{
  "type": "article",
  "title": "अजिंक्य रहाणे के संन्यास के बाद याद आए वो 5 भारतीय क्रिकेटर जिन्हें मैदान पर नहीं मिला फेयरवेल",
  "summary": "अजिंक्य रहाणे के बिना फेयरवेल संन्यास लेने के बाद भारतीय क्रिकेट के उन 5 बड़े नामों पर नजर, जिन्होंने देश को दो वर्ल्ड कप जिताए लेकिन उन्हें मैदान से विदाई लेने का मौका नहीं मिला।",
  "content": "भारतीय क्रिकेट में जब कोई स्टार खिलाड़ी संन्यास की घोषणा करता है, तो फैंस को उम्मीद होती है कि वह अपने होम ग्राउंड या किसी बड़े मुकाबले में मैदान पर अपना आखिरी मैच खेलकर विदा होगा। हालांकि, आधुनिक क्रिकेट में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है। हाल ही में भारतीय टीम के अनुभवी खिलाड़ी अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। अजिंक्य रहाणे का करियर काफी शानदार रहा, लेकिन बढ़ती उम्र और लगातार गिरते फॉर्म की वजह से वह लंबे समय तक टीम चयनकर्ताओं की नजरों से दूर रहे। लंबे इंतजार और वापसी का कोई रास्ता न दिखता देख उन्होंने बिना किसी विदाई मैच के ही संन्यास लेने का फैसला किया। अजिंक्य रहाणे अकेले ऐसे खिलाड़ी नहीं हैं जिनके साथ ऐसा हुआ है। उनसे पहले भी भारतीय क्रिकेट के कई महान खिलाड़ी, जिन्होंने देश को ऐतिहासिक ट्राफियां जिताईं, वे भी बिना फेयरवेल मैच खेले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अलग हो गए। यहां जानिए उन 5 महान दिग्गजों के बारे में जिन्हें मैदान पर फेयरवेल खेलने का अवसर नहीं मिल सका।\n\nयुवराज सिंह: दो विश्व कप के नायक को नहीं मिला विदाई मैच\nइस सूची में सबसे पहला और बड़ा नाम ऑलराउंडर युवराज सिंह का आता है। युवराज सिंह ने साल 2000 में भारतीय टीम के लिए अपना पदार्पण किया था। इसके बाद वह करीब दो दशकों तक टीम इंडिया का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे। युवराज सिंह ने 10 जून 2019 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की थी। अपने पूरे करियर में उन्होंने भारत के लिए कुल 402 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले, जिनमें 40 टेस्ट, 304 वनडे और 58 T20 मैच शामिल हैं। युवराज सिंह भारत की दो विश्व कप विजेता टीमों के अहम नायक रहे हैं। उन्होंने 2007 T20 विश्व कप और 2011 वनडे विश्व कप में भारत को चैंपियन बनाने में यादगार योगदान दिया। साल 2011 के वनडे विश्व कप में तो उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट के खिताब से नवाजा गया था। गंभीर बीमारी कैंसर को मात देकर मैदान पर फिर से वापसी करने वाले इस दिग्गज ऑलराउंडर को अपने करियर के अंतिम पड़ाव में खराब फॉर्म से जूझना पड़ा। आखिरकार टीम से बाहर रहने के बाद उन्हें बिना किसी फेयरवेल मैच के ही संन्यास की घोषणा करनी पड़ी।\n\nगौतम गंभीर: दो विश्व कप फाइनल के हीरो का खामोश संन्यास\nभारतीय टीम के मौजूदा हेड कोच गौतम गंभीर का नाम भी उन बदकिस्मत खिलाड़ियों में शामिल है, जिन्हें मैदान पर विदाई मैच खेलने का मौका नहीं मिला। गौतम गंभीर ने साल 2003 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था। उन्होंने अपने करियर में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कुल 242 मुकाबले खेले, जिनमें 58 टेस्ट, 147 वनडे और 37 T20 मैच शामिल रहे। गौतम गंभीर भी भारतीय क्रिकेट इतिहास की दो सबसे बड़ी विश्व कप सफलताओं के सबसे बड़े हीरो रहे हैं। उन्होंने 2007 T20 विश्व कप के फाइनल में 75 रनों की बेशकीमती पारी खेली थी और फिर 2011 वनडे विश्व कप के फाइनल में 97 रनों की यादगार पारी खेलकर भारत को विश्व विजेता बनाया था। इसके बावजूद करियर के आखिरी चरण में चयनकर्ताओं ने उनसे किनारा कर लिया। लंबे समय तक टीम से बाहर रहने के बाद गौतम गंभीर ने साल 2018 में बिना किसी फेयरवेल मैच के क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया।\n\nवीरेंद्र सहवाग: टेस्ट में दो तिहरे शतक लगाने वाले ओपनर की बिन विदाई रवानगी\nअपनी आक्रामक बल्लेबाजी से दुनिया भर के गेंदबाजों के मन में खौफ पैदा करने वाले सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग को भी मैदान पर फेयरवेल मैच खेलने का मौका नहीं मिला। वीरेंद्र सहवाग ने साल 1999 में टीम इंडिया के लिए अपना अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया था। उन्होंने अपने करियर में कुल 374 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। वीरेंद्र सहवाग 2007 T20 विश्व कप और 2011 वनडे विश्व कप दोनों ही विजेता टीमों में मुख्य ओपनर बल्लेबाज की भूमिका में रहे। टेस्ट क्रिकेट में भारत की ओर से दो तिहरे शतक जमाने वाले वह इकलौते भारतीय बल्लेबाज बने। अपनी विस्फोटक शैली के बावजूद 2013 के बाद खराब फॉर्म के कारण उन्हें भारतीय टीम से ड्रॉप कर दिया गया था। काफी समय तक वापसी का मौका न मिलने पर वीरेंद्र सहवाग ने साल 2015 में अपने 37वें जन्मदिन के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी।\n\nजहीर खान: 2011 विश्व कप के सबसे सफल तेज गेंदबाज की चोटों से थमी विदाई\nभारत के महानतम तेज गेंदबाजों में शुमार जहीर खान भी इस लिस्ट में शामिल हैं। जहीर खान ने भी युवराज सिंह की तरह साल 2000 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। अपने करियर के दौरान उन्होंने भारत के लिए कुल 309 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। अपनी बेहतरीन स्विंग और सटीक लाइन-लेंथ के लिए पहचाने जाने वाले जहीर खान 2011 वनडे विश्व कप विजेता टीम के सबसे मुख्य स्तंभ थे। उस टूर्नामेंट में उन्होंने संयुक्त रूप से सर्वाधिक 21 विकेट चटकाकर भारत को विश्व चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि करियर के अंतिम दौर में जहीर खान बार-बार चोटिल होने की समस्या से परेशान रहे। चोटों के कारण वह टीम से बाहर होते चले गए और आखिरकार उन्हें भी मैदान पर विदाई मुकाबला खेलने का अवसर प्राप्त नहीं हो सका।\n\nसुरेश रैना: तीनों फॉर्मेट में शतक जमाने वाले 'मिस्टर आईपीएल' का अचानक फैसला\nक्रिकेट जगत में मिस्टर आईपीएल के नाम से प्रसिद्ध हुए सुरेश रैना को भी टीम इंडिया के लिए फेयरवेल मैच खेलने का मौका नहीं मिल सका। सुरेश रैना ने साल 2005 में भारतीय टीम के लिए अपना डेब्यू किया था। उन्होंने भारत के लिए कुल 322 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। सुरेश रैना 2011 वनडे विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के बेहद महत्वपूर्ण सदस्य थे, जहां उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के खिलाफ नॉकआउट मैचों में बेहद निर्णायक और नाबाद पारियां खेली थीं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में भारत के लिए सबसे पहले शतक ठोकने का रिकॉर्ड भी सुरेश रैना के ही नाम दर्ज है। वह साल 2018 के बाद से राष्ट्रीय टीम से लगातार बाहर चल रहे थे। इसके बाद साल 2020 में धोनी के संन्यास लेने के तुरंत बाद ही सुरेश रैना ने भी बिना किसी विदाई मैच के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया।\n\nइसका आप पर असर\nक्रिकेट फैंस के लिए: यह दिखाता है कि आधुनिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में फॉर्म और टीम कॉम्बिनेशन के आगे दिग्गजों को भी तय समय पर फेयरवेल मैच मिलना तय नहीं होता।\n\nयुवा खिलाड़ियों के लिए: यह खबर बताती है कि करियर के चरम पर सफलता पाने के बाद भी हर खिलाड़ी को अपने संन्यास की योजना और अंतिम पड़ाव के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना होता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा क्यों की?\nअजिंक्य रहाणे लंबे समय से गिरते फॉर्म और बढ़ती उम्र के कारण भारतीय टीम से बाहर चल रहे थे और वापसी का रास्ता न देखकर उन्होंने संन्यास लिया।\n\n2. युवराज सिंह ने भारत के लिए कुल कितने अंतरराष्ट्रीय मैच खेले?\nयुवराज सिंह ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में भारत के लिए कुल 402 मैच खेले, जिनमें 40 टेस्ट, 304 वनडे और 58 T20 शामिल हैं।\n\n3. गौतम गंभीर ने विश्व कप के किन दो फाइनल मैचों में मैच जिताऊ पारियां खेली थीं?\nगौतम गंभीर ने 2007 T20 विश्व कप के फाइनल में 75 रन और 2011 वनडे विश्व कप के फाइनल में 97 रन की महत्वपूर्ण पारियां खेली थीं।\n\n4. 2011 वनडे विश्व कप में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज कौन थे?\n2011 वनडे विश्व कप में जहीर खान संयुक्त रूप से सर्वाधिक 21 विकेट लेने वाले गेंदबाज थे।\n\n5. वीरेंद्र सहवाग ने संन्यास का ऐलान कब और किस खास मौके पर किया था?\nवीरेंद्र सहवाग ने साल 2015 में अपने 37वें जन्मदिन के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की थी।\n\n6. तीनों फॉर्मेट में भारत के लिए सबसे पहले शतक बनाने का रिकॉर्ड किस खिलाड़ी के नाम है?\nतीनों अंतरराष्ट्रीय फॉर्मेट में भारत के लिए सबसे पहले शतक जमाने का रिकॉर्ड सुरेश रैना के नाम है।",
  "url": "https://trendkia.com/cricket/ajinkya-rahane-ke-snnyasa-ke-bada-yada-ae-vo-5-bharatiya-kriketara-jinhen-maidana-para-nahin-mila-pheyaravela-13932",
  "category": "क्रिकेट",
  "publishedAt": "2026-08-05",
  "tags": [
    "अजिंक्य रहाणे",
    "युवराज सिंह",
    "गौतम गंभीर",
    "वीरेंद्र सहवाग",
    "जहीर खान",
    "सुरेश रैना",
    "भारतीय क्रिकेट टीम",
    "फेयरवेल मैच"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}