# एक ही वनडे मुकाबले में दोनों सलामी बल्लेबाजों के सैकड़े, क्रिकेट इतिहास के 5 यादगार मौके

> वनडे क्रिकेट में किसी एक पारी के दौरान दोनों सलामी बल्लेबाजों का शतक जड़ना एक दुर्लभ उपलब्धि है। 1986 में जयपुर से शुरू हुए इस सिलसिले के शुरुआती पांच ऐतिहासिक मैचों का पूरा ब्योरा।

**Type:** article · **Category:** क्रिकेट · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/cricket/eka-hi-odi-mukabale-men-donon-salami-ballebajon-ke-saikare-cricket-itihasa-ke-5-yadagara-mauke-41828 · **Language:** Hindi
**Tags:** वनडे क्रिकेट, सलामी बल्लेबाज, क्रिकेट रिकॉर्ड, शतक, सईद अनवर, रमीज राजा

अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय क्रिकेट में जब दो बल्लेबाज पारी का आगाज करने उतरते हैं, तो उनकी प्राथमिक भूमिका शुरुआती कठिन ओवरों को निकाल कर टीम को सुरक्षित और मजबूत स्थिति में पहुंचाने की होती है। नई गेंद की स्विंग और उछाल का सामना करना आसान नहीं होता, लेकिन जब दोनों ही सलामी बल्लेबाज क्रीज पर पूरी तरह जम जाएं और अलग-अलग शतक जमाकर वापस लौटें, तो यह मुकाबला क्रिकेट इतिहास के पन्नों में अमर हो जाता है। पचास ओवर के खेल में दोनों ओपनरों का एक साथ सैकड़ा बनाना बेहद दुर्लभ माना गया है। इस खास सिलसिले की शुरुआत 1986 में हुई थी, जिसके बाद उपमहाद्वीप और एसोसिएट देशों के बल्लेबाजों ने भी इस अनोखे रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया। यहां उन शुरुआती पांच मैचों का ब्योरा दिया जा रहा है जहां दोनों सलामी बल्लेबाजों ने एक ही मुकाबले में शतकीय पारियां खेलकर विरोधी गेंदबाजी को बेबस कर दिया था।

## जयपुर 1986: ऑस्ट्रेलियाई जोड़ी का कारनामा मगर मुकाबला भारत के नाम
इस अद्भुत रिकॉर्ड की नींव 7 सितंबर 1986 को जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में रखी गई थी। यह मुकाबला भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला जा रहा था। कंगारू टीम की तरफ से पारी की शुरुआत करने आए ट्रैवर चैपल और ज्योफ मार्श ने पिच पर टिककर भारतीय गेंदबाजों की रणनीति को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। दोनों ही बल्लेबाजों ने तकनीक, संयम और आक्रामकता का बेहतरीन तालमेल दिखाया।

ट्रैवर चैपल और ज्योफ मार्श ने मैदान के चारों तरफ सटीक शॉट खेले और अपने-अपने व्यक्तिगत शतक पूरे किए। इस दोहरी शतकीय शुरुआत की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने निर्धारित ओवरों में 3 विकेट के नुकसान पर 250 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। उस दौर के सीमित ओवरों के क्रिकेट में 250 का स्कोर काफी बड़ा और मजबूत माना जाता था। हालांकि, ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए निराशा की बात यह रही कि दोनों ओपनर्स के शानदार शतकों के बावजूद वे मैच नहीं बचा सके। भारतीय टीम ने बेहतरीन जवाबी खेल दिखाया और इस मुकाबले को अपनी झोली में डालकर कंगारू ओपनर्स की यादगार मेहनत पर पानी फेर दिया।

## एडिलेड 1990: पाकिस्तानी जोड़ी का दबदबा और श्रीलंका को शिकस्त
जयपुर के मुकाबले के करीब चार साल बाद यह दुर्लभ नजारा ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर देखने को मिला। तारीख थी 17 फरवरी 1990 और मैदान था एडिलेड। इस मुकाबले में पाकिस्तान का सामना श्रीलंका से हो रहा था। पाकिस्तान की ओर से पारी का आगाज करने अनुभवी रमीज राजा और आक्रामक बाएं हाथ के बल्लेबाज सईद अनवर क्रीज पर उतरे।

दोनों पाकिस्तानी सलामी बल्लेबाजों ने श्रीलंकाई गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया। तेज गेंदों के साथ-साथ स्पिनरों के खिलाफ भी दोनों ने खुलकर रन बटोरे और देखते ही देखते अपने-अपने शतक पूरे कर लिए। इस ठोस और आक्रामक साझेदारी के दम पर पाकिस्तान ने 3 विकेट खोकर 315 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। एडिलेड में यह शतकीय शुरुआत बेकार नहीं गई। 315 के पहाड़ जैसे स्कोर के दबाव में श्रीलंकाई टीम बिखर गई और पाकिस्तान ने एक शानदार जीत अपने नाम दर्ज की।

## शारजाह 1993: रमीज राजा और सईद अनवर का फिर चला बल्ला
तटस्थ मैदानों पर सीमित ओवरों के क्रिकेट की चर्चा शारजाह के बिना अधूरी मानी जाती है। 4 फरवरी 1993 को शारजाह के रेगिस्तानी मैदान पर पाकिस्तान और श्रीलंका एक बार फिर आमने-सामने आए। एडिलेड के कारनामे को दोहराने के इरादे से रमीज राजा और सईद अनवर की जोड़ी दोबारा मैदान पर उतरी।

श्रीलंकाई गेंदबाजी आक्रमण के सामने ये दोनों बल्लेबाज चट्टान की तरह डट गए। उन्होंने न सिर्फ रन गति को बनाए रखा बल्कि फील्डरों को छकाते हुए खूबसूरत बाउंड्रीज जड़ीं। दोनों ओपनरों ने एक बार फिर एक ही पारी में शतक ठोकने की अद्भुत उपलब्धि हासिल की। पाकिस्तान की टीम ने पहली पारी में 3 विकेट के नुकसान पर 281 रन बनाए। मजबूत आधार मिलने के बाद पाकिस्तानी गेंदबाजों ने भी अपना काम बखूबी किया और टीम को श्रीलंका पर आसान व निर्णायक जीत दिलाई।

## शारजाह 1993: कुछ ही महीनों में नई जोड़ी के साथ दोहराया गया इतिहास
शारजाह का मैदान उसी साल 30 अक्टूबर 1993 को एक बार फिर इस करिश्मे का गवाह बना। प्रतिद्वंद्वी टीम फिर से श्रीलंका थी, लेकिन इस बार पाकिस्तान की सलामी जोड़ी में एक बदलाव था। सईद अनवर के साथ पारी की शुरुआत करने उतरे आसिफ मुज्तबा।

सईद अनवर ने अपने स्वाभाविक आक्रामक अंदाज को जारी रखा, वहीं आसिफ मुज्तबा ने दूसरे छोर पर धैर्य और सूझबूझ का परिचय दिया। श्रीलंकाई गेंदबाजों के पास इस नई जोड़ी को तोड़ने की कोई काट नजर नहीं आ रही थी। दोनों बल्लेबाजों ने शानदार खेल दिखाते हुए व्यक्तिगत सैकड़े पूरे किए। इस दोहरी शतकीय साझेदारी के सहारे पाकिस्तान ने 3 विकेट के नुकसान पर 313 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा किया। पाकिस्तानी बल्लेबाजों के इस दबदबे के आगे श्रीलंका टिक नहीं पाई और पाकिस्तान ने एक बार फिर मुकाबले में एकतरफा जीत दर्ज की।

## नैरोबी 1997: एसोसिएट राष्ट्र केन्या के ओपनरों ने रचा स्वर्णिम इतिहास
वनडे क्रिकेट के इस दुर्लभ रिकॉर्ड में एसोसिएट देशों का नाम भी बेहद गर्व के साथ शामिल है। 10 अक्टूबर 1997 को नैरोबी जिमखाना क्लब के मैदान पर केन्या और बांग्लादेश के बीच एकदिवसीय मैच खेला जा रहा था। घरेलू मैदान पर खेलते हुए केन्याई टीम के दो सलामी बल्लेबाजों दीपक और केनडी ओटिनो ने क्रिकेट जगत को चौंका दिया।

दीपक और केनडी ओटिनो ने बांग्लादेशी गेंदबाजी आक्रमण पर शुरू से ही कड़ा प्रहार किया। दोनों ने अपनी पारी को सूझबूझ और ताकतवर स्ट्रोक्स के साथ आगे बढ़ाते हुए शतक जमाए। दोनों सलामी बल्लेबाजों के शतकों की बदौलत केन्या ने 3 विकेट खोकर 347 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। 1997 के दौर में किसी एसोसिएट टीम द्वारा 347 रन बनाना एक असाधारण उपलब्धि थी। इस ऐतिहासिक पारी के दम पर केन्या ने बांग्लादेश के खिलाफ एक यादगार और बड़ी जीत हासिल कर अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा लिया।

## इसका आप पर असर
क्रिकेट प्रशंसकों और खेल सांख्यिकी के जानकारों के लिए यह सूची सीमित ओवरों के खेल में ओपनिंग साझेदारी के ऐतिहासिक महत्व को समझने का अवसर देती है।

- **क्रिकेट प्रेमियों के लिए:** यह विश्लेषण दिखाता है कि आधुनिक दौर से पहले भी सलामी बल्लेबाज कितने आक्रामक और प्रभावी हो सकते थे। पाठक पचास ओवरों के पुराने दौर की बल्लेबाजी तकनीक और रणनीतियों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।
- **खेल सांख्यिकी के संदर्भ में:** यह रिकॉर्ड बताता है कि एक ही पारी में दो शतकों के बावजूद जीत की गारंटी नहीं होती, जैसा 1986 में हुआ था। विश्लेषक इससे यह सीख सकते हैं कि मैच का नतीजा केवल शीर्ष क्रम के प्रदर्शन पर निर्भर नहीं करता।
- **एसोसिएट क्रिकेट की पहचान:** केन्या की उपलब्धि यह रेखांकित करती है कि सीमित संसाधनों वाली टीमें भी शीर्ष स्तर पर इतिहास रच सकती हैं। उभरते हुए क्रिकेट देशों के खिलाड़ियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण प्रेरणादायक मिसाल है।
- **रणनीतिक समझ:** टीमों के लिए यह सबक है कि ठोस शुरुआत के बाद बड़े लक्ष्य खड़े करना मैच जीतने की संभावनाओं को काफी बढ़ा देता है। रणनीतिकार पारी के आरंभिक 15 ओवरों के सदुपयोग पर अधिक जोर दे सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
एक ही पारी में दोनों सलामी बल्लेबाजों के शतक जड़ने का करिश्मा तब मुमकिन होता है जब कई अनुकूल कारक एक साथ काम करते हैं। इसके पीछे ठोस तकनीक, पिच का व्यवहार और विरोधी गेंदबाजी की लाचारी मुख्य वजहें रही हैं।

- **तकनीकी मजबूती और संयम:** दोनों बल्लेबाजों ने शुरुआती स्विंग को बिना जोखिम उठाए निकाला और सेट होने के बाद रन गति बढ़ाई। धैर्यपूर्वक क्रीज पर समय बिताने से विरोधी गेंदबाजों की लाइन और लेंथ पूरी तरह बिगड़ गई।
- **पिच और परिस्थितियां:** जयपुर, एडिलेड, शारजाह और नैरोबी की सतहों पर गेंद बल्ले पर आसानी से आ रही थी। बल्लेबाजों ने अनुकूल परिस्थितियों का पूरा लाभ उठाते हुए विकेट गंवाए बिना लंबी साझेदारियां कीं।
- **विरोधी आक्रमण में विकल्पों की कमी:** जब शुरुआती स्पैल में विकेट नहीं मिले तो गेंदबाजी पक्ष के पास कोई बैकअप रणनीति नहीं बची थी। लगातार रन बनने से फील्डिंग बिखर गई और दोनों बल्लेबाजों ने आसानी से अपने शतक पूरे किए।

## सवाल-जवाब

### 1. वनडे में दोनों ओपनर्स द्वारा शतक लगाने का पहला मामला कब सामने आया था?
यह पहली बार 7 सितंबर 1986 को जयपुर में हुआ था, जब ऑस्ट्रेलियाई ओपनर ट्रैवर चैपल और ज्योफ मार्श ने भारत के खिलाफ शतक बनाए थे।

### 2. क्या ऑस्ट्रेलिया जयपुर में दोनों ओपनर्स के शतक के बावजूद मैच जीत सका था?
नहीं, दोनों ओपनर्स के शतक और 3 विकेट पर 250 रन बनाने के बावजूद ऑस्ट्रेलिया यह मैच हार गया था और भारत ने जीत हासिल की थी।

### 3. रमीज राजा और सईद अनवर ने किन मैदानों पर एक साथ शतक जड़े थे?
इस जोड़ी ने 1990 में एडिलेड के मैदान पर और फिर 1993 में शारजाह के मैदान पर श्रीलंका के खिलाफ यह उपलब्धि हासिल की थी।

### 4. केन्या के किन दो सलामी बल्लेबाजों ने 1997 में इतिहास रचा था?
केन्या की तरफ से दीपक और केनडी ओटिनो ने 10 अक्टूबर 1997 को नैरोबी में बांग्लादेश के खिलाफ शतक जमाए थे।

### 5. केन्या ने बांग्लादेश के खिलाफ उस ऐतिहासिक मुकाबले में कितना स्कोर बनाया था?
केन्या ने अपने दोनों ओपनर्स के शतकों के दम पर 3 विकेट के नुकसान पर 347 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._