प्रयागराज के तीन लड़कों का क्रिकेट में बड़ा कमाल, यूपीसीए पैनल में स्कोरर और अंपायर बनकर बनाई जगह प्रयागराज के प्रितेश सोनकर ने राज्य स्तरीय स्कोरर की परीक्षा उत्तीर्ण की है, जबकि जुड़वां भाइयों कुशाग्र और यशाग्र ने अंपायरिंग इम्तिहान पास कर नया मुकाम पाया। संगम के शहर प्रयागराज के खेल जगत से एक बेहद उत्साहवर्धक खबर सामने आई है, जहाँ तीन होनहार लड़कों ने प्रांतीय क्रिकेट के तकनीकी मंच पर अपनी धाक जमाई है। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन यानी यूपीसीए द्वारा आयोजित कठिन परीक्षाओं के नतीजे सामने आने के बाद शहर के खेल प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह है। इनमें से एक प्रतिभागी ने स्कोरिंग के कठिन इम्तिहान में कामयाबी दर्ज की, तो वहीं दो सगे जुड़वां भाइयों ने अंपायरिंग के क्षेत्र में खुद को साबित करते हुए राज्य स्तरीय पैनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। कानपुर में आयोजित स्कोरिंग इम्तिहान में प्रितेश ने लहराया परचम दारागंज इलाके के रहने वाले प्रितेश सोनकर ने राज्य स्तर की स्कोरर परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर यह सफलता हासिल की है। इस इम्तिहान का आयोजन अगस्त के महीने में कानपुर शहर में कराया गया था। इलाहाबाद क्रिकेट एसोसिएशन के संयुक्त संयोजक (प्रबंधन) सोमेश्वर पांडेय के अनुसार, इस परीक्षा के लिए स्थानीय संस्था की तरफ से प्रितेश का नाम भेजा गया था। वे पहले से ही स्थानीय जिला पैनल में स्कोरर की जिम्मेदारी निभाते आ रहे थे। प्रितेश के माता-पिता सीमा सोनकर और प्रदीप सोनकर हैं। खेल के आँकड़ों और बारीकियों को तकनीकी रूप से दर्ज करने का हुनर उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई के अनुभवी स्कोरर अखिलेश त्रिपाठी के मार्गदर्शन में सीखा है। इस हुनर और लगन के दम पर उन्होंने पूरे सूबे के परीक्षार्थियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। कड़े मुकाबले वाली परीक्षा में सिर्फ चुनिंदा को मिली सफलता उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन की इस चयन प्रक्रिया में बेहद कड़ा मुकाबला देखने को मिला। राज्य भर के अलग-अलग जिलों से आए कुल 33 स्कोररों ने इस इम्तिहान में अपनी किस्मत आजमाई थी, जिसका संचालन बीसीसीआई एजुकेटर और बीसीसीआई अंपायर पी. जयपाल की देखरेख में पूरा कराया गया था। इस कड़ी परीक्षा में केवल 5 प्रतिभागी ही सफलता की दहलीज पार कर सके, जिनमें प्रितेश का नाम शामिल रहा। वहीं दूसरी तरफ अंपायरिंग परीक्षा का जिम्मा अंतरराष्ट्रीय अनुभव रखने वाले पूर्व आईसीसी अंपायर अनिल चौधरी संभाल रहे थे। उनके दिशा-निर्देशन में संपन्न हुई इस परीक्षा में प्रदेश भर के 97 उम्मीदवारों ने पर्चा भरा था। मैदान पर सटीक फैसलों और नियमों की कठिन कसौटी के बाद सिर्फ 14 अभ्यर्थियों को ही उत्तीर्ण घोषित किया गया। जुड़वां भाइयों कुशाग्र और यशाग्र का मैदान पर दोहरा जलवा अंपायरिंग की इसी कठिन परीक्षा में प्रयागराज के जुड़वां भाइयों कुशाग्र त्रिपाठी और यशाग्र त्रिपाठी ने एक साथ कामयाबी हासिल कर सबको चौंका दिया है। दोनों भाइयों ने इस परीक्षा को पास कर यूपीसीए के स्टेट पैनल अंपायर बनने का मुकाम हासिल किया। चौधरी नौनिहाल सिंह क्रिकेट एकेडमी के सचिव सत्यव्रत सहाय ने दोनों युवा अंपायरों की इस संयुक्त सफलता की पुष्टि की है। कुशाग्र और यशाग्र एकेडमी में कोच मोहम्मद आसिफ की देखरेख में क्रिकेट की ट्रेनिंग लेते रहे हैं। पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो दोनों दारागंज के रहने वाले हैं। उनके पिता अखिलेश त्रिपाठी उच्च न्यायालय में वकालत करने के साथ-साथ बीसीसीआई के स्कोरर और यूपीसीए के स्टेट पैनल अंपायर हैं, जबकि माँ का नाम रंजना त्रिपाठी है। इन दोनों भाइयों ने इलाहाबाद क्रिकेट एसोसिएशन से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर गाजीपुर मंडल की तरफ से इस चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। शहर के खेल जगत में खुशी की लहर प्रयागराज के तीनों युवाओं के इस असाधारण प्रदर्शन के बाद खेल हलकों में जश्न का माहौल है। स्थानीय क्रिकेट संस्था के सदस्यों, साथी खिलाड़ियों, कोचों और शहर के खेल प्रशासकों ने तीनों होनहारों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। मैदान पर सटीक अंपायरिंग और टेबल पर निष्पक्ष स्कोरिंग के इस नए सफर से स्थानीय स्तर पर उभरते अन्य युवाओं को भी खेल के तकनीकी क्षेत्रों में आगे बढ़ने की नई प्रेरणा मिलेगी। इसका आप पर असर इस उपलब्धि से प्रदेश और स्थानीय स्तर पर क्रिकेट के तकनीकी पदों में युवाओं की भागीदारी को नई मजबूती मिलेगी। • भारत में: घरेलू क्रिकेट में पेशेवर अंपायरों और प्रशिक्षित स्कोररों की माँग लगातार बढ़ रही है। नए और तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं के आने से मैच संचालन में पारदर्शिता और सटीकता बेहतर होगी। • प्रयागराज में: शहर के तीन युवाओं की इस कामयाबी से स्थानीय खिलाड़ियों और खेल में रुचि रखने वाले छात्रों को प्रेरणा मिलेगी। अब जिले की नई प्रतिभाएँ भी खेल में केवल खेलने तक सीमित न रहकर अंपायरिंग और स्कोरिंग को पेशेवर विकल्प के रूप में चुन सकेंगी। • उम्मीदवारों के लिए: क्रिकेट संघों की आधिकारिक परीक्षाओं के नियम और चयन मानक बेहद कठिन होते जा रहे हैं। इसमें सफल होने के लिए जिला स्तर से अनापत्ति प्रमाण पत्र और व्यावहारिक अभ्यास अनिवार्य रहता है। • पारिवारिक और कोचिंग सहयोग: सही मेंटरशिप और अकादमियों के जरिए छात्र समय रहते राज्य और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की तैयारी कर सकते हैं। जमीनी स्तर पर क्लब और स्थानीय अकादमियों की सक्रियता से खेल प्रतिभाओं का दायरा विस्तृत होता है। ऐसा क्यों हुआ उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन ने घरेलू क्रिकेट के मानकों को उन्नत करने और नए मैच अधिकारियों को जोड़ने के मकसद से इन परीक्षाओं का आयोजन कराया था। • राज्य स्तरीय चयन प्रक्रिया: घरेलू सत्र से पूर्व योग्य अधिकारियों की संख्या बढ़ाने के लिए कानपुर में स्कोरिंग और अंपायरिंग के विशेष इम्तिहान आयोजित किए गए थे। इस तरह के आयोजनों से उभरती प्रतिभाओं को आधिकारिक तौर पर पैनल में शामिल किया जाता है। • कड़े मूल्यांकन मानक: बीसीसीआई एजुकेटर पी. जयपाल और पूर्व आईसीसी अंपायर अनिल चौधरी की देखरेख में हुई परीक्षाओं का पाठ्यक्रम काफी कठिन रखा गया था। यही वजह रही कि दर्जनों परीक्षार्थियों में से केवल चुनिंदा लोग ही मेरिट सूची में आ सके। • स्थानीय तैयारी और मार्गदर्शन: प्रितेश ने अनुभवी स्कोरर से आंकड़े दर्ज करने की बारीकियां सीखी थीं, जबकि कुशाग्र और यशाग्र को पारिवारिक और कोचिंग का मजबूत आधार मिला। इन तीनों ने उचित औपचारिक अनुमति और प्रमाण पत्रों के आधार पर सही तैयारी के साथ परीक्षा में हिस्सा लिया। सवाल-जवाब 1. प्रयागराज के किन तीन युवाओं ने यूपीसीए की परीक्षा पास की है? दारागंज निवासी प्रितेश सोनकर ने स्कोरिंग परीक्षा पास की, जबकि जुड़वां भाइयों कुशाग्र त्रिपाठी और यशाग्र त्रिपाठी ने अंपायरिंग परीक्षा उत्तीर्ण की। 2. प्रितेश सोनकर ने स्कोरिंग की परीक्षा कहाँ दी थी? प्रितेश सोनकर ने अगस्त माह में कानपुर में आयोजित यूपीसीए की राज्य स्तरीय स्कोरिंग परीक्षा में हिस्सा लेकर सफलता हासिल की। 3. यूपीसीए अंपायरिंग परीक्षा में कुल कितने परीक्षार्थी शामिल हुए थे? अंपायरिंग परीक्षा में प्रदेश के विभिन्न जिलों से 97 अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जिनमें से केवल 14 ने सफलता पाई। 4. स्कोरिंग परीक्षा में कितने प्रतिभागी उत्तीर्ण हुए? बीसीसीआई एजुकेटर पी. जयपाल की देखरेख में हुई स्कोरिंग परीक्षा में 33 में से केवल 5 अभ्यर्थी ही पास हो सके। 5. कुशाग्र और यशाग्र किस क्रिकेट अकादमी से जुड़े हैं? दोनों भाई चौधरी नौनिहाल सिंह क्रिकेट एकेडमी से जुड़े हैं और कोच मोहम्मद आसिफ के प्रशिक्षु हैं। 6. जुड़वां भाइयों ने किस मंडल की ओर से यह परीक्षा दी थी? दोनों भाइयों ने इलाहाबाद क्रिकेट एसोसिएशन से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर गाजीपुर मंडल की ओर से परीक्षा में भाग लिया था। प्रेरणा और सबक प्रयागराज के इन युवाओं की मेहनत यह साबित करती है कि लगन और सही मार्गदर्शन से किसी भी कड़े इम्तिहान को फतह किया जा सकता है। • कठिन कसौटी से न घबराएं: स्कोरिंग में 33 में से केवल 5 और अंपायरिंग में 97 में से मात्र 14 उम्मीदवार पास हुए, लेकिन इन युवाओं ने भीड़ के बजाय अपनी तैयारी पर भरोसा रखा। • मार्गदर्शन की शक्ति पहचानें: अनुभवी विशेषज्ञों और कोचों के अनुभवों को आत्मसात कर किसी भी तकनीकी विधा में महारत हासिल की जा सकती है। • खेल में वैकल्पिक राहें खोजें: क्रिकेट के मैदान पर योगदान देने के लिए केवल बल्लेबाज या गेंदबाज होना जरूरी नहीं है; स्कोरिंग और अंपायरिंग जैसे क्षेत्र भी सम्मान और पहचान दिलाते हैं। https://trendkia.com/cricket/prayagraj-ke-tina-larakon-ka-kriketa-men-bara-kamala-upca-painala-men-skorara-aura-anpayara-banakara-banai-jagaha-54552 TrendKia — Har trend, sabse pehle.