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  "type": "article",
  "title": "मुदस्सर नजर और संजय मांजरेकर समेत टेस्ट इतिहास की 5 सबसे धीमी शतकीय पारियां",
  "summary": "टेस्ट क्रिकेट में धैर्य और तकनीक का इम्तिहान लेने वाली 5 ऐसी ऐतिहासिक पारियां, जहां बल्लेबाजों ने शतक जड़ने के लिए क्रीज पर कई घंटे बिता दिए।",
  "content": "टेस्ट क्रिकेट को हमेशा से ही मानसिक मजबूती, सब्र और तकनीक की सबसे बड़ी परीक्षा माना जाता है। टी20 और वनडे के इस दौर में जहां चौके-छक्कों की बरसात देखने को मिलती है, वहीं रेड बॉल क्रिकेट में कई बार परिस्थिति के अनुसार defensive खेल की सख्त जरूरत होती है। क्रिकेट के लंबे इतिहास में कुछ ऐसे मौके आए हैं जब बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाने के बजाय विकेट पर टिके रहने को प्राथमिकता दी। इन खिलाड़ियों ने क्रीज को अपनी ढाल बना लिया और विपक्षी गेंदबाजों को पूरी तरह थका दिया। ऐसे समय में जड़े गए शतक न केवल मैच बचाने में मददगार साबित हुए, बल्कि इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गए। आइए जानते हैं टेस्ट क्रिकेट के इतिहास की 5 सबसे धीमी शतकीय पारियों के बारे में, जो क्रीज पर बिताए गए समय के आधार पर दर्ज की गई हैं।\n\nमुदस्सर नजर का 557 मिनट का अटूट विश्व रिकॉर्ड\nसाल 1977 में लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच मुकाबला खेला जा रहा था। इस मैच में पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज मुदस्सर नजर ने एक ऐसी पारी खेली जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है। इंग्लैंड की धारदार गेंदबाजी के सामने मुदस्सर नजर ने चट्टान की तरह क्रीज पर पांव जमा लिए। उन्होंने हर गेंद को बेहद रक्षात्मक तरीके से खेला और रन बनाने का कोई जोखिम नहीं उठाया। मिनट बीतते गए और घंटे गुजरते गए, लेकिन उनका ध्यान नहीं भटका। मुदस्सर नजर ने अपना शतक पूरा करने के लिए पूरे 557 मिनट यानी लगभग 9 घंटे और 17 मिनट का समय लिया। यह टेस्ट इतिहास का सबसे धीमा शतक बन गया। पिछले 48 सालों से यह रिकॉर्ड अब भी उनके नाम ही दर्ज है।\n\nडरबन में डैकी मैकग्लेव की साहसी पारी\nदक्षिण अफ्रीका के दौरे पर 1957-58 में पहुंची ऑस्ट्रेलियाई टीम ने डरबन टेस्ट में मेजबान टीम पर भारी दबाव बना रखा था। दक्षिण अफ्रीका को मैच बचाने के लिए एक ऐसे बल्लेबाज की जरूरत थी जो क्रीज पर खूंटा गाड़ सके। यह जिम्मा उठाया सलामी बल्लेबाज डैकी मैकग्लेव ने। मैकग्लेव ने रन बनाने की गति को पूरी तरह किनारे रख दिया और उनका एकमात्र लक्ष्य विकेट पर टिके रहना रहा। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के पसीने छुड़ाते हुए उन्होंने 545 मिनट मैदान पर बिताए और अपना शतक पूरा किया। उनकी इस धीमी लेकिन जुझारू पारी की बदौलत ही दक्षिण अफ्रीका इस मुकाबले में अपनी साख बचाने में कामयाब रहा था।\n\nहरारे में असंका गुरुसिन्हा की 535 मिनट की दीवार\nवर्ष 1994-95 के दौरान श्रीलंका की टीम जिम्बाब्वे के दौरे पर थी। हरारे के मैदान पर जिम्बाब्वे के गेंदबाजों ने अपनी सधी हुई लाइन-लेंथ से श्रीलंकाई बल्लेबाजी क्रम को संकट में डाल दिया था। ऐसे विषम हालात में असंका गुरुसिन्हा ने मोर्चा संभाला। गुरुसिन्हा हमेशा से अपने लड़ाकू रवैये के लिए जाने जाते थे, लेकिन इस मैच में उन्होंने धैर्य की नई मिसाल पेश की। उन्होंने एक-एक रन के लिए कड़ा संघर्ष किया और 535 मिनट तक क्रीज पर डटे रहकर अपना शतक पूरा किया। उनकी इस धैर्यपूर्ण पारी ने श्रीलंकाई टीम को मैच में बेहद मजबूत स्थिति प्रदान की।\n\nकोलंबो में कप्तान जेफ क्रो का 516 मिनट का संघर्ष\n1986-87 में न्यूजीलैंड की टीम टेस्ट श्रृंखला के लिए श्रीलंका दौरे पर गई थी। कोलंबो में खेले गए मुकाबले में न्यूजीलैंड को अपनी पहली पारी में एक बड़ी साझेदारी की बेहद जरूरत थी। ऐसे में कीवी कप्तान जेफ क्रो ने खुद जिम्मेदारी ली और बल्लेबाजी करने उतरे। श्रीलंकाई स्पिनरों की फिरकी के सामने क्रो ने पूरी तरह रक्षात्मक रवैया अपनाया। उन्होंने मैदान पर 516 मिनट बिताकर अपना शतक पूरा किया। इस पारी ने यह साबित कर दिया कि जरूरत पड़ने पर एक आक्रामक बल्लेबाज भी टीम के हित में सब्र की मिसाल बन सकता है।\n\nजिम्बाब्वे के खिलाफ संजय मांजरेकर का 500 मिनट का संयम\nभारतीय टीम 1992-93 में जिम्बाब्वे के ऐतिहासिक दौरे पर थी। हरारे की पिच पर स्थानीय गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजों को रन बनाने का कोई मौका नहीं दिया। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में भारत के मध्यक्रम के बल्लेबाज संजय मांजरेकर ने संयम का परिचय दिया। अपनी मजबूत रक्षात्मक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए मांजरेकर ने बिना कोई जोखिम उठाए गेंदबाजों को पूरी तरह हतोत्साहित कर दिया। उन्होंने क्रीज पर 500 मिनट बिताकर अपना शतक पूरा किया और भारतीय टीम को एक सुरक्षित स्थिति में पहुंचाया।\n\nरेड बॉल क्रिकेट में सब्र की अहमियत\nये पारियां साबित करती हैं कि टेस्ट क्रिकेट सिर्फ आक्रामक बल्लेबाजी का खेल नहीं है। मुश्किल परिस्थितियों में टीम को हार से बचाने के लिए क्रीज पर टिके रहना भी एक महान कला है। मुदस्सर नजर, डैकी मैकग्लेव, असंका गुरुसिन्हा, जेफ क्रो और संजय मांजरेकर के शतक भले ही समय के हिसाब से सबसे धीमे रहे हों, लेकिन क्रिकेट इतिहास में उनका महत्व किसी भी तेज शतक से कम नहीं है।\n\nइसका आप पर असर\nखेल प्रेमियों के लिए: यह खबर टेस्ट क्रिकेट के पारंपरिक मूल्यों, धैर्य और रक्षात्मक तकनीक के महत्व को रेखांकित करती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. टेस्ट क्रिकेट में सबसे धीमा शतक बनाने का रिकॉर्ड किसके नाम है?\nपाकिस्तान के मुदस्सर नजर के नाम यह रिकॉर्ड दर्ज है, जिन्होंने 1977 में इंग्लैंड के खिलाफ लाहौर में अपना शतक पूरा करने के लिए 557 मिनट लिए थे।\n\n2. सबसे धीमे टेस्ट शतक की सूची में कौन से भारतीय बल्लेबाज शामिल हैं?\nसंजय मांजरेकर इस सूची में शामिल हैं, जिन्होंने 1992-93 में जिम्बाब्वे के खिलाफ हरारे में 500 मिनट में अपना शतक पूरा किया था।\n\n3. दक्षिण अफ्रीका के लिए सबसे धीमा शतक किसने जड़ा था?\nडैकी मैकग्लेव ने 1957-58 में डरबन टेस्ट के दौरान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 545 मिनट में शतक बनाया था।\n\n4. जेफ क्रो ने श्रीलंका के खिलाफ शतक बनाने में कितना समय लिया था?\nन्यूजीलैंड के कप्तान जेफ क्रो ने 1986-87 में कोलंबो टेस्ट में अपना शतक बनाने के लिए 516 मिनट क्रीज पर बिताए थे।\n\nप्रेरणा और सबक\nधैर्य और संयम का सबक:\n\n• परिस्थिति के अनुसार ढलना: जब परिस्थितियां कठिन हों, तो आक्रामकता के बजाय संयम से काम लेना सफलता दिलाता है।\n• टीम के हित को प्राथमिकता: व्यक्तिगत रन गति की परवाह किए बिना टीम को संकट से निकालना ही असली खेल भावना है।\n• तकनीक पर भरोसा: अपनी बुनियादी क्षमताओं और तकनीक पर विश्वास रखकर लंबे समय तक दबाव का मुकाबला किया जा सकता है।",
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  "category": "क्रिकेट",
  "publishedAt": "2026-08-17",
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