तिब्बत में फिर आया भूकंप, रिक्टर स्केल पर 4.5 मापी गई तीव्रता; कड़ाके की ठंड में घरों से बाहर निकले लोग तिब्बत में शनिवार को 4.5 तीव्रता का एक और भूकंप दर्ज किया गया। पिछले 24 से 36 घंटों के भीतर क्षेत्र में यह दूसरी बार धरती कांपी है, जिससे हाल ही में आए शक्तिशाली भूकंप के खौफ के बीच लोग ठिठुरती ठंड में बाहर निकल आए। पहाड़ी क्षेत्र तिब्बत में एक बार फिर से भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं, जिससे स्थानीय निवासियों में डर का माहौल बन गया है। इससे पहले गुरुवार 22 अक्टूबर को भी क्षेत्र में तीव्र भूकंप के झटके लगे थे, जिसके कारण भारी तबाही मची थी। उस आपदा में लगभग 16 लोगों की जान चली गई थी और बड़ी संख्या में मकान ढह गए थे। इन झटकों के बाद अब शनिवार 24 अक्टूबर 2026 को दोबारा धरती डोल उठी है। भौगोलिक स्थिति के कारण तिब्बत भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील जोन में आता है और यहां पिछले 24 से 36 घंटों के भीतर दो बार सिस्मिक गतिविधियां दर्ज की गई हैं। सुबह तड़के महसूस किए गए झटके उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शनिवार की सुबह तिब्बत की धरती एक बार फिर हिल उठी। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के आंकड़ों के अनुसार, इस ताजा भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.5 दर्ज की गई। एनसीएस की रिपोर्ट बताती है कि यह झटका सुबह करीब 5 बजकर 38 मिनट पर भारतीय मानक समय (आईएसटी) के अनुसार आया। हालांकि, इस बार भूकंप के केंद्र की गहराई और इसके कारण होने वाले संभावित नुकसान को लेकर तुरंत कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आ पाई है। गनीमत यह रही कि इस झटके के तुरंत बाद किसी के हताहत होने या बड़े पैमाने पर जानमाल के नुकसान की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। हाल ही में हुई भारी तबाही की टीस इससे ठीक पहले, गुरुवार देर शाम लगभग 8 बजे तिब्बत का इलाका एक अत्यधिक शक्तिशाली भूकंप से दहल उठा था। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) ने उस दौरान रिक्टर स्केल पर उसकी तीव्रता 7.0 आंकी थी। उस प्राकृतिक आपदा में जमीन के भीतर लगभग 173 किलोमीटर की गहराई पर हलचल हुई थी। इस भयानक झटके के कारण कुल 16 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि तमाम लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। स्थानीय प्रशासन द्वारा दी गई शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, घरों और बुनियादी ढांचे को भी बड़े पैमाने पर क्षति पहुंची थी, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। भारत का भूकंपीय वर्गीकरण और संवेदनशील क्षेत्र भूकंप के खतरे और संवेदनशीलता के लिहाज से भारत को चार प्रमुख जोन में विभाजित किया गया है। इनमें जोन-5 को सबसे खतरनाक और अधिक जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है, जहां विनाशकारी भूकंप आने की आशंका हमेशा बनी रहती है। इस जोन के अंतर्गत कश्मीर घाटी, पश्चिमी और गढ़वाल हिमालय, उत्तर बिहार, पूर्वोत्तर भारत, कच्छ का रण और अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह आते हैं। इसके बाद जोन-4 को उच्च जोखिम वाला क्षेत्र घोषित किया गया है, जिसमें दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और बिहार के विशाल हिस्से शामिल हैं। अन्य जोन और शहरों की स्थिति जोन-3 के दायरे में देश के कई बड़े और घनी आबादी वाले शहर आते हैं, जैसे मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, पुणे और अहमदाबाद। इसके विपरीत, जोन-2 को अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है, जिसमें बेंगलुरु, हैदराबाद और जयपुर जैसे शहर शामिल हैं। वैज्ञानिक वर्गीकरण प्रणाली के तहत भारत में अब जोन-1 का उपयोग नहीं किया जाता है, क्योंकि देश के सभी भू-भागों को न्यूनतम से लेकर अधिकतम जोखिम वाले इन चार जोन में ही समाहित कर लिया गया है। इसका आप पर असर तिब्बत और हिमालयी क्षेत्रों में बार-बार आ रहे भूकंप के झटकों के बीच आम नागरिकों के लिए सुरक्षा और एहतियात बेहद जरूरी हो गए हैं। • भारत में: देश के विभिन्न हिस्सों में संवेदनशील भूकंपीय जोन तय किए गए हैं, जिसके तहत दिल्ली और हिमालयी राज्यों जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों के नागरिकों को विशेष निर्माण नियमों का पालन करना चाहिए। सरकार और आपदा प्रबंधन एजेंसियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अध्ययन करना हर नागरिक के लिए सुरक्षित होता है। • तिब्बत और पड़ोसी क्षेत्रों में: लगातार आ रहे झटकों के कारण प्रभावित पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोग कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। स्थानीय प्रशासन और राहत दलों को तुरंत गर्म तंबू, कंबल और चिकित्सा सहायता मुहैया कराने की जरूरत होती है। ऐसा क्यों हुआ तिब्बत और उसके आसपास के क्षेत्रों में बार-बार भूकंप आने का प्रमुख कारण इस भू-भाग की जटिल टेक्टोनिक प्लेटों की स्थिति है। • विवर्तनिक प्लेटों की हलचल: तिब्बत का पूरा भू-भाग भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के अभिसरण क्षेत्र में स्थित है, जहां दोनों प्लेटों के लगातार टकराने और दबाव बनने के कारण भारी ऊर्जा संचित होती रहती है। • ऊर्जा का विमोचन: जब भूमि के भीतर संचित यह अत्यधिक दबाव अचानक टूटता है या खिसकता है, तो सिस्मिक तरंगे पैदा होती हैं जो सतह पर तेज भूकंप के झटकों के रूप में महसूस की जाती हैं। • लगातार आफ्टरशॉक्स: बड़े 7.0 तीव्रता के मुख्य भूकंप के बाद जमीन के भीतर संतुलन स्थापित होने की प्रक्रिया चलती है, जिसके परिणामस्वरूप 4.5 जैसी तीव्रता के झटके और छोटे आफ्टरशॉक्स लगातार महसूस किए जाते हैं। सवाल-जवाब 1. तिब्बत में ताजा भूकंप की तीव्रता कितनी दर्ज की गई? राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार रिक्टर पैमाने पर इस ताजा भूकंप की तीव्रता 4.5 मापी गई। 2. यह ताजा भूकंप किस समय आया था? यह भूकंप शनिवार सुबह करीब 5 बजकर 38 मिनट पर भारतीय मानक समय के अनुसार आया था। 3. इससे पहले तिब्बत में बड़ा भूकंप कब आया था? इससे पहले गुरुवार देर शाम लगभग 8 बजे 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था। 4. पिछले बड़े भूकंप में कितना नुकसान हुआ था? गुरुवार के भूकंप में 16 लोगों की मौत हो गई थी और कई मकान तबाह हो गए थे। 5. भारत को भूकंप के लिहाज से कितने जोन में बांटा गया है? भारत को भूकंप के खतरे के आधार पर 4 प्रमुख जोन में बांटा गया है। 6. दिल्ली किस भूकंपीय जोन के अंतर्गत आती है? दिल्ली को उच्च जोखिम वाले जोन-4 में शामिल किया गया है। https://trendkia.com/china/tibbata-men-phira-aya-bhuknpa-riktara-skela-para-4-5-mapi-gai-tivrata-karake-ki-thnda-men-gharon-se-bahara-nikale-loga-51146 TrendKia — Har trend, sabse pehle.