# मेघालय क्रिकेट एसोसिएशन में प्रशासनिक खींचतान के चलते नगालैंड मैच से पहले बदली रणजी टीम

> मेघालय क्रिकेट एसोसिएशन में आंतरिक प्रशासनिक विवाद और हाईकोर्ट के निर्देश के बाद रणजी ट्रॉफी के चौथे दौर में नगालैंड के खिलाफ पूरी नई टीम उतारी गई है.

**Type:** article · **Category:** क्रिकेट · **Published:** 2026-11-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/cricket/meghalaya-cricket-association-men-prashasanika-khinchatana-ke-chalate-nagaland-maicha-se-pahale-badali-ranji-tima-56870 · **Language:** Hindi
**Tags:** रणजी ट्रॉफी, मेघालय क्रिकेट एसोसिएशन, जेम्स संगमा, देवजीत सैकिया, रेनॉल्ड खारकमनी, घरेलू क्रिकेट, बीसीसीआई

भारतीय घरेलू क्रिकेट के प्रतिष्ठित टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी के दौरान एक अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है. प्लेट ग्रुप में नगालैंड के खिलाफ चौथे दौर के मुकाबले में मेघालय की पूरी एकादश अचानक बदली हुई नजर आई. किसी तकनीकी या रणनीतिक कारण अथवा खराब प्रदर्शन की वजह से नहीं, बल्कि राज्य क्रिकेट संघ के भीतर प्रशासनिक खींचतान और न्यायिक निर्देश के चलते यह बड़ा कदम उठाया गया.

## हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदला प्रशासनिक ढांचा
इस पूरे मामले की जड़ें राज्य निकाय के आंतरिक विवाद से जुड़ी हैं. 30 अक्टूबर को मेघालय हाईकोर्ट द्वारा दिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले के बाद राज्य क्रिकेट के संचालन और चयन प्रक्रियाओं से जुड़े अधिकार एसोसिएशन के अध्यक्ष जेम्स संगमा के गुट के पास आ गए. प्रशासनिक नियंत्रण बदलते ही मैदान पर उतरने वाली टीम की रूपरेखा भी बदल गई, जिसके तहत पहले खेल रहे दल को बाहर कर नई टीम को जिम्मेदारी सौंप दी गई.

## शुरुआती राउंड में टीम का मजबूत प्रदर्शन
हैरानी की बात यह है कि बदली गई पुरानी टीम ने टूर्नामेंट के पहले तीन मुकाबलों में शानदार खेल दिखाया था. उस दल ने तीन राउंड की समाप्ति पर 12 अंक जुटाए थे, जिसमें एक जीत और दो ड्रॉ मुकाबले शामिल थे. इस शुरुआती टीम को एसोसिएशन के सचिव रेनॉल्ड खारकमनी के नेतृत्व वाले समूह द्वारा आयोजित चयन प्रक्रिया के माध्यम से चुना गया था. हालांकि, एसोसिएशन के दो शीर्ष पदाधिकारियों के बीच लंबे समय से चल रही तनातनी अंततः मैदान के खेल पर भारी पड़ गई.

## बीसीसीआई का रुख और अदालती आदेश का पालन
मामला अदालत पहुंचने पर हाईकोर्ट ने अध्यक्ष जेम्स संगमा के अधिकारों और उनके कदमों को सही ठहराया. इस निर्णय के बाद चयन की बागडोर उनके पाले में चली गई और चौथे राउंड से ठीक पहले रातों-रात नई टीम का गठन कर दिया गया. इस संबंध में बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने स्पष्ट किया कि बोर्ड के पास अदालत के आदेश का पालन करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है, इसलिए अध्यक्ष की पहल पर तैयार की गई टीम को मैदान में उतरने की अनुमति दी गई. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने इस न्यायिक आदेश में किसी भी प्रकार का दखल देने से मना कर दिया है.

## इसका आप पर असर
राज्य क्रिकेट संघों के भीतर प्रशासनिक और कानूनी विवादों का सीधा असर सीधे खिलाड़ियों के करियर और टूर्नामेंट की प्रतिस्पर्धात्मकता पर पड़ता है.

- **खिलाड़ियों के करियर पर प्रभाव:** अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद शुरुआती तीन मैचों में 12 अंक जुटाने वाले खिलाड़ियों को प्रशासनिक विवाद के कारण अचानक बाहर बैठना पड़ा. इससे घरेलू क्रिकेटरों की मेहनत और उनकी खेल लय प्रभावित होती है.
- **घरेलू क्रिकेट की निष्पक्षता:** चयन प्रक्रिया में कानूनी और गुटीय विवादों के हावी होने से निष्पक्ष खेल भावना और प्रशासनिक विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं. बोर्ड और राज्य संघों को ऐसे मामलों में खिलाड़ियों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देनी होगी.
- **प्रशंसकों और दर्शकों के लिए:** क्रिकेट प्रशंसकों को अचानक बदली हुई टीम देखने को मिली, जिससे प्लेट ग्रुप की प्रतियोगिता और टीम के प्रदर्शन के निरंतर विश्लेषण में असमंजस पैदा होता है.
- **प्रशासनिक सबक:** खेल निकायों के पदाधिकारियों के बीच आपसी टकराव से अंततः मैदान पर टीम का संतुलन बिगड़ता है. संघों को विवाद समाधान की पारदर्शी व्यवस्था बनानी चाहिए ताकि चयन अदालत का विषय न बने.

## ऐसा क्यों हुआ
मेघालय क्रिकेट एसोसिएशन के दो शीर्ष पदाधिकारियों के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी, जो अंततः न्यायिक निर्णय के रूप में सामने आई.

- **पदाधिकारियों के बीच गुटीय विवाद:** एसोसिएशन के अध्यक्ष जेम्स संगमा और सचिव रेनॉल्ड खारकमनी के समर्थकों के बीच प्रशासनिक और चयन अधिकारों को लेकर लंबे समय से मतभेद चल रहे थे. दोनों गुट अपनी-अपनी चयन प्रक्रिया और प्रभाव को स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे.
- **हाईकोर्ट का 30 अक्टूबर का निर्णय:** विवाद अदालत की चौखट तक पहुंचा, जहां मेघालय हाईकोर्ट ने अध्यक्ष जेम्स संगमा की कार्रवाई को वैध ठहराया. अदालत के इस फैसले से चयन का अधिकार सीधे अध्यक्ष के गुट के हाथों में चला गया.
- **बीसीसीआई की कानूनी विवशता:** राष्ट्रीय बोर्ड ने स्पष्ट किया कि न्यायिक आदेश सर्वोपरि है और उसका पालन अनिवार्य है. इसी कारण बोर्ड ने अदालत के निर्देशानुसार अध्यक्ष द्वारा तय की गई नई टीम को खेलने की अनुमति दी.

## सवाल-जवाब

### 1. मेघालय की रणजी टीम को अचानक क्यों बदला गया?
मेघालय क्रिकेट एसोसिएशन में प्रशासनिक खींचतान और हाईकोर्ट द्वारा अध्यक्ष जेम्स संगमा के गुट को चयन अधिकार सौंपे जाने के बाद पूरी टीम बदली गई.

### 2. बदली गई पुरानी टीम का टूर्नामेंट में कैसा प्रदर्शन था?
पुरानी टीम ने शुरुआती तीन मुकाबलों में 12 अंक हासिल किए थे, जिसमें एक जीत और दो मुकाबले ड्रॉ रहे थे.

### 3. पुरानी टीम का चयन किसके द्वारा किया गया था?
उस टीम का चयन एसोसिएशन के सचिव रेनॉल्ड खारकमनी के नेतृत्व वाले गुट द्वारा शुरू की गई प्रक्रिया के तहत हुआ था.

### 4. इस पूरे मामले पर बीसीसीआई का क्या रुख रहा?
बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने स्पष्ट किया कि बोर्ड हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए बाध्य है और इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा.

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