रूढ़ियों को स्टंप आउट कर रहीं सिरोही की उर्मिला चौधरी, महेंद्र सिंह धोनी से प्रेरणा लेकर क्रिकेट में बना रहीं मुकाम राजस्थान के सिरोही जिले के पोसीतरा गांव की उर्मिला कुमारी चौधरी ने समाज की तमाम पाबंदियों को दरकिनार करते हुए क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। महेंद्र सिंह धोनी से प्रेरित होकर खेल के मैदान में उतरीं उर्मिला आज पुणे की एक एकेडमी में प्रोफेशनल ट्रेनिंग ले रही हैं। राजस्थान के छोटे से गांव से निकलकर क्रिकेट की पिच पर अपने हुनर का जलवा बिखेरने का ख्वाब देखने वाली उर्मिला कुमारी चौधरी की संघर्ष गाथा अडिग हौसले और दृढ़ संकल्प की एक बेहतरीन दास्तान है। सिरोही जिले के रेवदर उपखंड के अंतर्गत आने वाले पोसीतरा गांव की रहने वाली उर्मिला ने उस दकियानूसी मानसिकता को कड़ी चुनौती दी है, जिसमें आज भी ग्रामीण इलाकों में बेटियों के लिए खेलकूद के रास्ते आसान नहीं समझे जाते हैं। एक समय ऐसा भी था जब लोगों ने उन्हें मैदान पर खेलने को लेकर तरह-तरह के ताने कसे और उनके परिवार को भी सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ा, लेकिन उर्मिला ने अपने हाथों से विकेटकीपिंग ग्लव्स नहीं छोड़े और हर चुनौती का डटकर मुकाबला किया। भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी की शानदार विकेटकीपिंग शैली से प्रेरणा पाकर इस खेल की शुरुआत करने वाली उर्मिला पिछले चार साल से लगातार इस खेल के प्रति पूरी तरह समर्पित होकर मेहनत कर रही हैं। अपने इसी सपने को एक नई ऊंचाई और प्रोफेशनल स्तर पर ले जाने के लिए वह वर्तमान में पुणे की एक प्रतिष्ठित क्रिकेट एकेडमी में कड़ा प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। सबसे खास बात यह है कि घर से दूर दूसरे शहर में ट्रेनिंग लेने के बावजूद उनका अपनी माटी और जड़ों से गहरा जुड़ाव आज भी पूरी तरह कायम है। उर्मिला अपनी खेल प्रतिभा के दम पर जिला स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में सिरोही का शानदार प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं तथा जयपुर व अलवर में जिले की टीम की ओर से कई महत्वपूर्ण मैच खेल चुकी हैं। इसके अलावा जून 2024 में आयोजित हुई चैलेंजर्स ट्रॉफी में भी उन्होंने अपनी खेल कला का बेहतरीन प्रदर्शन किया था। टेलीविज़न पर मैच देखते-देखते जागा क्रिकेट का शौक क्रिकेट के प्रति अपने लगाव के बारे में बात करते हुए उर्मिला बताती हैं कि इस खेल से उनका परिचय कक्षा 11 में पढ़ाई के दौरान हुआ था। उन दिनों वह अपनी मौसी के बेटे के साथ बैठकर टेलीविजन पर क्रिकेट के मुकाबले देखा करती थीं। इसी दौरान महेंद्र सिंह धोनी की फुर्ती और विकेट के पीछे उनके अद्वितीय अंदाज ने उनके दिल और दिमाग पर गहरी छाप छोड़ी। धोनी के काम करने के तरीके और खेल के प्रति समर्पण को देखकर उन्होंने भी तय कर लिया कि उन्हें क्रिकेट के मैदान पर कुछ बड़ा करके दिखाना है। उनके इस सफर की शुरुआत कॉलेज स्तर के टूर्नामेंटों से हुई थी। धीरे-धीरे खेल के प्रति उनका यह शौक एक बड़े जुनून में तब्दील हो गया और उन्होंने मैदान पर नियमित अभ्यास करना शुरू कर दिया। पिछले लगभग चार वर्षों से उर्मिला लगातार मैदान पर घंटों पसीना बहा रही हैं और अपनी तकनीक को सुधारने में जुटी हुई हैं। ग्रामीण परिवेश की रूढ़िवादी सोच बनी सबसे बड़ी बाधा उर्मिला के लिए यह पूरा सफर सिर्फ खेल के मैदान तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्हें समाज की पुरानी और संकीर्ण सोच के खिलाफ भी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। ग्रामीण माहौल में लोगों ने उन्हें क्रिकेट खेलते देखा तो तरह-तरह की फब्तियां कसीं और ताने मारे। उनसे यहाँ तक कहा गया कि लड़कियों का असली काम घर-गृहस्ती संभालना, घास काटना और मवेशियों के लिए गोबर उठाना है, न कि क्रिकेट के मैदान पर समय बर्बाद करना। लोगों ने यह ताना भी दिया कि इस तरह क्रिकेट खेलने वाली लड़की से भविष्य में शादी कौन करेगा। शुरुआती दौर में उनका परिवार भी समाज की इन बातों से थोड़ा प्रभावित हुआ और उर्मिला के क्रिकेट खेलने के फैसले के पक्ष में नहीं था। हालांकि उन्होंने कभी हार नहीं मानी। पास के ही उड़वारिया गांव में फुटबॉल खेलने वाली कुछ अन्य लड़कियों का जीवंत उदाहरण देकर उन्होंने अपने परिवार को समझाया कि आज के दौर में बेटियां खेल के क्षेत्र में भी लड़कों से पीछे नहीं हैं और मुकद्दर बदल सकती हैं। परिजनों का समर्थन और भविष्य का बुलंद हौसला जिस परिवार को कभी समाज की आलोचनाओं और दबी जुबान से होने वाली बातों की सबसे ज्यादा चिंता सताती थी, वही आज उर्मिला की सबसे बड़ी ताकत बनकर उनके साथ खड़ा है। अपने सपनों को सही दिशा देने के लिए वह इस समय पुणे की क्रिकेट एकेडमी में विशेष प्रशिक्षण ले रही हैं। इसके साथ ही वह सिरोही जिले की टीम की नुमाइंदगी करना भी जारी रखे हुए हैं। उर्मिला का स्पष्ट तौर पर यह मानना है कि क्रिकेट उनके लिए महज़ एक खेल नहीं है, बल्कि समाज में अपनी खुद की एक अलग पहचान बनाने का बहुत बड़ा जरिया है। उनका मुख्य लक्ष्य सिरोही के साथ-साथ पूरे राजस्थान राज्य का नाम पूरी दुनिया में रोशन करना है। वह दृढ़ता से कहती हैं कि शादी के बाद भी उनका यह खेल और मैदान कभी छूटेगा नहीं। उर्मिला की यह प्रेरक कहानी उन तमाम बेटियों के लिए एक मजबूत संदेश है, जिन्हें अक्सर सामाजिक पाबंदियों और रूढ़ियों के कारण अपने सपनों का गला घोंटना पड़ता है। उन्होंने यह साबित कर दिखाया है कि अगर इरादे फौलादी हों तो हर ताने का करारा जवाब मैदान पर अपने प्रदर्शन से दिया जा सकता है और समाज की पुरानी बेड़ियों को भी विकेट की तरह आसानी से स्टंप आउट किया जा सकता है। इसका आप पर असर यह खबर उन सभी युवा लड़कियों और ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए बेहद प्रेरणादायक है जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद खेल या अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहती हैं। • भारत में: यह घटना देश के दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में प्रतिभाओं के सामने आने वाली सामाजिक चुनौतियों और उनके समाधान का एक स्पष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है। इससे खेल प्रशासन और ग्रामीण युवाओं को खेलकूद के प्रति प्रोत्साहन मिलता है। • सिरोही में: स्थानीय स्तर पर इस खबर से सिरोही और आसपास के क्षेत्रों के युवाओं विशेषकर बालिकाओं में खेल के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। इससे स्थानीय खेल अकादमियों और जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी को बढ़ावा मिल सकता है। सवाल-जवाब 1. उर्मिला कुमारी चौधरी किस जिले की रहने वाली हैं? उर्मिला राजस्थान के सिरोही जिले के रेवदर उपखंड के पोसीतरा गांव की रहने वाली हैं। 2. उर्मिला को क्रिकेट खेलने की प्रेरणा किससे मिली? उर्मिला को भारतीय खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी की विकेटकीपिंग शैली से क्रिकेट खेलने की प्रेरणा मिली। 3. उर्मिला वर्तमान में कहां प्रशिक्षण ले रही हैं? अपने सपने को प्रोफेशनल स्तर पर ले जाने के लिए उर्मिला पुणे की एक क्रिकेट एकेडमी में प्रशिक्षण ले रही हैं। 4. उर्मिला ने किन जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है? वह सिरोही का प्रतिनिधित्व करते हुए जयपुर और अलवर में जिले की टीम के लिए महत्वपूर्ण मुकाबले खेल चुकी हैं। 5. उन्होंने किस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया? जून 2024 की चैलेंजर्स ट्रॉफी में उर्मिला ने अपने खेल का प्रदर्शन किया था। 6. क्रिकेट के प्रति उनका लगाव कब शुरू हुआ? कक्षा 11 में पढ़ाई के दौरान टीवी पर मैच देखते हुए उनका जुड़ाव क्रिकेट से हुआ था। प्रेरणा और सबक उर्मिला कुमारी चौधरी का यह सफर कई महत्वपूर्ण सबक सिखाता है जिन्हें कोई भी आकांक्षी युवा अपने जीवन में अपना सकता है: • बड़ी प्रेरणा खोजें: अपने क्षेत्र के किसी दिग्गज या रोल मॉडल के काम का बारीकी से अध्ययन करें और उससे सीख लेकर अपने कौशल को निखारें। • नकारात्मकता को नजरअंदाज करें: समाज या आसपास के लोगों के तानों से विचलित होने के बजाय अपने लक्ष्य पर पूरी तरह एकाग्र रहें। • दूसरों का उदाहरण दें: अपने परिवार या समाज के विरोध को दूर करने के लिए समान क्षेत्रों में पहले से सफल हो चुके लोगों के उदाहरण पेश करें। • निरंतर अभ्यास जारी रखें: सफलता का शॉर्टकट नहीं होता; पिछले चार साल से लगातार पसीना बहाने की तरह अपने अभ्यास में निरंतरता बनाए रखें। https://trendkia.com/cricket/sirohi-player-urmila-choudhary-defies-social-norms-to-chase-cricket-dreams-inspired-by-ms-dhoni-25481 TrendKia — Har trend, sabse pehle.