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  "type": "article",
  "title": "कक्षा में दांव-पेंच और लंबी उड़ान से चौकन्ना हुआ वॉशिंगटन, ड्रैगन के गुप्त स्पेसप्लेन की पहली स्पष्ट झलक आई सामने",
  "summary": "अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी द्वारा जारी नई उपग्रह तस्वीर ने बीजिंग के गुप्त रीयूजेबल अंतरिक्ष यान की बनावट उजागर कर दी है, जिसकी कक्षा में तेजी से पैंतरे बदलने की क्षमता ने वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों को चौंका दिया है।",
  "content": "पृथ्वी की निचली कक्षा में तेजी से बढ़ते सैन्य दबदबे के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने अंतरराष्ट्रीय रक्षा गलियारों में गंभीर बहस छेड़ दी है। अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी ने अपनी ताजा रिपोर्ट 'चैलेंजेस टू सिक्योरिटी इन स्पेस' में एक अत्याधुनिक उपग्रह तस्वीर शामिल की है, जिसे मैक्सार टेक्नोलॉजीज द्वारा खींचा गया है। यह उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीर बीजिंग के उस गुप्त अंतरिक्ष कार्यक्रम का अब तक का सबसे स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत करती है, जिसके इर्द-गिर्द लंबे समय से गोपनीयता की मोटी चादर लिपटी हुई थी। इस नए रहस्योद्घाटन के बाद वॉशिंगटन में रणनीतिकार चीनी वायु और अंतरिक्ष शक्ति के अभूतपूर्व विस्तार को लेकर नए सिरे से आकलन करने में जुट गए हैं।\n\nनई सैटेलाइट तस्वीर में क्या दिखा अंतरिक्ष यान का स्वरूप\nमैक्सार टेक्नोलॉजीज के इस हाई-रिजॉल्यूशन फ्रेम में एक कॉम्पैक्ट और शटल जैसी बनावट वाला स्पेसक्राफ्ट साफ तौर पर नजर आ रहा है। इस यान के डिजाइन पर गौर करें तो इसमें अपेक्षाकृत छोटे पंख और पीछे की तरफ दो वर्टिकल टेल यानी दोहरी पूंछ मौजूद हैं। इसके धड़ के मध्य भाग में एक खुला पेलोड बे दिखाई देता है, जिसका उपयोग अंतरिक्ष में विभिन्न उपकरणों या वस्तुओं को ले जाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा यान के पिछले हिस्से के दोनों किनारों पर सोलर पैनल्स लगाए गए हैं, जो लंबे समय तक अंतरिक्ष में बने रहने के लिए जरूरी सौर ऊर्जा उत्पन्न करते हैं।\n\nरक्षा खुफिया एजेंसी के अनुसार, दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले ऐसे रीयूजेबल स्पेसक्राफ्ट भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की रीढ़ हैं। ये यान न केवल किसी वस्तु या उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने की क्षमता रखते हैं, बल्कि अपने जटिल वैज्ञानिक व तकनीकी परीक्षणों को अंजाम देकर सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लौटने में भी पूरी तरह सक्षम हैं।\n\nअमेरिकी अंतरिक्ष बल के X-37B से तुलना और तकनीकी भिन्नता\nआकार और बुनियादी अवधारणा के मामले में यह चीनी क्राफ्ट अमेरिकी स्पेस फोर्स द्वारा संचालित एक्स-37बी स्पेसप्लेन से काफी हद तक मेल खाता है। दोनों ही प्लेटफॉर्म मानवरहित, स्वायत्त और बार-बार प्रयोग में आने वाले अंतरिक्ष शटल के सिद्धांत पर काम करते हैं। इसके बावजूद तकनीकी विश्लेषकों ने दोनों की वायुगतिकीय संरचना में महत्वपूर्ण अंतर रेखांकित किए हैं। सबसे प्रमुख अंतर इसके पंखों में है, जहां चीनी मॉडल के पंख अमेरिकी एक्स-37बी की तुलना में ज्यादा चौड़े दिखाई देते हैं।\n\nअमेरिकी खुफिया एजेंसी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि तस्वीर में दिखाई दे रहा क्राफ्ट चीन के दो बहुचर्चित प्रायोगिक मॉडलों शैनलांग या तेंगयुन में से कौन सा है। इससे पहले साल 2024 में दक्षिण कोरिया में आयोजित एक अंतरिक्ष फोरम के दौरान इस रहस्यमयी यान की बेहद कम रिजॉल्यूशन वाली एक धुंधली तस्वीर साझा की गई थी। शेनलोंग की एक और उल्लेखनीय विशेषता यह है कि यह अपने सोलर पैनल ऐरे को यान के ऊपरी हिस्से पर लगाने के बजाय वाहन के पिछले हिस्से से तैनात करता हुआ दिखाई देता है।\n\nकक्षा में पैंतरेबाजी और जासूसी क्षमता ने क्यों बढ़ाई चिंता\nपारंपरिक उपग्रहों के विपरीत, जो एक निश्चित और पूर्वानुमानित कक्षा में परिक्रमा करते हैं, यह स्पेसप्लेन अंतरिक्ष में गतिशील रूप से अपनी दिशा बदलने और जटिल पैंतरेबाजी करने में सक्षम है। यही मुड़ने की त्वरित क्षमता सुरक्षा रणनीतिकारों के लिए सबसे बड़ी पहेली बन गई है। यह क्षमता यान को न केवल नए क्षेत्रों पर तुरंत खुफिया निगरानी स्थापित करने की छूट देती है, बल्कि कक्षा में मौजूद दूसरे उपग्रहों के काफी करीब जाकर अभियान संचालित करने का सामर्थ्य भी प्रदान करती है।\n\nहालांकि जारी की गई तस्वीरों में इस यान पर किसी प्रकार के घातक हथियार ले जाने या सीधे तौर पर आक्रामक मिशन संचालित करने के प्रत्यक्ष सबूत नहीं मिले हैं। लेकिन बीजिंग की बढ़ती निगरानी क्षमताएं साफ दिखाई दे रही हैं। रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि साल 2018 के बाद से चीन के जासूसी और सर्विलांस उपग्रहों का बेड़ा तीन गुना से भी अधिक बढ़कर 510 से ज्यादा हो चुका है, जिससे अंतरिक्ष में खुफिया प्रतिस्पर्धा नई ऊंचाइयों पर पहुंच गई है।\n\nअंतरिक्ष में चीन के चार बड़े मिशन और जारी उड़ान\nअपने रीयूजेबल अंतरिक्ष कार्यक्रम के तहत चीन ने साल 2020 से अब तक कुल चार ज्ञात ऑर्बिटल मिशन संचालित किए हैं। इसका तीसरा मिशन 14 दिसंबर 2023 को लॉन्च हुआ था और लगभग नौ महीने की लंबी अवधि के बाद 6 सितंबर 2024 को पूरा हुआ था। उस नौ महीने के कार्यकाल के दौरान चीनी अंतरिक्ष यान ने कक्षा में रहते हुए कई छोटी अज्ञात वस्तुएं भी छोड़ी थीं, जिसने वैश्विक अंतरिक्ष एजेंसियों को हैरत में डाल दिया था। इसके बाद चीन ने 7 फरवरी 2026 को अपना चौथा अंतरिक्ष मिशन शुरू किया। यह यान वर्तमान में भी अंतरिक्ष की कक्षा में लगातार चक्कर लगा रहा है और अमेरिकी एजेंसियां इस पर बारीक नजर बनाए हुए हैं।\n\nइसका आप पर असर\nइस गुप्त स्पेसप्लेन की सफल उड़ानें अंतरिक्ष में दोनों महाशक्तियों के बीच तकनीकी संतुलन को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं।\n\n• वैश्विक सुरक्षा संतुलन: दोबारा इस्तेमाल होने वाले स्पेसप्लेन किसी भी देश को अंतरिक्ष में त्वरित निगरानी और उपग्रह संचालन की अनूठी क्षमता प्रदान करते हैं। इसके चलते भविष्य में कक्षा के भीतर सैन्य संतुलन और रक्षा रणनीतियों में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।\n• अंतरिक्ष मलबे और उपग्रहों की सुरक्षा: कक्षा में लगातार दिशा बदलने और वस्तुओं को तैनात करने की क्षमता से अन्य नागरिक व संचार उपग्रहों के लिए अप्रत्याशित जोखिम पैदा होते हैं। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष समुदाय को ऐसे उड़ानों के लिए नए परिचालन नियमों और पारदर्शी प्रोटोकॉल पर काम करना पड़ सकता है।\n• वैश्विक प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा: चीन द्वारा कम लागत में बार-बार इस्तेमाल किए जा सकने वाले अंतरिक्ष यानों का सफल संचालन एयरोस्पेस तकनीक में नए निवेश को गति देगा। आने वाले समय में निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों में किफायती उपग्रह प्रक्षेपण प्रणालियों के विकास की होड़ और तेज होगी।\n• निगरानी और सूचना तंत्र: 510 से अधिक निगरानी उपग्रहों के साथ तालमेल बैठाने से सामरिक सूचनाओं का संग्रह बेहद तेज हो जाएगा। विभिन्न देशों की जमीनी और समुद्री गतिविधियों पर हर समय नजर रखने की क्षमता सीधे तौर पर कूटनीतिक फैसलों पर असर डालेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअंतरिक्ष में अपनी सामरिक बढ़त सुरक्षित करने और मिशन लागत में उल्लेखनीय कमी लाने के उद्देश्य से चीन ने रीयूजेबल अंतरिक्ष यानों पर वर्षों से भारी निवेश किया है।\n\n• किफायती अंतरिक्ष आवागमन का लक्ष्य: पारंपरिक रॉकेट केवल एक बार इस्तेमाल होते हैं, जिससे अंतरिक्ष मिशनों पर भारी खर्च आता है। दोबारा इस्तेमाल होने वाला स्पेसप्लेन बनाकर बीजिंग ने बार-बार उपग्रह छोड़ने और परीक्षण करने की परिचालन लागत को काफी कम कर दिया है।\n• कक्षा में लचीली निगरानी की जरूरत: स्थिर कक्षाओं में तैरने वाले सामान्य उपग्रहों की दिशा को तुरंत बदलना बेहद कठिन होता है। आपातकालीन स्थितियों में नए क्षेत्रों पर नजर रखने और दूसरे यानों का निरीक्षण करने के लिए मुड़ने वाले स्पेसप्लेन की सख्त आवश्यकता महसूस की गई।\n• अमेरिकी एक्स-37बी की तकनीकी चुनौती: अमेरिकी स्पेस फोर्स वर्षों से गुप्त रूप से एक्स-37बी का सफल संचालन कर रही थी। रणनीतिक संतुलन बनाए रखने और अंतरिक्ष में किसी एक देश का एकाधिकार रोकने के लिए चीन ने अपने समकक्ष शैनलांग और तेंगयुन कार्यक्रमों को तेजी से आगे बढ़ाया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. चीन के इस गुप्त स्पेसप्लेन की तस्वीर किस एजेंसी ने जारी की है?\nयह तस्वीर अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में जारी की है, जिसे मैक्सार टेक्नोलॉजीज द्वारा खींचा गया है।\n\n2. चीनी स्पेसप्लेन की शारीरिक बनावट में क्या विशेषताएं देखी गई हैं?\nइस यान में छोटे पंख, दो वर्टिकल टेल, बीच में एक खुला पेलोड बे और पिछले हिस्से में सोलर पैनल्स दिए गए हैं।\n\n3. यह चीनी स्पेसप्लेन अमेरिकी एक्स-37बी से किस तरह अलग है?\nदोनों के बुनियादी डिजाइन मिलते-जुलते हैं, लेकिन चीनी स्पेसप्लेन के पंख अमेरिकी विमान की तुलना में ज्यादा चौड़े दिखाई देते हैं।\n\n4. इस स्पेसप्लेन की किस क्षमता ने सुरक्षा रणनीतिकारों को सतर्क किया है?\nकक्षा में घूमते हुए अचानक मुड़ने और तेजी से दिशा बदलने की इसकी क्षमता ने विशेषज्ञों को सबसे ज्यादा सतर्क किया है।\n\n5. चीन के पास इस समय जासूसी और निगरानी उपग्रहों की संख्या कितनी है?\nरिपोर्ट के अनुसार 2018 के बाद से यह संख्या तीन गुना बढ़कर अब 510 से भी अधिक हो चुकी है।\n\n6. चीन का तीसरा और चौथा स्पेसप्लेन मिशन कब शुरू हुआ था?\nतीसरा मिशन 14 दिसंबर 2023 से 6 सितंबर 2024 तक चला था, जबकि चौथा मिशन 7 फरवरी 2026 को शुरू हुआ और अब भी जारी है।",
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