{
  "type": "article",
  "title": "जब 60 ओवर के मैच में बने सिर्फ 36 रन, गावस्कर की 174 गेंदों वाली पारी आज भी हैरान करती है",
  "summary": "साल 1975 के विश्व कप में इंग्लैंड के 334 रनों के जवाब में सुनील गावस्कर ने 174 गेंदें खेलकर सिर्फ 36 रन बनाए थे, जिसे वनडे की सबसे धीमी पारियों में गिना जाता है।",
  "content": "आज के दौर में सीमित ओवरों के क्रिकेट में जब बल्लेबाज क्रीज पर उतरते हैं, तो दर्शकों की नजरें तेज तर्रार अर्धशतक या सबसे तेज शतक के नए कीर्तिमानों पर टिकी होती हैं। आक्रामक बल्लेबाजी और बड़े स्कोर आधुनिक एकदिवसीय क्रिकेट की पहचान बन चुके हैं। लेकिन इस प्रारूप के पन्नों में एक ऐसा मुकाबला भी दर्ज है, जिसे क्रिकेट इतिहास की सबसे सुस्त बल्लेबाजी के रूप में याद किया जाता है और शायद कोई भी आधुनिक बल्लेबाज अपने करियर में ऐसा रिकॉर्ड नहीं देखना चाहेगा।\n\n1975 विश्व कप का वह मुकाबला जब थम गई थी रनों की रफ्तार\nयह वाकया साल 1975 के पहले एकदिवसीय विश्व कप का है, जब भारतीय टीम का सामना इंग्लैंड से लंदन के मैदान पर हुआ था। उस दौर में आज की तरह बल्लेबाजों का आकलन सिर्फ उनके ऊंचे स्ट्राइक रेट से नहीं होता था, लेकिन इस मुकाबले में जो देखने को मिला उसने सभी को चौंका दिया। भारत के दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने पूरे मैच के दौरान क्रीज संभाली रखी, मगर रनों की गति बेहद धीमी रही। उन्होंने अपनी इस पारी के दौरान केवल 20.68 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए, जो वनडे क्रिकेट के इतिहास में दर्ज सबसे धीमी पारियों में शामिल हो गया।\n\n174 गेंदों का सामना और स्कोरबोर्ड पर नाबाद 36 रन\nलंदन में खेले गए इस मुकाबले में मेजबान इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 60 ओवरों में 4 विकेट खोकर 334 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था। उस जमाने में 335 रनों के लक्ष्य को हासिल करना बेहद कठिन माना जाता था। बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की ओर से सुनील गावस्कर ओपनिंग करने आए और अंत तक आउट नहीं हुए। उन्होंने कुल 174 गेंदों का सामना किया और महज 36 रन बनाकर नाबाद रहे। भारत की पूरी टीम 60 ओवरों की समाप्ति पर 3 विकेट के नुकसान पर सिर्फ 132 रन ही जोड़ सकी। नतीजतन, इंग्लैंड ने यह एकदिवसीय मैच 202 रनों के बड़े अंतर से अपने नाम कर लिया।\n\nमैदान पर उस धीमी बल्लेबाजी के पीछे की मुख्य वजहें\nक्रिकेट विश्लेषकों और खुद सुनील गावस्कर के नजरिए से देखें तो इस तरह की पारी किसी भी बल्लेबाज को पसंद नहीं आ सकती। उस समय एकदिवसीय प्रारूप बिल्कुल नया था और मुकाबले 60-60 ओवरों के होते थे। खिलाड़ियों को इस फॉर्मेट का खास अनुभव नहीं था, इसलिए ज्यादातर बल्लेबाज टेस्ट क्रिकेट वाली मानसिकता के साथ ही मैदान में उतरते थे।\n\nइंग्लैंड के 334 रनों के भारी भरकम स्कोर के सामने भारतीय टीम को यह लक्ष्य लगभग नामुमकिन लगने लगा था। ऐसे में गावस्कर ने क्रीज पर ज्यादा से ज्यादा समय बिताने और मुकाबले को अभ्यास मैच की तरह खेलने का फैसला किया ताकि वे अपनी लय वापस पा सकें। इसके साथ ही, उस समय वह अपनी खराब फॉर्म से भी जूझ रहे थे, जिसके चलते उन्होंने जोखिम उठाने के बजाय सिर्फ विकेट बचाए रखने पर ध्यान दिया।\n\nइसका आप पर असर\nयह ऐतिहासिक घटना क्रिकेट प्रेमियों और युवा खिलाड़ियों को खेल के प्रारूप और रणनीति के बड़े बदलावों को समझने का मौका देती है।\n\n• क्रिकेट प्रशंसकों के लिए: यह मुकाबला दिखाता है कि सीमित ओवरों का खेल बीते दशकों में कितना बदल चुका है। 1975 के 60 ओवरों वाले खेल और आज के आक्रामक टी20 और वनडे प्रारूप के बीच का अंतर इससे साफ समझा जा सकता है।\n• युवा बल्लेबाजों के लिए: मैच की परिस्थितियों के अनुसार गति तय करना आज की सबसे बड़ी मांग है। टेस्ट शैली में खेलने के बजाय आधुनिक मैचों में लक्ष्य के मुताबिक स्ट्राइक रोटेट करना जरूरी होता है।\n• रिकॉर्ड ट्रैकर्स के लिए: 174 गेंदों में 36 रनों की यह पारी वनडे इतिहास की सबसे धीमी पारियों में शीर्ष पर दर्ज है। आज के दौर में 20.68 के स्ट्राइक रेट से पूरे 60 ओवर तक बल्लेबाजी देखना असंभव जैसा है।\n• क्रिकेट रणनीतिकारों के लिए: बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय शुरुआत से ही योजनाबद्ध आक्रमण कितना जरूरी है, यह मैच उसका बड़ा सबक है। बिना जोखिम उठाए रक्षात्मक रवैया अपनाने से केवल हार का अंतर बढ़ता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह असामान्य पारी नए प्रारूप की समझ की कमी, विशाल लक्ष्य और खराब व्यक्तिगत फॉर्म के मेल के कारण देखने को मिली थी।\n\n• नया प्रारूप और टेस्ट मानसिकता: साल 1975 में एकदिवसीय क्रिकेट अपनी शुरुआती अवस्था में था और मुकाबले 60 ओवर के होते थे। उस समय खिलाड़ी वनडे को टेस्ट क्रिकेट की तरह ही संभलकर खेलने के आदी थे।\n• असंभव सा लगने वाला लक्ष्य: इंग्लैंड ने पहले खेलते हुए 334 रन बनाए, जिसे उस समय हासिल करना नामुमकिन माना जा रहा था। इस दबाव के चलते टीम ने जीतने का प्रयास करने के बजाय विकेट बचाने को प्राथमिकता दी।\n• अभ्यास और खराब फॉर्म: सुनील गावस्कर उस समय अपनी खराब फॉर्म से जूझ रहे थे। उन्होंने इस मैच को आउट होने से बचने और नेट प्रैक्टिस की तरह क्रीज पर टिके रहने के मौके के तौर पर इस्तेमाल किया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सुनील गावस्कर ने इंग्लैंड के खिलाफ 1975 में कितने रन बनाए थे?\nउन्होंने 174 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 36 रन बनाए थे।\n\n2. उस मैच में इंग्लैंड ने कितना स्कोर खड़ा किया था?\nइंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 60 ओवरों में 4 विकेट खोकर 334 रन बनाए थे।\n\n3. इस मुकाबले में भारतीय टीम का अंतिम स्कोर क्या रहा?\nभारतीय टीम ने 60 ओवर खेलकर 3 विकेट के नुकसान पर 132 रन बनाए।\n\n4. इंग्लैंड ने यह मुकाबला कितने रनों से जीता था?\nइंग्लैंड ने यह एकदिवसीय मैच 202 रनों के बड़े अंतर से जीता था।\n\n5. गावस्कर की इस पारी का स्ट्राइक रेट क्या था?\nगावस्कर का स्ट्राइक रेट उस पारी में महज 20.68 का रहा था।",
  "url": "https://trendkia.com/cricket/jaba-60-ovara-ke-maicha-men-bane-sirpha-36-rana-gavaskar-ki-174-gendon-vali-pari-aja-bhi-hairana-karati-hai-42946",
  "category": "क्रिकेट",
  "publishedAt": "2026-10-04",
  "tags": [
    "सुनील गावस्कर",
    "विश्व कप 1975",
    "वनडे क्रिकेट",
    "क्रिकेट रिकॉर्ड",
    "भारतीय क्रिकेट"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}