डरबन टेस्ट में निक मैडिसन बिना खाता खोले लौटे पवेलियन, 33 गेंदों तक शून्य पर अटके रहे साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई ओपनर निक मैडिसन 33 गेंदें खेलने के बावजूद बिना कोई रन बनाए आउट हो गए। इस अजीबोगरीब पारी के साथ वह 26 साल पुराने एक अनचाहे रिकॉर्ड को तोड़ने के बेहद करीब पहुंच गए थे। साउथ अफ्रीका के दौरे पर गई ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम ने वनडे श्रृंखला समाप्त होने के बाद टेस्ट प्रारूप का आगाज कर दिया है। डरबन के मैदान पर शुरू हुए पहले टेस्ट मुकाबले के पहले ही दिन एक बेहद अजीबोगरीब वाकया देखने को मिला। टॉस के बाद पहले बल्लेबाजी करने मैदान में उतरी मेहमान कंगारू टीम की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही, जहां उनके सलामी बल्लेबाज क्रीज पर लंबा समय बिताने के बावजूद स्कोरबोर्ड पर अपना खाता तक नहीं खोल सके। 33 गेंदें खेलने के बाद भी शून्य पर सिमटी निक मैडिसन की पारी मुकाबले के पहले दिन ऑस्ट्रेलियाई पारी की शुरुआत करने निक मैडिसन और ट्रेविस हेड की जोड़ी मैदान पर उतरी। साउथ अफ्रीकी गेंदबाजों के सामने निक मैडिसन क्रीज पर डटे रहने का संघर्ष करते दिखे। उन्होंने एक के बाद एक कुल 33 गेंदों का सामना किया, लेकिन उनके बल्ले से एक भी रन नहीं निकल सका। आखिरकार बिना कोई रन बनाए शून्य के स्कोर पर ही वह आउट होकर पवेलियन लौट गए। शीर्ष क्रम अथवा मध्य क्रम में पहले से सातवें नंबर तक बल्लेबाजी करने वाले विशेषज्ञ बल्लेबाजों की बात करें, तो टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में लंबे अरसे बाद किसी बल्लेबाज के साथ ऐसा देखने को मिला है कि इतनी ज्यादा गेंदें खेलने के बाद भी वह बिना खाता खोले आउट हो गया हो। ट्रेवर ग्रिपर का 26 साल पुराना अनचाहा रिकॉर्ड टूटने से बचा अगर निक मैडिसन थोड़ी देर और क्रीज पर बिना रन बनाए टिके रहते, तो टेस्ट क्रिकेट में एक नया अनचाहा कीर्तिमान स्थापित हो जाता। विशेषज्ञ बल्लेबाजों में सबसे ज्यादा गेंदें खेलकर शून्य पर आउट होने का रिकॉर्ड जिम्बाब्वे के ट्रेवर ग्रिपर के नाम दर्ज है। साल 2000 में ट्रेवर ग्रिपर ने 36 गेंदों का सामना किया था और बिना कोई रन बनाए आउट हुए थे। टेस्ट क्रिकेट में निचले क्रम के कई पुछल्ले बल्लेबाजों ने भी बिना रन बनाए ढेरों गेंदें खेली हैं, लेकिन नंबर एक से सात तक के मुख्य बल्लेबाजों की सूची में 26 साल पुराना यह रिकॉर्ड आज भी पहले स्थान पर बना हुआ है, जिससे मैडिसन महज कुछ गेंदों की दूरी पर रह गए। शुरुआती झटकों से बैकफुट पर आई ऑस्ट्रेलियाई टीम मैडिसन के पवेलियन लौटने के बाद ऑस्ट्रेलियाई पारी संभल नहीं सकी और शीर्ष क्रम बुरी तरह बिखर गया। उनके जोड़ीदार ट्रेविस हेड भी ज्यादा देर क्रीज पर नहीं टिक सके और 19 गेंदों में केवल 9 रन बनाकर चलते बने। इसके बाद तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने पहुंचे मार्नस लाबुशेन ने पारी संभालने की कोशिश जरूर की, लेकिन वह भी 58 गेंदों का सामना करके केवल 37 रन ही बना सके और आउट हो गए। पहले दिन ही शीर्ष बल्लेबाजों के सस्ते में निपटने से ऑस्ट्रेलियाई टीम बैकफुट पर दिखाई दी, जबकि मेजबान साउथ अफ्रीकी गेंदबाजों ने शुरुआत से ही अपनी पकड़ मजबूत रखी। इसका आप पर असर क्रिकेट प्रेमियों और टेस्ट मैच फॉलो करने वाले प्रशंसकों के लिए यह पारी खेल की रणनीतिक और ऐतिहासिक बारीकियों को दर्शाती है। • क्रिकेट प्रशंसकों के लिए: टेस्ट क्रिकेट में ओपनिंग बल्लेबाजों के धैर्य और रन गति के संतुलन को लेकर चर्चा बढ़ जाती है। आधुनिक दौर में 33 गेंदों पर शून्य पर आउट होना दिखाता है कि शुरुआती परिस्थितियां बल्लेबाजों के लिए कितनी कठिन थीं। • ऑस्ट्रेलियाई टीम के समर्थकों के लिए: शुरुआती विकेट सस्ते में गंवाने से मध्य क्रम के बल्लेबाजों पर दबाव बढ़ जाता है। पहली पारी का बड़ा स्कोर खड़ा करने के लिए अब निचले क्रम को बड़ी जिम्मेदारी उठानी होगी। • साउथ अफ्रीकी गेंदबाजी के लिहाज से: घरेलू परिस्थितियों में नई गेंद से कसी हुई गेंदबाजी का बड़ा इनाम मेजबान टीम को मिला है। लगातार डॉट गेंदें फेंककर बल्लेबाजों को दबाव में लाने की रणनीति पूरी तरह कामयाब रही। • सांख्यिकी प्रेमियों के लिए: बिना रन बनाए सबसे ज्यादा गेंदें खेलने का अनचाहा रिकॉर्ड टूटने से बच गया है। साल 2000 का ट्रेवर ग्रिपर का रिकॉर्ड अब भी रिकॉर्ड बुक में सुरक्षित है। ऐसा क्यों हुआ यह घटना मैच की शुरुआती परिस्थितियों और साउथ अफ्रीकी गेंदबाजों की सटीक लाइन-लेंथ की वजह से घटी। डरबन में पहले सत्र की नई गेंद की स्विंग और उछाल ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का कोई मौका नहीं दिया। • कसी हुई गेंदबाजी: मेजबान टीम के तेज गेंदबाजों ने शुरुआती ओवरों में बेहद अनुशासित गेंदबाजी की और कोई भी ढीली गेंद नहीं फेंकी। इस निरंतर दबाव के चलते बल्लेबाज सिंगल चुराने या बाउंड्री निकालने में पूरी तरह असमर्थ रहे। • अत्यधिक रक्षात्मक रुख: निक मैडिसन ने क्रीज पर जमने के लिए बेहद रक्षात्मक रणनीति अपनाई और किसी भी जोखिम से बचने की कोशिश की। रन न बनने से डॉट गेंदों की संख्या लगातार बढ़ती गई और दबाव अंततः विकेट के रूप में सामने आया। • शीर्ष क्रम का बिखराव: पहले विकेट के दबाव का असर बाकी बल्लेबाजों पर भी दिखा, जहां ट्रेविस हेड 9 और मार्नस लाबुशेन 37 रन बनाकर चलते बने। एक छोर से रन न बनना दूसरे बल्लेबाजों के शॉट चयन को भी प्रभावित कर गया। सवाल-जवाब 1. निक मैडिसन पहले टेस्ट में कितने रन बनाकर आउट हुए? निक मैडिसन बिना कोई रन बनाए शून्य पर आउट होकर पवेलियन लौटे। 2. मैडिसन ने शून्य पर आउट होने से पहले कुल कितनी गेंदों का सामना किया? उन्होंने अपना खाता खोले बिना कुल 33 गेंदें खेलीं। 3. विशेषज्ञ बल्लेबाजों में बिना रन बनाए सबसे ज्यादा गेंदें खेलने का रिकॉर्ड किसके नाम है? यह रिकॉर्ड जिम्बाब्वे के ट्रेवर ग्रिपर के नाम है, जिन्होंने साल 2000 में 36 गेंदें खेलकर शून्य रन बनाए थे। 4. ट्रेविस हेड और मार्नस लाबुशेन ने कितने रन बनाए? ट्रेविस हेड 19 गेंदों में 9 रन बनाकर आउट हुए, जबकि मार्नस लाबुशेन ने 58 गेंदों में 37 रन बनाए। https://trendkia.com/cricket/darabana-testa-men-nic-maddinson-bina-khata-khole-laute-paveliyana-33-gendon-taka-shunya-para-atake-rahe-45382 TrendKia — Har trend, sabse pehle.