जंतर-मंतर पर रोक के खिलाफ बोले संजय मांजरेकर तो भड़के इंटरनेट यूजर्स, विदेश जाकर कमेंट्री करने की दी नसीहत दिल्ली में विरोध प्रदर्शन रोकने और गिरफ्तारियों पर सवाल उठाने के बाद पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर को डिजिटल मंचों पर तीखी प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ रहा है. राष्ट्रीय राजधानी में एक राजनीतिक संगठन के जमावड़े को रोके जाने और धरपकड़ अभियान के बाद उपजा विवाद अब खेल जगत की चर्चित हस्तियों तक पहुंच गया है. पूर्व भारतीय क्रिकेटर और वर्तमान कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने जब नागरिकों के शांतिपूर्वक अपनी बात रखने के अधिकार की वकालत की, तो सोशल मीडिया मंचों पर तीखी बहस छिड़ गई. कई लोगों ने उनकी राय पर गहरी नाराजगी जताते हुए उन्हें देश छोड़कर अन्यत्र काम तलाशने की सलाह तक दे डाली. चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप और जंतर-मंतर पर जमावड़े की योजना इस पूरे सियासी तनाव का केंद्र बिंदु शनिवार को आयोजित होने वाला एक विरोध मार्च था. कॉकरोच जनता पार्टी नामक दल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार के इस्तीफे की मांग उठाते हुए दिल्ली के ऐतिहासिक स्थल पर 'जंतर मंतर 2.0' कार्यक्रम की घोषणा की थी. संगठन का दावा था कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की पूरी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली बरती गई. अपने इस अभियान को पारदर्शी व निष्पक्ष मतदान प्रणाली की रक्षा के तौर पर पेश करते हुए पार्टी ने समर्थकों को जुटने का न्योता दिया था. प्रशासन की नामंजूरी और सुरक्षा इंतजाम आंदोलन की तैयारियों के बीच कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने आयोजन को हरी झंडी देने से साफ मना कर दिया. दिल्ली पुलिस का तर्क था कि इतने बड़े जमावड़े से आम नागरिकों की आवाजाही ठप हो सकती है, प्रमुख मार्गों पर जाम की स्थिति बन जाएगी और शांति व्यवस्था भंग होने का गंभीर खतरा पैदा होगा. मंजूरी खारिज होने के बावजूद जब कार्यकर्ताओं के पहुंचने की संभावना बनी, तो राजधानी के प्रवेश द्वारों और संवेदनशील चौराहों पर भारी सुरक्षा दस्ते तैनात कर दिए गए. चप्पे-चप्पे पर पहरा बिठाया गया, लोहे के अवरोधक खड़े किए गए और बाहर से आने वाले वाहनों की सघन तलाशी ली गई. डिजिटल मंच पर क्रिकेटर की टिप्पणी और तीखा विरोध सड़कों पर पुलिसिया सख्ती शुरू होते ही संजय मांजरेकर ने डिजिटल मंच एक्स पर अपनी असहमति जाहिर की. उन्होंने लिखा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाना हर नागरिक का लोकतांत्रिक हक है और जहां तक उन्हें याद है भारत एक लोकतंत्र है. उनके इस कथन के आते ही नेटिज़न्स के एक बड़े तबके ने उन पर निशाना साधना शुरू कर दिया. आलोचकों ने कहा कि जब राजधानी की शांति को खतरा हो तब ऐसी वकालत बेमानी है. इसी सिलसिले में मिस्टर सिन्हा नाम के एक यूजर ने तीखे शब्दों में कहा कि यदि उन्हें देश का माहौल लोकतांत्रिक नहीं लगता तो वे यहां से जाकर किसी दूसरे मुल्क में अपनी आवाज दें. यूजर ने यह तंज भी कसा कि वे घरेलू क्रिकेट ढांचे से कमाई करने के बावजूद निरंतर भारतीय दल की नुक्ताचीनी में लगे रहते हैं. कुछ ही घंटों में मांजरेकर के पोस्ट पर दर्जनों तल्ख टिप्पणियां जमा हो गईं, जहां उनके क्रिकेट करियर से लेकर उनकी व्यक्तिगत निष्ठा पर सवाल दागे गए. हवाई सफर के दौरान नोकझोंक और बड़े पैमाने पर हिरासत जमीन पर पुलिस का शिकंजा काफी व्यापक रहा. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर सुरक्षाबलों ने अलग-अलग इलाकों से कुल 1,500 से अधिक लोगों को ऐहतियातन अपनी कस्टडी में ले लिया. इस कार्रवाई की जद में संगठन के शीर्ष चेहरे भी आए. सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक सौरव दास और प्रमुख नेता आशुतोष रांका को दिल्ली की सीमा में कदम रखते ही रोक लिया गया. अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी से ठीक पहले का एक दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ, जो एक विमान के भीतर रिकॉर्ड किया गया था. वीडियो क्लिप में वे सामने खड़े वर्दीधारियों से उलझते और निडरता का दावा करते हुए कहते दिखे, "चलो, हमें गिरफ्तार करो!" उन्होंने प्रशासनिक बंदिशों को सत्ता की मनमानी बताते हुए वरिष्ठ पुरुष अधिकारियों को सामने लाने की मांग रखी. इसके अतिरिक्त, जाने-माने यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी प्रस्तावित हलचल से पहले गुरुग्राम में उनके ठिकाने से पुलिस ने रोक लिया. आकाशवाणी भवन के पास हिंसक टकराव और चोटिल पुलिसकर्मी तमाम पाबंदियों और धरपकड़ के बावजूद सड़कों पर टकराव पूरी तरह नहीं टल सका. आकाशवाणी भवन के आसपास जुटे कुछ तत्वों और पुलिसकर्मियों के बीच कहासुनी के बाद पथराव शुरू हो गया. इस हंगामे के दौरान दो पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए. चोटिल जवानों में सब-इंस्पेक्टर बजरंग जाधव शामिल थे, जिन्होंने बताया कि उग्र भीड़ को काबू करने के दौरान उन्हें पीछे से धक्का दिया गया जिससे वे जमीन पर गिर पड़े और चोटिल हो गए. हालात बेकाबू होते देख अतिरिक्त बल मौके पर पहुंचा और पथराव में शामिल कई उपद्रवियों को तुरंत दबोच लिया गया. अधिकारों की सीमा और भविष्य की रणनीति टकराव के बावजूद कॉकरोच जनता पार्टी ने साफ किया है कि उसका अभियान थमेगा नहीं. संगठन के प्रवक्ताओं के मुताबिक वे चुनावी सूचियों में कथित हेराफेरी के मसले को उठाते रहेंगे. वहीं दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक नियंत्रण और नागरिकों की अभिव्यक्ति की सीमा पर एक बार फिर तीखा राष्ट्रीय विमर्श छेड़ दिया है. एक पक्ष जहां शांति व यातायात की सुरक्षा को किसी भी आंदोलन से ऊपर बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे विरोध की आवाज दबाने का प्रयास मान रहा है. इसका आप पर असर दिल्ली में राजनीतिक प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था की सख्ती से आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर सीधा असर पड़ता है. • भारत में: सार्वजनिक हस्तियों द्वारा राजनीतिक मुद्दों पर राय रखने से डिजिटल विमर्श ध्रुवीकृत होता है. आम नागरिकों को सोशल मीडिया पर संवेदनशील विषयों पर टिप्पणी करते समय साइबर ट्रोलिंग और कानूनी प्रक्रियाओं के प्रति सजग रहना चाहिए. • दिल्ली में: विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बैरिकेडिंग से मध्य दिल्ली में यात्रा करने वाले दैनिक यात्रियों को भारी जाम का सामना करना पड़ सकता है. लुटियंस दिल्ली और जंतर-मंतर के आसपास आने-जाने वाले लोगों को आधिकारिक ट्रैफिक एडवाइजरी देखकर ही अपने सफर की योजना बनानी चाहिए. • हवाई और रेल यात्रियों के लिए: राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा एजेंसियों के गहन चेकिंग अभियानों के चलते एयरपोर्ट और प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर अतिरिक्त समय लग सकता है. दिल्ली की यात्रा करने वाले यात्रियों को सुरक्षा जांच को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त समय लेकर निकलना होगा. • चुनावी प्रक्रिया के लिहाज से: मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे उठने से आम मतदाताओं में जागरूकता बढ़ती है. नागरिकों को अपने निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में समय रहते अपना नाम और विवरण स्वयं सत्यापित कर लेना चाहिए. ऐसा क्यों हुआ यह पूरा विवाद एक राजनीतिक दल द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ छेड़े गए आंदोलन और उस पर प्रशासन द्वारा लगाए गए कड़े सुरक्षा प्रतिबंधों से उपजा है. • सीधे तौर पर विरोध का कारण: कॉकरोच जनता पार्टी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण में गंभीर धांधली की गई है. इसी आधार पर संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 'जंतर मंतर 2.0' प्रदर्शन का आह्वान किया था. • प्रशासनिक रोक की वजह: दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने, भारी ट्रैफिक जाम और सार्वजनिक सुरक्षा के जोखिमों का हवाला देते हुए कार्यक्रम की अनुमति देने से इनकार कर दिया था. इसके बावजूद कार्यकर्ताओं के जुटने की आशंका को देखते हुए 1,500 से अधिक लोगों को ऐहतियातन हिरासत में लिया गया. • मांजरेकर पर विवाद का कारण: पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने सोशल मीडिया पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन को नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाया था. इस टिप्पणी को कई यूजर्स ने गैर-जिम्मेदाराना माना और उन पर देश के खिलाफ बोलने का आरोप लगाते हुए विदेश जाकर कमेंट्री करने की नसीहत दे दी. सवाल-जवाब 1. संजय मांजरेकर को सोशल मीडिया पर क्यों ट्रोल किया जा रहा है? उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकार बताया था, जिससे नाराज यूजर्स ने उनकी आलोचना की. 2. कॉकरोच जनता पार्टी दिल्ली में किस मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही थी? पार्टी का आरोप था कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण में अनियमितताएं हुई हैं, और वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे. 3. दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार क्यों किया था? पुलिस ने सार्वजनिक सुरक्षा, भारी ट्रैफिक जाम की आशंका और कानून-व्यवस्था के बिगड़ने के खतरे का हवाला देते हुए अनुमति नहीं दी थी. 4. दिल्ली में कितने लोगों को हिरासत में लिया गया? सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने विभिन्न इलाकों से कुल 1,500 से अधिक लोगों को ऐहतियातन हिरासत में लिया. 5. किन प्रमुख नेताओं और हस्तियों को पुलिस ने हिरासत में लिया? सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और यूट्यूबर ध्रुव राठी को पुलिस ने हिरासत में लिया. 6. प्रदर्शन के दौरान हिंसा में कौन घायल हुआ? आकाशवाणी भवन के पास हुई झड़प और पथराव में सब-इंस्पेक्टर बजरंग जाधव सहित दो पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए. https://trendkia.com/cricket/jantar-mantar-para-roka-ke-khilapha-bole-sanjay-manjrekar-to-bharake-intaraneta-yujarsa-videsha-jakara-kamentri-karane-ki-di-nasih-46091 TrendKia — Har trend, sabse pehle.