# एक दिवसीय विश्व कप में दर्ज हुए पांच सबसे शर्मनाक स्कोर, जब ताश के पत्तों की तरह ढह गई थीं टीमें

> क्रिकेट विश्व कप के इतिहास में कई बार मजबूत और उभरती टीमों की बल्लेबाजी पूरी तरह बिखर गई। कनाडा के 36 रनों से लेकर वानखेड़े में श्रीलंका के 55 रनों पर सिमटने तक, जानिए टूर्नामेंट के पांच सबसे छोटे स्कोर।

**Type:** article · **Category:** क्रिकेट · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/cricket/eka-divasiya-vishva-kapa-men-darja-hue-pancha-sabase-sharmanaka-skora-jaba-tasha-ke-patton-ki-taraha-dhaha-gai-thin-timen-43886 · **Language:** Hindi
**Tags:** क्रिकेट विश्व कप, कनाडा क्रिकेट, श्रीलंका क्रिकेट, नामीबिया क्रिकेट, बांग्लादेश क्रिकेट, वनडे क्रिकेट, क्रिकेट रिकॉर्ड्स

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की सबसे बड़ी प्रतियोगिता यानी एक दिवसीय विश्व कप में हमेशा बड़े स्कोर और विस्फोटक बल्लेबाजी ही देखने को नहीं मिलती। खेल के इस सबसे बड़े मंच पर ऐसे भी अनगिनत मौके आए हैं जब अनुकूल परिस्थितियों और धारदार गेंदबाजी के सामने मजबूत बल्लेबाजी क्रम अचानक पूरी तरह बिखर गया। कई टीमों के नाम ऐसे अवांछित आंकड़े दर्ज हो चुके हैं जिन्हें क्रिकेट इतिहास में हमेशा एक बुरे दौर के तौर पर देखा जाता है। टूर्नामेंट के इतिहास में दर्ज पांच सबसे न्यूनतम योग ऐसे रहे हैं जिन्होंने दर्शकों के साथ-साथ विशेषज्ञों को भी हैरत में डाल दिया था।

## पार्ल में कनाडा का ऐतिहासिक पतन: 36 रन
विश्व कप इतिहास का सबसे कम स्कोर 19 फरवरी 2003 को दक्षिण अफ्रीका के पार्ल मैदान पर बना था। इस मुकाबले में कनाडा की टीम श्रीलंका के घातक गेंदबाजी आक्रमण का सामना करने मैदान में उतरी थी। श्रीलंकाई गेंदबाजों की कसी हुई लाइन-लेंथ और स्विंग के आगे कनाडाई बल्लेबाजों के पास कोई जवाब नहीं था। पूरी टीम महज 18.4 ओवर तक ही टिक सकी और स्कोरबोर्ड पर सिर्फ 36 रन जोड़कर पवेलियन लौट गई। इस दौरान टीम की रन गति मात्र 1.92 प्रति ओवर रही। श्रीलंकाई टीम ने इस मामूली लक्ष्य को बिना किसी मशक्कत के हासिल कर लिया, लेकिन यह मैच विश्व कप के पन्नों में सबसे छोटे स्कोर का विश्व कीर्तिमान दर्ज करा गया जो आज दो दशक बाद भी कायम है।

## मैनचेस्टर में इंग्लैंड के सामने कनाडा का संघर्ष: 45 रन
पार्ल के मैच से काफी पहले भी कनाडा की टीम इसी तरह के बेहद खराब दौर से गुजर चुकी थी। 13 जून 1979 को मैनचेस्टर के मैदान पर इंग्लैंड और कनाडा के बीच भिड़ंत हुई थी। साठ ओवर के उस दौर में इंग्लिश गेंदबाजों ने बेहद अनुशासित और आक्रामक गेंदबाजी की नुमाइश पेश की। कनाडाई बल्लेबाज क्रीज पर टिकने के लिए लगातार संघर्ष करते रहे लेकिन रन गति बिल्कुल थम गई। नतीजा यह हुआ कि पूरी कनाडाई टीम 40.3 ओवर खेलकर सिर्फ 45 रन पर सिमट गई। इंग्लैंड की टीम ने इस मैच पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी और बेहद आसानी से जीत हासिल कर ली।

## पोटचेफस्ट्रूम में नामीबिया का समर्पण: 45 रन
कनाडा के 45 रन के आंकड़े की बराबरी 2003 के विश्व कप में ही नामीबिया की टीम ने की। 27 फरवरी 2003 को पोटचेफस्ट्रूम में नामीबिया का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया जैसी शक्तिशाली टीम से हुआ। ग्लेन मैक्ग्रा की आग उगलती गेंदों और एडम गिलक्रिस्ट की शानदार विकेटकीपिंग के सामने नामीबियाई बल्लेबाज पूरी तरह बेबस साबित हुए। ग्लेन मैक्ग्रा ने घातक स्पेल डालते हुए सात विकेट चटकाए, जबकि विकेट के पीछे एडम गिलक्रिस्ट ने छह कैच लपके। ऑस्ट्रेलियाई आक्रमण के सामने नामीबिया की पूरी पारी 14 ओवरों में मात्र 45 रनों पर ढेर हो गई। कम ओवर खेलने की वजह से उनका रन रेट 3.21 जरूर रहा, लेकिन लक्ष्य इतना छोटा था कि ऑस्ट्रेलिया ने इसे बेहद आसानी से प्राप्त कर लिया।

## वानखेड़े में घरेलू मैदान पर श्रीलंका का पतन: 55 रन
न्यूनतम स्कोर की सूची में केवल एसोसिएट या गैर-अनुभवी टीमें ही शामिल नहीं हैं, बल्कि दो बार की विश्व विजेता श्रीलंका का नाम भी इसमें दर्ज है। 2 नवंबर 2023 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत और श्रीलंका के बीच खेला गया मुकाबला बेहद चौंकाने वाला रहा। भारतीय तेज गेंदबाजों ने नई गेंद से ऐसा तूफान खड़ा किया कि श्रीलंकाई शीर्ष और मध्य क्रम ताश के पत्तों की तरह ढह गया। वानखेड़े की रोशनी में भारतीय गेंदबाजों की धारदार गेंदों का सामना श्रीलंकाई बल्लेबाज नहीं कर पाए और पूरी टीम 19.4 ओवरों में सिर्फ 55 रनों पर ढेर हो गई। आधुनिक दौर के क्रिकेट में किसी प्रमुख टीम का ऐसा पतन बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक माना गया।

## मीरपुर में घरेलू दर्शकों के सामने बांग्लादेश की विफलता: 58 रन
विश्व कप इतिहास का पांचवां सबसे छोटा स्कोर बांग्लादेश के नाम दर्ज है। 4 मार्च 2011 को मीरपुर के शेर-ए-बांग्ला स्टेडियम में अपने घरेलू प्रशंसकों के सामने बांग्लादेश की टीम वेस्टइंडीज के खिलाफ उतरी थी। कैरेबियाई तेज गेंदबाजों की गति और बाउंस के दबाव को घरेलू टीम झेल नहीं सकी। घरेलू परिस्थितियों में खेलने के बावजूद पूरी बांग्लादेशी टीम 18.5 ओवरों में मात्र 58 रन बनाकर सिमट गई। अपने ही मैदान पर इतना कम स्कोर बनना टीम और समर्थकों दोनों के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ। वेस्टइंडीज ने इस बेहद आसान लक्ष्य को कुछ ही ओवरों में पार कर एकतरफा जीत दर्ज की।

## इसका आप पर असर
क्रिकेट प्रशंसकों और खेल विश्लेषकों के लिए विश्व कप के ये आंकड़े यह रेखांकित करते हैं कि शीर्ष स्तर के टूर्नामेंट में दबाव और बेहतर गेंदबाजी के सामने मजबूत बल्लेबाजी भी अचानक बिखर सकती है।

- **क्रिकेट प्रेमियों के लिए:** यह जानकारी दर्शाती है कि सीमित ओवरों के खेल में केवल बड़े शतक ही नहीं बल्कि घातक गेंदबाजी स्पेल भी मैच का फैसला कुछ ही ओवरों में कर सकते हैं। दर्शक ऐसे ऐतिहासिक आंकड़ों के जरिए खेल के दोनों पहलुओं को समझ सकते हैं।
- **खेल सांख्यिकी के नजरिए से:** 2003 में कनाडा द्वारा बनाया गया 36 रनों का रिकॉर्ड पिछले 23 सालों से अटूट है जो यह दिखाता है कि इस स्तर पर इतना कम स्कोर बनना कितना दुर्लभ है। आधुनिक बल्लेबाजों के लिए यह आंकड़े दबाव प्रबंधन और तकनीक का महत्व सिखाते हैं।
- **प्रमुख टीमों के प्रदर्शन पर:** श्रीलंका जैसी मजबूत पूर्व चैंपियन टीम का 55 रन पर ऑलआउट होना साबित करता है कि घरेलू परिस्थितियों में सटीक स्विंग गेंदबाजी किसी भी विश्वस्तरीय क्रम को ध्वस्त कर सकती है। आगामी टूर्नामेंटों में रणनीतिक योजना बनाते समय टीमें इन कमजोरियों से सबक लेती हैं।
- **एसोसिएट देशों के विकास के लिए:** कनाडा और नामीबिया के ये मैच दिखाते हैं कि शीर्ष टीमों के नियमित मैचों के बिना बड़ी प्रतियोगिताओं में कदम रखना कितना चुनौतीपूर्ण होता है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद इन अनुभवों से सीख लेकर सहयोगी देशों को अधिक प्रतिस्पर्धी अवसर प्रदान करने पर काम करती है।

## ऐसा क्यों हुआ
विश्व कप में टीमों के इतने कम स्कोर पर सिमटने के पीछे मुख्य रूप से अत्यधिक स्विंग, अनुशासित तेज गेंदबाजी, और बड़े टूर्नामेंट के नॉकआउट या ग्रुप स्टेज के भारी दबाव का होना मुख्य वजह रही है।

- **परिस्थितियों और तेज गेंदबाजी का दबदबा:** पार्ल, मैनचेस्टर और वानखेड़े जैसी पिचों पर तेज गेंदबाजों को हवा और सतह से भरपूर मदद मिली। मैक्ग्रा और भारतीय तेज गेंदबाजों की सटीक लाइन-लेंथ ने बल्लेबाजों को संभलने का मौका नहीं दिया।
- **मानसिक दबाव और शुरुआती झटके:** विश्व कप के बड़े मंच पर पहले कुछ ओवरों में विकेट गंवाने के बाद निचला क्रम दबाव नहीं संभाल सका। बल्लेबाजों के बीच साझेदारी न बन पाना ऐसे विशाल पतनों का कारण बना।
- **अनुभव की कमी और तकनीक का अभाव:** 1979 और 2003 में कनाडा और नामीबिया जैसी उभरती टीमों के पास विश्वस्तरीय तेज गेंदबाजी का सामना करने का पर्याप्त अंतरराष्ट्रीय अनुभव नहीं था, जिससे वे तेजी से पवेलियन लौट गईं।

## सवाल-जवाब

### 1. विश्व कप के इतिहास में सबसे न्यूनतम स्कोर किस टीम का है?
विश्व कप इतिहास का सबसे कम स्कोर कनाडा के नाम है, जो 19 फरवरी 2003 को श्रीलंका के खिलाफ 36 रनों पर ऑलआउट हो गई थी।

### 2. कनाडा की 36 रनों की पारी कितने ओवर तक चली थी?
कनाडा की पूरी टीम श्रीलंका के सामने 18.4 ओवरों में सिमट गई थी और उनका रन रेट मात्र 1.92 रहा था।

### 3. ग्लेन मैक्ग्रा ने नामीबिया के खिलाफ 2003 विश्व कप में कितने विकेट लिए थे?
ग्लेन मैक्ग्रा ने उस मुकाबले में घातक गेंदबाजी करते हुए सात विकेट चटकाए थे, जबकि एडम गिलक्रिस्ट ने छह कैच पकड़े थे।

### 4. श्रीलंका की टीम वानखेड़े में कितने स्कोर पर ऑलआउट हुई थी?
श्रीलंका की टीम 2 नवंबर 2023 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत के खिलाफ 19.4 ओवरों में सिर्फ 55 रनों पर ऑलआउट हो गई थी।

### 5. बांग्लादेश की टीम किस विपक्षी टीम के खिलाफ 58 रन पर ढेर हुई थी?
बांग्लादेश की टीम 4 मार्च 2011 को मीरपुर के मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ खेलते हुए मात्र 58 रनों पर सिमट गई थी।

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