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  "title": "जब 30 रन के एक ओवर ने हिला दिया था ईशांत शर्मा का करियर, डिप्रेशन से यूं बाहर लाई थीं प्रतिमा सिंह",
  "summary": "साल 2013 के एक मैच में एक ओवर में 30 रन खाने के बाद तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा गहरे डिप्रेशन में चले गए थे। तब उनकी तत्कालीन मंगेतर और अब पत्नी प्रतिमा सिंह ने उन्हें संभाला और खेल के नजरिए से बाहर निकलकर दोबारा मुकाम हासिल करने की प्रेरणा दी।",
  "content": "भारतीय क्रिकेट के सफर में कई ऐसे मुकाबले आते हैं जो किसी खिलाड़ी की तकदीर हमेशा के लिए बदल देते हैं। कुछ शामें जीत के सुनहरे पन्ने लिखती हैं, तो कुछ ऐसी यादें छोड़ जाती हैं जो खिलाड़ी को भीतर तक झकझोर देती हैं। ऐसा ही एक दौर तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा की जिंदगी में भी आया था, जिसने उनके खेल और मानसिक स्थिति दोनों पर गहरा असर डाला था।\n\nएक खास मीडिया इंटरव्यू के दौरान अपने करियर के सबसे बुरे दौर को याद करते हुए ईशांत शर्मा ने बताया कि वह वाकया साल 2013 का था। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक रोमांचक मुकाबला खेला जा रहा था और टीम इंडिया जीत के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी थी। कंगारू टीम को आखिरी तीन ओवरों में जीत के लिए 44 रनों की दरकार थी। मैदान पर तनाव का माहौल था और कप्तान ने जिम्मेदारी सौंपते हुए गेंद ईशांत शर्मा को थमा दी।\n\nउस रात किस्मत ने कुछ और ही तय कर रखा था। क्रीज पर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज जेम्स फॉकनर मौजूद थे। ईशांत ने गेंदबाजी शुरू की, लेकिन फॉकनर ने उनके उसी ओवर में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए 30 रन बटोर लिए। मुट्ठी में नजर आ रहा मुकाबला चंद पन्नों की तरह पलट गया और भारत मैच हार गया। इस पराजय का पूरा ठीकरा ईशांत शर्मा के सिर पर फूट पड़ा।\n\nमैदान की इस असफलता ने ईशांत को मानसिक तौर पर पूरी तरह तोड़ दिया। वह सिर्फ एक-दो दिन नहीं, बल्कि पूरे 15 दिनों तक अपने कमरे में बंद रहे और लगातार रोते रहे। खेल के प्रति उनका लगाव ही उस समय उनके मानसिक तनाव की सबसे बड़ी वजह बन गया था। उनके जहन में बार-बार वही ओवर और फॉकनर के शॉट घूमते रहते थे, जिससे वह गहरे अवसाद में चले गए।\n\nइस अंधेरे वक्त में उनकी तत्कालीन मंगेतर और वर्तमान पत्नी प्रतिमा सिंह ने ढाल बनकर उनका साथ दिया। एक खिलाड़ी होने के नाते प्रतिमा खेल की विभीषिका और उसके दबाव को अच्छे से जानती थीं। उन्होंने ईशांत को ढांढस बंधाया और एक ऐसी सीख दी जिसने उनका पूरा दृष्टिकोण बदल दिया। प्रतिमा ने उनसे कहा कि खेल को जिंदगी पर हावी न होने दें।\n\nपत्नी के इन दो टूक शब्दों ने ईशांत के भीतर नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने आंसू पोछे और खुद को मैदान पर साबित करने की ठानी। अपनी कमियों पर काम करते हुए उन्होंने कड़ी मेहनत की और शानदार वापसी की। इसके बाद उन्होंने अपनी गेंदबाजी के दम पर इतिहास रचा और भारत के लिए 100 से अधिक टेस्ट मैच खेलने वाले चुनिंदा तेज गेंदबाजों की फेहरिस्त में अपना नाम दर्ज कराया।\n\nइसका आप पर असर\nयह कहानी दर्शाتی है कि किस प्रकार पेशेवर खेलों में मिलने वाली असफलताएं और लोगों की उम्मीदें किसी भी खिलाड़ी के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकती हैं।\n\n• मानसिक स्वास्थ्य: अत्यधिक दबाव और सार्वजनिक आलोचना खिलाड़ियों के मानसिक संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।\n• परिवार का सहयोग: कठिन समय में जीवनसाथी या परिवार का संबल मानसिक अवसाद से बाहर निकलने में सबसे बड़ी ताकत बनता है।\n• कमबैक की राह: असफलता से हार मानने के बजाय गलतियों से सीखकर दोबारा कड़ी मेहनत करने से सफलता हासिल की जा सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह घटना एक खास मैच के दौरान मैदान पर दबाव और रणनीतिक असफलताओं के कारण घटी।\n\n• अचानक पलटा मैच: आखिरी ओवरों में अत्यधिक रन लुटाने के कारण भारत जीता हुआ मुकाबला हार गया।\n• मानसिक दबाव: देश की उम्मीदों और टीम की मेहनत पर असर पड़ने का बोझ खिलाड़ी सहन नहीं कर पाया।\n• अकेलापन: हार के बाद नकारात्मक विचारों के बीच लंबे समय तक अकेले रहने से स्थिति डिप्रेशन में बदल गई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ईशांत शर्मा किस वर्ष डिप्रेशन में चले गए थे?\nईशांत शर्मा साल 2013 में डिप्रेशन का शिकार हुए थे।\n\n2. किस बल्लेबाज ने ईशांत के एक ओवर में 30 रन बनाए थे?\nऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज जेम्स फॉकनर ने ईशांत के एक ओवर में 30 रन बटोरे थे।\n\n3. ईशांत शर्मा लगातार कितने दिनों तक कमरे में रोते रहे थे?\nईशांत शर्मा लगातार 15 दिनों तक अपने कमरे में बंद होकर रोते रहे थे।\n\n4. इस मुश्किल दौर से बाहर निकलने में किसने मदद की थी?\nउनकी तत्कालीन मंगेतर और वर्तमान पत्नी प्रतिमा सिंह ने उन्हें इस मानसिक तनाव से बाहर निकाला था।\n\n5. ईशांत शर्मा ने भारत के लिए कितने टेस्ट मैच खेले हैं?\nईशांत शर्मा ने भारत के लिए 100 से अधिक टेस्ट मैच खेले हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\nईशांत शर्मा के जीवन का यह अध्याय संघर्ष से पार पाने और मानसिक मजबूती का बड़ा संदेश देता है।\n\n• गलतियों से सीख: किसी भी बड़ी असफलता को अंत मानने के बजाय उससे सीखकर खुद को बेहतर बनाएं।\n• मानसिक दृढ़ता: खराब दौर में अपनों की सलाह सुनें और नकारात्मकता को अपने ऊपर हावी न होने दें।\n• कड़ी मेहनत: सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, केवल निरंतर अभ्यास ही आपको मुकाम तक पहुंचाता है।",
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  "category": "क्रिकेट",
  "publishedAt": "2026-09-18",
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    "ईशांत शर्मा",
    "प्रतिमा सिंह",
    "भारतीय क्रिकेट",
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