गॉल में 112 पर सिमटी टीम इंडिया, हार के बाद शास्त्री की पार्टी से बदली सोच 2015 के गॉल टेस्ट में 176 रन के करीब पहुंचकर भी टीम इंडिया 112 पर ऑलआउट हो गई थी, लेकिन हार के बाद रवि शास्त्री की पार्टी ने टीम का पूरा नजरिया बदल दिया. क्रिकेट के मैदान पर कई बार किस्मत आखिरी लम्हे में करवट बदल लेती है, जीता हुआ मुकाबला हाथ से फिसल जाता है और जश्न की तैयारी अचानक सन्नाटे में बदल जाती है. 2015 में श्रीलंका के गॉल शहर में खेला गया टेस्ट मैच टीम इंडिया के लिए कुछ ऐसा ही अनुभव लेकर आया था. उस दौर में विराट कोहली को कप्तानी की जिम्मेदारी नई नई मिली थी और उनके साथ कोच की कुर्सी पर रवि शास्त्री मौजूद थे. दोनों ने मैच जीतने के लिए रणनीति बनाने में कोई कमी नहीं रखी थी, लेकिन मैदान पर कहानी कुछ और ही लिखी जानी थी. 176 रन की दहलीज पर बिखरी उम्मीदें मैच के तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक टीम इंडिया को जीत के लिए 176 रन की दरकार थी और टीम ने केएल राहुल का विकेट गंवाकर 23 रन बना लिए थे. मतलब चौथे दिन जीत के लिए सिर्फ 153 रन और चाहिए थे. क्रीज पर पहली पारी में शतक जड़ चुके शिखर धवन मौजूद थे और उनके साथ नाइटवॉचमैन के तौर पर ईशांत शर्मा बल्लेबाजी कर रहे थे. दोनों बल्लेबाजों ने जब मैदान पर कदम रखा तो लग रहा था कि लंच तक टीम इंडिया जीत का जश्न मना लेगी. लेकिन तभी रंगना हेराथ की गेंदबाजी ने पूरा खेल पलट दिया. उनकी फिरकी के आगे भारतीय बल्लेबाज एक के बाद एक आउट होते चले गए और पूरी टीम सिर्फ 112 रन पर सिमट गई. श्रीलंका ने यह मैच 63 रन के बड़े अंतर से अपने नाम कर लिया और हेराथ अकेले 7 विकेट चटकाने में कामयाब रहे. प्रेजेंटेशन सेरेमनी के दौरान भारतीय खिलाड़ियों के झुके हुए चेहरे साफ बता रहे थे कि गॉल में उनसे बड़ी चूक हो चुकी है. 11 साल बाद फिर गॉल, राहुल के लिए यादों की वापसी अब 11 साल बाद टीम इंडिया एक बार फिर गॉल के उसी मैदान पर उतरने वाली है और इस बार भी दस्ते में केएल राहुल मौजूद रहेंगे, जो 2015 की उस हार के चश्मदीद रहे थे और मैदान पर हर उतार चढ़ाव उनकी आंखों के सामने से गुजरा था. इस बार एक दिलचस्प संयोग भी सामने आया है. 2015 में यह मैच 15 अगस्त को खत्म हुआ था, जबकि 2026 में यह मुकाबला ठीक इसी तारीख यानी 15 अगस्त से शुरू होगा. 14 अगस्त की शाम तक हर तरफ टीम इंडिया की जीत की ही चर्चा हो रही थी, लेकिन अगली सुबह मैदान पर कुछ और ही कहानी लिखी जाने वाली थी, और यह सब केएल राहुल की आंखों के सामने हुआ था. हार के बाद पार्टी, शास्त्री का अनोखा फॉर्मूला टीम इंडिया चार दिन के अंदर ही गॉल टेस्ट हार गई थी, इसलिए तय कार्यक्रम से पहले ही टीम कोलंबो के लिए रवाना हो गई. टीम को ताज समुद्रा होटल में ठहरना था और अगले दिन रवि शास्त्री प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए पहुंचे. जब उनसे पूछा गया कि हार के बाद टीम ने क्या किया, तो उन्होंने बताया कि उन्होंने सभी खिलाड़ियों के लिए पार्टी अरेंज करवाई थी, ताकि खिलाड़ी उस मैच के झटके को पीछे छोड़कर नए सिरे से खुद को तैयार कर सकें. इसका असर मैदान पर भी साफ दिखा, पहला टेस्ट हारने के बावजूद टीम इंडिया ने अगले दोनों टेस्ट मैच जीत लिए और पूरी सीरीज भी अपने नाम कर ली. कल्चर जो सालों तक चला तीन साल बाद जब रवि शास्त्री और विराट कोहली बतौर कोच और कप्तान दोबारा साथ आए, तो हार के बाद खिलाड़ियों का माहौल हल्का करने वाला यह पार्टी कल्चर टीम इंडिया के साथ लंबे समय तक बना रहा. इसका आप पर असर • क्रिकेट फैंस के लिए: 2026 में टीम इंडिया के गॉल दौरे से पहले यह पुरानी हार याद दिलाती है कि इस मैदान पर हालात कभी भी पलट सकते हैं, इसलिए इस बार के मुकाबले पर नजर रखने वालों के लिए यह इतिहास खास मायने रखता है, खासकर तब जब उस हार के चश्मदीद केएल राहुल अब भी टीम का हिस्सा हैं. सवाल-जवाब 1. 2015 के गॉल टेस्ट में टीम इंडिया को जीत के लिए कितने रन चाहिए थे? टीम इंडिया को जीत के लिए 176 रन बनाने थे. 2. टीम इंडिया उस मैच में कितने रन पर ऑलआउट हुई थी? टीम 112 रन पर ऑलआउट हो गई थी, जिससे श्रीलंका को 63 रन से जीत मिली. 3. उस मैच में सबसे ज्यादा विकेट किसने लिए थे? श्रीलंका के रंगना हेराथ ने 7 विकेट लिए थे. 4. हार के बाद रवि शास्त्री ने क्या किया था? उन्होंने सभी खिलाड़ियों के लिए पार्टी अरेंज करवाई थी, ताकि टीम मैच का झटका भूलकर नए सिरे से तैयार हो सके. 5. पार्टी अरेंज करने का नतीजा क्या निकला? पहला टेस्ट हारने के बावजूद टीम इंडिया ने अगले दोनों टेस्ट मैच और पूरी सीरीज जीत ली. 6. 2026 का गॉल टेस्ट कब शुरू होगा और इसका 2015 से क्या संयोग है? यह मैच 15 अगस्त 2026 से शुरू होगा, जबकि 2015 का मैच ठीक इसी तारीख को खत्म हुआ था. प्रेरणा और सबक • हार को हार तक सीमित न रखें: गॉल की करारी हार के बाद रवि शास्त्री ने मैच के गम में डूबे रहने के बजाय टीम के लिए पार्टी अरेंज करवाई, ताकि खिलाड़ी झटके से जल्दी बाहर निकल सकें. • माहौल हल्का रखना नतीजों में बदलता है: इसी सोच का नतीजा रहा कि पहला टेस्ट हारने के बावजूद टीम इंडिया ने अगले दोनों टेस्ट और पूरी सीरीज जीत ली. • लीडरशिप का फैसला मायने रखता है: नए नए कप्तान बने विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री ने मुश्किल पल में जो फैसला लिया, वह आगे चलकर टीम की पहचान बन गया. • अच्छी आदतें लंबे समय तक चलती हैं: तीन साल बाद जब शास्त्री और कोहली दोबारा कोच-कप्तान के तौर पर साथ आए, तो हार के बाद पार्टी करने का यही कल्चर टीम के साथ बना रहा. https://trendkia.com/cricket/galle-men-112-para-simati-tima-indiya-hara-ke-bada-shastri-ki-parti-se-badali-socha-12443 TrendKia — Har trend, sabse pehle.