पटियाला हाउस कोर्ट से पूर्व भारतीय क्रिकेटर जैकब मार्टिन सभी आरोपों से बरी, 2004 के फर्जी वीजा मामले में मिली बड़ी राहत दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 2004 के मानव तस्करी और फर्जी वीजा मामले में वडोदरा के रहने वाले पूर्व भारतीय क्रिकेटर जैकब मार्टिन को बरी कर दिया है। 22 साल चले लंबे कानूनी संघर्ष के बाद अदालत को उनके खिलाफ पैसों के लेन-देन या धोखाधड़ी का कोई सबूत नहीं मिला। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 2004 के एक क्रिमिनल केस में पूर्व भारतीय क्रिकेटर जैकब मार्टिन को राहत देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया है। 54 साल के जैकब मार्टिन गुजरात के वडोदरा शहर के निवासी हैं और उन पर फर्जी वीजा तथा इमिग्रेशन स्टैम्प से जुड़े मामले में संलिप्तता का आरोप लगाया गया था। लगभग 22 वर्षों तक चले लंबे कानूनी घटनाक्रम के बाद अदालत ने फैसला सुनाते हुए पाया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप किसी भी ठोस साक्ष्य से साबित नहीं होते हैं। अदालत का फैसला और सबूतों का अभाव पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष जैकब मार्टिन के खिलाफ लगे आरोपों को साबित करने में नाकाम रहा। पूर्व क्रिकेटर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 468 (जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके साथ ही उन पर पासपोर्ट एक्ट की धारा 12 के तहत भी मामले दर्ज थे। जांच के दौरान यह आरोप लगाया गया था कि वे ब्रिटेन यात्रा की व्यवस्था, फर्जी इमिग्रेशन स्टैम्प और पैसों के लेन-देन में शामिल थे। हालांकि, अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अजवा स्पोर्ट्स क्लब पर उनके किसी भी तरह के मालिकाना हक या नियंत्रण का कोई प्रमाण नहीं मिला, और न ही पैसों के संदिग्ध लेन-देन का कोई ठोस सबूत पेश किया जा सका। अदालत में पेश किए गए कई गवाह भी इन आरोपों की पुष्टि करने में असमर्थ रहे। 2004 के यूके दौरे से जुड़ा विवाद इस पूरे मामले की शुरुआत साल 2004 में हुई थी, जब एक क्रिकेट टीम यूके के दौरे पर गई थी। जैकब मार्टिन भी उस दल का हिस्सा थे। दौरे की समाप्ति के बाद टीम के सभी सदस्य भारत लौट आए थे, लेकिन एक खिलाड़ी वहीं रुक गया था। उस खिलाड़ी के पास छह महीने की वैध अवधि का वीजा मौजूद था, जिसके कारण वह वहां रुकने के लिए अधिकृत था। लेकिन वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी वह तय समय से अधिक समय तक ब्रिटेन में ही ठहरा रहा। बाद में वह व्यक्ति पासपोर्ट पर फर्जी इमिग्रेशन स्टैम्प लगवाकर भारत वापस आया, जिसे दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया था। करियर पर असर और 22 साल का मानसिक तनाव मामले में नाम घसीटे जाने को लेकर जैकब मार्टिन ने अपनी आपबीती साझा की। उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच और एफआईआर में उनका नाम कहीं भी दर्ज नहीं था। बाद में जांच प्रक्रिया के दौरान उन्हें इस केस में नामजद कर दिया गया, क्योंकि वे एक जाने-माने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर थे। इस आपराधिक मामले के कारण उन्हें 22 सालों तक अत्यधिक मानसिक तनाव और करियर के नुकसान का सामना करना पड़ा। इस कानूनी विवाद के चलते उन्हें रेलवे की अपनी नौकरी गंवानी पड़ी और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई में भी काम करने के अवसर हासिल नहीं हो सके। पूर्व क्रिकेटर ने राहत की सांस लेते हुए कहा, "हाल ही में इस केस से मुझे क्लीन चिट मिली है और 22 साल बाद आया यह फैसला मेरी जिंदगी का एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट है।" जैकब मार्टिन का क्रिकेट करियर और आंकड़े दाएं हाथ के मध्यक्रम बल्लेबाज जैकब मार्टिन ने भारतीय राष्ट्रीय टीम के लिए साल 1999 से 2001 के बीच कुल 10 एकदिवसीय यानी वनडे मैच खेले। उन्होंने सितंबर 1999 में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की थी, जबकि साल 2001 में केन्या के खिलाफ उन्होंने अपना अंतिम वनडे मुकाबला खेला। अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान उन्होंने 8 पारियों में बल्लेबाजी करते हुए 158 रन बनाए, जिसमें उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ स्कोर 39 रन रहा। भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका करियर छोटा रहा, लेकिन घरेलू क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है। जैकब मार्टिन ने 138 प्रथम श्रेणी मैच और 101 लिस्ट ए मुकाबले खेले, जिनमें उन्होंने कुल मिलाकर 12 हजार से भी अधिक रन बनाए हैं। इसका आप पर असर भारत में: यह मामला यह दर्शाता है कि आपराधिक मुकदमों में लंबा समय लगने से निर्दोष व्यक्तियों का करियर और आजीविका किस तरह प्रभावित होती है। वडोदरा में: बड़ौदा के पूर्व कप्तान जैकब मार्टिन को 22 साल बाद मिली इस पूर्ण कानूनी राहत से स्थानीय खेल प्रेमियों को बड़ी स्पष्टता मिली है। सवाल-जवाब 1. जैकब मार्टिन कौन हैं? जैकब मार्टिन भारत के पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और वडोदरा के रहने वाले खिलाड़ी हैं, जिन्होंने 1999 से 2001 के बीच भारत के लिए 10 वनडे मैच खेले हैं। 2. जैकब मार्टिन पर 2004 का क्या मामला दर्ज था? उन पर 2004 के यूके दौरे के दौरान फर्जी वीजा, इमिग्रेशन स्टैम्प की हेराफेरी और मानव तस्करी से जुड़े अवैध लेन-देन के आरोप लगाए गए थे। 3. पटियाला हाउस कोर्ट ने जैकब मार्टिन को बरी क्यों किया? अदालत को पैसों के लेन-देन या अजवा स्पोर्ट्स क्लब पर उनके नियंत्रण का कोई ठोस सबूत नहीं मिला, और गवाह भी आरोपों की पुष्टि करने में नाकाम रहे। 4. जैकब मार्टिन पर कौन-कौन सी कानूनी धाराएं लगाई गई थीं? उन पर आईपीसी की धारा 420, 468, 471 और 120बी के साथ-साथ पासपोर्ट एक्ट की धारा 12 के तहत आरोप दर्ज किए गए थे। 5. इस 22 साल लंबे केस का जैकब मार्टिन के करियर पर क्या प्रभाव पड़ा? इस लंबित केस के कारण उनकी रेलवे की नौकरी चली गई और वे लंबे समय तक बीसीसीआई में नौकरी के अवसरों से वंचित रहे। 6. जैकब मार्टिन के क्रिकेट करियर के आंकड़े क्या हैं? उन्होंने भारत के लिए 10 वनडे मैचों में 158 रन बनाए। इसके अलावा उन्होंने घरेलू क्रिकेट के 138 प्रथम श्रेणी और 101 लिस्ट ए मैचों में 12,000 से अधिक रन बनाए हैं। https://trendkia.com/cricket/patiala-house-court-se-purva-bharatiya-kriketara-jacob-martin-sabhi-aropon-se-bari-2004-ke-pharji-vija-mamale-men-mili-bari-rahata-19544 TrendKia — Har trend, sabse pehle.