दोनों हाथों से गेंदबाजी कर थरेंदु रत्नायके ने खींचा ध्यान, भारत के खिलाफ मैच में दिखाया दुर्लभ हुनर एशियन गेम्स में श्रीलंका के स्पिनर थरेंदु रत्नायके ने दाएं और बाएं दोनों हाथों से गेंदबाजी कर सबको चकित कर दिया। संजू सैमसन और शिवम दुबे के विकेट लेकर उन्होंने अपनी खास एम्बिडेक्स्ट्रस कला साबित की। क्रिकेट में घूमती पिचों पर स्पिन गेंदबाजों का बल्लेबाजों को चकमा देना आम बात मानी जाती है, लेकिन जब कोई गेंदबाज एक ही मुकाबले में दाएं और बाएं दोनों हाथों से गेंद फेंकने लगे, तो खेल का रोमांच और बढ़ जाता है। करोगी स्पोर्ट्स पार्क के मैदान पर श्रीलंकाई टीम के मैच के दौरान दर्शकों को कुछ ऐसा ही असाधारण नजारा देखने को मिला। मुकाबले में एक ही गेंदबाज ने पहले बाएं हाथ से राउंड द विकेट आकर गेंद डाली और फिर कुछ समय बाद दाएं हाथ से राउंड द विकेट आकर गेंद फेंकी, और दोनों ही तरीकों से बल्लेबाजों को पवेलियन भेजने में सफलता पाई। एम्बिडेक्स्ट्रस स्पिन का अनोखा करतब क्रिकेट के नियमों के तहत किसी बल्लेबाज को स्विच हिट लगाने से रोकने की कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन एक गेंदबाज यदि अपना हाथ बदलकर गेंदबाजी करना चाहता है, तो उसे गेंद फेंकने से पहले अंपायर को इसकी औपचारिक जानकारी देनी अनिवार्य होती है। एशियन गेम्स के मंच पर श्रीलंका के थरेंदु रत्नायके ने इसी नियम के तहत अपनी दुर्लभ प्रतिभा का परिचय दिया। उन्होंने भारतीय बल्लेबाजों के सामने दोनों हाथों से गेंदबाजी की और संजू सैमसन व शिवम दुबे जैसे प्रमुख खिलाड़ियों को आउट कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनकी इस अनूठी गेंदबाजी शैली ने मैदान में मौजूद बल्लेबाजों के साथ-साथ खेल समीक्षकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। मुथैया मुरलीधरन, रंगना हेराथ और अजंता मेंडिस जैसे विश्व स्तरीय स्पिनर देने वाले श्रीलंका से आने वाले इस युवा गेंदबाज का पूरा नाम थरेंदु रत्नायके है। उनकी गेंदबाजी की सबसे प्रमुख विशेषता उनकी दोहरी कला है। वह अपने दाएं हाथ से ऑफ स्पिन कराने की क्षमता रखते हैं, जबकि बाएं हाथ से गेंद फेंकते समय वह शुद्ध लेफ्ट आर्म ऑर्थोडॉक्स स्पिन गेंदबाजी करते हैं। क्रिकेट की तकनीकी शब्दावली में इस क्षमता को एम्बिडेक्स्ट्रस बॉलिंग कहा जाता है, जिसका अर्थ है दोनों हाथों से समान नियंत्रण के साथ गेंदबाजी करने की योग्यता। भारत के खिलाफ सेमीफाइनल में दो अहम सफलताएं एशियन गेम्स के सेमीफाइनल में जब श्रीलंका का मुकाबला भारत से हुआ, तब थरेंदु रत्नायके ने अपनी इस कला का बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने संजू सैमसन को एक शानदार आर्म बॉल पर बोल्ड कर दिया, जिसे खेलना किसी भी बल्लेबाज के लिए बेहद कठिन माना जाता है। इसके बाद उन्होंने शिवम दुबे को भी अपना शिकार बनाकर पवेलियन भेज दिया। इस बड़े मैच में उन्होंने कुल 4 ओवर गेंदबाजी की, जिसमें 32 रन खर्च करते हुए 2 महत्वपूर्ण विकेट अपने नाम किए। जिस आर्म बॉल से उन्होंने संजू सैमसन का विकेट निकाला, उस गेंद की सटीकता और गति ने क्रिकेट पंडितों को खासा प्रभावित किया। संजय मांजरेकर और अजय जडेजा ने आंकी अहमियत थरेंदु रत्नायके के खेल की चर्चा केवल उनके खाते में जुड़े दो विकेटों की वजह से नहीं हो रही है, बल्कि उस तकनीकी क्षमता की वजह से हो रही है जो उन्हें आधुनिक क्रिकेट में अन्य गेंदबाजों से पूरी तरह अलग खड़ा करती है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर और अजय जडेजा ने भी रत्नायके के इस अनूठे हुनर की सराहना की है। उनका आकलन है कि मौजूदा दौर के फटाफट क्रिकेट में इस प्रकार के दोहरे हुनर वाले गेंदबाजों की अहमियत लगातार बढ़ सकती है और आने वाले दिनों में कई टीमें अपनी रणनीति के तहत ऐसे खिलाड़ियों को शामिल करना चाहेंगी। टी20 फॉर्मेट में बल्लेबाज हर गेंदबाज के खिलाफ पहले से रणनीति बनाकर क्रीज पर उतरते हैं, लेकिन जब कोई गेंदबाज एक ही ओवर में हाथ और एंगल दोनों बदल दे, तो बल्लेबाज की पूरी तैयारी धरी रह जाती है। बल्लेबाजों के लिए क्यों बन सकती है बड़ी पहेली? आमतौर पर कोई भी बल्लेबाज विपक्षी गेंदबाज के रिलीज पॉइंट, हाथ के एक्शन और गेंद के कोण को देखकर अपने शॉट का चयन करता है। रत्नायके के सामने बल्लेबाजों को हर गेंद पर अपने रुख में बदलाव करना पड़ता है। दाएं हाथ से गेंदबाजी करते वक्त वह गेंद को दाएं हाथ के बल्लेबाज के लिए अंदर लाते हैं यानी ऑफ स्पिन कराते हैं, जबकि बाएं हाथ से गेंदबाजी करते वक्त वह गेंद को विपरीत दिशा में टर्न कराते हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि बल्लेबाज को केवल गेंद की गति और पिच से मिलने वाले टर्न को ही नहीं भांपना है, बल्कि गेंदबाज किस हाथ से गेंद फेंक रहा है, इस पर भी लगातार पैनी नजर रखनी होगी। टी20 जैसे तेज तर्रार प्रारूप में जहां मैच का परिणाम महज एक या दो गेंदों के अंतर से तय हो जाता है, वहां दोनों हाथों से गेंदबाजी करने का यह हुनर किसी भी टीम के लिए बेहद उपयोगी हथियार साबित हो सकता है। श्रीलंका को थरेंदु रत्नायके के रूप में एक ऐसा विलक्षण गेंदबाज मिला है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोधी टीमों के लिए रणनीतिक सिरदर्द बन सकता है। आने वाले समय में उनके सामने खुद को लगातार साबित करने की चुनौती जरूर होगी, लेकिन एशियन गेम्स में उन्होंने यह दिखा दिया है कि दोनों हाथों से गेंदबाजी करना सिर्फ दिखाने का करतब नहीं, बल्कि मैच जिताने वाली रणनीति भी है। इसका आप पर असर क्रिकेट प्रेमियों और युवा खिलाड़ियों के लिए दोनों हाथों से गेंदबाजी करने की यह तकनीक खेल में नए रणनीतिक आयाम जोड़ती है। • क्रिकेट प्रेमियों के लिए: दर्शकों को मैचों में पारंपरिक गेंदबाजी के बजाय अधिक विविधता और रोमांच देखने को मिलेगा। गेंदबाज के हाथ बदलने पर मैच का रुख अचानक पलटने की संभावना बढ़ जाती है। • युवा खिलाड़ियों के लिए: क्रिकेट अकादमियों में अभ्यास करने वाले युवा गेंदबाजों को दोनों हाथों से कौशल विकसित करने की नई प्रेरणा मिलेगी। आधुनिक टी20 प्रारूप में इस तरह के दुर्लभ हुनर वाले खिलाड़ियों को फ्रेंचाइजी टीमों में प्राथमिकता मिल सकती है। • बल्लेबाजों की तैयारी पर: बल्लेबाजों को अब केवल दाएं या बाएं हाथ के गेंदबाजों के वीडियो विश्लेषण तक सीमित नहीं रहना होगा। उन्हें एक ही गेंदबाज के दोनों कोणों को तुरंत भांपने के लिए अभ्यास सत्रों में अतिरिक्त तैयारी करनी होगी। • मैच के नियमों के प्रति जागरूकता: आम दर्शकों को खेल के उस नियम की स्पष्ट जानकारी मिलती है जिसके तहत हाथ बदलने पर अंपायर को सूचित करना पड़ता है। इससे खेल के तकनीकी नियमों को समझने में मदद मिलती है। ऐसा क्यों हुआ एशियन गेम्स के मैच में थरेंदु रत्नायके की गेंदबाजी इसलिए केंद्र में आई क्योंकि उन्होंने दाएं हाथ से ऑफ स्पिन और बाएं हाथ से ऑर्थोडॉक्स स्पिन दोनों का सफल इस्तेमाल किया। भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ उनके इस दुर्लभ प्रयोग ने खेल के रणनीतिक परिदृश्य को बदल दिया। • प्राकृतिक दोहरी क्षमता: रत्नायके के पास दोनों हाथों से गेंद को नियंत्रित करने और सही टर्न कराने की स्वाभाविक एम्बिडेक्स्ट्रस काबिलियत मौजूद है। इसी तकनीकी मजबूती के बल पर वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों हाथों से प्रभावी गेंदें फेंक सके। • टी20 क्रिकेट की नई मांग: टी20 फॉर्मेट में बल्लेबाजों की आक्रामक योजनाओं को ध्वस्त करने के लिए नए एंगल और विविधता की सख्त जरूरत होती है। रत्नायके की गेंदबाजी बल्लेबाजों के पूर्व नियोजित शॉट्स को नाकाम करने का सटीक जरिया बनी। • सेमीफाइनल का बड़ा मंच: भारत के खिलाफ एशियन गेम्स के सेमीफाइनल में संजू सैमसन और शिवम दुबे जैसे स्थापित बल्लेबाजों के विकेट लेने से उनके हुनर को तत्काल वैश्विक पहचान मिली। दबाव भरे मैच में 4 ओवर में 32 रन देकर 2 विकेट निकालना उनके प्रभाव को साबित करता है। सवाल-जवाब 1. थरेंदु रत्नायके कौन हैं? थरेंदु रत्नायके श्रीलंका के स्पिन गेंदबाज हैं जो दाएं हाथ से ऑफ स्पिन और बाएं हाथ से ऑर्थोडॉक्स स्पिन दोनों हाथों से गेंदबाजी करने में सक्षम हैं। 2. एशियन गेम्स में रत्नायके ने किन भारतीय बल्लेबाजों को आउट किया? उन्होंने भारतीय टीम के प्रमुख बल्लेबाज संजू सैमसन को बोल्ड किया और शिवम दुबे को भी पवेलियन भेजा। 3. भारत के खिलाफ मैच में रत्नायके का गेंदबाजी आंकड़ा क्या रहा? रत्नायके ने अपने 4 ओवर के कोटे में 32 रन देकर 2 महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए। 4. क्रिकेट में हाथ बदलकर गेंदबाजी करने का नियम क्या है? गेंदबाज अगर अपना गेंदबाजी हाथ बदलना चाहता है, तो उसे गेंद फेंकने से पहले मैदानी अंपायर को इसकी जानकारी देना अनिवार्य है। 5. संजय मांजरेकर और अजय जडेजा ने उनकी गेंदबाजी के बारे में क्या कहा? उनका मानना है कि आधुनिक टी20 क्रिकेट में दोनों हाथों से गेंदबाजी करने वाले खिलाड़ियों की मांग बढ़ेगी और टीमें ऐसे गेंदबाजों को जोड़ना चाहेंगी। https://trendkia.com/cricket/donon-hathon-se-gendabaji-kara-tharindu-ratnayake-ne-khincha-dhyana-india-ke-khilapha-maicha-men-dikhaya-durlabha-hunara-41280 TrendKia — Har trend, sabse pehle.