# नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान दिखी विशेष बॉन्डिंग, बंद कमरे की बैठक के बाद हाथ थामकर मुस्कुराए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग

> नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में बंद कमरे की बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बेहद गर्मजोशी भरी मुलाकात हुई, जिसने वैश्विक मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

**Type:** article · **Category:** चीन · **Published:** 2026-09-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/china/new-delhi-men-brics-shikhara-sammelana-2026-ke-daurana-dikhi-vishesha-bondinga-bnda-kamare-ki-baithaka-ke-bada-hatha-thamakara-mus-31549 · **Language:** Hindi
**Tags:** ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026, नरेंद्र मोदी, शी जिनपिंग, भारत चीन संबंध, नई दिल्ली, वैश्विक कूटनीति

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के मंच से एक ऐसा ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कूटनीतिक दृश्य सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी चर्चा बटोरी है। इस शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील बंद कमरे की बैठक आयोजित की गई थी। इस क्लोज्ड-डोर मीटिंग में सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और कूटनीति से जुड़े कई अत्यंत गोपनीय मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। जैसे ही यह बैठक समाप्त हुई और नेता बाहर निकले, वहां मौजूद कैमरे एक असाधारण पल के गवाह बने। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक-दूसरे के सामने आए और दोनों के बीच कमाल की गर्मजोशी देखी गई। दोनों नेताओं ने न केवल एक-दूसरे से हाथ मिलाया, बल्कि काफी देर तक एक-दूसरे का हाथ थामे रखा और चेहरे पर बड़ी मुस्कान के साथ बातचीत की। इस अनौपचारिक और आत्मीय मुलाकात को देखकर कूटनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि बंद कमरे के भीतर हुई चर्चा बहुत सकारात्मक रही है, जिसके सुखद परिणाम बाहर आते ही दोनों नेताओं के चेहरों पर साफ दिखाई दे रहे थे।

## कैमरे में कैद हुई प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग की आत्मीय बातचीत
सोशल मीडिया और विभिन्न वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर साझा किए गए दृश्यों में साफ देखा जा सकता है कि बंद कमरे की बैठक के खत्म होते ही दोनों शीर्ष नेता एक-दूसरे के आमने-सामने आते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग बेहद सहज और दोस्ताना अंदाज में बातचीत शुरू करते हैं। दोनों नेता एक-दूसरे का हाथ पकड़कर काफी समय तक खड़े रहते हैं और उनके चेहरों पर बड़ी मुस्कान तैरती दिखाई देती है। बातचीत के दौरान कई ऐसे पल भी आते हैं जब दोनों नेता एक-दूसरे की बातों पर खुलकर हंसते हुए दिखाई देते हैं। इस खास पल के दौरान उनके आसपास खड़े अन्य सदस्य देशों के शीर्ष प्रतिनिधि, राजनयिक और उच्चाधिकारी भी इस असाधारण दृश्य को बेहद उत्सुकता और हैरानी के साथ देख रहे थे। कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेताओं की शारीरिक भाषा और उनका यह अनौपचारिक अंदाज सीधे तौर पर यह संदेश देता है कि दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों से चला आ रहा गंभीर तनाव अब कूटनीतिक प्रयासों के जरिए धीरे-धीरे कम हो रहा है।

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## आखिर क्या हुआ ब्रिक्स की इस बंद कमरे की बैठक के अंदर?
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित होने वाली बंद कमरे की यानी क्लोज्ड-डोर बैठकें हमेशा से ही अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। मीडिया की सीधी पहुंच और कैमरों की नजरों से दूर होने वाली इस गुप्त चर्चा में सभी देशों के राष्ट्राध्यक्ष पूरी स्वतंत्रता के साथ अपनी बात रखते हैं। इस विशेष बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने, वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित और मजबूत बनाने और आपसी सुरक्षा से जुड़े बेहद नाजुक मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों का आकलन है कि बंद कमरे में हुई इसी खुली और बेबाक चर्चा के कारण दोनों पड़ोसी देशों के नेताओं को एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझने का मौका मिला, जिसके परिणामस्वरूप बैठक खत्म होने के बाद बाहर निकलते ही उनके बीच इतना सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण रवैया देखने को मिला। जब एशिया महाद्वीप की ये दो सबसे बड़ी आर्थिक और सैन्य ताकतें एक ही मंच पर बैठकर वैश्विक समस्याओं का हल ढूंढने का प्रयास करती हैं, तो उसका सीधा असर वैश्विक कूटनीति पर पड़ना तय है।

## पश्चिमी देशों और अमेरिका की क्यों बढ़ी धड़कन?
भारत और चीन न केवल दुनिया की दो सबसे बड़ी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं हैं, बल्कि वे वैश्विक आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा भी हैं। ऐसे में जब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच इस तरह की आत्मीयता और निकटता देखी जाती है, तो अमेरिका और यूरोपीय देशों के रणनीतिक हलकों में हलचल मचना पूरी तरह से स्वाभाविक है। पश्चिमी मीडिया और वहां के नीति-नियंता इस मुलाकात के हर एक पहलू का बेहद सूक्ष्मता से विश्लेषण कर रहे हैं। पश्चिमी देशों को सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि यदि भारत और चीन के बीच के सीमा विवाद और कूटनीतिक मतभेद पूरी तरह से सुलझ जाते हैं, तो एशिया में एक अभूतपूर्व और अत्यंत शक्तिशाली गठबंधन का उदय हो सकता है। यह नया शक्ति केंद्र न केवल वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर के दबदबे को सीधी चुनौती दे सकता है, बल्कि पश्चिमी देशों द्वारा बनाई जाने वाली एकतरफा आर्थिक और भू-राजनीतिक नीतियों के प्रभाव को भी काफी हद तक कम कर सकता है।

## सीमा तनाव के बीच द्विपक्षीय संबंधों का नया अध्याय
पिछले कुछ वर्षों के दौरान दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जो सैन्य और कूटनीतिक गतिरोध देखने को मिला था, उसे दूर करने के लिए दोनों पक्षों की ओर से लगातार उच्च स्तरीय प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे नाजुक दौर में ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय और वैश्विक मंच दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व को बिना किसी पूर्व निर्धारित एजेंडे के सीधे और अनौपचारिक रूप से जुड़ने का एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति ने यह साबित किया है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता को सर्वोपरि रखते हुए वैश्विक मंच पर एक अत्यंत मजबूत और आत्मनिर्भर खिलाड़ी के रूप में खड़ा है। नई दिल्ली में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में सामने आई यह सुखद तस्वीर इस बात का संकेत दे सकती है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों का एक नया और अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण अध्याय शुरू हो सकता है।

## इसका आप पर असर
भारत और चीन के बीच बेहतर होते संबंधों का सीधा असर क्षेत्रीय स्थिरता और व्यापार नीतियों पर पड़ेगा, जिससे दोनों देशों के नागरिकों को लाभ मिल सकता है।

- **भारत में:** सीमा पर सुरक्षा और स्थिरता बढ़ने से रक्षा बजट पर अनावश्यक दबाव कम होगा। इससे सरकार को विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे के विकास पर अधिक धन खर्च करने का अवसर मिलेगा।
- **भारत में:** इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल क्षेत्रों में कच्चे माल की आपूर्ति सुगम होने से उत्पादों की लागत कम हो सकती है। इसका सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को सस्ती वस्तुओं और दवाओं के रूप में मिलेगा।
- **नई दिल्ली में:** इस स्तर के बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की सफल मेजबानी से राष्ट्रीय राजधानी की वैश्विक प्रतिष्ठा मजबूत होगी। इससे शहर में पर्यटन और आतिथ्य सत्कार उद्योग को नया बढ़ावा मिलेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह गर्मजोशी भरी मुलाकात दोनों देशों के बीच सीमा विवादों को सुलझाने के लिए लंबे समय से चल रहे राजनयिक प्रयासों और ब्रिक्स जैसे मंच की अनौपचारिक प्रकृति के कारण संभव हो सकी है।

- **कूटनीतिक बातचीत की निरंतरता:** दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर पर लगातार बातचीत चल रही है। इन निरंतर प्रयासों ने दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक स्तर पर बर्फ पिघलने का माहौल तैयार किया।
- **बहुपक्षीय मंच का प्रभाव:** ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जैसे बहुपक्षीय आयोजन नेताओं को बिना किसी द्विपक्षीय प्रोटोकॉल के दबाव के अनौपचारिक रूप से मिलने का अवसर प्रदान करते हैं। इसके चलते नेताओं के बीच बातचीत अधिक स्वाभाविक और सहज हो पाती है।
- **साझा आर्थिक हित:** वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और सप्लाई चेन की बाधाओं ने दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को सहयोग बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है। स्थानीय मुद्रा व्यापार और आर्थिक सुरक्षा के मुद्दों पर सहमति ने इस सकारात्मक रुख को और मजबूत किया।

## सवाल-जवाब

### 1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच यह मुलाकात कब और कहां हुई?
यह मुलाकात 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान सदस्य देशों की बंद कमरे की बैठक खत्म होने के बाद हुई।

### 2. ब्रिक्स की इस बंद कमरे की बैठक में किन मुख्य विषयों पर चर्चा हुई?
इस गुप्त बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति, स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा देने, सुरक्षित सप्लाई चेन और सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

### 3. दोनों नेताओं के बीच बातचीत के दौरान कैसा माहौल देखा गया?
दोनों नेताओं के बीच काफी दोस्ताना और सकारात्मक माहौल देखा गया, जहां वे हाथ मिलाते, हंसते और गर्मजोशी से बातें करते नजर आए।

### 4. भारत और चीन के बीच इस करीबी से पश्चिमी देश चिंतित क्यों हैं?
पश्चिमी देशों को चिंता है कि दोनों एशियाई शक्तियों के बीच गहरा आर्थिक और रणनीतिक सहयोग वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व और पश्चिमी नीतियों को चुनौती दे सकता है।

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