# क्रिकेट इतिहास में लगातार टेस्ट शतक ठोकने की सबसे हैरतअंगेज लय, 89 वर्षों से शीर्ष पर मौजूद ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज

> टेस्ट क्रिकेट में लगातार मैचों में शतक जड़ना एक ऐसा बेमिसाल कीर्तिमान है, जहां सर डॉन ब्रैडमैन के 6 शतकों का विश्व रिकॉर्ड आज भी अटूट है।

**Type:** article · **Category:** क्रिकेट · **Published:** 2026-10-31 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/cricket/cricket-history-me-lagatar-test-shatak-thokne-ki-sabse-hairatangez-lay-89-years-se-top-par-australian-legend-53620 · **Language:** Hindi
**Tags:** टेस्ट क्रिकेट, सर डॉन ब्रैडमैन, गौतम गंभीर, जैक्स कैलिस, मोहम्मद यूसुफ, क्रिकेट रिकॉर्ड्स, टेस्ट शतक

लाल गेंद के प्रारूप में किसी बल्लेबाज के लिए लगातार कई मुकाबलों में तिहरे अंक तक पहुंचना निरंतरता, मानसिक एकाग्रता और तकनीकी मजबूती की सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है। टेस्ट क्रिकेट के इतिहास के पन्नों को पलटें तो कुछ ऐसे असाधारण दौर नजर आते हैं जब बल्लेबाजों ने मैदान पर कदम रखते ही हर मैच में शतकीय पारी खेली। इस विशिष्ट सूची में ऑस्ट्रेलिया के सर डॉन ब्रैडमैन सबसे ऊपर काबिज हैं, जिनका लगातार छह टेस्ट शतक लगाने का कीर्तिमान 89 सालों के बाद भी पूरी शान के साथ टिका हुआ है। उनके अलावा इस सर्वकालिक शीर्ष सूची में दक्षिण अफ्रीका के महान हरफनमौला जैक्स कैलिस, पाकिस्तान के कलात्मक बल्लेबाज मोहम्मद यूसुफ और भारत के जुझारू सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर अपनी अमिट छाप छोड़ चुके हैं।

## सर डॉन ब्रैडमैन का ऐतिहासिक छह शतकों का सिलसिला
जब भी खेल में रनों के एवरेस्ट और अविश्वसनीय निरंतरता का जिक्र होता है, सर डोनाल्ड ब्रैडमैन का नाम स्वाभाविक रूप से सबसे पहले उभरता है। विरोधी गेंदबाजी आक्रमणों के मन में खौफ पैदा करने वाले ब्रैडमैन ने साल 1937 के शुरुआती महीनों में इंग्लैंड के खिलाफ एशेज सीरीज के दौरान ऐसी बल्लेबाजी की जिसने रिकॉर्ड किताबों को नए सिरे से लिखने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने लगातार छह टेस्ट मुकाबलों में शतक ठोकने का अद्​भुत कारनामा अंजाम दिया। इस ऐतिहासिक सिलसिले का आगाज 1 जनवरी 1937 को मेलबर्न के मैदान पर हुआ, जहां उन्होंने पहली पारी में 270 रनों की मैराथन पारी खेलकर मुकाबला पलट दिया था। इसके बाद एडिलेड में 29 जनवरी 1937 से शुरू हुए मुकाबले में ब्रैडमैन के बल्ले से 212 रनों की एक और जोरदार दोहरी शतकीय पारी निकली।

ब्रैडमैन का यह विजय रथ यहीं नहीं थमा। 26 फरवरी 1937 को मेलबर्न में फिर से खेलते हुए उन्होंने 169 रनों की जोरदार पारी खेली। इसके बाद जब ऑस्ट्रेलियाई टीम 1938 के दौरे पर इंग्लैंड पहुंची, तो जून 1938 में नॉटिंघम टेस्ट में उन्होंने नाबाद 144 रन बनाए। इसके तुरंत बाद लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर नाबाद 102 रन और फिर लीड्स में 103 रनों की पारी खेलकर उन्होंने लगातार छह शतकों का विश्व रिकॉर्ड पूरा किया। यह एक ऐसा शिखर है जिसे आधुनिक युग का कोई भी बल्लेबाज आज तक पार नहीं कर पाया है।

## 1929 और 1930 में ब्रैडमैन का एक और कमाल
ब्रैडमैन के करियर में इस तरह की शतकीय लड़ी सिर्फ एक बार नहीं दिखी। इससे पहले साल 1929 और 1930 के दौरान भी उन्होंने लगातार चार टेस्ट मुकाबलों में शतकीय पारियां खेलने का कारनामा किया था। इस सुनहरे दौर में उन्होंने मेलबर्न में 123 रन बनाए, नॉटिंघम में 131 रनों की पारी खेली, लॉर्ड्स में 254 रन ठोके और लीड्स के मैदान पर 334 रनों की ऐतिहासिक तिहरी शतकीय पारी खेलकर इतिहास रच दिया था। यह आंकड़े बताते हैं कि वह अपनी पूरी खेल यात्रा के दौरान गेंदबाजों पर किस कदर हावी रहते थे।

## जैक्स कैलिस का दक्षिण अफ्रीकी चट्टान जैसा प्रदर्शन
आधुनिक क्रिकेट के सबसे संपूर्ण ऑलराउंडरों में शुमार दक्षिण अफ्रीका के जैक्स कैलिस अपनी बेदाग तकनीक और अद्वितीय धैर्य के लिए जाने जाते थे। कैलिस का क्रीज पर डट जाना विरोधी कप्तानों और गेंदबाजों की सारी रणनीतियों को निष्प्रभावी कर देता था। दिसंबर 2003 से मार्च 2004 के बीच कैलिस ने अपनी बल्लेबाजी के दम पर टेस्ट मैचों में रनों का ऐसा अंबार लगाया जिसने दक्षिण अफ्रीका को अपराजेय बना दिया। कैलिस ने लगातार पांच टेस्ट पारियों में शतक जड़ने का हैरतअंगेज कारनामा किया।

इस सिलसिले की शुरुआत दिसंबर 2003 में वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू सीरीज से हुई। जोहान्सबर्ग टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने 158 रन बनाए। उसके फौरन बाद डरबन टेस्ट में उनके बल्ले से नाबाद 177 रनों की पारी निकली। केपटाउन में खेले गए अगले मुकाबले में कैलिस ने नाबाद 130 रन बनाए और फिर सेंचुरियन में भी नाबाद 130 रन जड़कर वेस्टइंडीज के गेंदबाजी आक्रमण को पूरी तरह पस्त कर दिया। इसके बाद जब दक्षिण अफ्रीकी टीम न्यूजीलैंड दौरे पर गई, तो मार्च 2004 में हेमिल्टन टेस्ट में कैलिस ने नाबाद 150 रनों की पारी खेलकर लगातार पांच शतकीय पारियों का अपना यह असाधारण सफर पूरा किया।

## मोहम्मद यूसुफ का जादुई साल 2006
अपनी खूबसूरत कलाईयों के सहारे कलात्मक और शालीन कवर ड्राइव लगाने वाले पाकिस्तान के मोहम्मद यूसुफ के लिए साल 2006 किसी सपने जैसा रहा। उन्होंने उस कैलेंडर वर्ष में टेस्ट क्रिकेट में रनों का सैलाब ला दिया था। अगस्त 2006 में जब पाकिस्तान की टीम इंग्लैंड के दौरे पर थी, तब यूसुफ ने लीड्स में 192 रन और द ओवल के मैदान पर 128 रनों की शानदार पारियां खेलकर गेंदबाजों को बेबस कर दिया था। इसके बाद असली तूफान नवंबर 2006 में देखने को मिला जब वेस्टइंडीज ने पाकिस्तान का दौरा किया।

लाहौर टेस्ट में यूसुफ ने 192 रन बनाए, फिर मुल्तान टेस्ट में 191 रनों की पारी खेली। इसके बाद कराची टेस्ट में उन्होंने दोनों पारियों में शतक जड़ते हुए पहली पारी में 102 और दूसरी पारी में 124 रन ठोक दिए। लगातार पांच टेस्ट शतक जड़कर उन्होंने दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों को अचंभित कर दिया। मुश्किल और दबाव भरे लम्हों में टीम को उबारने की उनकी क्षमता ने उन्हें उस समय टेस्ट प्रारूप का सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज बना दिया था।

## गौतम गंभीर का जुझारू और स्वर्णिम काल
भारतीय क्रिकेट में 2009 और 2010 का समय बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर के करियर का स्वर्णिम काल माना जाता है। गंभीर अपनी एकाग्रता, असीम धैर्य और घंटों क्रीज पर टिककर मैच बचाने या जिताने के लिए मशहूर थे। मार्च 2009 में न्यूजीलैंड की धरती पर उन्होंने नेपियर में 137 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली और उसके बाद वेलिंगटन टेस्ट में 167 रन बनाकर अपनी तकनीकी श्रेष्ठता साबित की।

न्यूजीलैंड के बाद जब नवंबर 2009 में श्रीलंका ने भारत का दौरा किया, तब गंभीर का बल्ला लगातार बोलता रहा। उन्होंने अहमदाबाद टेस्ट में 114 रन बनाए और फिर कानपुर के मैदान पर 167 रनों की बेहद ठोस पारी खेली। इस शतकीय सिलसिले को उन्होंने जनवरी 2010 में भी जारी रखा, जब चट्टोग्राम में बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट मुकाबले में उन्होंने 116 रन बनाए। लगातार पांच टेस्ट मैचों में शतक ठोककर गंभीर ने इस चुनिंदा एलीट क्लब में भारत का झंडा बुलंद किया।

## 1931 और 1932 में ब्रैडमैन की एक और ऐतिहासिक लय
इस ऐतिहासिक सूची में पांचवें स्थान पर भी सर डॉन ब्रैडमैन का ही नाम दर्ज है, जो यह साबित करता है कि उनका खेल अपने दौर से कितना आगे था। साल 1931 और 1932 के बीच दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेली गई घरेलू टेस्ट सीरीज में ब्रैडमैन ने एक बार फिर रनों की सुनामी ला दी थी। 27 नवंबर 1931 को ब्रिस्बेन में शुरू हुए टेस्ट में उन्होंने पहली पारी में 226 रन ठोके। इसके बाद 18 दिसंबर 1931 को सिडनी टेस्ट में उन्होंने 112 रन बनाए।

इस सीरीज में उनकी भूख लगातार बढ़ती गई। 31 दिसंबर 1931 को मेलबर्न टेस्ट की दूसरी पारी में उन्होंने 167 रन बनाए और फिर 29 जनवरी 1932 को एडिलेड में नाबाद 299 रनों की विस्मयकारी पारी खेली। इस दौरान ब्रैडमैन ने लगातार चार मैचों में शतकीय प्रहार करके दक्षिण अफ्रीकी टीम को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया था। यह आंकड़े बताते हैं कि टेस्ट क्रिकेट में लंबी और लगातार शतकीय पारियां खेलना कितना दुर्लभ और यादगार कारनामा रहा है।

## इसका आप पर असर
टेस्ट क्रिकेट में लगातार शतक बनाने वाले खिलाड़ियों का यह दुर्लभ रिकॉर्ड खेल प्रेमियों और उभरते क्रिकेटरों को खेल के सबसे कड़े प्रारूप में निरंतरता का असली पैमाना समझाता है।

- **क्रिकेट प्रेमियों के लिए:** यह आंकड़े बताते हैं कि लाल गेंद के क्रिकेट में व्यक्तिगत निरंतरता का स्तर कितना ऊंचा हो सकता है। दर्शक समझ सकते हैं कि 89 साल पुराना ब्रैडमैन का कीर्तिमान आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण के दौर में भी क्यों अभेद्य बना हुआ है।
- **युवा बल्लेबाजों के लिए:** लंबी पारियों और लगातार मैचों में शतक ठोकने के लिए सिर्फ आक्रामक शॉट्स नहीं, बल्कि क्रीज पर टिकने का धैर्य जरूरी होता है। गंभीर और कैलिस जैसे दिग्गजों की पारियां यह सिखाती हैं कि सत्र दर सत्र खेल को कैसे आगे बढ़ाया जाता है।
- **टीम रणनीतिकारों के लिए:** जब शीर्ष या मध्य क्रम का बल्लेबाज लगातार मैचों में शतकीय पारियां खेलता है, तो टीम की हार की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है। ऐसे खिलाड़ी विरोधी गेंदबाजों को मानसिक रूप से थकाकर मैच पर पूर्ण नियंत्रण दिलाते हैं।
- **इतिहास प्रेमियों के लिए:** क्रिकेट के 140 से अधिक वर्षों के इतिहास में केवल गिने-चुने बल्लेबाज ही 5 या उससे अधिक मुकाबलों में यह कारनामा कर पाए हैं। यह सूची खेल के विभिन्न युगों की परिस्थितियों और पिचों के बदलाव के बावजूद महानता के साझा धागे को रेखांकित करती है।

## ऐसा क्यों हुआ
टेस्ट क्रिकेट में लगातार मैचों में शतकीय पारियां निकलना किसी भी बल्लेबाज के चरम फॉर्म, बेदाग तकनीक और मानसिक दृढ़ता के दुर्लभ तालमेल के कारण संभव हो पाता है।

- **चरम मानसिक एकाग्रता:** एक बार शतक पूरा करने के बाद कई बल्लेबाज संतुष्ट हो जाते हैं या एकाग्रता खो देते हैं। ब्रैडमैन, कैलिस, यूसुफ और गंभीर जैसे दिग्गजों में हर नई पारी को शून्य से शुरू करने और घंटों बल्लेबाजी करने की असाधारण भूख थी।
- **तकनीक और परिस्थितियों से सामंजस्य:** यह सिलसिले अलग-अलग देशों, पिचों और मौसम में खेले गए मुकाबलों में बने। चाहे इंग्लैंड की सीमिंग परिस्थितियां हों, न्यूजीलैंड का उछाल हो या उपमहाद्वीप की टर्निंग पिचें, इन बल्लेबाजों की तकनीकी अनुकूलन क्षमता ने उन्हें लगातार रन बनाने में मदद की।
- **दबाव झेलने की क्षमता:** इन पारियों में से कई मैच बचाने या टीम को गहरे संकट से निकालने के दौरान आईं। गंभीर का नेपियर में 137 और कैलिस की नाबाद पारियां यह दर्शाती हैं कि टीम की जिम्मेदारी ने उनकी बल्लेबाजी को और अधिक धार दी।

## सवाल-जवाब

### 1. टेस्ट क्रिकेट में लगातार सबसे ज्यादा शतक जड़ने का विश्व रिकॉर्ड किसके नाम है?
यह विश्व रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के सर डॉन ब्रैडमैन के नाम है, जिन्होंने साल 1937 और 1938 के बीच लगातार छह टेस्ट मैचों में शतक जड़े थे।

### 2. सर डॉन ब्रैडमैन का यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड कितने वर्षों से बरकरार है?
ब्रैडमैन का लगातार छह टेस्ट शतक ठोकने का यह विश्व कीर्तिमान पिछले 89 सालों से अटूट है।

### 3. दक्षिण अफ्रीका के जैक्स कैलिस ने लगातार कितने टेस्ट पारियों में शतक बनाए थे?
जैक्स कैलिस ने दिसंबर 2003 से मार्च 2004 के दौरान वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड के खिलाफ लगातार पांच टेस्ट पारियों में शतक लगाए थे।

### 4. पाकिस्तान के मोहम्मद यूसुफ ने किस साल लगातार पांच टेस्ट मैचों में शतक ठोके?
मोहम्मद यूसुफ ने साल 2006 में इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के खिलाफ खेलते हुए लगातार पांच टेस्ट शतक जड़ने का कारनामा किया था।

### 5. भारत की तरफ से लगातार पांच टेस्ट मैचों में शतक लगाने वाले बल्लेबाज कौन हैं?
भारत के सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने 2009 और 2010 के दौरान न्यूजीलैंड, श्रीलंका और बांग्लादेश के खिलाफ लगातार पांच टेस्ट मैचों में शतक बनाए।

### 6. साल 1931-1932 में ब्रैडमैन ने किस टीम के खिलाफ लगातार चार शतकीय पारियां खेली थीं?
साल 1931 और 1932 के दौरान ब्रैडमैन ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ लगातार चार टेस्ट मैचों में शतकीय प्रहार किया था, जिसमें नाबाद 299 रन भी शामिल थे।

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