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  "type": "article",
  "title": "मोहम्मद शमी को नजरअंदाज किए जाने पर रवि शास्त्री का फूटा गुस्सा, बोले- उनके साथ सही नहीं हुआ",
  "summary": "भारतीय टीम के पूर्व कोच रवि शास्त्री ने टेस्ट सेटअप से मोहम्मद शमी को बाहर रखने के फैसलों पर तीखी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद तेज गेंदबाज को नजरअंदाज किया जाना पूरी तरह गलत है।",
  "content": "भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और कोच रवि शास्त्री ने टेस्ट सेटअप से अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को दूर रखने की नीति पर खुलकर सवाल खड़े किए हैं। उनका मानना है कि घरेलू क्रिकेट में बंगाल की तरफ से लगातार प्रभावी प्रदर्शन करने और अपनी फिटनेस साबित करने के बाद भी इस गेंदबाज को उचित मौका न मिलना निराशाजनक है। शास्त्री ने इस बात पर जोर दिया कि मैदान पर लंबे समय तक गेंदबाजी करने की क्षमता ही किसी भी खिलाड़ी की फिटनेस का सबसे बड़ा पैमाना होती है।\n\nघरेलू क्रिकेट में साबित की उपयोगिता\nरवि शास्त्री ने इस बात का विशेष रूप से जिक्र किया कि मोहम्मद शमी ने लगातार घरेलू मुकाबलों में हिस्सा लिया है और भारी गेंदबाजी का बोझ उठाया है। बंगाल की टीम के लिए खेलते हुए उन्होंने कठिन परिस्थितियों में लंबी स्पैल फेंकी हैं और अपनी फिटनेस को लेकर उठने वाले तमाम सवालों का मैदान पर अपने प्रदर्शन से करारा जवाब दिया है। शास्त्री के अनुसार, चयनकर्ताओं को इंटरनेशनल स्तर पर वापसी की तैयारी का आंकलन करते समय इस तरह के घरेलू प्रदर्शनों को पूरी तवज्जो देनी चाहिए थी।\n\nफिटनेस के पैमानों पर रखे कड़े विचार\nशास्त्री ने अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि जिम में पसीना बहाने से ज्यादा जरूरी मैदान पर गेंदबाजी करने की क्षमता होती है। उन्होंने कहा कि अगर कोई खिलाड़ी मुकाबले के दौरान 10 या 12 ओवर फेंकने की स्थिति में नहीं है, तो जिम के फिटनेस आंकड़ों का कोई मतलब नहीं रह जाता है। बंगाल के लिए लगातार 15 से 20 ओवर गेंदबाजी करने वाले शमी जैसे मेहनती गेंदबाज को नजरअंदाज करना टीम के हित में नहीं है, खासकर तब जब लंबे और कठिन दौर में अनुभवी खिलाड़ियों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।\n\nकरियर के अंत को लेकर जताई निराशा\nपूर्व कोच ने यह भी माना कि देश के लिए शानदार सेवाएं देने वाले खिलाड़ी के साथ ऐसा बर्ताव होना बेहद दुखद है। उनके मुताबिक शमी के भीतर अभी 30 से 40 और विकेट चटकाने की क्षमता बची हुई थी और उन्हें पिछले 12 महीनों के दौरान निश्चित रूप से टीम का हिस्सा होना चाहिए था। शास्त्री ने कहा कि तमाम मीडिया रिपोर्ट्स में शमी की फिटनेस को लेकर भले ही अनिश्चितता जताई जाती रही हो, लेकिन वास्तविकता यह थी कि वह मैदान पर लगातार पसीना बहाकर अपनी उपयोगिता साबित कर रहे थे।\n\nइसका आप पर असर\nभारतीय क्रिकेट चयन से जुड़े इस घटनाक्रम का असर देश के खेल फैंस और भावी चयन रणनीतियों पर पड़ सकता है।\n\n• भारतीय क्रिकेट पर असर: अनुभवी खिलाड़ियों को बाहर रखने से टीम की बेंच स्ट्रेंथ और दबाव की स्थितियों से निपटने की क्षमता पर सवाल उठते हैं।\n• घरेलू क्रिकेट का महत्व: इस विवाद के बाद घरेलू टूर्नामेंटों में प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के मूल्यांकन को लेकर नए सिरे से बहस छिड़ सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह पूरा विवाद राष्ट्रीय टीम में चयन के मानदंडों और अनुभवी खिलाड़ियों की फिटनेस के आकलन को लेकर पैदा हुआ है।\n\n• चयन नीतियां: घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद सीनियर खिलाड़ियों को नजरअंदाज किए जाने से इस तरह के सवाल खड़े होते हैं।\n• फिटनेस आकलन: जिम के आंकड़ों और मैदान पर गेंदबाजी के भारी वर्कलोड के बीच अंतर को लेकर विशेषज्ञों की अलग-अलग राय रहती है।\n• अनुभवी खिलाड़ियों की जरूरत: लंबे और कठिन टेस्ट सत्रों के दौरान तेज गेंदबाजी आक्रमण में अनुभव की कमी को लेकर पूर्व खिलाड़ियों ने चिंता जताई है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रवि शास्त्री ने किस खिलाड़ी के समर्थन में बयान दिया है?\nरवि शास्त्री ने तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी का समर्थन किया है।\n\n2. शास्त्री ने शमी के किस प्रदर्शन का जिक्र किया है?\nउन्होंने बंगाल के लिए घरेलू क्रिकेट में लगातार गेंदबाजी करने और भारी वर्कलोड उठाने का जिक्र किया है।\n\n3. पूर्व कोच ने फिटनेस को लेकर क्या कहा है?\nशास्त्री ने कहा कि मैच के दौरान लंबे स्पैल फेंकने की क्षमता ही फिटनेस का असली पैमाना होती है।\n\n4. शास्त्री के अनुसार शमी को किस फॉर्मेट में खेलना चाहिए था?\nउनके अनुसार शमी को पिछले 12 महीनों में टेस्ट टीम का हिस्सा होना चाहिए था।",
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  "publishedAt": "2026-11-08",
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