खराब शुरुआत के बाद इतिहास रचने वाले छह क्रिकेट दिग्गज क्रिकेट जगत के छह महान बल्लेबाजों ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की बेहद निराशाजनक शुरुआत की थी, लेकिन बाद में अपने प्रदर्शन से खेल के इतिहास में अमर हो गए। क्रिकेट के गलियारों में यह कहावत अक्सर सुनाई देती है कि पहली छाप ही आखिरी छाप होती है, लेकिन खेल जगत के छह सबसे बड़े दिग्गजों ने इस धारणा को सिरे से खारिज कर दिया। सर डॉन ब्रैडमैन, सचिन तेंदुलकर, ब्रायन लारा, विराट कोहली, स्टीव स्मिथ और जो रूट ऐसे नाम हैं जिनके बिना आधुनिक क्रिकेट की कहानी अधूरी है। हैरान करने वाली बात यह है कि इन सभी महान खिलाड़ियों ने जब अंतरराष्ट्रीय मंच पर कदम रखा, तो उनका प्रदर्शन बेहद खराब रहा था और किसी बुरे सपने जैसा प्रतीत हुआ था। शुरुआती बाधाओं को पार करके वैश्विक क्रिकेट पर अपनी बादशाहत कायम करने वाले इन खिलाड़ियों का सफर उभरते हुए खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी सीख है। यह एक दिलचस्प इत्तेफाक है कि ये तमाम खिलाड़ी अपने पदार्पण मैच में कोई बड़ा कमाल नहीं दिखा पाए और सचिन तेंदुलकर को छोड़कर बाकी सभी की टीमों को उस मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। इस फेहरिस्त में जो रूट एकमात्र ऐसे बल्लेबाज रहे जिन्होंने अपने पहले मैच में अर्धशतक जरूर लगाया, लेकिन उन्हें भी आगे चलकर काफी संघर्ष करना पड़ा था। जब दिग्गजों के कदम पहले मैच में लड़खड़ाए क्रिकेट के इतिहास में सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज के तौर पर गिने जाने वाले सर डॉन ब्रैडमैन ने साल 1928 में इंग्लैंड के खिलाफ अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की थी। उस मुकाबले की पहली पारी में वह महज 18 रन बना सके और दूसरी पारी में तो उनके बल्ले से सिर्फ 1 रन निकला। हालात इतने बदतर थे कि ऑस्ट्रेलिया की उस मुकाबले में 675 रनों की भारी-भरकम हार के बाद सर डॉन ब्रैडमैन को प्लेइंग इलेवन से बाहर तक का रास्ता दिखा दिया गया था। ठीक ऐसी ही कहानी साल 1989 में महज 16 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाले सचिन तेंदुलकर के साथ भी दोहराई गई थी। पाकिस्तान के सियालकोट और कराची की खतरनाक पिचों पर वकार यूनिस और वसीम अकरम की रफ्तार भरी गेंदों के आगे सचिन केवल 15 रन ही बना पाए थे। सचिन तेंदुलकर ने बाद में खुद इस बात को स्वीकार किया था कि उस मैच के तुरंत बाद उन्हें ऐसा लगने लगा था कि उनका अंतरराष्ट्रीय करियर शुरू होने से पहले ही समाप्त हो चुका है। वेस्टइंडीज के महान खिलाड़ी ब्रायन लारा भी साल 1990 में पाकिस्तान के खिलाफ अपने पहले टेस्ट मैच की दूसरी पारी में सिर्फ 5 रन बनाकर आउट हो गए थे और क्रीज पर काफी असहज नजर आए थे। आधुनिक दौर के दिग्गज विराट कोहली ने साल 2008 में श्रीलंका के खिलाफ अपने वनडे करियर की शुरुआत की थी, जहां बतौर ओपनर मैदान पर उतरे विराट कोहली सिर्फ 12 रन बनाकर एलबीडब्ल्यू आउट हो गए थे। वहीं दूसरी तरफ, स्टीव स्मिथ ने साल 2010 में एक लेग स्पिनर के रूप में पाकिस्तान के खिलाफ अपना डेब्यू किया था और आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए पहली पारी में 1 रन जबकि दूसरी पारी में महज 12 रन ही बना पाए थे। जो रूट ने हालांकि साल 2012 में भारत के खिलाफ नागपुर के मैदान पर 73 रनों की संघर्षपूर्ण पारी खेली थी, लेकिन इसके तुरंत बाद उन्हें भी अपनी बल्लेबाजी तकनीक को लेकर लंबे वक्त तक जूझना पड़ा था। शुरुआती नाकामी के पीछे छिपे थे ये मुख्य कारण विशेष जानकारों के मुताबिक, इन दिग्गज खिलाड़ियों के शुरुआती दौर के खराब प्रदर्शन के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़ी वजहें जिम्मेदार थीं। घरेलू क्रिकेट के स्तर से अचानक अंतरराष्ट्रीय स्तर के मंच पर छलांग लगाने से मानसिक दबाव कई गुना बढ़ जाता है। बड़े स्टेडियम का भारी-भरकम माहौल और दुनिया भर के करोड़ों प्रशंसकों की उम्मीदें शुरुआत में नए खिलाड़ियों को काफी नर्वस कर देती हैं। इन सभी बल्लेबाजों को अपने करियर के शुरुआती चरण में ही वसीम अकरम, वकार यूनिस और चामिंडा वास जैसे खतरनाक गेंदबाजों का सामना करना पड़ा और पिचें भी बेहद कठिन थीं। इसके अलावा स्टीव स्मिथ जैसे खिलाड़ी को तो शुरुआत में एक गेंदबाज के तौर पर टीम में शामिल किया गया था, जिस वजह से वह अपनी असली बल्लेबाजी क्षमता को लंबे समय तक पहचान ही नहीं पाए थे। असफलताओं से सीखकर तय किया महानता का सफर असली महानता की परीक्षा तभी होती है जब कोई खिलाड़ी मैदान पर गिरकर दोबारा पूरी ताकत से उठता है। इन छह दिग्गजों ने अपनी पहली नाकामी को एक बड़े सबक के रूप में स्वीकार किया और खुद को साबित किया। सर डॉन ब्रैडमैन ने शानदार वापसी करते हुए 99.94 का अविश्वसनीय बल्लेबाजी औसत हासिल किया, सचिन तेंदुलकर ने शतकों का महाशतक पूरा किया और ब्रायन लारा ने टेस्ट क्रिकेट में 400 रनों की ऐतिहासिक पारी खेलकर नया मुकाम बनाया। इसके अलावा विराट कोहली, स्टीव स्मिथ और जो रूट ने आधुनिक क्रिकेट के फैब-4 में अपनी पुख्ता जगह बनाई। इन सभी खिलाड़ियों का यह प्रेरणादायक सफर यह साबित करता है कि खेल की शुरुआत चाहे कितनी भी फीकी और खराब क्यों न हो, अगर इरादे मजबूत हों और कड़ी मेहनत जारी रखी जाए तो अंजाम हमेशा ऐतिहासिक ही होता है। इसका आप पर असर खेल प्रेमियों और युवा खिलाड़ियों के लिए यह जानना जरूरी है कि शुरुआती नाकामी से करियर खत्म नहीं होता, बल्कि यह लंबी सफलता की नींव बन सकती है। • भारत में: खेल के मैदान पर संघर्ष कर रहे युवा एथलीटों को इससे यह सीख मिलती है कि खराब शुरुआत के बावजूद मानसिक दृढ़ता बनाए रखने से शीर्ष स्तर पर मुकाम हासिल किया जा सकता है। • खेल जगत में: यह तथ्य खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को यह समझाता है कि असफलताएं सफलता की यात्रा का एक स्वाभाविक हिस्सा होती हैं। ऐसा क्यों हुआ इन महान खिलाड़ियों के शुरुआती प्रदर्शन के खराब रहने के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर का भारी दबाव और शुरुआती दौर की तकनीकी चुनौतियां थीं। • मानसिक दबाव: घरेलू सर्किट से अचानक अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचने से खिलाड़ियों पर भारी मानसिक दबाव और उम्मीदों का बोझ आ जाता है। • कठिन गेंदबाजी आक्रमण: इन सभी दिग्गजों को अपने शुरुआती मुकाबलों में अपने दौर के सबसे घातक गेंदबाजों का सामना करना पड़ा था। • गलत भूमिका: स्टीव स्मिथ जैसे खिलाड़ियों को शुरुआती दौर में विशेषज्ञ बल्लेबाज की बजाय गेंदबाज के रूप में आजमाया गया था। सवाल-जवाब 1. सर डॉन ब्रैडमैन ने अपने टेस्ट डेब्यू में कुल कितने रन बनाए थे? सर डॉन ब्रैडमैन ने 1928 में इंग्लैंड के खिलाफ अपने टेस्ट डेब्यू की पहली पारी में 18 रन और दूसरी पारी में 1 रन बनाया था। 2. सचिन तेंदुलकर ने किस उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था? सचिन तेंदुलकर ने मात्र 16 साल की उम्र में 1989 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था। 3. विराट कोहली ने अपने डेब्यू वनडे मैच में कितने रन बनाए थे? विराट कोहली ने 2008 में श्रीलंका के खिलाफ अपने पहले वनडे मैच में बतौर ओपनर 12 रन बनाए थे और एलबीडब्ल्यू आउट हुए थे। 4. कौन सा बल्लेबाज अपने डेब्यू मैच में अर्धशतक लगाने में सफल रहा था? जो रूट एकमात्र ऐसे बल्लेबाज थे जिन्होंने अपने डेब्यू मैच में 73 रनों की जुझारू पारी खेली थी। 5. स्टीव स्मिथ ने अपने करियर की शुरुआत किस भूमिका में की थी? स्टीव स्मिथ ने 2010 में पाकिस्तान के खिलाफ अपने करियर की शुरुआत एक लेग स्पिनर के रूप में की थी। प्रेरणा और सबक सफलता और महानता हासिल करने के लिए इन दिग्गजों के सफर से कुछ मुख्य सबक सीखे जा सकते हैं। • विफलता से सीख: शुरुआती असफलताओं को कभी भी अपना अंत नहीं मानना चाहिए, बल्कि उन्हें भविष्य की सफलता का आधार बनाना चाहिए। • कड़ी मेहनत: तकनीक और खेल की कमियों को दूर करने के लिए लगातार अभ्यास और दृढ़ संकल्प बेहद जरूरी है। • मानसिक मजबूती: बड़े दबाव और आलोचनाओं के बीच अपने लक्ष्य पर अडिग रहना ही असली विजेता की पहचान है। https://trendkia.com/cricket/kharaba-shuruata-ke-bada-itihasa-rachane-vale-chhaha-kriketa-diggaja-29837 TrendKia — Har trend, sabse pehle.