{
  "type": "article",
  "title": "रणजी ट्रॉफी में रनों का अंबार लगाने वाले रिंकू सिंह पर क्यों है टी-20 स्पेशलिस्ट होने का ठप्पा",
  "summary": "रिंकू सिंह घरेलू लाल गेंद के क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अक्सर सिर्फ टी-20 फॉर्मेट का खिलाड़ी मानकर नजरअंदाज किया जाता है।",
  "content": "फिल्म जगत में अस्सी और नब्बे के दशक के दौरान कलाकारों को एक खास दायरे में बांध दिया जाता था। उस दौर में अभिनेता और अभिनेत्रियों पर कोई न कोई ठप्पा लग जाता था कि कौन एक्शन हीरो है, कौन रोमांटिक भूमिकाओं के लिए बना है और कौन सिर्फ हास्य कलाकार है। इसके बाद उन्हें उसी छवि के अनुसार फिल्में मिलती थीं। हालांकि आज का दौर पूरी तरह बदल चुका है और कलाकार हर तरह की भूमिकाएं निभा रहे हैं, जबकि निर्माता और निर्देशक भी जोखिम उठाने से पीछे नहीं हटते हैं।\n\nकुछ इसी तरह की मानसिकता इन दिनों क्रिकेट के खेल में खिलाड़ियों के साथ भी देखने को मिल रही है। आज के समय में कई बल्लेबाजों को केवल टेस्ट खिलाड़ी या फिर विशेष तौर पर टी-20 खिलाड़ी के रूप में देखा जाने लगा है। इस तरह के ठप्पे विशेष रूप से बल्लेबाजों के करियर को सीमित कर रहे हैं। इस स्थिति का सबसे बड़ा शिकार रिंकू सिंह जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी हो रहे हैं, जो हर प्रारूप में अपनी उपयोगिता साबित करने की काबिलियत रखते हैं।\n\nरणजी ट्रॉफी में रिंकू सिंह का शानदार प्रदर्शन\nउत्तर प्रदेश के खिलाड़ी रिंकू सिंह ने 2026-27 के रणजी सीजन में बिहार के खिलाफ मुकाबले के दौरान 168 गेंदों का सामना करते हुए 112 रनों की बेहतरीन पारी खेली। राजगीर में मौजूद कई क्रिकेट विशेषज्ञों ने इस मैच को देखने के बाद इस बात पर चर्चा की कि रिंकू सिंह लंबे समय से लाल गेंद के क्रिकेट में लगातार रन बना रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें केवल टी-20 का फिनिशर मानकर सीमित कर दिया गया है। यदि उनके रणजी ट्रॉफी के आंकड़ों पर गौर किया जाए, तो ऐसे तथ्य सामने आते हैं जो किसी को भी हैरान कर सकते हैं।\n\nरिंकू सिंह भारत के उन चुनिंदा बल्लेबाजों में शामिल हैं जो अपनी स्थापित छवि को लगातार चुनौती देते हैं और हर प्रारूप में बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं। इसके बावजूद उन पर टी-20 विशेषज्ञ का ठप्पा लगाकर अन्य प्रारूपों के लिए उनकी दावेदारी को खारिज कर दिया जाता है। रणजी ट्रॉफी में उनका औसत 68.08 का रहा है। उन्होंने अपने करियर के 54 फर्स्ट क्लास मैचों में 10 शतकों की मदद से कुल 3869 रन बनाए हैं। इसके अलावा 2018-19 के सत्र में उन्होंने 10 मैचों में 105.88 की शानदार औसत के साथ 953 रन बनाए थे। उत्तर प्रदेश के कई वरिष्ठ क्रिकेटरों का मानना है कि यह चयनकर्ताओं की एक बड़ी गलतफहमी है कि रिंकू केवल टी-20 के खिलाड़ी हैं। उनके पास वह तकनीक और संयम दोनों मौजूद हैं जो लंबे प्रारूप के क्रिकेट के लिए बेहद जरूरी हैं।\n\nभारतीय टीम से दूरी और घरेलू क्रिकेट में वापसी की कोशिश\nवर्ष 2026 का विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहने के बाद से रिंकू सिंह राष्ट्रीय टीम से बाहर चल रहे हैं। हाल ही में समाप्त हुई इंग्लैंड, आयरलैंड और वेस्टइंडीज के खिलाफ श्रृंखलाओं के लिए उन्हें टीम में जगह नहीं दी गई थी। वर्ष 2026 के विश्व कप के पांच मैचों में रिंकू केवल 24 रन ही बना पाए थे। मुख्य कोच गौतम गंभीर की निचले क्रम में गेंदबाजी करने वाले ऑलराउंडर खिलाड़ियों को प्राथमिकता देने की रणनीति के कारण शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी और नमन धीर को तो अवसर मिला, लेकिन रिंकू सिंह अपनी जगह बरकरार नहीं रख सके। अब रिंकू घरेलू क्रिकेट में लाल गेंद के मुकाबलों में लगातार रन बनाकर अपने ऊपर लगे इस सीमित प्रारूप के ठप्पे को हटाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\nइस खबर का उन सभी घरेलू क्रिकेट प्रेमियों और खिलाड़ियों पर सीधा असर पड़ता है जो सीमित प्रारूपों के अलावा पारंपरिक लाल गेंद के क्रिकेट को महत्व देते हैं।\n\n• भारतीय क्रिकेट में: यह स्थिति दर्शाती है कि सीमित प्रारूपों में खेलने वाले खिलाड़ियों को लंबे प्रारूप में अपनी काबिलियत साबित करने के लिए कितना कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। चयन प्रक्रिया के दौरान खिलाड़ियों के चयन के मापदंडों पर भी इससे गंभीर सवाल खड़े होते हैं।\n• घरेलू सर्किट में: उत्तर प्रदेश और अन्य घरेलू टीमों के लिए यह एक संकेत है कि खिलाड़ियों के कौशल का सही आंकलन केवल एक प्रारूप के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। इससे युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलती है कि वे हर प्रारूप में खुद को साबित करें।\n\nऐसा क्यों हुआ\nरिंकू सिंह के रणजी ट्रॉफी में बेहतरीन आंकड़े होने के बावजूद उन्हें टीम से बाहर रखने के पीछे कुछ विशेष रणनीतिक कारण रहे हैं। टीम प्रबंधन की नई योजनाओं और चयन नीतियों ने उनके चयन को प्रभावित किया है।\n\n• रणनीतिक बदलाव: मुख्य कोच गौतम गंभीर की लोअर मिडिल ऑर्डर में ऐसे खिलाड़ियों को प्राथमिकता देने की रणनीति रही है जो बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी भी कर सकें। इसी सोच के कारण शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी और नमन धीर को टीम में जगह मिली।\n• विश्व कप का प्रदर्शन: वर्ष 2026 के विश्व कप के पांच मैचों में रिंकू सिंह केवल 24 रन ही बना सके थे, जिसके चलते उन्हें शुरुआती योजना से बाहर करना पड़ा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रिंकू सिंह का रणजी ट्रॉफी में औसत कितना है?\nरिंकू सिंह रणजी ट्रॉफी में 68.08 की औसत से रन बनाते आ रहे हैं।\n\n2. रिंकू सिंह ने बिहार के खिलाफ मैच में कितने रन बनाए?\nउन्होंने 2026-27 के रणजी सीजन में बिहार के खिलाफ 168 गेंदों पर 112 रन बनाए।\n\n3. रिंकू सिंह ने अब तक कितने फर्स्ट क्लास मैच खेले हैं?\nउन्होंने अपने करियर में 54 फर्स्ट क्लास मैच खेले हैं जिनमें उन्होंने 10 शतकों की मदद से 3869 रन बनाए हैं।\n\n4. किन खिलाड़ियों को रिंकू सिंह की जगह टीम में प्राथमिकता दी गई?\nगौतम गंभीर की रणनीति के तहत शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी और नमन धीर को टीम में जगह दी गई।",
  "url": "https://trendkia.com/cricket/ranaji-trophi-men-ranon-ka-anbara-lagane-vale-rinku-singh-para-kyon-hai-t20-visheshajna-hone-ka-thappa-47329",
  "category": "क्रिकेट",
  "publishedAt": "2026-10-13",
  "tags": [
    "रिंकू सिंह",
    "रणजी ट्रॉफी",
    "भारतीय क्रिकेट",
    "घरेलू क्रिकेट",
    "गौतम गंभीर",
    "उत्तर प्रदेश क्रिकेट"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}