# दबाव और ट्रोलिंग पर संजू सैमसन का बेबाक बयान, बोले हम कोई रोबोट नहीं हैं

> अफगानिस्तान के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में 22 गेंदों पर 57 रन जड़ने के बाद संजू सैमसन ने आलोचनाओं, इंटरनेट ट्रोलिंग और टीम में प्रतिस्पर्धा पर खुलकर अपनी बात रखी.

**Type:** article · **Category:** क्रिकेट · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/cricket/dabava-aura-trolinga-para-sanju-samson-ka-bebaka-bayana-bole-hama-koi-robota-nahin-hain-34657 · **Language:** Hindi
**Tags:** संजू सैमसन, भारतीय क्रिकेट टीम, टी20 क्रिकेट, अफगानिस्तान बनाम भारत, वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लगातार बने रहने का दबाव कितना गहरा होता है, यह अफगानिस्तान के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले के बाद साफ नजर आया जब संजू सैमसन ने अपनी आक्रामक पारी खेलने के बाद मैदान से बाहर की दुनिया पर अपनी भावनाएं साझा कीं. इस मुकाबले में उन्होंने महज 22 गेंदों का सामना करते हुए 57 रनों की जोरदार पारी खेली. इस तेजतर्रार पारी के दौरान उन्होंने 52 रन केवल चौकों और छक्कों की मदद से बटोरे. श्रृंखला के शुरुआती मैच में वह केवल 10 रन बनाकर पवेलियन लौट गए थे, जिसके तुरंत बाद उनकी फॉर्म और टीम में मौजूदगी पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं. ऐसे नाजुक मोड़ पर आई यह अर्धशतकीय पारी उनके आत्मविश्वास और टीम संतुलन दोनों के लिहाज से काफी अहम साबित हुई है.

## सोशल मीडिया के शोर और ट्रोलिंग से निपटने का तरीका
मुकाबला खत्म होने के बाद संजू सैमसन ने स्वीकार किया कि इंटरनेट पर चलने वाली नकारात्मक बातें खिलाड़ियों को मानसिक तौर पर जरूर छूती हैं. उन्होंने साझा किया कि वह अक्सर अशांति से बचने के लिए अपना वाई-फाई नेटवर्क बंद कर देते हैं. हालांकि, इंटरनेट दोबारा चालू करते ही अनचाहे नोटिफिकेशन स्क्रीन पर तैरने लगते हैं, जिसे अब उन्होंने खेल की दिनचर्या का एक सामान्य हिस्सा मान लिया है. उन्होंने बताया कि पहले इस तरह की टिप्पणियां ज्यादा चुभती थीं, लेकिन अब समय और तजुर्बे के साथ उन्होंने इस दबाव को संभालना सीख लिया है.

खिलाड़ियों की भावनात्मक स्थिति पर बोलते हुए संजू सैमसन ने साफ कहा, 
> "हम रोबोट नहीं हैं जो यह कह सकें कि नहीं, यह मुझे प्रभावित नहीं करता. निश्चित रूप से यह आपको प्रभावित करता है."
 सैमसन के मुताबिक भारतीय क्रिकेटरों के लिए बाहर का शोर अनदेखा करना आसान नहीं होता, लेकिन मैदान पर उतरने से पहले अपनी मानसिकता, तैयारी और रणनीति को लेकर मन में स्पष्टता होना सबसे ज्यादा जरूरी है.

## बल्लेबाजी में निडर रवैया बनाए रखने की चुनौती
आक्रामक बल्लेबाजी के दौरान आने वाले मानसिक द्वंद्व पर चर्चा करते हुए संजू सैमसन ने स्पष्ट किया कि अगर वह हर वक्त बाहर की राय पर सोचते रहते, तो खुलकर शॉट्स खेलना मुमकिन नहीं होता. अगर खिलाड़ी हर गेंद पर यह सोचने लगे कि आउट होने के बाद ऑनलाइन ट्रोलिंग झेलनी पड़ेगी, तो उसका स्वाभाविक खेल पूरी तरह खत्म हो जाएगा. इसलिए वह किसी भी गेंद पर बल्ला चलाने से पहले संकोच करने के बजाय खुद को समझाते हैं कि परिणाम चाहे जो हो, निडर होकर खेलना ही एकमात्र विकल्प है.

## ड्रेसिंग रूम में साथी खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा का सच
टीम में शीर्ष क्रम के स्थानों को लेकर चल रही होड़ पर भी संजू सैमसन ने अपना नजरिया स्पष्ट किया. जब वैभव सूर्यवंशी और अभिषेक शर्मा के साथ शुरुआती क्रम की दावेदारी को लेकर सवाल उठा, तो उन्होंने इसे आंतरिक प्रतिद्वंद्विता मानने से इनकार कर दिया. उन्होंने साफ किया कि वैभव सूर्यवंशी और अभिषेक शर्मा को बाहरी दर्शक या विश्लेषक भले ही आपस में भिड़ते प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखें, लेकिन टीम के अंदर की वास्तविकता बिल्कुल अलग है. ड्रेसिंग रूम में सभी सदस्य सिर्फ देश की जीत को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं और बाकी व्यक्तिगत समीकरण उसके बाद आते हैं.

## इसका आप पर असर
यह बातचीत दर्शाती है कि उच्च स्तर पर प्रदर्शन करने वाले पेशेवर एथलीट भी डिजिटल ट्रोलिंग और अनिश्चितता के दबाव से जूझते हैं.

- **क्रिकेट प्रशंसकों के लिए:** खिलाड़ियों की निरंतरता और मानसिक स्वास्थ्य पर ऑनलाइन टिप्पणियों का सीधा असर पड़ता है. समझदार प्रशंसक केवल तात्कालिक अंकों के आधार पर राय बनाने के बजाय खेल के व्यापक संदर्भ को महत्व देते हैं.
- **युवा खिलाड़ियों के लिए:** आलोचनाओं से घिरने पर बाहरी राय से दूरी बनाना और अपने बुनियादी खेल पर टिके रहना जरूरी है. विफलता के डर को हावी न होने देना ही लंबी अवधि की सफलता तय करता है.
- **सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए:** डिजिटल मंचों पर की गई सख्त टिप्पणियां खिलाड़ियों तक सीधे पहुंचती हैं. किसी भी खिलाड़ी की फॉर्म में गिरावट आने पर संयमित और गरिमापूर्ण प्रतिक्रिया देना खेल संस्कृति को बेहतर बनाता है.
- **प्रतियोगी माहौल में काम करने वालों के लिए:** कार्यस्थल या टीम में सहकर्मियों को प्रतिद्वंद्वी मानने के बजाय साझा लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. आंतरिक एकता व्यक्तिगत दबाव को कम कर संस्थागत सफलता को आसान बनाती है.

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटनाक्रम तब सामने आया जब श्रृंखला के पहले मैच में विफलता के बाद संजू सैमसन ने दूसरे मैच में तूफानी पारी खेलकर आलोचकों का ध्यान खींचा.

- **पहले मैच में नाकामी का दबाव:** संजू सैमसन पहले टी20 मैच में केवल 10 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए थे. राष्ट्रीय टीम में जगह को लेकर चल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण तुरंत उनकी निरंतरता पर सवाल उठाए जाने लगे.
- **दूसरे मैच में जवाबी प्रदर्शन:** सैमसन ने दूसरे मुकाबले में केवल 22 गेंदों में 57 रन ठोककर शानदार वापसी की. इस पारी में 52 रन बाउंड्री से बनाकर उन्होंने दिखा दिया कि वह खेल के रुख को तेजी से बदलने में सक्षम हैं.
- **डिजिटल युग का लगातार बढ़ता दबाव:** भारतीय क्रिकेट में हर गेंद का सूक्ष्म विश्लेषण सोशल मीडिया पर तुरंत शुरू हो जाता है. मैच के बाद के संवाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के तनाव से निपटने के लिए खिलाड़ियों को जानबूझकर डिजिटल दुनिया से दूरी बनानी पड़ती है.

## सवाल-जवाब

### 1. अफगानिस्तान के खिलाफ दूसरे टी20 में संजू सैमसन ने कितने रन बनाए?
संजू सैमसन ने 22 गेंदों में 57 रनों की तेजतर्रार पारी खेली, जिसमें 52 रन सिर्फ बाउंड्री से बने.

### 2. श्रृंखला के पहले मुकाबले में संजू सैमसन का प्रदर्शन कैसा रहा था?
पहले मुकाबले में संजू सैमसन केवल 10 रन बनाकर आउट हो गए थे, जिसके बाद उनके स्थान पर सवाल उठने लगे थे.

### 3. ट्रोलिंग और आलोचनाओं से बचने के लिए संजू सैमसन क्या तरीका अपनाते हैं?
संजू सैमसन ने बताया कि वह अशांति से बचने के लिए वाई-फाई बंद कर देते हैं ताकि सोशल मीडिया नोटिफिकेशन न दिखें.

### 4. क्या संजू सैमसन वैभव सूर्यवंशी को अपना प्रतिद्वंद्वी मानते हैं?
नहीं, संजू सैमसन ने स्पष्ट किया कि वह वैभव सूर्यवंशी को प्रतिद्वंद्वी नहीं मानते क्योंकि वे सभी एक टीम के रूप में देश के लिए खेल रहे हैं.

## प्रेरणा और सबक
संजू सैमसन की यह पारी और उनका बयान कठिन समय में मानसिक मजबूती बनाए रखने की उत्कृष्ट सीख देता है.

- **नकारात्मक शोर से दूरी:** अत्यधिक मानसिक भटकाव होने पर बाहरी सूचनाओं और सोशल मीडिया से दूरी बनाना मानसिक संतुलन लौटाता है. आत्म-शांति बनाए रखने के लिए डिजिटल डिटॉक्स का सहारा लेना एक व्यावहारिक कदम है.
- **मानवीय संवेदना को स्वीकारना:** दबाव महसूस होना कमजोरी नहीं बल्कि एक स्वाभाविक मानवीय पहलू है. अपनी भावनाओं को स्वीकार कर ही तजुर्बे के साथ उन्हें बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है.
- **असफलता के डर पर काबू:** परिणामों की अत्यधिक चिंता किए बिना अपनी मूल कार्यशैली पर भरोसा बनाए रखना चाहिए. आलोचना के डर से अपनी आक्रामकता छोड़ना असफलता की ओर ले जाता है.
- **सामूहिक लक्ष्य को प्राथमिकता:** साथी सहयोगियों को प्रतिद्वंद्वी मानने के बजाय एक टीम के रूप में मिलकर काम करने से प्रदर्शन निखरता है. समूह की सफलता में ही व्यक्तिगत पहचान सुरक्षित रहती है.

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