विराट कोहली के दौर वाली ऐतिहासिक टेस्ट टीम का अंत, अब सिर्फ तीन खिलाड़ी बचे मैदान पर लगातार 42 महीनों तक टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष पर रहने वाली भारतीय टीम के अधिकांश दिग्गज खिलाड़ी अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह चुके हैं। केवल तीन नाम अब सक्रिय क्रिकेट से जुड़े हैं। क्रिकेट के गलियारों में समय के साथ बदलाव एक अटल सत्य है, जिसे चाहकर भी बदला नहीं जा सकता। बात चाहे खेल के मैदान की हो या फिर व्यक्तिगत जीवन की, बदलाव का नियम हर जगह समान रूप से लागू होता है। यदि नजर डालें पिछले कुछ वर्षों के सफर पर, तो वर्ष 2018 के बाद से जिस भारतीय टेस्ट टीम ने दुनिया भर के मैदानों पर अपना सिक्का जमाया था, वह आज पूरी तरह से बदल चुकी है। उस दौर के न तो रणनीतिकार मैदान पर हैं और न ही वे धुरंधर योद्धा जो जीत की इबारत लिखते थे। यहाँ मुख्य रूप से बात हो रही है विराट कोहली और उनके सुनहरे कार्यकाल की। भारतीय टेस्ट इतिहास का स्वर्णिम काल जब भी भारतीय टेस्ट क्रिकेट के सुनहरे अध्यायों का जिक्र होगा, कप्तान और बल्लेबाज के रूप में विराट कोहली का योगदान हमेशा सर्वोच्च स्थान पर दर्ज रहेगा। उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय टीम ने पूरे 42 महीनों तक दुनिया की नंबर-1 टेस्ट टीम का ताज अपने सिर पर सजाए रखा और ग्लोबल स्तर पर अपनी एक अलग धाक जमाई। हालांकि, जैसे-जैसे समय का पहिया आगे बढ़ा, उस ऐतिहासिक टेस्ट एकादश के मुख्य सितारे एक-एक करके संन्यास के रास्ते पर चल पड़े या फिर विदाई की कगार पर पहुँच गए। हाल ही में रोहित शर्मा और विराट कोहली द्वारा लाल गेंद के प्रारूप को छोड़ने के बाद, उस शानदार युग के केवल तीन खिलाड़ी ही अब मैदान पर शेष बचे हैं। संन्यास ले चुके दिग्गज खिलाड़ी उस दौर की आक्रामक और लगभग अजेय टेस्ट वाहिनी की रीढ़ माने जाने वाले अधिकांश खिलाड़ी अब खेल को अलविदा कह चुके हैं। इस लंबी सूची में कई बड़े और प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं। विदेशी धरती पर भारत को मजबूत शुरुआत देने वाले सलामी बल्लेबाज मुरली विजय और शिखर धवन अब लीजेंड्स क्रिकेट का हिस्सा बन चुके हैं। भारतीय बल्लेबाजी क्रम की मजबूत दीवार कहे जाने वाले चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे ने भी थोड़े समय पहले अपने संन्यास का ऐलान कर एक गौरवशाली युग पर विराम लगा दिया। साल 2025 में विराट कोहली और रोहित शर्मा दोनों ही महादिग्गजों ने टेस्ट प्रारूप से संन्यास लेकर हर किसी को हैरान कर दिया, जिसमें कोहली ने 123 टेस्ट मैचों के अपने करियर में कुल 9,230 रन बनाए। इसके अलावा, शानदार विकेटकीपर ऋद्धिमान साहा और देश के सबसे सफल स्पिन गेंदबाजों में शुमार आर. अश्विन भी अब टेस्ट मंच से दूर हो चुके हैं। मैदान पर बचे हुए आखिरी तीन नाम विराट की उस प्रसिद्ध प्लेइंग इलेवन में से अब केवल तीन तेज गेंदबाज ही ऐसे हैं जो किसी न किसी रूप में सक्रिय हैं, हालांकि उनके भविष्य को लेकर भी लगातार अटकलें जारी हैं। सौ से अधिक टेस्ट मैच खेल चुके ईशांत शर्मा लंबे समय से टीम से बाहर चल रहे हैं और जल्द ही अपने आधिकारिक संन्यास की घोषणा कर सकते हैं। अपनी गति और घरेलू पिचों पर बेहतरीन रिवर्स स्विंग के लिए पहचाने जाने वाले विदर्भ के उमेश यादव भी अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर खड़े हैं। स्विंग के उस्ताद कहे जाने वाले भुवनेश्वर कुमार भी अब केवल सीमित ओवरों के मुकाबलों या घरेलू क्रिकेट तक ही सीमित रह गए हैं। अजेय बादशाहत और ऐतिहासिक उपलब्धियां विराट कोहली की कप्तानी का रिकॉर्ड गवाह है कि भारत ने उनके नेतृत्व में कुल 68 टेस्ट मैच खेले जिनमें से 40 मुकाबलों में जीत का परचम लहराया, जो किसी भी भारतीय कप्तान के लिए एक ऐतिहासिक आंकड़ा है। उनकी कप्तानी का सबसे बड़ा मील का पत्थर ऑस्ट्रेलिया की धरती पर पहली बार (2018-19) टेस्ट श्रृंखला जीतना और इंग्लैंड के ऐतिहासिक मैदानों जैसे लॉर्ड्स तथा ओवल पर तिरंगा फहराना रहा है। कोहली ने ड्रेसिंग रूम में जिस फिटनेस और आक्रामक संस्कृति की नींव रखी, उसी के परिणाम स्वरूप भारत ने लगातार साढ़े तीन साल तक शीर्ष पायदान पर कब्जा जमाए रखा। इन تمام दिग्गजों के जाने के बाद भारतीय टेस्ट क्रिकेट अब एक नए संक्रमण काल से गुजर रहा है। शुभमन गिल और यशस्वी जायसवाल जैसे युवा प्रतिभावान खिलाड़ी अब इस बड़ी विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी उठा रहे हैं। पुरानी पीढ़ी भले ही इतिहास के पन्नों में सिमट गई हो, लेकिन उनके द्वारा स्थापित आक्रामकता आज भी भारतीय टीम की मूल पहचान बनी हुई है। https://trendkia.com/cricket/virat-kohli-ke-daura-vali-aitihasika-testa-tima-ka-anta-aba-sirpha-tina-khilari-bache-maidana-para-13344 TrendKia — Har trend, sabse pehle.