मेसी और रोनाल्डो को देखकर सीखा खेल, छतरपुर की 14 वर्षीय अंत्रा जैन ने स्टेट लेवल फुटबॉल में जीता तीसरा स्थान छतरपुर के लवकुश नगर की 14 वर्षीय अंत्रा जैन ने अंडर-14 राज्य स्तरीय फुटबॉल स्पर्धा में तीसरा स्थान पाया है, जबकि उनके पिता उन्हें क्रिकेटर बनाना चाहते हैं. मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित लवकुश नगर की रहने वाली 14 साल की अंत्रा जैन ने खेल जगत में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. हाल ही में आयोजित हुई अंडर-14 राज्य स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान अपने नाम किया. इस बड़ी उपलब्धि के बाद उनके परिवार में जश्न का माहौल है. राज्य स्तर पर परचम लहराने से पहले अंत्रा तहसील, जिला और संभाग स्तर की प्रतियोगिताओं में भी अपनी जीत दर्ज करवा चुकी हैं. मैदान पर उनकी फुर्ती और खेल के प्रति समर्पण ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है. क्रिकेट और फुटबॉल दोनों में गहरी रुचि अंत्रा का रुझान बचपन के दिनों से ही मैदान और खेलों की तरफ रहा है. स्कूल के दिनों में वे लगातार खेलकूद से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा लेती रही हैं. वे क्रिकेट और फुटबॉल दोनों ही खेल बहुत उत्साह से खेलती हैं. उनका कहना है कि बचपन में टीवी पर टी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट और फीफा वर्ल्ड कप के मुकाबले देखा करती थीं, जिससे उनके भीतर खेलों के प्रति गहरा लगाव पैदा हुआ. क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनेल मेसी जैसे दिग्गज फुटबॉलरों को खेलते देखकर फुटबॉल के प्रति उनकी दिलचस्पी और ज्यादा बढ़ गई. इन्हीं खिलाड़ियों के खेल को देखकर उन्होंने तय किया कि उन्हें खेल जगत में कुछ बड़ा मुकाम हासिल करना है. अभी राज्य स्तरीय फुटबॉल में तीसरा स्थान हासिल करने के बाद उनका अगला लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का है. पिता का सपना: क्रांति गौड़ की तरह चमके बेटी अंत्रा के पिता सुशील कुमार जैन एक व्यवसायी हैं, जो अपनी बेटी को चौथी कक्षा से ही खेल का कड़ा अभ्यास करवा रहे हैं. वे खुद अपनी दोनों बेटियों को साथ लेकर स्थानीय सरकारी कॉलेज के खेल मैदान पर जाते हैं और वहां नियमित रूप से अभ्यास कराते हैं. पिता अंत्रा को फुटबॉल और क्रिकेट दोनों का प्रशिक्षण दिलवाते हैं, लेकिन उनकी दिली ख्वाहिश है कि बेटी क्रिकेट के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारे. उनके इस सपने के पीछे एक बड़ा प्रेरणास्रोत भी है. छतरपुर जिले के घुवारा गांव की बेटी क्रांति गौड़ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट खेल चुकी हैं. इसी मिसाल को सामने रखकर सुशील कुमार जैन का मानना है कि जब जिले की एक बेटी अंतरराष्ट्रीय फलक पर पहुंच सकती है, तो उनकी बेटी भी क्रिकेट में बहुत आगे जा सकती है. धोनी का उदाहरण और पारंपरिक करियर से अलग सोच सुशील कुमार जैन के अनुसार उनकी बेटी एक बहुत ही कुशल गेंदबाज है और उसमें क्रिकेट में बड़ा नाम कमाने की पूरी क्षमता है. वे महेंद्र सिंह धोनी का उदाहरण देते हुए बताते हैं कि पूर्व भारतीय कप्तान भी शुरुआत में बहुत बढ़िया फुटबॉल खेलते थे, लेकिन बाद में उन्होंने क्रिकेट की राह चुनी और पूरी दुनिया में माही के नाम से विख्यात हुए. पिता का कहना है कि वे अपनी बेटी को किसी पारंपरिक पेशे जैसे डॉक्टर, इंजीनियर या सरकारी अधिकारी बनाने की होड़ में नहीं धकेलना चाहते, बल्कि उसे एक स्थापित स्पोर्ट्स प्लेयर बनाना चाहते हैं. वर्तमान में अंत्रा ने फुटबॉल में अपनी काबिलियत साबित की है और परिवार को पूरा भरोसा है कि आने वाले समय में वह क्रिकेट के मैदान पर भी नाम रोशन करेगी. इस सफर में अंत्रा के स्कूल क्राइस्ट ज्योति स्कूल से भी पूरा सहयोग मिल रहा है. शुरुआती निराशा के बाद मां का मिला संबल अंत्रा की मां रेखा जैन एक गृहिणी हैं और वे अपनी बेटियों के खेल प्रेम को हमेशा बढ़ावा देती आई हैं. वे बताती हैं कि जब अंत्रा पहली बार किसी चयन मुकाबले में गई थी और सफलता नहीं मिली, तो वह काफी निराश हो गई थी. उस मुश्किल घड़ी में उन्होंने बेटी की हिम्मत बढ़ाते हुए भरोसा दिया कि अगली बार उसका चयन अवश्य होगा. परिवार में खेल का माहौल ऐसा है कि उनकी तीनों बेटियां खेलों में सक्रिय हैं. बड़ी बेटी बाहर रहकर पढ़ाई कर रही है और उसे बास्केटबॉल खेलने का गहरा शौक है. परिवार के मजबूत समर्थन के दम पर अंत्रा अपने खेल के सफर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी कर रही हैं. इसका आप पर असर यह उपलब्धि जमीनी स्तर पर खेलों में बेटियों की भागीदारी और अभिभावकों की बदलती सोच को दर्शाती है. • मध्य प्रदेश में: छोटे कस्बों और जिलों की युवा प्रतिभाओं को खेल के बुनियादी ढांचे और सरकारी कॉलेजों के मैदानों में नियमित अभ्यास करने की प्रेरणा मिलती है. इससे स्थानीय स्तर पर खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने वाली बालिकाओं की संख्या और उनके लिए समर्थन में वृद्धि होगी. • छतरपुर में: लवकुश नगर और घुवारा जैसे क्षेत्रों से बालिकाओं के खेल में आगे आने से स्थानीय परिवारों में पारंपरिक करियर के बजाय खेल को करियर चुनने का भरोसा मजबूत होता है. जिला और संभाग स्तर के ट्रायल में शामिल होने वाले युवा खिलाड़ियों के लिए यह एक सकारात्मक मिसाल है. • अभिभावकों के लिए: यह कहानी माता-पिता को डॉक्टर या इंजीनियर बनने के पारंपरिक दबाव से हटकर बच्चों की स्वाभाविक खेल प्रतिभा को चौथी कक्षा जैसी शुरुआती उम्र से तराशने के लिए प्रोत्साहित करती है. शुरुआती विफलता के समय बच्चों का मनोबल बनाए रखना उनके दीर्घकालिक विकास के लिए बेहद अहम है. • युवा एथलीटों के लिए: एक साथ कई खेलों जैसे फुटबॉल और क्रिकेट में अभ्यास करने से बुनियादी शारीरिक फिटनेस और मैदान पर आत्मविश्वास विकसित करने में मदद मिलती है. खिलाड़ी अपनी बहुमुखी प्रतिभा को संवारते हुए राष्ट्रीय स्तर के अवसरों की तैयारी कर सकते हैं. ऐसा क्यों हुआ अंत्रा जैन की यह उपलब्धि नियमित पारिवारिक मार्गदर्शन, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से मिली प्रेरणा और जमीनी स्तर की प्रतियोगिताओं में निरंतर भागीदारी का परिणाम है. • नियमित जमीनी प्रशिक्षण: अंत्रा के पिता उन्हें कक्षा चार से ही स्थानीय सरकारी कॉलेज के मैदान में नियमित रूप से अभ्यास करा रहे हैं. लगातार खेल अभ्यास और तहसील, जिला और संभाग स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार भाग लेने से उनका खेल परिपक्व हुआ. • वैश्विक सितारों की प्रेरणा: बचपन में टेलीविजन पर फीफा वर्ल्ड कप और टी-20 क्रिकेट मैचों को देखने के साथ-साथ रोनाल्डो और मेसी के खेल ने उनके मन में खेलों के प्रति गहरी रुचि और प्रतिस्पर्धी सोच विकसित की. • जिले की सफल मिसाल: छतरपुर जिले के घुवारा गांव की क्रांति गौड़ के अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की उपलब्धि ने परिवार को यह विश्वास दिलाया कि जिले की बेटियां भी खेलों के सर्वोच्च मंच पर पहुंच सकती हैं. • पारिवारिक और संस्थागत समर्थन: शुरुआती दौर में चयन न होने पर मां द्वारा दिया गया प्रोत्साहन और स्कूल का समर्थन अंत्रा के आत्मविश्वास को बनाए रखने में निर्णायक कारक बना. सवाल-जवाब 1. अंत्रा जैन ने किस खेल प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल किया है? अंत्रा जैन ने अंडर-14 राज्य स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता में तीसरा स्थान प्राप्त किया है. 2. अंत्रा जैन मध्य प्रदेश के किस जिले और कस्बे की रहने वाली हैं? वे मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के लवकुश नगर की रहने वाली हैं. 3. अंत्रा को फुटबॉल खेलने की प्रेरणा किन खिलाड़ियों से मिली? उन्हें क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनेल मेसी को खेलते देखकर फुटबॉल के प्रति रुचि और प्रेरणा मिली. 4. अंत्रा के पिता उन्हें किस खेल में आगे बढ़ाना चाहते हैं और क्यों? उनके पिता उन्हें क्रिकेट में आगे ले जाना चाहते हैं क्योंकि अंत्रा एक अच्छी बॉलर हैं और जिले की क्रांति गौड़ भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट खेल चुकी हैं. 5. अंत्रा को अभ्यास कौन कराता है और वे कहां अभ्यास करती हैं? उनके पिता सुशील कुमार जैन उन्हें सरकारी कॉलेज के खेल मैदान में नियमित रूप से अभ्यास कराते हैं. 6. अंत्रा का आगामी खेल लक्ष्य क्या है? राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में सफलता के बाद अंत्रा का लक्ष्य आगे राष्ट्रीय स्तर पर खेलना है. प्रेरणा और सबक अंत्रा जैन और उनके परिवार की यह यात्रा युवा खिलाड़ियों और अभिभावकों को खेल में आगे बढ़ने के लिए जरूरी दृष्टिकोण सिखाती है. • शुरुआती उम्र से निरंतर अभ्यास: किसी भी खेल में महारत हासिल करने के लिए चौथी कक्षा जैसी प्राथमिक उम्र से ही नियमित अभ्यास की शुरुआत करना जरूरी है. • विफलता को सीख बनाना: पहले प्रयास में चयन न होने पर निराश होने के बजाय सकारात्मक रहकर अगली प्रतियोगिता की तैयारी में जुटना चाहिए. • पारंपरिक दायरे से बाहर सोचना: सिर्फ डॉक्टर या इंजीनियर बनने की सामाजिक दौड़ में शामिल होने के बजाय बच्चे की स्वाभाविक खेल प्रतिभा को पहचानकर उस पर भरोसा करना चाहिए. • स्थानीय संसाधनों का उपयोग: बड़े प्रशिक्षण केंद्रों के अभाव में भी सरकारी कॉलेज के खेल मैदान जैसी उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाकर उच्च स्तर की तैयारी की जा सकती है. https://trendkia.com/cricket/messi-aura-ronaldo-ko-dekhakara-sikha-khela-chhatarpur-ki-14-varshiya-antra-jain-ne-state-level-football-men-jita-tisara-sthana-42984 TrendKia — Har trend, sabse pehle.