# इंदौर में जवागल श्रीनाथ ने युवा खिलाड़ियों को चेताया, वैभव सूर्यवंशी जैसी उभरती प्रतिभाओं के लिए टेस्ट क्रिकेट ही असली आधार

> मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के वार्षिक पुरस्कार समारोह में भारतीय क्रिकेट के महान तेज गेंदबाज और आईसीसी मैच रेफरी जवागल श्रीनाथ ने कहा कि क्रिकेट को बेचा नहीं बल्कि सिखाया जाना चाहिए, और लंबे करियर के लिए लाल गेंद का प्रारूप ही सबसे मजबूत आधार है।

**Type:** article · **Category:** क्रिकेट · **Published:** 2026-08-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/cricket/indore-men-javagal-srinath-ne-yuva-khilariyon-ko-chetaya-vaibhav-sooryavanshi-jaisi-ubharati-pratibhaon-ke-lie-test-kriketa-hi-asa-23308 · **Language:** Hindi
**Tags:** जवागल श्रीनाथ, वैभव सूर्यवंशी, टेस्ट क्रिकेट, आईपीएल, रणजी ट्रॉफी, इंदौर, मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन, भारतीय क्रिकेट

आज के दौर में क्रिकेट का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, जहां चौकों और छक्कों का रोमांच तथा टी-20 फॉर्मेट का कमर्शियल आकर्षण युवा खिलाड़ियों की पहली पसंद बनता जा रहा है। खेल के इस पूरी तरह से व्यावसायिक हो चुके युग में, भारतीय क्रिकेट के महान तेज गेंदबाज और आईसीसी मैच रेफरी जवागल श्रीनाथ की स्पष्ट और बेबाक सलाह ने क्रिकेट जगत के साथ-साथ उभरते हुए युवा खिलाड़ियों को अपनी प्राथमिकताओं पर नए सिरे से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। इंदौर में आयोजित मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (MPCA) के सीजन अवार्ड 2025-26 समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे जवागल श्रीनाथ ने खेल के मूल सिद्धांतों की वकालत करते हुए एक बड़ा संदेश दिया। उनका यह बयान उन तमाम युवा खिलाड़ियों के लिए एक महत्त्वपूर्ण दिशा-निर्देश की तरह सामने आया है जो आईपीएल के ग्लैमर और शॉर्टकट सफलता की चकाचौंध में अपने खेल की बुनियाद को भूलते जा रहे हैं।

## व्यावसायिकता के दौर में खेल की असली सीख
मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के इंदौर स्थित मंच से बोलते हुए जवागल श्रीनाथ ने खेल के संरक्षण और खिलाड़ियों के सही मार्गदर्शन पर विशेष बल दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, **"क्रिकेट को बेचा नहीं जाना चाहिए, बल्कि उसे सिखाया जाना चाहिए।"** उनका यह एक वाक्य आज के आधुनिक और अत्यधिक कमर्शियल हो चुके क्रिकेट माहौल पर गहरा कटाक्ष करने के साथ-साथ एक बहुत बड़ी सीख भी प्रदान करता है। आज के समय में जब अधिकांश ध्यान फ्रेंचाइजी क्रिकेट, स्पॉन्सरशिप और ताबड़तोड़ बल्लेबाजी पर केंद्रित है, तब पूर्ववर्ती पीढ़ियों के महान खिलाड़ियों की ऐसी नसीहतें युवा प्रतिभाओं के लिए एक आईने का काम करती हैं। श्रीनाथ ने इस बात पर जोर दिया कि क्रिकेट के व्यावसायिक पहलू से अलग, इसके तकनीकी, मानसिक और नैतिक स्वरूप को बचाकर रखना हर क्रिकेट संस्था और कोच का दायित्व है।

## टेस्ट क्रिकेट की गहराई और 'मदर ऑफ क्रिकेट' का दर्जा
जवागल श्रीनाथ ने 5 दिन के पारंपरिक लाल गेंद के प्रारूप को क्रिकेट की असली आत्मा और पहचान बताया। अपने लंबे और भव्य करियर के अनुभव के आधार पर उन्होंने टेस्ट क्रिकेट को 'मदर ऑफ क्रिकेट' यानी क्रिकेट की जननी का दर्जा दिया। उन्होंने यह माना कि टी-20 और आईपीएल जैसे टूर्नामेंटों का अपना महत्त्व और अपनी जगह है, लेकिन अगर किसी खिलाड़ी को अपने खेल में वास्तविक गहराई और निखार चाहिए, तो वह केवल 5 दिन के लंबे मुकाबले खेलने से ही हासिल हो सकता है। श्रीनाथ ने एक महत्त्वपूर्ण तकनीकी और मानसिक दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा कि केवल छोटे प्रारूप में खेलने वाला खिलाड़ी जरूरी नहीं कि टेस्ट क्रिकेट की कठिन चुनौतियों में आसानी से ढल पाए। हालांकि, जिस खिलाड़ी ने खुद को टेस्ट क्रिकेट की कठिन भट्टी में तपाकर तैयार किया है, वह दुनिया के किसी भी फॉर्मेट और किसी भी परिस्थिति में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकता है।

टी-20 प्रारूप में रन बनाना या विकेट चटकाना कई बार आसान लग सकता है, क्योंकि वहां जोखिम लेने की छूट होती है और परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं। इसके विपरीत, 5 दिन के टेस्ट क्रिकेट में सफलता हासिल करने के लिए केवल आक्रामक शॉट्स ही काफी नहीं होते। वहां खिलाड़ी की शारीरिक सहनशक्ति, शॉट चयन की तकनीक, धैर्य और मानसिक एकाग्रता की वास्तविक परीक्षा होती है। टेस्ट क्रिकेट में एक-एक सत्र का खेल और पिचों का बदलता मिजाज खिलाड़ी के चरित्र का निर्माण करता है। इसी कारण से जवागल श्रीनाथ का मानना है कि पारंपरिक लाल गेंद का क्रिकेट ही किसी भी क्रिकेटर की क्षमता का असली मानदंड है।

## वैभव सूर्यवंशी की उपलब्धि और बढ़ते कदम
जवागल श्रीनाथ की यह नसीहत आधुनिक भारतीय क्रिकेट की सबसे चर्चित और उभरती हुई प्रतिभा बिहार के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के संदर्भ में और भी प्रासंगिक हो जाती है। बिहार के इस होनहार खिलाड़ी ने बेहद कम उम्र में अपने बल्ले से ऐसा तहलका मचाया है कि हर कोई उनकी प्रतिभा का कायल हो गया है। महज 14 साल की उम्र में फर्स्ट क्लास क्रिकेट की दुनिया में कदम रखने वाले वैभव सूर्यवंशी ने अपनी आक्रामक और निडर बल्लेबाजी शैली से बेहद कम समय में कई बड़े मुकाम हासिल कर लिए हैं। रणजी ट्रॉफी और भारत के विभिन्न घरेलू टूर्नामेंटों में उनके नाम कई शानदार पारियां दर्ज हैं, जहां उन्होंने न केवल अपनी विस्फोटक क्षमता बल्कि मजबूत तकनीक का भी परिचय दिया है।

घरेलू क्रिकेट में अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल जैसे विश्व के सबसे बड़े फ्रेंचाइजी मंच पर भी अपनी धमाकेदार उपस्थिति दर्ज कराई है। टी-20 क्रिकेट में उनके आक्रामक तेवर ने यह साबित कर दिया है कि वे आधुनिक दौर के सबसे खतरनाक और प्रतिभाशाली युवा बल्लेबाजों में शामिल हैं। हालांकि, इतनी कम उम्र में मिली अपार सफलता और लोकप्रियता के बीच जवागल श्रीनाथ की यह चेतावनी वैभव जैसे रिकॉर्डधारी युवा खिलाड़ियों के लिए एक महत्त्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करती है। आईपीएल की चकाचौंध और त्वरित स्टारडम के बीच अपने फर्स्ट क्लास और लाल गेंद के क्रिकेट के सफर को प्राथमिकता देना ही वैभव सूर्यवंशी के करियर की लंबी उम्र की सबसे बड़ी गारंटी साबित होगा।

## लंबे करियर और स्थायित्व के लिए टेस्ट क्रिकेट का आधार जरूरी
यदि कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 10 से 15 साल का लंबा और सफल करियर बनाना चाहता है, तो उसे अपने खेल का मुख्य आधार टेस्ट क्रिकेट को ही बनाना पड़ेगा। जवागल श्रीनाथ ने इस बात पर विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया कि शॉर्ट फॉर्म क्रिकेट में ग्लैमर और त्वरित पैसा बहुत अधिक है, जिसके कारण आज की युवा पीढ़ी स्वाभाविक रूप से इसकी ओर तेजी से आकर्षित हो रही है। परंतु छोटे प्रारूपों की सबसे बड़ी सच्चाई यह भी है कि इनमें खिलाड़ियों का चयन जितनी जल्दी और आसानी से होता है, प्रदर्शन में थोड़ी सी गिरावट आने पर उन्हें उतनी ही तेजी से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया जाता है। ऐसे में किसी भी खिलाड़ी के करियर को स्थायित्व और सुरक्षा केवल पारंपरिक लाल गेंद के क्रिकेट से ही मिल सकती है।

शॉर्ट फॉर्मेट में खिलाड़ियों का रोटेशन बहुत तेजी से होता है और नई प्रतिभाओं का आगमन पुरानी प्रतिभाओं को जल्द ही हाशिए पर धकेल देता है। इसके विपरीत, जो खिलाड़ी फर्स्ट क्लास और टेस्ट क्रिकेट में निरंतर अच्छा प्रदर्शन करते हैं, उनकी तकनीकी नींव इतनी मजबूत हो जाती है कि चयनकर्ता और टीम प्रबंधन उन पर हमेशा भरोसा बनाए रखते हैं। वैभव सूर्यवंशी जैसे युवाओं के लिए यह बात समझना अनिवार्य है कि त्वरित सफलता से प्राप्त हुआ स्टारडम क्षणिक हो सकता है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में दर्ज की गई उपलब्धियां इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए अमर हो जाती हैं।

## अभिभावकों, कोच और क्रिकेट एसोसिएशनों की जिम्मेदारी
अपने संबोधन के दौरान जवागल श्रीनाथ ने केवल खिलाड़ियों को ही नहीं, बल्कि खेल के पूरे इकोसिस्टम को सचेत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि माता-पिता, व्यक्तिगत कोच और राज्य क्रिकेट एसोसिएशनों की यह सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि वे उभरते हुए खिलाड़ियों को सही दिशा दिखाएं। जब युवा खिलाड़ी शुरुआती उम्र में ही ग्लैमर और व्यावसायिक प्रलोभनों के प्रभाव में आने लगते हैं, तब उनके मार्गदर्शकों का यह कर्तव्य बन जाता है कि वे उन्हें लाल गेंद के क्रिकेट का महत्त्व समझाएं। इंदौर के इस कार्यक्रम के माध्यम से श्रीनाथ ने क्रिकेट प्रशासकों से भी अपील की कि वे ऐसे कार्यक्रम और अवसंरचना विकसित करें जिससे युवा खिलाड़ी फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित हों।

वैभव सूर्यवंशी जैसे अद्भुत प्रतिभाशाली बल्लेबाजों के लिए श्रीनाथ का यह संदेश एक स्पष्ट कंपास की तरह कार्य करता है। वैभव के शॉट्स में टाइमिंग, ताकत और निडरता का अद्भुत संगम है, लेकिन मॉडर्न क्रिकेट के शोरगुल और टी-20 के दबाव के बीच अपनी स्वाभाविक तकनीक को तराशने के लिए रणजी ट्रॉफी और लंबे फॉर्मेट के मैचों से दूरी नहीं बनाई जा सकती। यदि वैभव और उनके समकालीन युवा खिलाड़ी इस महान गेंदबाज की सलाह को अपने जीवन में उतार लेते हैं, तो वे न केवल आईपीएल के जगमगाते सितारे बने रहेंगे, बल्कि भारतीय क्रिकेट के महान इतिहास में अपना नाम एक दिग्गज खिलाड़ी के रूप में दर्ज कराने में सफल होंगे।

## इसका आप पर असर
यह समाचार युवा क्रिकेटरों, उनके अभिभावकों और खेलप्रेमियों के लिए महत्त्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रस्तुत करता है।

- **भारत में:** उभरते खिलाड़ियों को आईपीएल के ग्लैमर के साथ-साथ पारंपरिक टेस्ट और रणजी ट्रॉफी क्रिकेट पर ध्यान देने की प्रेरणा मिलती है। इससे क्रिकेट की बुनियादी तकनीक और मानसिक सहनशक्ति मजबूत होती है।
- **इंदौर और मध्य प्रदेश में:** MPCA द्वारा आयोजित ऐसे सत्र स्थानीय युवा प्रतिभाओं और अकादमियों के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करते हैं।
- **युवा एथलीटों के लिए:** 10 से 15 साल के लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर के निर्माण के लिए लाल गेंद के क्रिकेट को आधार बनाने का स्पष्ट संदेश मिलता है।
- **अभिभावकों और कोचों के लिए:** बच्चों को केवल शार्ट-टर्म कमर्शियल सफलता के बजाय दीर्घकालिक तकनीकी मजबूती की ओर मोड़ने का मार्गदर्शन प्राप्त होता है।

## सवाल-जवाब

### 1. इंदौर में जवागल श्रीनाथ ने क्रिकेट को लेकर क्या मुख्य सलाह दी?
जवागल श्रीनाथ ने कहा कि क्रिकेट को बेचा नहीं जाना चाहिए बल्कि सिखाया जाना चाहिए, और टेस्ट क्रिकेट ही खेल की असली आत्मा तथा 'मदर ऑफ क्रिकेट' है।

### 2. वैभव सूर्यवंशी कौन हैं और उनका क्या रिकॉर्ड रहा है?
वैभव सूर्यवंशी बिहार के युवा बल्लेबाज हैं जिन्होंने महज 14 साल की उम्र में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखा और रणजी ट्रॉफी तथा आईपीएल में आक्रामक बल्लेबाजी से पहचान बनाई।

### 3. जवागल श्रीनाथ के अनुसार लंबे करियर के लिए क्या जरूरी है?
श्रीनाथ के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 10 से 15 साल का लंबा करियर बनाने के लिए टेस्ट क्रिकेट और लाल गेंद के प्रारूप को अपना मुख्य आधार बनाना अनिवार्य है।

### 4. शॉर्ट फॉर्मेट क्रिकेट के साथ क्या चुनौती जुड़ी हुई है?
शॉर्ट फॉर्मेट में खिलाड़ियों का चयन जितनी जल्दी होता है, फॉर्म में गिरावट आने पर उनका रोटेशन और बाहर होना भी उतनी ही तेजी से होता है।

### 5. यह कार्यक्रम कहां और किसके द्वारा आयोजित किया गया था?
यह कार्यक्रम इंदौर में मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (MPCA) द्वारा सीजन अवार्ड 2025-26 के अवसर पर आयोजित किया गया था।

## प्रेरणा और सबक
वैभव सूर्यवंशी जैसी युवा प्रतिभाओं और जवागल श्रीनाथ की सीख से मिलने वाले मुख्य संदेश:

- **बुनियाद मजबूत रखें:** किसी भी क्षेत्र में त्वरित सफलता के बावजूद अपने मूल आधार और बुनियादी सिद्धांतों से कभी दूर न हों।
- **दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाएं:** तात्कालिक चकाचौंध के स्थान पर 10 से 15 वर्षों की सतत सफलता पर ध्यान केंद्रित करें।
- **अनुशासन और धैर्य:** कठिन परिस्थितियों और लंबे प्रारूपों में खुद को तपाकर ही स्थायी पहचान बनाई जा सकती है।
- **मार्गदर्शकों की बात समझें:** अनुभवी दिग्गजों की सलाह को कंपास मानकर करियर का सही मार्ग चुनें।

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