गुवाहाटी में शुभमन गिल का 223 रनों का ऐतिहासिक तूफान, टीम इंडिया ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 406 रन चेज कर रचा इतिहास गुवाहाटी में शुभमन गिल के सबसे तेज दोहरे शतक और नाबाद 223 रनों के दम पर भारत ने 406 रन का विशाल स्कोर चेज कर सीरीज अपने नाम की। गुवाहाटी के मैदान पर 30 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का एक ऐसा मुकाबला खेला गया जिसने एक दिवसीय इतिहास के कई पुराने रिकॉर्ड्स को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। वेस्टइंडीज की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 50 ओवर में 405 रनों का विशालकाय स्कोर खड़ा किया था। जवाब में भारतीय टीम ने इस विशाल चुनौती को बेहद आसान बनाते हुए 43.3 ओवर में ही जीत हासिल कर ली। टीम इंडिया ने 406 रन का लक्ष्य पार कर अंतरराष्ट्रीय एक दिवसीय मुकाबलों में अपना अब तक का सबसे बड़ा सफल रन चेज पूरा किया। इसके साथ ही भारतीय टीम ने तीन मैचों की इस एक दिवसीय श्रृंखला के शुरुआती दो मुकाबले जीतकर 2-0 की अजेय बढ़त भी बना ली है। शुभमन गिल का तूफानी दोहरा शतक और ऐतिहासिक व्यक्तिगत स्कोर लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम के लिए कप्तान शुभमन गिल ने बल्ले से अविश्वसनीय प्रदर्शन किया। शुभमन गिल ने महज 117 गेंदों का सामना करते हुए अपना दोहरा शतक पूरा किया, जो कि एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के पूरे इतिहास की सबसे तेज डबल सेंचुरी बन गई है। इससे पूर्व सबसे तेज गति से दोहरा शतक लगाने का कीर्तिमान भारतीय बल्लेबाज ईशान किशन के नाम दर्ज था, जिन्होंने वर्ष 2022 में बांग्लादेश के खिलाफ खेलते हुए 126 गेंदों में यह उपलब्धि हासिल की थी। गिल ने इस आंकड़े को 9 गेंदों के बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया। अपनी इस पारी के दौरान शुभमन गिल ने कई अन्य बड़े कीर्तिमान भी स्थापित किए। उन्होंने केवल 62 गेंदों पर शतक पूरा किया था, जो बतौर भारतीय कप्तान एक दिवसीय मैचों का सबसे तेज शतक है। अंत तक नाबाद रहते हुए गिल ने 223 रन बनाए, जो लक्ष्य का पीछा करते हुए किसी भी भारतीय बल्लेबाज का एक दिवसीय मुकाबलों में सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर है। इसके अलावा किसी भी तरह के लिस्ट ए क्रिकेट में लक्ष्य का पीछा करते हुए यह अब तक की सबसे बड़ी नाबाद पारी बन गई है। इस मामले में उन्होंने बांग्लादेशी बल्लेबाज सौम्य सरकार का पिछला रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 2019 में ढाका प्रीमियर लीग के एक मुकाबले में नाबाद 208 रन बनाए थे। शीर्ष क्रम की साझेदारियों ने आसान की 406 रनों की राह इस बड़े रन चेज में कप्तान गिल को अनुभवी बल्लेबाज रोहित शर्मा का बेहतरीन सहयोग मिला। रोहित शर्मा ने तेज गति से बल्लेबाजी करते हुए 72 गेंदों में अपना शतक पूरा किया और 101 रन बनाकर पवेलियन लौटे। रोहित और गिल के बीच पहले विकेट के लिए 255 रनों की विशाल दोहरी शतकीय साझेदारी हुई, जिसने मैच का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया। रोहित के आउट होने के उपरांत मैदान पर आए विराट कोहली ने भी उपयोगी योगदान दिया। कोहली 29 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन तब तक भारतीय टीम अपनी जीत की दहलीज पर पहुंच चुकी थी और गिल ने बाकी औपचारिकताएं बिना किसी परेशानी के पूरी कर दीं। वेस्टइंडीज के तीन शतकों के बावजूद हाथ लगी पराजय मुकाबले के पहले हिस्से में वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की जमकर खबर ली थी। कैरेबियाई ओपनर जॉन कैम्पबेल ने सिर्फ 65 गेंदों पर अपना शतक पूरा किया, जो भारत के खिलाफ एक दिवसीय प्रारूप में किसी भी वेस्टइंडीज बल्लेबाज द्वारा लगाया गया सबसे तेज शतक है। उनके साथ कप्तान शाई होप ने 94 गेंदों में 104 रनों की कप्तानी पारी खेली। मध्यक्रम में आमिर जंगू ने मात्र 70 गेंदों में अपना शतक पूरा किया और कुल 77 गेंदों में 114 रनों की धुआंधार पारी खेली। इन तीन शतकों की मदद से वेस्टइंडीज ने 50 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर 405 रन जुटाए। एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यह केवल 11वां ऐसा अवसर था जब किसी एक पारी में तीन अलग-अलग बल्लेबाजों ने शतक जमाए हों। दिलचस्प और हैरान करने वाला तथ्य यह है कि इन सभी 11 मौकों में ऐसा पहली बार हुआ जब तीन शतक लगाने वाली टीम को मैच में हार का मुंह देखना पड़ा। भारत की गेंदबाजी की बात करें तो गुरनूर बराड़, कुलदीप यादव और रवींद्र जडेजा ने दो-दो सफलताएं हासिल कीं। इस दौरान कुलदीप यादव ने अपने एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय करियर के 200 विकेट भी पूरे कर लिए। 400 से अधिक रनों के सफल चेज का दुर्लभ इतिहास विश्व क्रिकेट में 400 या उससे अधिक रनों के विशाल लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल करने की यह सिर्फ दूसरी घटना है। इससे पहले साल 2006 में जोहान्सबर्ग के मैदान पर साउथ अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया द्वारा दिए गए 438 रनों के लक्ष्य को 435 रन बनाकर पार किया था। एक दिवसीय क्रिकेट के सफल चेज की सर्वकालिक सूची में अब साउथ अफ्रीका का वह 435 रनों का मुकाबला पहले स्थान पर और गुवाहाटी में भारत का यह 406 रनों का कारनामा दूसरे स्थान पर काबिज हो गया है। गुवाहाटी का यह मैच एक दिवसीय इतिहास के सबसे बड़े स्कोर वाले मुकाबलों में भी तीसरे पायदान पर दर्ज हो गया है। इस पूरे मैच में दोनों टीमों को मिलाकर कुल 811 रन बने। इससे पहले साल 2006 के जोहान्सबर्ग मुकाबले में कुल 872 रन बने थे, जिसमें ऑस्ट्रेलिया ने 434 और साउथ अफ्रीका ने 438 रन बनाए थे। वहीं साल 2009 में राजकोट में भारत के 414 और श्रीलंका के 411 रनों के मैच में 825 रन बने थे। 400 या उससे ज्यादा रन बनाने के वैश्विक आंकड़ों में साउथ अफ्रीका 8 बार, इंग्लैंड 7 बार, ऑस्ट्रेलिया 3 बार, न्यूजीलैंड और श्रीलंका 2-2 बार, तथा वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे 1-1 बार यह मुकाम छू चुके हैं। इसका आप पर असर गुवाहाटी में खेले गए इस ऐतिहासिक मुकाबले ने एक दिवसीय क्रिकेट में बड़े लक्ष्यों के प्रति टीमों की रणनीति और दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया है। • क्रिकेट प्रशंसकों के लिए: दर्शकों को एक दिवसीय प्रारूप में टी20 जैसी आक्रामक बल्लेबाजी देखने को मिली है। आधुनिक क्रिकेट में 400 रनों का स्कोर भी अब पूरी तरह से सुरक्षित नहीं माना जा सकता है। • गुवाहाटी और असम में: स्थानीय खेल प्रेमियों को अपने शहर में विश्व क्रिकेट का तीसरा सबसे बड़ा स्कोरिंग मुकाबला देखने का मौका मिला। इस आयोजन से शहर के क्रिकेट स्टेडियम की अंतरराष्ट्रीय साख में भारी इजाफा हुआ है। • भारतीय क्रिकेट के लिए: शुभमन गिल की कप्तानी में मिली यह जीत टीम के शीर्ष क्रम के आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों पर ले गई है। तीन मैचों की श्रृंखला में 2-0 की अजेय बढ़त मिलने से टीम प्रबंधन प्रयोग करने की स्थिति में आ गया है। • गेंदबाजों की रणनीति पर: बल्लेबाजों की मददगार पिचों पर गेंदबाजों के लिए लाइन और लेंथ बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। आगामी मैचों में टीमों को अपनी गेंदबाजी योजनाओं और फील्ड प्लेसमेंट में व्यापक बदलाव करने होंगे। ऐसा क्यों हुआ गुवाहाटी के मैदान पर दोनों टीमों के बल्लेबाजों ने अनुकूल परिस्थितियों और बेहतरीन तकनीक का भरपूर लाभ उठाते हुए एक के बाद एक कई ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किए। • शीर्ष क्रम की तेज शुरुआत: वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने पहले बल्लेबाजी करते हुए शुरू से ही भारतीय गेंदबाजों पर आक्रमण किया। जॉन कैम्पबेल, शाई होप और आमिर जंगू के शतकों ने स्कोर को 405 तक पहुंचाने में मुख्य भूमिका निभाई। • सपाट पिच और छोटी सीमाएं: गुवाहाटी की पिच बल्लेबाजों के लिए बेहद मुफीद साबित हुई जहां गेंद बल्ले पर आसानी से आ रही थी। गेंदबाजों को पिच से कोई मदद नहीं मिली और दोनों पारियों में खुलकर रन बने। • गिल और रोहित की रिकॉर्ड साझेदारी: भारत के 406 रनों के चेज में पहले विकेट के लिए 255 रनों की साझेदारी निर्णायक साबित हुई। इस तेज शुरुआत ने बाद में आने वाले बल्लेबाजों से रन गति का दबाव पूरी तरह हटा दिया। • ऐतिहासिक रन चेज की मिसाल: इससे पहले 400 से अधिक रनों का सफल चेज केवल 2006 में जोहान्सबर्ग में हुआ था। भारतीय टीम ने संयम और तेज बल्लेबाजी का संतुलन बनाकर इस दुर्लभ कारनामे को अंजाम दिया। सवाल-जवाब 1. शुभमन गिल ने कितने गेंदों में दोहरा शतक पूरा किया? शुभमन गिल ने महज 117 गेंदों में अपना दोहरा शतक पूरा किया। यह एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट इतिहास का सबसे तेज दोहरा शतक है। 2. गिल से पहले सबसे तेज एक दिवसीय दोहरे शतक का रिकॉर्ड किसके नाम था? गिल से पहले यह कीर्तिमान ईशान किशन के नाम था। उन्होंने 2022 में बांग्लादेश के खिलाफ 126 गेंदों में दोहरा शतक लगाया था। 3. वेस्टइंडीज की ओर से किन बल्लेबाजों ने शतक बनाए? वेस्टइंडीज के लिए जॉन कैम्पबेल ने 65 गेंदों में, शाई होप ने 104 रन और आमिर जंगू ने 77 गेंदों में 114 रन बनाकर शतक जड़े। 4. भारत ने 406 रनों का लक्ष्य कितने ओवरों में हासिल किया? भारतीय टीम ने 406 रनों का विशाल लक्ष्य 43.3 ओवर में ही हासिल कर लिया। 5. इस मुकाबले में कुलदीप यादव ने कौन सी व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल की? कुलदीप यादव ने मैच में दो विकेट चटकाकर अपने एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय करियर के 200 विकेट पूरे किए। 6. एक दिवसीय क्रिकेट में 400 से अधिक का पहला सफल चेज किस टीम ने किया था? पहला सफल 400+ चेज साउथ अफ्रीका ने 2006 में जोहान्सबर्ग में ऑस्ट्रेलिया के 438 रनों के लक्ष्य के खिलाफ किया था। https://trendkia.com/cricket/guvahati-men-shubman-gill-ka-223-ranon-ka-aitihasika-tuphana-tima-india-ne-west-indies-ke-khilapha-406-rana-cheja-kara-racha-itiha-40611 TrendKia — Har trend, sabse pehle.