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  "type": "article",
  "title": "वर्ल्ड स्किल्स में तिरंगा लहराने वाले हुनरमंदों से मिले नरेंद्र मोदी, बोले डिग्री जितनी ही अहमियत रखती है प्रैक्टिकल ट्रेनिंग",
  "summary": "शंघाई में 48वीं वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता में 10वां स्थान हासिल करने वाले भारतीय दल से प्रधानमंत्री आवास पर नरेंद्र मोदी ने संवाद किया। उन्होंने कौशल प्रशिक्षण संस्थानों की तुलना आईआईटी और आईआईएम से करते हुए युवाओं को नई तकनीक सीखने की सलाह दी।",
  "content": "चीन के शंघाई शहर में आयोजित 48वीं वर्ल्ड स्किल्स कंपटीशन में शानदार प्रदर्शन करके स्वदेश लौटे भारतीय दल के युवा प्रतिभागियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुलाकात की है। 9 अक्टूबर को प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित इस विशेष संवाद कार्यक्रम में देश का मान बढ़ाने वाले हुनरमंद युवाओं ने अंतरराष्ट्रीय मंच के अपने अनुभव साझा किए। अक्सर कौशल के ओलंपिक के नाम से पहचानी जाने वाली इस वैश्विक प्रतियोगिता का आयोजन 22 से 27 सितंबर तक हुआ था। इस दौरान भारतीय प्रतिभागियों ने विदेशी धरती पर इस्तेमाल किए जा रहे आधुनिक टूल्स, सॉफ्टवेयर प्रणालियों, तकनीकी प्रणालियों और काम करने के नए तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही देश के युवाओं के सामर्थ्य को मजबूत बनाने के लिए कौशल विकास की दिशा में चल रही सरकारी पहलों से मिले लाभ को भी सामने रखा।\n\nप्रैक्टिकल हुनर को एकेडमिक डिग्री के बराबर बताएं: प्रधानमंत्री का संदेश\nवैश्विक पटल पर भारत का परचम लहराने वाले सभी युवाओं को बधाई देते हुए नरेंद्र मोदी ने उनसे पूरे देश में कौशल विकास के एंबेसडर के तौर पर सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि मौजूदा दौर में व्यावहारिक कौशल यानी प्रैक्टिकल स्किल्स किसी भी औपचारिक एकेडमिक डिग्री जितने ही जरूरी हैं। बदलती दुनिया में विशेष कौशल के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जिस रफ्तार से तकनीकी विकास हो रहा है, उसमें युवाओं को अपनी कार्यक्षमता लगातार अपग्रेड करनी होगी। उन्होंने सलाह दी कि नई टेक्नोलॉजी के साथ खुद को लगातार ढालना और नए हुनर को सीखना समय की सबसे बड़ी मांग है। इसके साथ ही उन्होंने प्रतिभागियों से अंतरराष्ट्रीय बाजार की आवश्यकताओं को समझने और अपने सुझावों के जरिए भारत के घरेलू कौशल प्रशिक्षण इकोसिस्टम को विश्वस्तरीय बनाने में मदद करने का आह्वान किया।\n\n \n\nआईआईटी और आईआईएम के बराबर है वोकेशनल संस्थानों का रुतबा\nप्रतिभागियों से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा कौशल विकास के लिए एक समर्पित अलग मंत्रालय बनाए जाने के मूल विजन पर प्रकाश डाला। उन्होंने दो टूक कहा कि कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने वाले संस्थानों की अहमियत देश के शीर्ष संस्थानों जैसे आईआईटी और आईआईएम से किसी भी मायने में कम नहीं है। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपने वैश्विक अनुभवों और जमीनी सुझावों को सरकार के साथ निरंतर साझा करते रहें ताकि देश के वोकेशनल ट्रेनिंग तंत्र की कमियों को दूर करके उसे अधिक प्रभावी बनाया जा सके। युवा प्रतिभाओं को अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखते हुए नई औद्योगिक चुनौतियों के लिए तैयार रहने के लिए प्रेरित किया गया।\n\nवर्ल्ड स्किल्स में टीम इंडिया का ऐतिहासिक प्रदर्शन: 10वीं रैंक और 26 पदक\nवर्ल्ड स्किल्स दरअसल दुनिया भर के विभिन्न देशों और क्षेत्रों के युवा पेशेवरों को व्यावसायिक और तकनीकी कौशल में अपनी महारत दिखाने के लिए मंच प्रदान करने वाली सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता है। शंघाई में आयोजित 48वें संस्करण में भारत की तरफ से 70 प्रतिभागियों के एक मजबूत दल ने 63 अलग-अलग कौशल विधाओं में अपनी दावेदारी पेश की थी। कड़े वैश्विक मुकाबलों के बीच भारतीय टीम ने ओवरऑल तालिका में 10वां स्थान प्राप्त किया। इस टूर्नामेंट में टीम इंडिया के हुनरमंदों ने 6 सिल्वर मेडल अपने नाम किए, जबकि असाधारण गुणवत्ता और कार्यकुशलता के दम पर 20 मेडल फॉर एक्सीलेंस हासिल करने में भी कामयाबी पाई।\n\nइसका आप पर असर\nअंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय युवाओं की यह उपलब्धि वोकेशनल एजुकेशन और स्किल सर्टिफिकेशन को देश भर में नई सामाजिक प्रतिष्ठा और पहचान दिलाएगी।\n\n• कौशल सीखने वाले युवाओं के लिए: वोकेशनल ट्रेनिंग लेने वाले युवाओं को अब पारंपरिक डिग्री धारकों के बराबर सम्मान और बेहतर औद्योगिक अवसर मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। नई तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय मानकों को सीखने से घरेलू व वैश्विक स्तर पर रोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे।\n• उद्योग और भर्ती क्षेत्र पर: बहुराष्ट्रीय कंपनियां और घरेलू उद्योग अब केवल डिग्रियों पर निर्भर रहने के बजाय प्रमाणित प्रैक्टिकल दक्षता को प्राथमिकता देंगे। 63 अलग-अलग विधाओं में अंतरराष्ट्रीय मानकों की जानकारी उद्योगों में कुशल जनशक्ति की कमी को पूरा करने में मददगार होगी।\n• प्रशिक्षण संस्थानों के लिए: सरकारी और निजी कौशल केंद्रों में टूल्स और सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन की गति तेज होगी। प्रतिभागियों के अनुभवों के आधार पर देश भर के वोकेशनल ट्रेनिंग संस्थानों के पाठ्यक्रम में आधुनिक वैश्विक बदलाव देखने को मिलेंगे।\n• वैश्विक रोजगार के अवसर: भारतीय कार्यबल की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता और मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। जो युवा विदेशी मानकों के अनुरूप तकनीकी कौशल हासिल करेंगे, उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सीधी नियुक्ति मिल सकेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह संवाद 48वीं वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता से लौटे 70 भारतीय प्रतिभागियों के सम्मान और उनके व्यावहारिक अनुभवों से देश के नीतिगत ढांचे को बेहतर बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।\n\n• वैश्विक मंच पर ऐतिहासिक प्रदर्शन: भारतीय दल ने शंघाई में 22 से 27 सितंबर तक आयोजित प्रतियोगिता में 10वां स्थान प्राप्त किया, जिसमें 6 सिल्वर मेडल और 20 मेडल फॉर एक्सीलेंस शामिल रहे। इस उल्लेखनीय सफलता के बाद 9 अक्टूबर को प्रधानमंत्री ने प्रतिभागियों को उनके योगदान की सराहना के लिए आमंत्रित किया।\n• नीतिगत सुधारों के लिए जमीनी फीडबैक: प्रतियोगिता में युवाओं ने अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर, अंतरराष्ट्रीय टूल्स और काम करने के नए तरीकों का सामना किया। सरकार इन प्रतिभागियों के वास्तविक अनुभवों का उपयोग भारत के प्रशिक्षण तंत्र को अपग्रेड करने के लिए करना चाहती है।\n• कौशल विकास को मुख्यधारा में लाने का विजन: सरकार द्वारा अलग कौशल विकास मंत्रालय बनाए जाने के उद्देश्य को स्पष्ट करना और समाज में वोकेशनल ट्रेनिंग की प्रतिष्ठा को आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों के समकक्ष स्थापित करना इस संवाद का मुख्य कारण रहा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. 48वीं वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता का आयोजन कहां और कब हुआ था?\nइस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन चीन के शंघाई में 22 से 27 सितंबर के बीच किया गया था।\n\n2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रतिभागियों से कब मुलाकात की?\nप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 अक्टूबर को प्रधानमंत्री आवास पर सभी प्रतिभागियों से मुलाकात की।\n\n3. वर्ल्ड स्किल्स 2026 में भारत ने कौन सा स्थान और कितने पदक हासिल किए?\nभारतीय टीम ने प्रतियोगिता में ओवरऑल 10वां स्थान हासिल किया, जिसमें 6 सिल्वर मेडल और 20 मेडल फॉर एक्सीलेंस शामिल रहे।\n\n4. भारत की तरफ से प्रतियोगिता में कितने प्रतिभागियों ने भाग लिया था?\nभारत की तरफ से 70 प्रतिभागियों ने 63 विभिन्न कौशल विधाओं में हिस्सा लिया था।\n\n5. प्रधानमंत्री ने कौशल प्रशिक्षण संस्थानों की तुलना किन संस्थानों से की?\nप्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वोकेशनल और कौशल प्रशिक्षण संस्थानों का महत्व देश के प्रमुख संस्थानों जैसे आईआईटी और आईआईएम से किसी भी मायने में कम नहीं है।\n\n6. पीएम मोदी ने युवाओं से किस भूमिका को निभाने की अपील की?\nप्रधानमंत्री ने प्रतिभागियों से कौशल विकास के एंबेसडर बनने और नई तकनीकों के अनुसार खुद को लगातार अपग्रेड करने का आग्रह किया।\n\nप्रेरणा और सबक\nशंघाई में 63 विधाओं में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागियों को टक्कर देकर शीर्ष 10 में जगह बनाने वाले भारतीय युवाओं का यह सफर हर आकांक्षी छात्र के लिए मार्गदर्शक है।\n\n• प्रैक्टिकल हुनर की ताकत पहचानें: सफलता केवल पारंपरिक कॉलेज डिग्रियों से तय नहीं होती, बल्कि किसी एक काम में विशेषज्ञता हासिल करना भी आपको वैश्विक मंच पर खड़ा कर सकता है। अपने हाथों के हुनर और तकनीकी दक्षता को कभी कमतर न समझें।\n• तकनीक के साथ खुद को अपग्रेड करते रहें: जैसे-जैसे नए सॉफ्टवेयर और टूल्स उद्योग में आ रहे हैं, अपनी क्षमताओं को लगातार तराशना जरूरी है। नए तरीकों को सीखने और अपनाने की तत्परता ही किसी पेशेवर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाती है।\n• अनुभवों से दूसरों का मार्ग प्रशस्त करें: खुद सीखे गए कौशल और अंतरराष्ट्रीय अनुभवों को दूसरों के साथ साझा करके समाज और देश के पूरे इकोसिस्टम को मजबूत बनाया जा सकता है। एक सफल पेशेवर का दायित्व अपनी कम्युनिटी के लिए मार्गदर्शक बनना भी है।",
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  "category": "क्रिकेट",
  "publishedAt": "2026-10-09",
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