# आगरा के युवक ने दोस्त से दिलवाई सिपाही भर्ती परीक्षा, मेरठ में ट्रेनिंग के दौरान खुला फर्जीवाड़ा

> उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है, जहां असली अभ्यर्थी की जगह उसका दोस्त लिखित परीक्षा से लेकर फिजिकल और मेडिकल टेस्ट तक में शामिल हुआ।

**Type:** article · **Category:** अपराध · **Published:** 2026-09-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/crime/agra-ke-mukul-ne-dosta-ramroop-se-dilavai-up-police-bharti-pariksha-meerut-men-treninga-ke-daurana-khula-pharjivara-31201 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूपी पुलिस भर्ती, मेरठ पुलिस लाइन, आगरा न्यूज, मुकुल, रामरूप, फर्जीवाड़ा, सिपाही भर्ती, पुलिस जांच

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती प्रक्रिया की सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देकर खाकी वर्दी हासिल करने की एक हैरान कर देने वाली साजिश का पर्दाफाश हुआ है। आगरा के एक अभ्यर्थी ने खुद परीक्षा में बैठे बिना सिपाही के पद पर चयन हासिल कर लिया। उसकी जगह उसके एक दोस्त ने लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा और मेडिकल जांच तक के सभी चरण पूरे किए। यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब एक गोपनीय शिकायती पत्र के जरिए उच्च अधिकारियों को इस धांधली की जानकारी मिली, जिसके बाद कराई गई जांच में बायोमेट्रिक डेटा का बड़ा अंतर सामने आया।

## साजिश का ताना-बाना और फर्जीवाड़े का तरीका
इस पूरे मामले की जड़ें आगरा जिले से जुड़ी हैं। आगरा निवासी मुकुल (पुत्र पप्पूराम) पुलिस विभाग में सिपाही बनने का सपना देख रहा था, लेकिन उसे चयन प्रक्रिया खुद पास करने पर भरोसा नहीं था। मुकुल ने अपने दोस्त रामरूप (पुत्र किशनचंद निषाद) के साथ मिलकर भर्ती प्रणाली को धोखा देने की योजना बनाई। योजना के मुताबिक, मुकुल के नाम पर जारी प्रवेश पत्र और आवेदन से जुड़े दस्तावेजों में मुकुल की जगह रामरूप की तस्वीर लगाई गई।

इसके बाद रामरूप ने मुकुल की पहचान का इस्तेमाल करते हुए लिखित परीक्षा दी। बात केवल लिखित परीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि दस्तावेजों के सत्यापन, शारीरिक दक्षता परीक्षा और मेडिकल जांच में भी रामरूप ही मुकुल बनकर शामिल हुआ। शुरुआती चरणों में दस्तावेजों के भारी दबाव और सत्यापन की बारीक खामियों के कारण यह हेरफेर पकड़ में नहीं आ सका। इसके चलते मुकुल का अंतिम रूप से चयन हो गया और उसे मेरठ पुलिस लाइन में रिक्रूट आरक्षी के तौर पर प्रशिक्षण के लिए भेज दिया गया।

## रजिस्टर्ड पत्र ने खोली पूरी पोल
मुकुल मेरठ पुलिस लाइन में आराम से ट्रेनिंग ले रहा था, लेकिन इसी बीच एक रजिस्टर्ड डाक ने पूरे खेल को बिगाड़ दिया। पुलिस अधीक्षक और पुलिस लाइन के क्षेत्राधिकारी (सीओ) को एक शिकायती पत्र प्राप्त हुआ। इस पत्र में मुकुल की असली तस्वीर संलग्न थी और विस्तार से बताया गया था कि परीक्षा देने वाला व्यक्ति असल में कोई और था।

शिकायत मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और तत्काल गोपनीय जांच शुरू कर दी गई। जांच टीम ने जब भर्ती बोर्ड के रिकॉर्ड, फिजिकल टेस्ट के दौरान लिए गए बायोमेट्रिक विवरण और मुकुल के वास्तविक फिंगरप्रिंट का मिलान किया, तो भारी विसंगतियां पाई गईं। बायोमेट्रिक डेटा का मिलान न होने से यह साफ हो गया कि ट्रेनिंग ले रहा व्यक्ति और परीक्षा में बैठने वाला व्यक्ति अलग-अलग थे।

## ट्रेनिंग सेंटर से फरार हुआ आरोपी, मुकदमा दर्ज
जैसे ही मुकुल को भनक लगी कि उसके दस्तावेजों और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड की गहन जांच शुरू हो चुकी है, वह मेरठ पुलिस लाइन से चुपके से फरार हो गया। जांच पूरी होने के बाद एसपी यातायात ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को सौंप दी।

रिपोर्ट में धांधली की पुष्टि होने पर मेरठ के थाना सिविल लाइंस में आधिकारिक कार्रवाई शुरू की गई। आरटीसी प्रभारी निरीक्षक विजय बहादुर सिंह की तहरीर पर मुख्य आरोपी मुकुल और उसकी जगह परीक्षा देने वाले उसके सहयोगी रामरूप के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस की टीमें अब दोनों फरार आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

## भर्ती सुरक्षा तंत्र पर खड़े हुए सवाल
इस घटना ने प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में होने वाले सत्यापन तंत्र की कमजोरियों को उजागर किया है। आधुनिक तकनीक और बायोमेट्रिक सिस्टम लागू होने के बावजूद सॉल्वर और फर्जी उम्मीदवार शुरुआती जांच को पार करने में सफल रहे। इस खुलासे के बाद भर्ती बोर्ड और पुलिस प्रशासन ने सत्यापन के नियमों को और अधिक कड़ा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि भविष्य में इस तरह की धांधली की पुनरावृत्ति न हो सके।

## इसका आप पर असर
यह मामला प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों और पुलिस भर्ती प्रक्रिया के संचालन से जुड़े नियमों पर सीधा असर डालता है।

- **उत्तर प्रदेश में:** इस घटना के बाद भर्ती बोर्ड दस्तावेजों और बायोमेट्रिक मिलान की प्रक्रिया को कई स्तरों पर अनिवार्य और अधिक सख्त बनाएगा। परीक्षा केंद्रों और फिजिकल ग्राउंड पर हर चरण में रीयल-टाइम डिजिटल फिंगरप्रिंट और फेस रिकग्निशन सत्यापन से गुजरना होगा।
- **अभ्यर्थियों के लिए:** किसी भी तरह के अनुचित साधन या छद्म रूप धारण करने पर केवल अभ्यर्थिता ही रद्द नहीं होगी, बल्कि गैर-जमानती धाराओं में आपराधिक मुकदमा भी दर्ज होगा। पकड़े जाने पर अभ्यर्थी हमेशा के लिए सरकारी नौकरी की परीक्षाओं से प्रतिबंधित हो जाएंगे।
- **प्रशासनिक स्तर पर:** पुलिस ट्रेनिंग सेंटरों में शामिल होने वाले सभी नए रिक्रूट्स का दोबारा बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन किया जाएगा। इससे ट्रेनिंग के शुरुआती दिनों में ही किसी भी फर्जीवाड़े की समय रहते पहचान संभव हो सकेगी।
- **जांच और निगरानी:** फर्जीवाड़ा करने वाले सॉल्वर और उनके मददगारों के खिलाफ संगठित अपराध अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए पुलिस विभाग भर्ती डेटाबेस की नियमित आंतरिक ऑडिटिंग को बढ़ावा देगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटना एक अभ्यर्थी द्वारा अपने स्थान पर दूसरे व्यक्ति को बिठाकर परीक्षा और भर्ती के सभी चरण पार करने की साजिश के कारण घटी, जो आंतरिक सत्यापन में शुरुआती ढिलाई की वजह से संभव हुई।

- **सीधा कारण:** आगरा के मुकुल ने खुद परीक्षा दिए बिना अपने दोस्त रामरूप की तस्वीर एडमिट कार्ड पर लगाकर उसे लिखित, फिजिकल और मेडिकल टेस्ट में अपनी जगह भेजा।
- **सुरक्षा में चूक:** भर्ती प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में बड़ी संख्या में उम्मीदवारों की मौजूदगी के चलते बायोमेट्रिक और फोटो का गहन मिलान समय पर नहीं हो सका, जिससे फर्जी अभ्यर्थी आगे बढ़ता गया।
- **पर्दाफाश का आधार:** वरिष्ठ अधिकारियों को मिली एक रजिस्टर्ड शिकायती चिट्ठी और मुकुल की वास्तविक फोटो के आधार पर जब ट्रेनिंग सेंटर में बायोमेट्रिक डेटा खंगाला गया, तब फिंगरप्रिंट का बड़ा अंतर सामने आया।
- **विभागीय कार्रवाई:** जांच रिपोर्ट में धोखाधड़ी साबित होने पर दोनों आरोपियों के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज किया गया और उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. यूपी पुलिस भर्ती में फर्जीवाड़े का यह मामला कहां का है?
यह मामला मुख्य रूप से आगरा के अभ्यर्थी मुकुल और उसके दोस्त रामरूप से जुड़ा है, जिसका खुलासा मेरठ पुलिस लाइन में ट्रेनिंग के दौरान हुआ।

### 2. मुकुल ने पुलिस भर्ती परीक्षा कैसे पास की थी?
मुकुल ने खुद परीक्षा नहीं दी थी, बल्कि अपने स्थान पर दोस्त रामरूप की फोटो एडमिट कार्ड पर लगाकर उससे लिखित, फिजिकल और मेडिकल टेस्ट दिलवाए थे।

### 3. इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश कैसे हुआ?
पुलिस अधीक्षक और सीओ को मिली एक रजिस्टर्ड शिकायती चिट्ठी के बाद कराई गई गोपनीय जांच और बायोमेट्रिक डेटा मिलान में यह खेल पकड़ा गया।

### 4. आरोपियों के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की गई है?
आरटीसी प्रभारी निरीक्षक विजय बहादुर सिंह की तहरीर पर मेरठ के थाना सिविल लाइंस में मुकुल और रामरूप के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है।

### 5. जांच शुरू होने पर आरोपी मुकुल ने क्या किया?
जांच की भनक लगते ही आरोपी मुकुल मेरठ पुलिस लाइन के ट्रेनिंग सेंटर से चुपचाप फरार हो गया।

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