धोनी-गिलक्रिस्ट भी छू नहीं पाए यह मुकाम, जानें टेस्ट क्रिकेट के एक साल में सबसे ज्यादा शिकार करने वाला कौन है वह विकेटकीपर? टेस्ट क्रिकेट में एक कैलेंडर वर्ष में सबसे अधिक बल्लेबाजों को आउट करने का रिकॉर्ड किसी भी भारतीय या ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज के नाम नहीं, बल्कि इंग्लैंड के खिलाड़ी के पास है। टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में जब भी विकेट के पीछे से मैच का रुख बदलने वाले महान खिलाड़ियों की बात होती है, तो दिमाग में एमएस धोनी, एडम गिलक्रिस्ट और मार्क बाउचर जैसे दिग्गज विकेटकीपरों के नाम सबसे पहले आते हैं। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि टेस्ट क्रिकेट में एक कैलेंडर वर्ष में सबसे ज्यादा बल्लेबाजों को आउट करने का रिकॉर्ड इनमें से किसी भी महान खिलाड़ी के नाम दर्ज नहीं है। साल 2016 में इंग्लैंड के एक स्टार विकेटकीपर ने विकेट के पीछे ऐसा अद्भुत कारनामा किया था, जिसे लगभग एक दशक बीतने के बाद भी आज तक कोई खिलाड़ी नहीं तोड़ पाया है। जॉनी बेयरस्टो का ऐतिहासिक साल 2016 इंग्लैंड के विकेटकीपर जॉनी बेयरस्टो ने साल 2016 में विकेट के पीछे कमाल का प्रदर्शन करते हुए कुल 70 शिकार किए थे। उन्होंने उस वर्ष खेले गए 17 टेस्ट मैचों की श्रृंखला में शानदार फुर्ती दिखाते हुए विकेट के पीछे 66 कैच लपके और 4 स्टंपिंग की थीं। बेयरस्टो का यह बेमिसाल आंकड़ा आज भी किसी विकेटकीपर द्वारा एक कैलेंडर वर्ष में किया गया सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जाता है। इस बेहतरीन रिकॉर्ड के बनने के बाद से दुनिया भर में कई बेहतरीन विकेटकीपर आए और गए, लेकिन अभी तक कोई भी विकेटकीपर 70 के इस जादुई आंकड़े को छूने में भी कामयाब नहीं हो पाया है। मार्क बाउचर और ऑस्ट्रेलियाई दिग्गजों की चुनौती अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दक्षिण अफ्रीका का प्रतिनिधित्व करने वाले और सबसे सफल विकेटकीपरों में गिने जाने वाले मार्क बाउचर इस सूची में दूसरे पायदान पर काबिज हैं। उन्होंने साल 1998 में महज 13 टेस्ट मैचों में विकेट के पीछे 67 शिकार किए थे, जिसमें 65 कैच और 2 स्टंपिंग शामिल थीं। हालांकि बेयरस्टो ने साल 2016 में जो कमाल दिखाया, उसके सामने बाउचर का यह बेहतरीन प्रदर्शन भी दूसरे नंबर पर खिसक गया। इस सूची में ऑस्ट्रेलियाई विकेटकीपरों का भी दबदबा रहा है। ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज इयान हीली ने साल 1993 में खेले गए 16 टेस्ट मैचों में विकेट के पीछे कुल 67 शिकार किए थे। इस दौरान उन्होंने 58 कैच लपके थे और 9 स्टंपिंग की थीं। हीली की विकेटकीपिंग का जादू साल 1997 में भी देखने को मिला था, जब उन्होंने एक कैलेंडर वर्ष में 59 बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाया और इस सूची में फिर से अपनी जगह पक्की की। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के ही एक और महान खिलाड़ी एडम गिलक्रिस्ट ने साल 2004 में कमाल की विकेटकीपिंग का प्रदर्शन किया था। उन्होंने उस वर्ष सिर्फ 14 टेस्ट मैचों में विरोधी टीमों के 66 बल्लेबाजों को पवेलियन भेजने का काम किया था। उनके इस शानदार प्रदर्शन में 58 कैच और 8 स्टंपिंग शामिल थीं। भारतीय विकेटकीपिंग के शिखर पर महेंद्र सिंह धोनी अगर इस वैश्विक सूची में भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक महेंद्र सिंह धोनी के स्थान की बात की जाए, तो वह काफी नीचे यानी 18वें पायदान पर नजर आते हैं। एमएस धोनी ने साल 2011 में विकेट के पीछे कुल 50 शिकार किए थे, जिसमें उन्होंने 47 कैच पकड़े थे और 3 स्टंपिंग की थीं। भले ही वैश्विक स्तर पर धोनी इस सूची में पीछे नजर आते हों, लेकिन एक कैलेंडर वर्ष में टेस्ट क्रिकेट के दौरान सबसे अधिक शिकार करने का भारतीय रिकॉर्ड आज भी उन्हीं के नाम दर्ज है। इसका आप पर असर क्रिकेट प्रेमियों और खेल के आंकड़ों में रुचि रखने वालों के लिए, यह ऐतिहासिक विश्लेषण आधुनिक विकेटकीपिंग की बारीकियों और टेस्ट क्रिकेट में दुर्लभ रिकॉर्ड्स की अहमियत को बेहतर तरीके से समझने में मदद करता है। • ऐतिहासिक संदर्भ की समझ: अलग-अलग समय पर खेले गए मैचों की संख्या की तुलना करने से रिकॉर्ड्स पर पड़ने वाले प्रभाव का पता चलता है। इससे फैंस समझ सकते हैं कि एक साल में मिलने वाले मौकों के आधार पर किसी खिलाड़ी के प्रदर्शन का सही आकलन कैसे किया जाए। • युवा विकेटकीपरों के लिए प्रेरणा: उभरते हुए खिलाड़ी फिटनेस और निरंतरता के स्तर को समझने के लिए इन आंकड़ों को एक मानक के रूप में देख सकते हैं। इससे पता चलता है कि लगातार मैचों में उच्च शारीरिक स्तर बनाए रखना ही बड़ी सफलता की कुंजी है। • विकेटकीपिंग के योगदान का सम्मान: केवल बल्लेबाजी के बजाय विकेट के पीछे की फुर्ती पर ध्यान केंद्रित करने से इस हुनर की अहमियत बढ़ती है। इसका मतलब है कि विकेटकीपरों को सिर्फ उनके रनों के आधार पर नहीं बल्कि उनकी मुख्य जिम्मेदारी के आधार पर भी आंका जाएगा। • क्रिकेट इतिहास पर स्वस्थ चर्चा: धोनी, गिलक्रिस्ट, बाउचर और बेयरस्टो के आंकड़ों की तुलना खेल प्रशंसकों के बीच रचनात्मक बहस को बढ़ावा देती है। यह दर्शकों को केवल लोकप्रियता से हटकर ठोस आंकड़ों के आधार पर क्रिकेट के इतिहास का विश्लेषण करने का मौका देती है। ऐसा क्यों हुआ यह बेमिसाल रिकॉर्ड साल 2016 में इंग्लैंड के व्यस्त टेस्ट मैचों के शेड्यूल और उस दौरान विकेट के पीछे जॉनी बेयरस्टो के बेहतरीन फॉर्म के तालमेल के कारण संभव हो पाया था। • मैचों के अधिक अवसर: इंग्लैंड ने साल 2016 में कुल 17 टेस्ट मैच खेले थे, जो काफी बड़ी संख्या है। इसने जॉनी बेयरस्टो को अन्य पूर्व दिग्गजों की तुलना में विकेट के पीछे शिकार करने के ज्यादा मौके प्रदान किए। • पूर्व दिग्गजों को मिले कम मैच: मार्क बाउचर और एडम गिलक्रिस्ट जैसे विकेटकीपरों ने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वाले वर्षों में कम टेस्ट मैच खेले थे। उदाहरण के लिए, बाउचर ने 1998 में केवल 13 टेस्ट मैच खेले थे, जिससे शानदार प्रदर्शन के बावजूद उनके कुल शिकार की संख्या सीमित रह गई। • गेंदबाजों का लगातार सहयोग: इंग्लैंड के गेंदबाजों ने लगातार ऐसी परिस्थितियां बनाईं जहां बल्लेबाजों के बल्ले का बाहरी किनारा लगा। बेयरस्टो ने विकेट के पीछे इन अवसरों को बिना किसी गलती के लपका जिससे यह ऐतिहासिक आंकड़ा तैयार हुआ। सवाल-जवाब 1. टेस्ट क्रिकेट में एक साल में सबसे ज्यादा शिकार करने का रिकॉर्ड किस विकेटकीपर के नाम है? यह रिकॉर्ड इंग्लैंड के जॉनी बेयरस्टो के नाम है, जिन्होंने साल 2016 में विकेट के पीछे कुल 70 शिकार किए थे। 2. जॉनी बेयरस्टो ने 2016 में कुल कितने कैच और स्टंपिंग की थीं? बेयरस्टो ने 2016 में खेले गए 17 टेस्ट मैचों में कुल 66 कैच लपके थे और 4 बल्लेबाजों को स्टंप आउट किया था। 3. इस विशिष्ट सूची में दूसरे स्थान पर कौन सा विकेटकीपर मौजूद है? दक्षिण अफ्रीका के मार्क बाउचर इस सूची में दूसरे स्थान पर हैं, जिन्होंने साल 1998 में खेले गए 13 टेस्ट मैचों में विकेट के पीछे कुल 67 शिकार किए थे। 4. एक कैलेंडर वर्ष में सर्वाधिक टेस्ट शिकार करने का भारतीय रिकॉर्ड किसके नाम है? यह रिकॉर्ड महेंद्र सिंह धोनी के नाम है, जिन्होंने साल 2011 में कुल 50 शिकार (47 कैच और 3 स्टंपिंग) किए थे। 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