# डार्विन में बांग्लादेश के खिलाफ मिली हार से पैट कमिंस के करियर पर लगा दाग, बना शर्मनाक रिकॉर्ड

> डार्विन में बांग्लादेश के खिलाफ नौ विकेट से मिली करारी हार के बाद पैट कमिंस के नाम एक अनचाहा रिकॉर्ड जुड़ गया है। वह ग्रेग चैपल के बाद दूसरे ऐसे ऑस्ट्रेलियाई कप्तान बन गए हैं जिन्हें अपने घर में दो अलग-अलग एशियाई टीमों के हाथों हार का सामना करना पड़ा है।

**Type:** article · **Category:** क्रिकेट · **Published:** 2026-08-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/cricket/darvina-men-bangladesh-ke-khilapha-mili-hara-se-pat-cummins-ke-kariyara-para-laga-daga-bana-sharmanaka-rikorda-17778 · **Language:** Hindi
**Tags:** पैट कमिंस, बांग्लादेश क्रिकेट, डार्विन टेस्ट, ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट, हसन महमूद, क्रिकेट रिकॉर्ड

डार्विन के मैदान पर बांग्लादेश के खिलाफ ऐतिहासिक शिकस्त झेलने के बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम और कप्तान पैट कमिंस की चारों तरफ आलोचना हो रही है। घरेलू सरजमीं पर टेस्ट इतिहास में यह पहला मौका है जब मेहमान बांग्लादेशी टीम ने ऑस्ट्रेलिया को मात दी है। इस मुकाबले में नौ विकेट की करारी हार के साथ ही कप्तान पैट कमिंस के नाम एक ऐसा शर्मनाक रिकॉर्ड दर्ज हो गया है जो चार दशक से अधिक समय में किसी अन्य कंगारू कप्तान के साथ नहीं हुआ था।

## बना चार दशकों पुराना शर्मनाक रिकॉर्ड
इस मुकाबले के बाद पैट कमिंस इतिहास के पन्नों में उस फेहरिस्त में शामिल हो गए हैं जिसे कोई भी कप्तान याद नहीं रखना चाहेगा। पैट कमिंस साल 1977 के बाद पहले ऐसे ऑस्ट्रेलियाई कप्तान बन गए हैं जिन्हें दो अलग-अलग एशियाई देशों ने उनकी अपनी ही सरजमीं पर पराजित किया है। इससे पहले दिग्गज ग्रेग चैपल अपने कार्यकाल के दौरान ऐसी स्थिति का सामना करने वाले इकलौते कप्तान थे।

ग्रेग चैपल ने जनवरी 1977 में सिडनी के मैदान पर पाकिस्तान के खिलाफ अपना पहला घरेलू टेस्ट गंवाया था और इसके बाद दिसंबर 1981 में मेलबर्न में भारतीय टीम के खिलाफ भी उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। अब इस फेहरिस्त में पैट कमिंस का नाम भी जुड़ गया है, जिनकी कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया को नवंबर 2024 में पर्थ के मैदान पर भारत के खिलाफ हार मिली थी और अब अगस्त 2026 में डार्विन में बांग्लादेश ने उन्हें शिकस्त दे दी है।

## मैच का रोमांच और बांग्लादेश का शानदार प्रदर्शन
मुकाबले की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी के आधार पर 228 रनों की बढ़त गंवा दी थी, जिसके चलते बांग्लादेश के सामने चौथी पारी में जीत हासिल करने के लिए महज 57 रनों का बेहद आसान लक्ष्य आया था। मेहमान टीम ने महज 14.2 ओवरों में केवल एक विकेट गंवाकर इस लक्ष्य को आसानी से हासिल कर लिया और ऑस्ट्रेलिया में अपनी पहली टेस्ट जीत दर्ज कर ली। बांग्लादेशी टीम को ऑस्ट्रलियाई जमीन पर यह ऐतिहासिक सफलता पाने के लिए केवल तीन टेस्ट मैचों की दरकार पड़ी। इसके साथ ही वे ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर सबसे कम मैचों में टेस्ट मुकाबला जीतने वाली एशियाई टीम और कुल मिलाकर दूसरी सबसे तेज टीम बन गई है।

## शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी
इस ऐतिहासिक जीत में तेज गेंदबाज हसन महमूद ने अपनी गेंदबाजी से मुख्य भूमिका निभाई और कुल नौ विकेट अपने नाम किए, जिसके लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच के खिताब से नवाजा गया। हसन महमूद ने ऑस्ट्रेलियाई पारी के दौरान पहली पारी में छह और दूसरी पारी में तीन महत्वपूर्ण विकेट झटके। उनके अलावा मेहदी हसन मिराज ने भी ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए पहली पारी में शानदार अर्धशतक लगाया और फिर दूसरी पारी में कुल पांच बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई।

बल्लेबाजी की बात करें तो बांग्लादेश के कप्तान नजमुल हुसैन शंटो ने पहली पारी के दौरान 84 रनों की बहुमूल्य पारी खेली, जबकि सलामी बल्लेबाज तंजीद हसन तमीम ने 197 गेंदों का सामना करते हुए 101 रनों की बेहतरीन शतकीय पारी खेली। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलियाई खेमे से जोश हेजलवुड ने पहली पारी में छह विकेट चटकाए और कैमरन ग्रीन ने दूसरी पारी में 104 रनों की शानदार शतकीय पारी खेली, लेकिन बाकी खिलाड़ी टीम को जीत दिलाने में असफल रहे।

## सवाल-जवाब

### 1. डार्विन टेस्ट में बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को कितने विकेट से हराया?
बांग्लादेश ने डार्विन टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया को 9 विकेट से हराया।

### 2. पैट कमिंस के नाम कौन सा शर्मनाक रिकॉर्ड दर्ज हुआ है?
पैट कमिंस साल 1977 के बाद पहले ऐसे ऑस्ट्रेलियाई कप्तान बन गए हैं जिन्हें अपने घर में दो अलग-अलग एशियाई देशों के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा है।

### 3. डार्विन टेस्ट में मैन ऑफ द मैच किसे चुना गया?
तेज गेंदबाज हसन महमूद को मैच में कुल नौ विकेट लेने के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

### 4. बांग्लादेश को ऑस्ट्रेलिया में अपनी पहली टेस्ट जीत दर्ज करने में कितने टेस्ट लगे?
बांग्लादेश को ऑस्ट्रेलियाई जमीन पर पहली टेस्ट जीत दर्ज करने के लिए केवल तीन टेस्ट मैचों की आवश्यकता पड़ी।

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