दलीप ट्रॉफी फाइनल के बीच करुण नायर का विवाद, साउथ जोन का साथ छोड़ बेंगलुरु लौटे बल्लेबाज दलीप ट्रॉफी फाइनल में प्लेइंग इलेवन से बाहर किए जाने के बाद करुण नायर ने साउथ जोन का साथ छोड़ दिया और बेंगलुरु लौट आए। उन्होंने वहां घरेलू टूर्नामेंट में शतक लगाकर चयनकर्ताओं के फैसलों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले जा रहे दलीप ट्रॉफी फाइनल मुकाबले में साउथ जोन की टीम भारी संकट में नजर आ रही है। इस खिताबी मुकाबले में ईस्ट जोन की टीम ने पहली पारी में 703 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया, जिससे साउथ जोन की गेंदबाजी कमजोर साबित होती दिखी। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अनुभवी बल्लेबाज करुण नायर अचानक चर्चा का केंद्र बन गए हैं, जिन्हें सेमीफाइनल और फाइनल दोनों अहम मुकाबलों की प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं दी गई थी। टीम से बाहर होने के बाद जड़ा शानदार शतक दलीप ट्रॉफी फाइनल मुकाबले की शुरुआत से ठीक एक दिन पहले तक कर्नाटक के बल्लेबाज करुण नायर चेपॉक में साउथ जोन के साथ नेट सत्र में अभ्यास कर रहे थे। हालांकि, जब उन्हें यह बात पता चली कि उन्हें फाइनल की अंतिम ग्यारह खिलाड़ियों की सूची में शामिल नहीं किया गया है, तो वह रविवार को अचानक टीम का साथ छोड़कर बेंगलुरु वापस लौट आए। इसके अगले दिन यानी सोमवार को उन्होंने केएससीए सेक्रेटरी इलेवन की तरफ से खेलते हुए छत्तीसगढ़ के खिलाफ शानदार शतक जड़ दिया। करुण नायर इस समय एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में थिमप्पैया ट्रॉफी के तहत केएससीए सेक्रेटरी इलेवन के लिए मैदान पर उतर रहे हैं, जिसे कर्नाटक में रणजी ट्रॉफी सीजन की आधिकारिक शुरुआत माना जाता है। कोच और कप्तान के बयानों से उठे चयन पर सवाल दलीप फाइनल के दूसरे दिन का खेल समाप्त होने के बाद जब साउथ जोन के कोच विक्रम वर्मा से करुण नायर के अचानक जाने को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे निजी कारणों का हवाला दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नायर ने ईमेल के जरिए अनुमति मांगी थी और व्यक्तिगत कारणों से घर गए थे। इसके साथ ही उन्होंने टीम संयोजन की मजबूरी बताते हुए कहा कि विपक्षी टीमों के पास दो बाएं हाथ के स्पिनर होने के कारण मध्य क्रम में एक बाएं हाथ के बल्लेबाज की जरूरत थी ताकि उनकी गेंदबाजी का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके। नॉर्थ जोन के खिलाफ पहले मैच में युवा खिलाड़ी कोदिमेला हिमातेजा को मौका मिला था और देवदत्त पडिक्कल की वापसी के बाद टीम का संयोजन वैसा ही रखा गया, जिस वजह से नायर को बाहर रखना पड़ा। हालांकि, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर करुण नायर की एक पोस्ट ने कोच के इन दावों से अलग संकेत दिए, जिससे टीम चयन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे। साउथ जोन की इस टीम में करुण नायर जैसे अनुभवी और टेस्ट क्रिकेट में ट्रिपल सेंचुरी लगाने वाले बल्लेबाज को स्क्वाड में तो रखा गया था, लेकिन उन्हें अंतिम ग्यारह में मौका नहीं दिया गया। सलामी बल्लेबाजों के चयन और रणनीतिक फैसले इस खिताबी मुकाबले में साउथ जोन की टीम सिर्फ एक विशेषज्ञ ओपनर एन जगदीशन के साथ मैदान पर उतरी है। इस अनोखे फैसले का बचाव करते हुए साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा ने स्पष्ट किया कि टीम के उप-कप्तान रिकी भुई पारी की शुरुआत कर सकते हैं। उन्होंने बेंगलुरु में खेले गए सेमीफाइनल मैच में भी ओपनिंग की थी, जहां उन्होंने 5 और 42 रन बनाए थे। हालांकि, यह गौर करने वाली बात है कि रिकी भुई ने अपने अब तक के 90 फर्स्ट-क्लास मैचों में से केवल तीन बार ही ओपनिंग की है। इसके अलावा, यह भी जानकारी सामने आई है कि दलीप ट्रॉफी की इन टीमों का चयन राष्ट्रीय चयनकर्ताओं द्वारा नहीं किया गया था, बल्कि संबंधित जोन के प्रत्येक राज्य संघ के चयनकर्ताओं ने मिलकर इन्हें चुना था। इसका आप पर असर दलीप ट्रॉफी और घरेलू क्रिकेट के इस विवाद का असर सीधे तौर पर खिलाड़ियों के चयन और क्षेत्रीय संघों की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। • क्रिकेट फैंस के लिए: चयन प्रक्रिया और रणनीतिक फैसलों को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, जिससे खेल प्रेमियों को टीम की अंदरूनी तैयारियों और प्रबंधन की कार्यशैली का पता चलता है। • घरेलू खिलाड़ियों के लिए: यह घटना दिखाती है कि किस तरह बेहतरीन फॉर्म में होने के बावजूद खिलाड़ियों को अंतिम ग्यारह से बाहर बैठना पड़ सकता है, जिससे उन्हें वैकल्पिक टूर्नामेंटों में अपने प्रदर्शन से जवाब देना होता है। ऐसा क्यों हुआ दलीप ट्रॉफी फाइनल के दौरान उपजे इस विवाद के पीछे रणनीतिक चयन और खिलाड़ियों के बीच का मुकाबला मुख्य कारण रहा है। • टीम संयोजन की रणनीति: साउथ जोन प्रबंधन ने विरोधी टीमों के पास मौजूद बाएं हाथ के स्पिनरों से निपटने के लिए मध्य क्रम में बाएं हाथ के बल्लेबाज को शामिल करने की योजना बनाई थी। • खिलाड़ियों की वापसी: देवदत्त पडिक्कल की वापसी और पहले मैच खेल चुके युवा खिलाड़ियों को प्राथमिकता दिए जाने के कारण अनुभवी करुण नायर को अंतिम ग्यारह से बाहर बैठना पड़ा। • व्यक्तिगत प्रतिक्रिया: प्लेइंग इलेवन से लगातार बाहर रहने के बाद खिलाड़ी ने टीम कैंप छोड़ने का निर्णय लिया और घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन कर अपना पक्ष रखा। सवाल-जवाब 1. करुण नायर ने साउथ जोन की टीम क्यों छोड़ी? दलीप ट्रॉफी फाइनल की प्लेइंग इलेवन में जगह न मिलने के कारण करुण नायर ने टीम का साथ छोड़ दिया था। 2. टीम छोड़ने के बाद करुण नायर ने कहां मैच खेला? उन्होंने बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में छत्तीसगढ़ के खिलाफ केएससीए सेक्रेटरी इलेवन के लिए मैच खेला। 3. टीम छोड़ने के बाद करुण नायर ने क्या प्रदर्शन किया? उन्होंने छत्तीसगढ़ के खिलाफ शानदार शतक जड़कर अपनी शानदार फॉर्म का परिचय दिया। 4. साउथ जोन के कोच ने उनके जाने पर क्या कारण बताया? कोच विक्रम वर्मा ने इसे निजी कारण बताया और कहा कि उन्होंने ईमेल के जरिए अनुमति ली थी। 5. दलीप ट्रॉफी की टीमों का चयन किसने किया था? दलीप ट्रॉफी की टीमों का चयन राष्ट्रीय चयनकर्ताओं ने नहीं बल्कि संबंधित जोन के प्रत्येक राज्य संघ के चयनकर्ताओं ने किया था। https://trendkia.com/cricket/dalipa-trophi-phainala-ke-bicha-karun-nair-ka-vivada-south-zone-ka-satha-chhodakara-bengaluru-laute-ballebaja-29891 TrendKia — Har trend, sabse pehle.