# कनपटी पर स्मार्ट सेंसर लगाकर अभ्यास करते नजर आए शुभमन गिल, पीवी सिंधु के बाद क्रिकेट मैदान में पहुंची अनोखी तकनीक

> न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से पहले भारतीय कप्तान शुभमन गिल कनपटी पर 'टेंपल' नामक डिवाइस पहनकर अभ्यास करते दिखे, जो दिमाग में ऑक्सीजन और रक्त प्रवाह को मापता है।

**Type:** article · **Category:** क्रिकेट · **Published:** 2026-11-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/cricket/kanapati-para-smarta-sensara-lagakara-abhyasa-karate-najara-ae-shubman-gill-pv-sindhu-ke-bada-kriketa-maidana-men-pahunchi-anokhi--54951 · **Language:** Hindi
**Tags:** शुभमन गिल, टेंपल डिवाइस, दीपिंदर गोयल, पीवी सिंधु, स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी, बीसीसीआई, क्रिकेट फिटनेस, जीपीएस ट्रैकर

आधुनिक खेल जगत में तकनीक की मौजूदगी अब सिर्फ फैसलों और अंपायरिंग तक सीमित नहीं रह गई है। क्रिकेट की बाईस गज की पिच पर जहां पहले केवल खिलाड़ियों का कौशल और पारंपरिक फिटनेस मायने रखती थी, वहीं अब अत्याधुनिक सेंसर और वियरेबल्स ने खिलाड़ियों की दैनिक ट्रेनिंग का रूप पूरी तरह बदल दिया है। हॉकआई, स्नीकोमीटर और थर्ड अंपायर जैसे साधन पहले से ही मैचों का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं, मगर अब व्यक्तिगत बायोमेट्रिक गैजेट्स सीधे खिलाड़ियों के शरीर से जुड़कर उनके प्रदर्शन को निखारने का काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान शुभमन गिल न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली आगामी एकदिवसीय श्रृंखला की तैयारियों के दौरान अपनी कनपटी पर एक अनोखा उपकरण लगाए हुए नजर आए हैं।

## पीवी सिंधु के बाद क्रिकेट में पहुंची नई तकनीक
इस विशेष वियरेबल गैजेट का नाम 'टेंपल' है। इसे सबसे पहले भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु ने कोर्ट पर अपने अभ्यास के दौरान उपयोग में लाया था। अब बैडमिंटन के बाद क्रिकेट के गलियारों में भी इसका प्रवेश हो चुका है, जहां शुभमन गिल नेट सत्र में इसे पहने दिखाई दिए। इस तकनीकी नवाचार को ज़ोमैटो के संस्थापक दीपिंदर गोयल ने विकसित किया है। यह उपकरण हाल के दिनों में पेशेवर एथलीटों के बीच तेजी से चर्चा बटोर रहा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि गिल की पहल के बाद आने वाले वक्त में कई अन्य भारतीय क्रिकेटर और विभिन्न खेलों के पेशेवर खिलाड़ी भी अपनी ट्रेनिंग का स्तर बेहतर करने के लिए इस दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।

## कनपटी पर लगने वाला सेंसर कैसे करता है काम
आकार में बेहद कॉम्पैक्ट दिखने वाले इस डिवाइस को सीधे सिर के पार्श्व हिस्से यानी कनपटी पर चिपकाया जाता है। इसका मुख्य कार्य मस्तिष्क में रक्त संचार और ऑक्सीजन के स्तर की वास्तविक समय में निगरानी करना है। तकनीकी रूप से यह उपकरण नियर-इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक के सहारे काम करता है, जो दिमाग में ऑक्सीजन की सांद्रता को भांपकर मस्तिष्क के रक्त प्रवाह का सटीक अनुमान लगाती है।

दीपिंदर गोयल के अनुसार यह प्रणाली 1 से 250 के पैमाने पर एक लाइव स्कोर प्रदान करती है। इस रीडिंग में 1 का अंक गहन मानसिक विश्राम और शांति को दर्शाता है, जबकि 250 का स्तर किसी शीर्ष अंतरराष्ट्रीय एथलीट के चरम फोकस या 'पीक फ्लो' को प्रदर्शित करता है। फिलहाल यह उपकरण पूरी तरह प्रायोगिक चरण में है। इसे न तो अभी व्यावसायिक तौर पर आम बाजार में उतारा गया है और न ही इसे कोई मेडिकल प्रमाणीकरण हासिल हुआ है। भारत में इसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹72,000 से ₹80,000 के बीच बताई जा रही है, तथा साल 2026 के अंत से पहले इसके वितरण शुरू होने की संभावना जताई गई है।

## क्रिकेटरों के किट का पहले से हिस्सा हैं अन्य जीपीएस वियरेबल्स
भारतीय क्रिकेट टीम में हाई-टेक गैजेट्स का प्रयोग नया नहीं है। मैच और अभ्यास के दौरान खिलाड़ियों की जर्सी के पीछे पीठ के ऊपरी हिस्से पर अक्सर एक उभार नजर आता है, जो दरअसल एक GPS परफॉर्मेंस ट्रैकर होता है। खिलाड़ी इसे अपनी जर्सी के नीचे एक विशेष कम्प्रेशन स्पोर्ट्स वेस्ट के पिछले पॉकेट में पहनते हैं।

यह जीपीएस सिस्टम सपोर्ट स्टाफ और कंडीशनिंग कोचों को दौड़ने की गति, तय की गई दूरी, तीव्रता और शारीरिक थकावट का वास्तविक डेटा मुहैया कराता है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की टेक्नोलॉजी फर्मों STATSports और Catapult के साथ साझेदारी करके इसे अपनी राष्ट्रीय संरचना में अनिवार्य कर रखा है। टेस्ट, वनडे, टी20 और आईपीएल के भारी भरकम कैलेंडर के बीच चोटों से बचने और वर्कलोड मैनेजमेंट को सुचारू बनाए रखने के लिए यह तकनीक लंबे समय से अनिवार्य भूमिका निभा रही है। अब 'टेंपल' जैसे न्यूरो-ट्रैकिंग डिवाइस के जुड़ने से खिलाड़ियों की मानसिक सतर्कता को भी तकनीकी रूप से मापना संभव हो रहा है।

## इसका आप पर असर
खिलाड़ियों के प्रदर्शन को सुधारने वाली हाई-टेक तकनीकों का असर आने वाले समय में आम फिटनेस प्रेमियों और आधुनिक ट्रेनिंग उपकरणों के बाजार पर पड़ेगा।

- **आम उपभोक्ताओं के लिए:** यह न्यूरो-मॉनिटरिंग डिवाइस फिलहाल आम बाजार में उपलब्ध नहीं है और बिना मेडिकल सर्टिफिकेशन के केवल ट्रायल के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है। इसके 2026 के अंत से पहले ₹72,000 से ₹80,000 की अनुमानित कीमत पर आने की संभावना है, जिसका मतलब है कि सामान्य उपयोगकर्ताओं को इस तकनीक को व्यक्तिगत रूप से आजमाने के लिए अभी इंतजार करना होगा।
- **एथलीटों और खेल प्रेमियों के लिए:** पेशेवर खेलों में अब शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक एकाग्रता को भी मशीनों से मापा जाने लगा है। यदि यह तकनीक सफल रहती है, तो भविष्य में अकादमियों और क्लब स्तर पर भी मानसिक फोकस सुधारने के लिए ऐसे बायो-सेंसर ट्रेनिंग का हिस्सा बन सकते हैं।
- **क्रिकेट प्रशंसकों के लिए:** भारतीय खिलाड़ियों के वर्कलोड और फिटनेस की रियल-टाइम ट्रैकिंग से खिलाड़ियों को चोटों से बचाया जा सकेगा। आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के व्यस्त कैलेंडर के बीच प्रमुख खिलाड़ियों के चोटिल होने की संभावना कम होगी, जिससे टीम को मैदान पर पूरा फायदा मिलेगा।
- **घरेलू टेक इनोवेशन पर असर:** भारतीय टेक संस्थापकों द्वारा खेल क्षेत्र के लिए विकसित किए जा रहे अत्याधुनिक उपकरणों को बढ़ावा मिलेगा। इससे भारत में स्पोर्ट्स साइंस और वियरेबल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नए शोध और निवेश को बल मिल सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
भारतीय टीम के व्यस्त कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते मुकाबले के चलते खिलाड़ियों की शारीरिक और मानसिक क्षमता को अधिकतम स्तर पर बनाए रखना अनिवार्य हो गया है।

- **मानसिक दबाव का विश्लेषण:** क्रिकेट और बैडमिंटन जैसे उच्च-दबाव वाले खेलों में शांत चित्त और ध्यान केंद्रित रखना जीत की कुंजी है। टेंपल डिवाइस नियर-इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी के जरिए मस्तिष्क में ऑक्सीजन स्तर और ब्लड सर्कुलेशन मापकर खिलाड़ी की एकाग्रता का सटीक डेटा प्रदान करता है।
- **वर्कलोड और चोटों की रोकथाम:** तीनों अंतरराष्ट्रीय फॉर्मेट और आईपीएल के अत्यधिक व्यस्त शेड्यूल के कारण खिलाड़ियों के शरीर पर भारी थकान होती है। यही वजह है कि बीसीसीआई ने कैटापल्ट और स्टेटस्पोर्ट्स जैसी कंपनियों के जीपीएस ट्रैकिंग उपकरणों को पहले से अनिवार्य किया हुआ है।
- **तकनीकी नवाचार की शुरुआत:** ज़ोमैटो के संस्थापक दीपिंदर गोयल ने इस डिवाइस का आविष्कार किया, जिसे सबसे पहले बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने आजमाया था। गिल द्वारा इसे अभ्यास सत्र में अपनाने से यह साफ होता है कि शीर्ष खिलाड़ी अपने प्रदर्शन में मामूली सुधार के लिए भी नए तकनीकी विकल्पों का परीक्षण कर रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. शुभमन गिल अपनी कनपटी पर कौन सा उपकरण पहनकर अभ्यास कर रहे थे?
गिल 'टेंपल' नामक एक प्रायोगिक डिवाइस पहनकर अभ्यास कर रहे थे, जो मस्तिष्क में रक्त प्रवाह और ऑक्सीजन के स्तर को मापता है।

### 2. इस टेंपल डिवाइस का आविष्कार किसने किया है?
इस गैजेट का आविष्कार ज़ोमैटो के संस्थापक दीपिंदर गोयल ने किया है।

### 3. क्रिकेट से पहले किस भारतीय एथलीट ने इस डिवाइस का इस्तेमाल किया था?
गिल से पहले बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने बैडमिंटन कोर्ट पर इसका उपयोग किया था।

### 4. टेंपल डिवाइस किस तकनीक पर आधारित है और यह क्या मापता है?
यह नियर-इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक का उपयोग करके दिमाग की ऑक्सीजन का स्तर मापता है, जो मस्तिष्क के रक्त प्रवाह का संकेत देता है।

### 5. डिवाइस का 1 से 250 का पैमाना क्या दर्शाता है?
इस पैमाने पर 1 का अर्थ गहरा आराम या शांति है, जबकि 250 किसी शीर्ष खिलाड़ी की चरम एकाग्रता यानी पीक फ्लो स्थिति को दर्शाता है।

### 6. बाजार में इस डिवाइस की अनुमानित कीमत और उपलब्धता क्या होगी?
इसकी अनुमानित कीमत ₹72,000 से ₹80,000 बताई गई है और 2026 समाप्त होने से पहले इसकी शिपिंग शुरू होने की उम्मीद है।

### 7. क्रिकेटर अपनी जर्सी के नीचे पीठ पर कौन सा गैजेट पहनते हैं?
क्रिकेटर अपनी स्पोर्ट्स वेस्ट में एक GPS परफॉर्मेंस ट्रैकर पहनते हैं, जो उनकी फिटनेस और वर्कलोड का डेटा सपोर्ट स्टाफ को देता है।

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