15-वर्षीय भारतीय सनसनी वैभव सूर्यवंशी के लिए अर्जुन रणतुंगा ने कमर्शियल दबाव से दूर रहने और तकनीक पर ध्यान देने की कही बात 1996 के विश्व कप विजेता कप्तान अर्जुन रणतुंगा ने 15 वर्षीय क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि युवा खिलाड़ियों को कमर्शियल चकाचौंध से बचाकर तकनीक और लंबे फॉर्मेट की मजबूती पर ध्यान देना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की दुनिया में जब भी कोई किशोर खिलाड़ी अपनी असाधारण क्षमता से सुर्खियां बटोरता है, तो उसके साथ ढेरों उम्मीदों और अनगिनत आशंकाओं का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। भारत के केवल 15 वर्ष के उभरते हुए विस्फोटक बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी इन दिनों लगातार चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं। इस युवा प्रतिभा के सामने आने पर क्रिकेट जगत की कई महान हस्तियों का ध्यान उनकी ओर आकर्षित हुआ है। इन्हीं में 1996 में श्रीलंका को विश्व कप चैंपियन बनाने वाले कप्तान अर्जुन रणतुंगा भी शामिल हैं। खुद किशोरावस्था में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने करियर की शुरुआत करने वाले रणतुंगा ने इस युवा खिलाड़ी को लेकर एक बेहद गंभीर और विचारणीय संदेश दिया है। उनका स्पष्ट मानना है कि महज 15 साल की नाजुक उम्र में इस लड़के पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक दबाव डालने के बजाय, उसे अपने स्वाभाविक खेल का स्वतंत्र होकर आनंद लेने की पूरी छूट मिलनी चाहिए। युवा खिलाड़ियों पर कमर्शियल चकाचौंध और बाहरी दबाव का खतरा अर्जुन रणतुंगा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा को लेकर बहुत जल्दबाजी में कोई अंतिम राय बनाना बिल्कुल भी सही नहीं है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वह अभी केवल एक बच्चा है और उसे अपनी उम्र के हिसाब से बचपन जीने की पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। आधुनिक क्रिकेट के बदलते माहौल में उभरते हुए खिलाड़ियों के आसपास जिस तरह से मैनेजरों, व्यावसायिक एजेंटों और आकर्षक स्पॉन्सरशिप का एक बड़ा जाल फैल जाता है, वह किसी भी नए करियर के विकास के लिए सबसे खतरनाक साबित हो सकता है। रणतुंगा का मानना है कि यदि कोई खिलाड़ी इतनी छोटी उम्र में ही कमर्शियल दुनिया की चमक-धमक में खो जाता है, तो उसका ध्यान भटक सकता है और मैदान पर उसका प्रदर्शन बिखर सकता है। इसलिए इस समय सबसे प्राथमिक और आवश्यक कदम यह है कि युवा वैभव को बाहरी शोर-शराबे और बाजार के दबाव से पूरी तरह दूर रखा जाए। टी20 का रोमांच बनाम टेस्ट क्रिकेट की वास्तविक कसौटी क्रिकेट के अलग-अलग फॉर्मेट और तकनीकी बारीकियों पर चर्चा करते हुए श्रीलंकाई दिग्गज ने एक बहुत ही साफ लकीर खींची है। वैभव सूर्यवंशी ने टी20 फॉर्मेट में अपनी आक्रामक और आतिशी बल्लेबाजी से सभी को प्रभावित किया है। हालांकि, रणतुंगा का कहना है कि टी20 क्रिकेट में कोई भी खिलाड़ी दर्शकों का मनोरंजन करने वाला एक बेहतरीन एंटरटेनर जरूर बन सकता है, लेकिन किसी भी बल्लेबाज के कौशल और चरित्र की असली परीक्षा केवल खेल के सबसे लंबे और पारंपरिक फॉर्मेट यानी टेस्ट क्रिकेट में ही होती है। यदि वैभव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दशकों तक अपनी चमक बनाए रखनी है और एक परिपक्व एवं संपूर्ण क्रिकेटर के रूप में पहचान बनानी है, तो उन्हें अपनी बेसिक तकनीक पर निरंतर और कठोर परिश्रम करना होगा। अंततः यह निर्णय वैभव को ही करना है कि क्या वह केवल छोटे फॉर्मेट के रोमांचक खिलाड़ी बनकर संतुष्ट रहना चाहते हैं या फिर टेस्ट क्रिकेट की कसौटी पर खरे उतरकर क्रिकेट इतिहास में एक महान बल्लेबाज के रूप में दर्ज होना चाहते हैं। भारतीय क्रिकेट के दिग्गजों से मार्गदर्शन प्राप्त करने की आवश्यकता भारत में मौजूद क्रिकेट के विशाल और समृद्ध ज्ञान की सराहना करते हुए रणतुंगा ने कहा कि वैभव सूर्यवंशी के पास विश्व के सबसे महान सलाहकारों और मार्गदर्शकों की उपस्थिति का अनोखा लाभ उपलब्ध है। उन्होंने भारतीय क्रिकेट के कई महान स्तंभों का उल्लेख किया, जिनमें सुनील गावस्कर, मोहम्मद अजहरुद्दीन, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण जैसे नाम शामिल हैं। रणतुंगा ने अपने शुरुआती दिनों की यादों को साझा करते हुए बताया कि उनके दौर में श्रीलंकाई क्रिकेटर सुनील गावस्कर और गुंडप्पा विश्वनाथ जैसे भारतीय महारथियों को खेलते देखकर बल्लेबाजी की गहरी बारीकियां सीखा करते थे। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वैभव को भी इन भारतीय दिग्गजों के अनुभवों से यह सीखना चाहिए कि विपरीत परिस्थितियों और कठिन समय में मानसिक मजबूती के साथ क्रीज पर कैसे डटे रहा जाता है। अर्जुन रणतुंगा का अपना अनुभव और सर गैरी सोबर्स की ऐतिहासिक सीख अर्जुन रणतुंगा द्वारा दी गई यह महत्वपूर्ण सलाह उनके अपने जीवन के लंबे अनुभवों से उपजी है। जब वह स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे, तभी महान ऑलराउंडर सर गैरी सोबर्स ने उनकी असाधारण प्रतिभा को पहचान लिया था। सर गैरी सोबर्स ने वर्ष 1982 में श्रीलंका के ऐतिहासिक पहले टेस्ट मैच से लेकर 1983 के विश्व कप तक श्रीलंकाई टीम को निखारने और तैयार करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। रणतुंगा ने न केवल अपनी अगुआई में श्रीलंका को 1996 का ऐतिहासिक विश्व कप दिलाया, बल्कि हमेशा खिलाड़ियों के अधिकारों और आत्मसम्मान के लिए क्रिकेट बोर्ड और प्रशासनिक व्यवस्था से टकराने का साहस भी दिखाया। आज 62 वर्ष की आयु में, किसी आधिकारिक पद पर न रहते हुए भी, खेल की नब्ज पर उनकी समझ उतनी ही सटीक है। रणतुंगा की यह सलाह केवल वैभव सूर्यवंशी तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक दौर के हर उस युवा क्रिकेटर के लिए एक सबक है जो शुरुआती चकाचौंध में अपनी जड़ों और बुनियादी मूल्यों से भटकने के मोड़ पर खड़ा है। क्रिकेट के लंबे और सफल सफर में टिके रहने के लिए मजबूत तकनीक, सही दिशा-निर्देशन और धैर्य ही सबसे बड़े हथियार होते हैं। इसका आप पर असर क्रिकेट फैंस और उभरते खिलाड़ियों के लिए: • युवा खिलाड़ियों पर कमर्शियल दबाव से बचने और बुनियादी तकनीक मजबूत करने की सलाह से उभरते क्रिकेटरों को लंबे करियर की सही दिशा मिलती है। • क्रिकेट फैंस के लिए यह संदेश साफ करता है कि टी20 के रोमांच के साथ-साथ टेस्ट क्रिकेट की असल चुनौती ही खिलाड़ी का सही आकलन करती है। सवाल-जवाब 1. अर्जुन रणतुंगा ने वैभव सूर्यवंशी को लेकर क्या मुख्य सलाह दी है? अर्जुन रणतुंगा ने सलाह दी है कि 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी पर किसी तरह का दबाव न डाला जाए और उन्हें स्वतंत्र होकर खेलने व अपना बचपन जीने का मौका दिया जाए। 2. रणतुंगा के अनुसार युवा खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ा खतरा क्या है? आधुनिक क्रिकेट में छोटी उम्र में ही मैनेजरों, एजेंटों और स्पॉन्सरशिप का जाल बिछ जाना खिलाड़ी के एकाग्रता और खेल दोनों को बिगाड़ सकता है। 3. टी20 और टेस्ट क्रिकेट को लेकर रणतुंगा की क्या राय है? रणतुंगा के अनुसार टी20 खिलाड़ी को एक एंटरटेनर बना सकता है, लेकिन किसी बल्लेबाज की असली परीक्षा केवल टेस्ट क्रिकेट की बुनियादी तकनीक पर ही होती है। 4. रणतुंगा ने वैभव को किन भारतीय दिग्गज खिलाड़ियों से सीखने की सलाह दी है? उन्होंने सुनील गावस्कर, मोहम्मद अजहरुद्दीन, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण जैसे महान खिलाड़ियों से सीखने का सुझाव दिया। 5. अर्जुन रणतुंगा के अपने करियर में मार्गदर्शन की क्या भूमिका रही है? रणतुंगा को स्कूली दिनों में सर गैरी सोबर्स ने पहचाना था, जिन्होंने 1982 के पहले टेस्ट से 1983 विश्व कप तक श्रीलंकाई टीम को तराशा था। https://trendkia.com/cricket/15-varshiya-bharatiya-sanasani-vaibhav-sooryavanshi-ke-lie-arjun-ranatunga-ne-kamarshiyala-dabava-se-dura-rahane-aura-takanika-par-19408 TrendKia — Har trend, sabse pehle.