बीच यात्रा के समय को मौजूदा हाई-स्पीड ट्रेनों और वाणिज्यिक विमानों की तुलना में बहुत घटा देगी। हालांकि, इसे आम यात्रियों के लिए उपलब्ध कराने से पहले कई जटिल व्यावहारिक बाधाएं दूर करनी होंगी। अत्यधिक गति पर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, लंबी दूरियों तक कम दबाव वाली ट्यूब में वैक्यूम बनाए रखना, आपातकालीन स्थिति में सुरक्षित निकासी के इंतजाम करना और विशाल बुनियादी ढांचे के निर्माण की भारी लागत इस परियोजना के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। अंतरिक्ष प्रक्षेपण और रक्षा क्षेत्र में इस तकनीक का उपयोग यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और वैक्यूम ट्यूब तकनीक सिर्फ ट्रेनों तक सीमित नहीं रहने वाली है। सीएएसआईसी इस तकनीक के अन्य व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर भी शोध कर रहा है। उदाहरण के तौर पर, अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले उपग्रहों और अंतरिक्ष यान को शुरुआती गति प्रदान करने के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक लॉन्च सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा, युद्धपोतों और विमान वाहक पोतों पर लड़ाकू विमानों को बहुत कम दूरी के रनवे से टेक-ऑफ कराने वाली कैटापल्ट प्रणाली में भी इसी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तकनीक का उपयोग किया जाता है। आने वाले समय में यह तकनीक एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों के स्वरूप को भी बदल सकती है। इसका आप पर असर भारत और वैश्विक स्तर पर: यह वैक्यूम ट्यूब मैग्लेव तकनीक भविष्य में लंबी दूरी की जमीनी यात्रा को विमानों से भी तेज और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की क्षमता रखती है। तकनीकी और परिवहन क्षेत्र में: सफल इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रपल्शन से न केवल ट्रेन यात्रा बल्कि अंतरिक्ष प्रक्षेपण और रक्षा प्रणालियों में भी भारी सुधार देखने को मिल सकता है। सवाल-जवाब 1. चीन में आयोजित मैग्लेव ट्रेन टेस्ट में कितनी गति दर्ज की गई? हुबेई प्रांत में आयोजित इस परीक्षण के दौरान 1,110 किलोग्राम वजनी मॉडल ट्रेन ने 800 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार हासिल की। 2. इस हाई-स्पीड फ्लाइंग ट्रेन प्रोजेक्ट को कौन सी संस्था विकसित कर रही है? इस परियोजना को चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉरपोरेशन यानी सीएएसआईसी (CASIC) द्वारा विकसित किया जा रहा है। 3. मैग्लेव ट्रेन में घर्षण कैसे खत्म होता है? मैग्लेव तकनीक में शक्तिशाली इलेक्ट्रोमैग्नेट्स ट्रेन को पटरी से ऊपर हवा में उठा देते हैं, जिससे पहियों और पटरी के बीच का भौतिक घर्षण पूरी तरह खत्म हो जाता है। 4. हवा के दबाव यानी एयर ड्रैग को कम करने के लिए क्या तरीका अपनाया गया है? ट्रेन को एक बंद कम दबाव वाली ट्यूब (वैक्यूम ट्यूब) के अंदर चलाया जाता है, जिससे अंदर की हवा पंप करके बाहर निकाल दी जाती है और हवा का प्रतिरोध न्यूनतम हो जाता है। 5. हुबेई में इस्तेमाल किए गए टेस्ट ट्रैक की लंबाई और अलाइनमेंट सटीकता क्या है? यह टेस्ट ट्रैक 1 किलोमीटर लंबा है, जिसे कंक्रीट और स्टील से बनाया गया है और इसमें अलाइनमेंट त्रुटि की सीमा अधिकतम 0.5 मिलीमीटर रखी गई है। 6. इस फ्लाइंग ट्रेन प्रोजेक्ट का अंतिम वाणिज्यिक लक्ष्य क्या है? इस प्रोजेक्ट का अंतिम लक्ष्य 1,000 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक की रफ्तार से चलने वाली व्यावसायिक ट्रेन प्रणाली तैयार करना है। 7. ट्रेन के अलावा इस इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तकनीक का उपयोग कहां हो सकता है? इस तकनीक का उपयोग अंतरिक्ष में उपग्रहों को शुरुआती गति देने वाले लॉन्च सिस्टम और युद्धपोतों पर लड़ाकू विमानों को लॉन्च करने वाले कैटापल्ट सिस्टम में किया जा सकता है। https://trendkia.com/china/hubei-men-800-kimi-prati-ghnte-ki-raphtara-se-dauri-modala-trena-china-ne-1-kimi-lnbe-traika-para-racha-naya-rikorda-15967 TrendKia — Har trend, sabse pehle.