36 दिन जेल की सलाखों के पीछे और फिर मैदान पर वापसी, रणजी ट्रॉफी में शतक लगाकर फफककर रो पड़े अभिषेक पोरेल बंगाल के विकेटकीपर-बल्लेबाज अभिषेक पोरेल ने गंभीर कानूनी विवाद और 36 दिनों की जेल की सजा के बाद रणजी ट्रॉफी में शानदार वापसी करते हुए शतक जड़ा, जिसके बाद वह मैदान पर ही भावुक हो गए। बंगाल के विकेटकीपर-बल्लेबाज अभिषेक पोरेल के लिए पिछले कुछ महीने बेहद कठिन और संघर्षपूर्ण रहे हैं। उन पर एक मेडिकल छात्रा द्वारा शादी का झांसा देकर रेप का गंभीर आरोप लगाया गया था, जिसके बाद यह कानूनी मामला अदालत तक पहुंचा और उन्हें न्यायिक हिरासत का सामना करना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम और विवाद के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं कि उनका क्रिकेट करियर अब समाप्त हो चुका है। करीब 36 दिन जेल में गुजारने के बाद उन्हें भारी मुश्किलों के बीच जमानत हासिल हुई, लेकिन इस कानूनी संकट से उबरने के बाद भी उनका मानसिक मनोबल पूरी तरह टूट चुका था। रणजी ट्रॉफी में शानदार वापसी और चयन जेल से बाहर आने के बाद अभिषेक पोरेल के लिए परिस्थितियां बेहद प्रतिकूल थीं और उन्हें हर तरफ से आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे कठिन समय में उनकी अपनी स्टेट टीम ने उन पर विश्वास बनाए रखा और उन्हें रणजी ट्रॉफी कैंप के लिए बुलावा भेजा। बंगाल की टीम प्रबंधन ने न केवल उन्हें रणजी ट्रॉफी 2026-27 के लिए टीम का हिस्सा बनाया, बल्कि उन्हें दिल्ली के खिलाफ खेले गए पहले मैच की प्लेइंग इलेवन में भी सीधे मौका दिया। टीम का यह भरोसा उनके लिए एक बड़ा संबल साबित हुआ। मैदान पर शतक और भावनाओं का सैलाब दिल्ली के खिलाफ मुकाबले में अभिषेक पोरेल ने मैदान पर उतरकर धैर्य और संयम का परिचय दिया और बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए अपना शतक पूरा किया। जैसे ही उन्होंने 137 गेंदों का सामना करते हुए यह शतकीय पारी खेली, उनके भीतर पिछले 36 दिनों और उसके बाद का सारा मानसिक तनाव और दर्द आंसुओं के रूप में बाहर आ गया। शतक लगाने की खुशी और पिछले दिनों झेले गए मानसिक आघात के कारण वह मैदान पर ही फूट-फूटकर रोने लगे, जिसका वीडियो और पल सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा। इसका आप पर असर यह घटना घरेलू क्रिकेट खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य और कानूनी विवादों के बाद पेशेवर जीवन में वापसी की चुनौतियों को उजागर करती है। • घरेलू क्रिकेट पर असर: यह मामला खेल संगठनों और टीमों के लिए खिलाड़ियों के व्यक्तिगत संकट और पुनर्वास के प्रबंधन पर नए सिरे से विचार करने का संदेश देता है। • खिलाड़ियों का मनोबल: यह उन खिलाड़ियों के लिए एक उदाहरण है जो कठिन परिस्थितियों और कानूनी लड़ाइयों से गुजरने के बाद अपने खेल के जरिए वापसी की कोशिश करते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब अभिषेक पोरेल पर एक मेडिकल छात्रा द्वारा गंभीर आरोप लगाए गए, जिसके बाद कानूनी प्रक्रियाओं के तहत उन्हें जेल भेजा गया। • कानूनी कार्रवाई: आरोपों के तूल पकड़ने और अदालत के आदेश के बाद उन्हें 36 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहना पड़ा, जिससे उनका करियर संकट में आ गया था। • टीम का समर्थन: गंभीर आरोपों से घिरे होने के बावजूद बंगाल टीम प्रबंधन ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें रणजी ट्रॉफी कैंप में वापसी का अवसर दिया। • मानसिक दबाव: लंबे समय तक जेल में रहने और समाज के तिरस्कार के कारण उनके भीतर जो मानसिक तनाव जमा हो गया था, वह मैदान पर शतक जड़ने के बाद आंसुओं के रूप में बाहर आ गया। सवाल-जवाब 1. अभिषेक पोरेल किस टीम के लिए घरेलू क्रिकेट खेलते हैं? अभिषेक पोरेल बंगाल की टीम के लिए घरेलू क्रिकेट खेलते हैं। 2. अभिषेक पोरेल ने कितने दिन जेल में बिताए? अभिषेक पोरेल ने कानूनी मामलों के चलते 36 दिन जेल में बिताए। 3. रणजी ट्रॉफी मैच में अभिषेक ने किस टीम के खिलाफ शतक लगाया? अभिषेक पोरेल ने दिल्ली के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मैच में शतक जड़ा। 4. शतक पूरा करने के बाद अभिषेक पोरेल की क्या प्रतिक्रिया थी? शतक पूरा करने के बाद अभिषेक पोरेल मैदान पर ही फूट-फूटकर रोने लगे। https://trendkia.com/cricket/36-din-jail-aur-ranji-trophy-me-shatak-lagakar-phaphak-kar-ro-pade-abhishek-porel-47311 TrendKia — Har trend, sabse pehle.