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  "type": "article",
  "title": "केप टाउन टेस्ट में डीआरएस विवाद पर आईसीसी का सख्त एक्शन, साउथ अफ्रीका के कोच एश्वेल प्रिंस और काइल वेरेन को लगी फटकार",
  "summary": "केप टाउन में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध तीसरे टेस्ट के दौरान अंपायर के निर्णय पर विवाद खड़ा करने को लेकर आईसीसी ने साउथ अफ्रीका के बैटिंग कोच एश्वेल प्रिंस और खिलाड़ी काइल वेरेन को फटकार लगाते हुए एक-एक डिमेरिट अंक दिया है।",
  "content": "केप टाउन में साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए तीसरे टेस्ट मुकाबले के तीसरे दिन डीआरएस से जुड़े एक विवाद ने बड़ा तूल पकड़ लिया। साउथ अफ्रीका की दूसरी पारी में सलामी बल्लेबाज मार्केस एकरमैन के आउट होने के बाद उपजे विवाद के चलते अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने साउथ अफ्रीका के बल्लेबाजी कोच एश्वेल प्रिंस और खिलाड़ी काइल वेरेन पर सख्त रुख अपनाया है। दोनों को खेल की आचार संहिता का उल्लंघन करने का दोषी मानते हुए आधिकारिक तौर पर फटकार लगाई गई है।\n\nडीआरएस के 15 सेकंड के नियम पर खड़ा हुआ था विवाद\nयह पूरा वाकया उस समय हुआ जब साउथ अफ्रीका की दूसरी पारी चल रही थी और ओपनर मार्केस एकरमैन को मैदान पर आउट दे दिया गया था। एकरमैन मैदानी अंपायरों के इस फैसले को चुनौती देने के लिए डीआरएस रिव्यू मांगना चाहते थे। हालांकि, मैदानी अंपायरों ने साफ तौर पर उनका रिव्यू लेने से मना कर दिया क्योंकि इसके लिए तय 15 सेकंड की समय सीमा समाप्त हो चुकी थी। अंपायरों का स्पष्ट फैसला था कि समय सीमा समाप्त होने के बाद कोई भी टीम रिव्यू की मांग नहीं कर सकती।\n\nबाउंड्री लाइन पर अंपायरों से बहस और देरी\nजब मार्केस एकरमैन को रिव्यू नहीं मिला और वह वापस पवेलियन की दिशा में लौट रहे थे, तब साउथ अफ्रीका के बैटिंग कोच एश्वेल प्रिंस ने मैदानी अंपायरों के साथ बहस शुरू कर दी। प्रिंस बार-बार इस बात पर अड़े रहे कि डीआरएस की मांग करने के लिए अभी समय बचा हुआ था और रिव्यू दिया जाना चाहिए था। ठीक उसी समय टीम की प्लेइंग इलेवन का हिस्सा न होने के बावजूद खिलाड़ी काइल वेरेन ने एकरमैन को बाउंड्री लाइन के भीतर ही रुकने का इशारा किया। वेरेन के इस निर्देश के चलते एकरमैन के मैदान से बाहर जाने में गैर-जरूरी देरी हुई, जिसे खेल भावना और प्रोटोकॉल के विरुद्ध माना गया।\n\nगलती स्वीकार करने के बाद लगा डिमेरिट अंक\nआईसीसी ने पूरे घटनाक्रम की समीक्षा के बाद स्पष्ट किया कि एश्वेल प्रिंस और काइल वेरेन दोनों को आचार संहिता के नियम 2.8 का उल्लंघन करने का दोषी पाया गया है। यह विशेष नियम किसी अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के दौरान मैदानी अंपायरों के निर्णयों पर असंतोष जाहिर करने या उनसे बहस करने पर लागू होता है। पिछले 24 महीनों के अनुशासन रिकॉर्ड को देखते हुए यह दोनों का पहला अपराध था, इसलिए उनके रिकॉर्ड में एक-एक डिमेरिट पॉइंट दर्ज किया गया। दोनों ने आईसीसी मैच रेफरी जवागल श्रीनाथ द्वारा लगाए गए आरोपों और सजा को बिना किसी विरोध के स्वीकार कर लिया, जिसके चलते किसी औपचारिक सुनवाई या लंबी जांच की नौबत नहीं आई।\n\nअंपायरों की शिकायत और साउथ अफ्रीका की सीरीज जीत\nप्रिंस और वेरेन के विरुद्ध यह शिकायत ऑन-फील्ड अंपायर रिचर्ड इलिंगवर्थ और रिचर्ड केटलबोरो के साथ-साथ थर्ड अंपायर क्रिस गैफनी और फोर्थ अंपायर लुबाबालो गकुमा ने दर्ज कराई थी। आचार संहिता के लेवल 1 के उल्लंघन के तहत कम से कम आधिकारिक चेतावनी और अधिकतम मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना या एक से दो डिमेरिट अंक दिए जाने का प्रावधान है। मैदान के बाहर इस विवाद के बावजूद साउथ अफ्रीका ने केप टाउन टेस्ट में खेल के चौथे और पांचवें दिन जबरदस्त गेंदबाजी और शानदार वापसी के दम पर ऑस्ट्रेलिया को शिकस्त दी और तीन मैचों की यह टेस्ट सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली।\n\nइसका आप पर असर\nक्रिकेट प्रशंसकों और खिलाड़ियों के लिए यह फैसला खेल में नियमों के कड़े पालन और अंपायरों के सम्मान का कड़ा संदेश देता है।\n\n• क्रिकेट नियमों पर असर: आईसीसी ने स्पष्ट किया है कि 15 सेकंड के डीआरएस टाइमर का उल्लंघन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ को खेल के तय नियमों के भीतर ही काम करना होगा।\n• खिलाड़ियों के रिकॉर्ड पर प्रभाव: एश्वेल प्रिंस और काइल वेरेन दोनों के अनुशासन रिकॉर्ड में एक-एक डिमेरit अंक जुड़ गया है। अगले 24 महीनों के भीतर और अधिक अंक जुड़ने पर उन पर मैचों का निलंबन लग सकता है।\n• डगआउट और रिजर्व खिलाड़ियों के लिए सबक: प्लेइंग इलेवन से बाहर रहने वाले खिलाड़ियों को मैदान पर हो रहे फैसलों में हस्तक्षेप करने से सख्त परहेज करना होगा। बाउंड्री लाइन पर ऐसी गतिविधि अब सीधे आईसीसी के आचार संहिता उल्लंघन के दायरे में आएगी।\n• प्रशंसकों और दर्शकों के लिए स्पष्टता: मैच के दौरान टीवी या स्टेडियम में मैच देख रहे दर्शकों को यह साफ संदेश मिला है कि अंपायर का फैसला सर्वोपरि है। तकनीक का सहारा लेने के लिए तय समय सीमा में अपील करना अनिवार्य है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह कार्रवाई केप टाउन टेस्ट के दौरान अंपायर के फैसले पर असंतोष व्यक्त करने और मैच में व्यवधान डालने के कारण की गई।\n\n• 15 सेकंड की समय सीमा समाप्त होना: साउथ अफ्रीका की दूसरी पारी में मार्केस एकरमैन के आउट होने के बाद डीआरएस मांगने के लिए निर्धारित 15 सेकंड का समय निकल चुका था, जिसके कारण अंपायरों ने रिव्यू देने से मना कर दिया।\n• कोच और खिलाड़ी का अनुचित हस्तक्षेप: बल्लेबाजी कोच एश्वेल प्रिंस ने अंपायरों से बार-बार बहस की, जबकि गैर-खिलाड़ी काइल वेरेन ने एकरमैन को बाउंड्री लाइन के भीतर रोककर बाहर जाने में जानबूझकर देरी करवाई।\n• आचार संहिता नियम 2.8 का उल्लंघन: ऑन-फील्ड और टीवी अंपायरों ने पाया कि दोनों का आचरण अंपायरों के फैसले पर असहमति जताने की श्रेणी में आता है, जिसके आधार पर मैच रेफरी के सामने औपचारिक आरोप तय किए गए।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. आईसीसी ने साउथ अफ्रीका के किन सदस्यों पर कार्रवाई की है?\nआईसीसी ने साउथ अफ्रीका के बैटिंग कोच एश्वेल प्रिंस और खिलाड़ी काइल वेरेन पर नियमों के उल्लंघन के लिए कार्रवाई की है।\n\n2. यह घटना किस मैच और किस दिन की है?\nयह घटना केप टाउन में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए तीसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन साउथ अफ्रीका की दूसरी पारी के दौरान हुई।\n\n3. विवाद किस बात को लेकर शुरू हुआ था?\nबल्लेबाज मार्केस एकरमैन आउट होने के बाद डीआरएस लेना चाहते थे, लेकिन अंपायरों ने 15 सेकंड का समय खत्म होने के कारण रिव्यू देने से इनकार कर दिया था।\n\n4. एश्वेल प्रिंस और काइल वेरेन पर क्या आरोप थे?\nएश्वेल प्रिंस ने अंपायर से बहस की और काइल वेरेन ने एकरमैन को मैदान से बाहर जाने से रोकते हुए देरी करवाई।\n\n5. आईसीसी ने दोनों को क्या सजा सुनाई है?\nदोनों को आधिकारिक तौर पर फटकार लगाई गई है और उनके अनुशासन रिकॉर्ड में एक-एक डिमेरिट पॉइंट जोड़ा गया है।\n\n6. क्या इस मामले में कोई औपचारिक सुनवाई हुई?\nनहीं, दोनों ने मैच रेफरी जवागल श्रीनाथ द्वारा लगाए गए आरोपों और सजा को स्वीकार कर लिया, जिससे औपचारिक सुनवाई की आवश्यकता नहीं पड़ी।\n\n7. तीसरे टेस्ट और सीरीज का परिणाम क्या रहा?\nसाउथ अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर केप टाउन टेस्ट जीता और तीन मैचों की यह टेस्ट सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली।",
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  "whatItMeansForYou": "क्रिकेट प्रशंसकों और खिलाड़ियों के लिए यह फैसला खेल में नियमों के कड़े पालन और अंपायरों के सम्मान का कड़ा संदेश देता है।\n\n• क्रिकेट नियमों पर असर: आईसीसी ने स्पष्ट किया है कि 15 सेकंड के डीआरएस टाइमर का उल्लंघन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ को खेल के तय नियमों के भीतर ही काम करना होगा।\n• खिलाड़ियों के रिकॉर्ड पर प्रभाव: एश्वेल प्रिंस और काइल वेरेन दोनों के अनुशासन रिकॉर्ड में एक-एक डिमेरit अंक जुड़ गया है। अगले 24 महीनों के भीतर और अधिक अंक जुड़ने पर उन पर मैचों का निलंबन लग सकता है।\n• डगआउट और रिजर्व खिलाड़ियों के लिए सबक: प्लेइंग इलेवन से बाहर रहने वाले खिलाड़ियों को मैदान पर हो रहे फैसलों में हस्तक्षेप करने से सख्त परहेज करना होगा। बाउंड्री लाइन पर ऐसी गतिविधि अब सीधे आईसीसी के आचार संहिता उल्लंघन के दायरे में आएगी।\n• प्रशंसकों और दर्शकों के लिए स्पष्टता: मैच के दौरान टीवी या स्टेडियम में मैच देख रहे दर्शकों को यह साफ संदेश मिला है कि अंपायर का फैसला सर्वोपरि है। तकनीक का सहारा लेने के लिए तय समय सीमा में अपील करना अनिवार्य है।",
  "whyItHappened": "यह कार्रवाई केप टाउन टेस्ट के दौरान अंपायर के फैसले पर असंतोष व्यक्त करने और मैच में व्यवधान डालने के कारण की गई।\n\n• 15 सेकंड की समय सीमा समाप्त होना: साउथ अफ्रीका की दूसरी पारी में मार्केस एकरमैन के आउट होने के बाद डीआरएस मांगने के लिए निर्धारित 15 सेकंड का समय निकल चुका था, जिसके कारण अंपायरों ने रिव्यू देने से मना कर दिया।\n• कोच और खिलाड़ी का अनुचित हस्तक्षेप: बल्लेबाजी कोच एश्वेल प्रिंस ने अंपायरों से बार-बार बहस की, जबकि गैर-खिलाड़ी काइल वेरेन ने एकरमैन को बाउंड्री लाइन के भीतर रोककर बाहर जाने में जानबूझकर देरी करवाई।\n• आचार संहिता नियम 2.8 का उल्लंघन: ऑन-फील्ड और टीवी अंपायरों ने पाया कि दोनों का आचरण अंपायरों के फैसले पर असहमति जताने की श्रेणी में आता है, जिसके आधार पर मैच रेफरी के सामने औपचारिक आरोप तय किए गए।",
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      "question": "आईसीसी ने साउथ अफ्रीका के किन सदस्यों पर कार्रवाई की है?",
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      "answer": "यह घटना केप टाउन में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए तीसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन साउथ अफ्रीका की दूसरी पारी के दौरान हुई।"
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      "answer": "एश्वेल प्रिंस ने अंपायर से बहस की और काइल वेरेन ने एकरमैन को मैदान से बाहर जाने से रोकते हुए देरी करवाई।"
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      "question": "क्या इस मामले में कोई औपचारिक सुनवाई हुई?",
      "answer": "नहीं, दोनों ने मैच रेफरी जवागल श्रीनाथ द्वारा लगाए गए आरोपों और सजा को स्वीकार कर लिया, जिससे औपचारिक सुनवाई की आवश्यकता नहीं पड़ी।"
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