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  "title": "क्रिकेट के 5 अजीब अंधविश्वास: गैरी सोबर्स के लिए सुनील गावस्कर बने लकी चार्म और नील मैकेंजी के अनोखे नियम",
  "summary": "क्रिकेट के मैदान पर खिलाड़ियों के अजीबोगरीब अंधविश्वास और टोटकों का पुराना इतिहास रहा है। वेस्टइंडीज के गैरी सोबर्स से लेकर रवींद्र जडेजा तक, जानिए 5 सबसे अनोखे किस्से।",
  "content": "खेलों की दुनिया में कड़ी मेहनत, बेहतरीन तकनीक और अटूट लगन का कोई दूसरा विकल्प नहीं होता है, लेकिन जब मैदान पर किस्मत साथ छोड़ती है, तो दुनिया के बड़े-बड़े धुरंधर खिलाड़ी भी अजीबोगरीब टोटकों और अंधविश्वासों का सहारा लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं। क्रिकेट के मैदान पर चाहे एक बड़ा शतक जड़ना हो या फिर विपक्षी टीम के अहम विकेट चटकाना हो, खिलाड़ियों को कई बार अपनी जन्मजात काबिलियत के साथ-साथ किसी अदृश्य ‘लकी’ चीज की भी सख्त जरूरत महसूस होने लगती है। यह अजीब सिलसिला अक्सर बहुत ही अनजाने तरीके से शुरू हो जाता है। मान लीजिए अगर किसी खिलाड़ी ने किसी खास बल्ले से मैदान पर उतरकर ताबड़तोड़ रन बनाए हैं या फिर किसी खास रंग के दस्ताने पहनकर अपनी टीम को मैच जिताया है, तो वह अगली बार भी पूरी शिद्दत के साथ उसी वस्तु को अपनी सफलता की मूल कुंजी मान बैठता है। अपने मैच पैड को हमेशा पहले बाएं पैर में पहनना, हर मुकाबले में एक ही रंग का रूमाल अपनी जेब में सुरक्षित रखना या अपनी पसंद का एक खास जर्सी नंबर चुनना तो एक आम बात बन चुकी है, लेकिन क्रिकेट जगत में कुछ खिलाड़ियों के अंधविश्वास इतने अनोखे और हैरान करने वाले रहे हैं कि उनके बारे में जानकर हंसी भी आती है और गहरा ताज्जुब भी होता है।\n\n \n\nगैरी सोबर्स और सुनील गावस्कर का दिलचस्प संयोग\n\nक्रिकेट इतिहास के सर्वकालिक महान ऑलराउंडरों में शुमार वेस्टइंडीज के सर गैरी सोबर्स किसी भी परिचय के मोहताज नहीं हैं। अपने एक ही ओवर में छह छक्के जड़ने वाले करिश्माई सोबर्स जितने बेहतरीन और आक्रामक बल्लेबाज थे, उतने ही शानदार और फुर्तीले गेंदबाज और फील्डर भी माने जाते थे। लेकिन क्या आप इस दिलचस्प बात को जानते हैं कि इतना बड़ा और दिग्गज खिलाड़ी भारत के महान ओपनर सुनील गावस्कर को अपने लिए एक पक्का ‘लकी चार्म’ मानता था? साल 1971 की ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज के दौरान सुनील गावस्कर अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की बिल्कुल शुरुआत कर रहे थे और मैदान पर उतरकर लगातार ताबड़तोड़ रन बना रहे थे। वहीं दूसरी तरफ, गैरी सोबर्स उस समय अपने करियर के बेहद खराब फॉर्म से जूझ रहे थे और रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। सोबर्स हर दिन मैच शुरू होने से ठीक पहले भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में सीधे चले आते थे, वहां मौजूद सभी खिलाड़ियों से गर्मजोशी से मिलते थे और विशेष रूप से सुनील गावस्कर को छूकर सीधे मैदान के अंदर जाते थे। इसके बाद एक बेहद अजीब संयोग यह देखने को मिला कि गावस्कर को छूने के बाद गैरी सोबर्स का बल्ला जमकर बोलने लगा और उन्होंने लगातार बेहतरीन शतक जड़ डाले.\n\n \n\nजब भारतीय कप्तान ने चली अनोखी चाल\n\nयह दिलचस्प वाकया इस ऐतिहासिक सीरीज के आखिरी टेस्ट मैच का है। उस मुकाबले में भारतीय कप्तान अजीत वाडेकर ने गैरी सोबर्स के इस अजीब टोटके को पूरी तरह से नाकाम करने की एक पक्की योजना बनाई। सोबर्स के ड्रेसिंग रूम में आने से ठीक पहले ही कप्तान वाडेकर ने चुस्ती दिखाते हुए सुनील गावस्कर को अंदर टॉयलेट के भीतर बंद कर दिया। तय समय पर गैरी सोबर्स वहां पहुंचे, उन्होंने इधर-उधर की सामान्य बातें कीं, लेकिन काफी तलाशने के बाद भी वे सुनील गावस्कर को छू नहीं पाए। अब किस्मत का असली खेल देखिए, उस दिन गैरी सोबर्स जब बल्लेबाजी करने के लिए मैदान पर उतरे, तो वे आबिद अली की पारी की पहली ही गेंद पर बिना अपना खाता खोले शून्य के स्कोर पर आउट होकर पवेलियन लौट गए। क्रिकेट के गलियारों में यह घटना आज भी एक बड़े और अनोखे संयोग के रूप में पूरी तरह से याद की जाती है.\n\n \n\nनील मैकेंजी के बेहद अतरंगी और सख्त नियम\n\nदक्षिण अफ्रीका के पूर्व सलामी बल्लेबाज नील मैकेंजी के निजी अंधविश्वास तो इतने ज्यादा अजीब थे कि उनके अपने साथी खिलाड़ी भी उन्हें देखकर हैरान रह जाते थे। मैकेंजी जब भी बल्लेबाजी करने के लिए मैदान पर उतरने वाले होते थे, तो उससे ठीक पहले वह इस बात की तसल्ली जरूर करते थे कि ड्रेसिंग रूम के भीतर टॉयलेट की सीट हमेशा नीचे की तरफ पूरी तरह बंद हो। सिर्फ इतनी सी बात पर ही उनका सिलसिला खत्म नहीं होता था; मैदान के अंदर जाने से ठीक पहले वह अपने कीमती बल्ले को ड्रेसिंग रूम की छत से छुआते थे और उसे प्यार से थपथपाते थे। जब वह अपनी बैटिंग के लिए क्रीज पर पहुंच जाते थे, तब भी उनका यह टोटका रुकता नहीं था; वह मैदान पर मौजूद गेंदबाजों और फील्डरों को बहुत गौर से देखने के साथ-साथ स्क्वायर लेग से लेकर फाइन लेग तक के पूरे एरिया का एक बेहद खास पैटर्न के तहत मुआयना करते थे। हालांकि, इन तमाम अजीब आदतों के बावजूद, नील मैकेंजी ने दक्षिण अफ्रीका की राष्ट्रीय टीम के लिए कुल 58 टेस्ट और 64 वनडे मैचों में बेहद शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने करियर में हजारों रन बनाए और अपनी एक अलग पहचान बनाई.\n\n \n\nडॉक खाने का डर और संगीत का अनोखा जादू\n\nक्रिकेट के खेल में शून्य के स्कोर पर आउट होकर पवेलियन लौटने को ‘डक’ कहा जाता है। शायद यही एक बड़ी वजह है कि दुनिया भर के ज्यादातर क्रिकेटर मैच से ठीक पहली रात को अपने खाने में ‘डक’ यानी बतख के मांस को छूने तक से पूरी तरह बचते हैं। इंग्लैंड के तीन जाने-माने दिग्गज बल्लेबाजों रॉबिन जैकमैन, डेविड गॉवर और एलन लैंब ने एक बार गलती से मैच से ठीक पहले डक खा लिया और उसका नतीजा यह हुआ कि अगले ही दिन पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में वे तीनों बहुत ही सस्ते दामों पर पवेलियन लौट गए। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के आधुनिक दिग्गज बल्लेबाज स्टीव स्मिथ ने आगे चलकर इस पुराने मिथक को पूरी तरह से तोड़ दिया। उन्होंने लॉर्ड्स टेस्ट मैच से ठीक पहले अपने डिनर में डक का सेवन किया और उसके ठीक अगले दिन मैदान पर शानदार बल्लेबाजी करते हुए 215 रनों की एक ऐतिहासिक पारी खेल डाली। इसके बिल्कुल विपरीत, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क का तरीका बाकी सभी खिलाड़ियों से बिल्कुल अलग और जुदा था। जहां दुनिया भर के अधिकांश खिलाड़ी मैदान पर उतरने से पहले पूरी तरह शांत रहना या फिर बहुत धीमा और सुकून देने वाला संगीत सुनना बेहद पसंद करते हैं, वहीं माइकल क्लार्क अपने कानों में इयरफोन लगाकर बहुत तेज आवाज में गाने सुनते थे। उनका अपना यह पक्का विश्वास था कि इस प्रकार का लाउड म्यूजिक उनके दिमाग को पूरी तरह से एकाग्र करने में काफी मदद करता है.\n\n \n\nरवींद्र जडेजा का सफेद लाइन से दूरी का नियम\n\nमैदानी टोटकों और अंधविश्वासों की इस लंबी सूची में भारत के स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा का नाम भी बेहद प्रमुखता के साथ शामिल किया जाता है। रवींद्र जडेजा जब भी खेल के दौरान मैदान के अंदर कदम रखते हैं या फिर अपनी पारी समाप्त करके बाहर लौटते हैं, तो वह कभी भी बाउंड्री लाइन या फिर 30-यार्ड के दायरे वाले घेरे की सफेद पट्टी पर अपना पैर बिल्कुल नहीं रखते हैं। वह हमेशा उस सफेद लाइन को पूरी तरह से फांदकर ही आगे की तरफ बढ़ते हैं। उनके मन में यह पक्का विश्वास है कि उस सफेद पट्टी पर पैर रखने से उनका अच्छा भाग्य बिगड़ सकता है और उनकी किस्मत उनसे रूठ सकती है। चाहे अंतरराष्ट्रीय मंच का भारी-भरकम दबाव हो या फिर घरेलू क्रिकेट का सामान्य माहौल, खेल में सफलता पाने की यह तीव्र चाहत ही होती है जो हर क्रिकेटर्स को उन सभी चीजों को आजमाने के लिए मजबूर कर देती है जो उन्हें अंदर से मानसिक मजबूती प्रदान कर सकें। आखिरकार, मैदान पर बनाए जाने वाले एक-एक रन और चटकाए जाने वाले एक-एक विकेट के लिए खिलाड़ियों को मिलने वाली यह ‘लकी’ ताकत ही तो इस पूरे खेल का सबसे बड़ा और असली रोमांच होती है.\n\nइसका आप पर असर\nक्रिकेट प्रेमियों के लिए: यह लेख खेल के मैदान पर खिलाड़ियों के मानसिक दबाव और उनके अनोखे विश्वासों की अनूठी झलक दिखाता है, जो यह साबित करता है कि खेल में शारीरिक कौशल के साथ मानसिक शांति भी कितनी अहम होती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. गैरी सोबर्स किसे अपना लकी चार्म मानते थे?\nगैरी सोबर्स भारत के महान ओपनर सुनील गावस्कर को अपना लकी चार्म मानते थे और मैदान पर जाने से पहले उन्हें छूते थे।\n\n2. नील मैकेंजी बल्लेबाजी से पहले क्या अजीब नियम मानते थे?\nनील मैकेंजी यह देखते थे कि ड्रेसिंग रूम में टॉयलेट की सीट बंद हो और मैदान पर जाने से पहले बल्ले को छत से छुआते थे।\n\n3. किस ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने डक खाने के मिथक को तोड़ा था?\nऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज स्टीव स्मिथ ने लॉर्ड्स टेस्ट से पहले डिनर में डक खाकर अगले दिन 215 रनों की पारी खेली थी।\n\n4. रवींद्र जडेजा मैदान पर उतरते समय किस नियम का पालन करते हैं?\nरवींद्र जडेजा मैदान पर आते-जाते वक्त बाउंड्री या 30-यार्ड सर्कल की सफेद लाइन पर पैर रखने से बचते हैं और उसे फांदकर आगे बढ़ते हैं।",
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  "category": "क्रिकेट",
  "publishedAt": "2026-08-10",
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