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  "title": "अजमेर पुलिस की दिल्ली में बड़ी कार्रवाई, पॉलिसी रिन्यूअल का झांसा देकर ₹6.50 लाख ऐंठने वाला विकास कुमार चढ़ा हत्थे",
  "summary": "अजमेर साइबर पुलिस ने दिल्ली से विकास कुमार को गिरफ्तार कर 6.50 लाख रुपये की ठगी का पर्दाफाश किया है। आरोपी फर्जी कंपनियों के खातों से कमीशन लेकर रकम ट्रांसफर करता था।",
  "content": "अजमेर के एक निवासी के साथ इंश्योरेंस पॉलिसी रिन्यूअल के नाम पर 6.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के खिलाफ साइबर थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस की विशेष टीम ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दबिश देकर मुख्य आरोपी विकास कुमार को धर दबोचा है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह कोई छिटपुट अपराध नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा है जो निर्दोष लोगों की जीवनभर की कमाई पर डाका डाल रहा था।\n\nफर्जी बैंक खातों से सुलझी ठगी की गुत्थी\nपीड़ित राजकुमार हेड़ा ने साइबर थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने बताया कि पॉलिसी रिन्यूअल का झांसा देकर उनसे करीब 6 लाख 50 हजार रुपये ठग लिए गए। मामला दर्ज होने के बाद साइबर पुलिस की टीम ने तुरंत तकनीकी अनुसंधान शुरू किया। पुलिस ने सबसे पहले उन बैंक खातों के ट्रांजेक्शन ट्रेल को ट्रैक किया, जिनमें ठगी की राशि ट्रांसफर की गई थी।\n\nडिजिटल फुटप्रिंट्स और बैंकिंग साक्ष्यों की परतें दर परतें खोलते हुए पुलिस टीम दिल्ली तक पहुंची। गहन तफ्तीश के आधार पर पुलिस ने विकास कुमार को चिन्हित किया और उसे गिरफ्तार कर लिया।\n\nकिराए के खातों का बड़ा नेटवर्क और कमीशन का खेल\nपूछताछ के दौरान पुलिस के सामने कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोपी विकास कुमार ने फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर आईजीएमएस कॉरपोरेशन नाम से एक फर्म का बैंक खाता खुलवाया था। कागजों में इस फर्म को सूर्यांश नाम की कपड़ों की दुकान के रूप में दिखाया गया था। वास्तविक रूप में इस बैंक खाते का उपयोग ठगी से प्राप्त अवैध रकम को तुरंत ठिकाने लगाने और ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।\n\nइस काले कारोबार में खाते का इस्तेमाल करने की एवज में सूर्यांश नामक व्यक्ति को रोजाना 500 रुपये का किराया दिया जाता था। वहीं, साइबर ठगी से खाते में आने वाली पूरी रकम में से विकास कुमार अपना 10 प्रतिशत कमीशन काटकर अपने पास रखता था। बाकी बची 90 फीसदी रकम को वह गिरोह के अन्य सहयोगियों अमृत, आसिफ और बाकी साथियों के खातों में आगे ट्रांसफर कर देता था।\n\nअजमेर लाकर पूछताछ जारी, कई और खुलासे संभव\nसाइबर थाना पुलिस विकास कुमार के साथ-साथ इस नेटवर्क से जुड़े सूर्यांश, अमृत और आसिफ को भी गिरफ्तार कर अजमेर ले आई है। पुलिस अब इन सभी आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर गहन पूछताछ कर रही है। पुलिस टीम यह पता लगाने की कोशिश में जुटी है कि यह गिरोह कब से सक्रिय था और इस फर्जी खाते के जरिए अब तक कुल कितने लाख रुपये का अवैध लेन-देन किया जा चुका है।\n\nइसके अलावा, पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इस गिरोह ने अजमेर के अलावा देश के अन्य हिस्सों में कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान आरोपियों से पूछताछ के बाद इस साइबर सिंडिकेट से जुड़े कई अन्य संदिग्धों के नामों का खुलासा होगा और ठगी की पूरी नेटवर्क चेन ध्वस्त की जा सकेगी।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: बीमा या पॉलिसी रिन्यूअल से जुड़े फोन कॉल पर किसी भी व्यक्ति को अपनी बैंक डिटेल या ओटीपी शेयर न करें और केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही भुगतान करें।\n\nअजमेर और राजस्थान में: साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने पर तुरंत स्थानीय साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं या राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अजमेर में कितने रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है?\nपीड़ित राजकुमार हेड़ा से पॉलिसी रिन्यूअल कराने के नाम पर करीब 6.50 लाख रुपये की ठगी की गई है।\n\n2. पुलिस ने मुख्य आरोपी को कहां से गिरफ्तार किया है?\nअजमेर की साइबर थाना पुलिस ने दिल्ली से मुख्य आरोपी विकास कुमार को गिरफ्तार किया है।\n\n3. ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए किस नाम से खाता खोला गया था?\nआरोपी ने 'सूर्यांश' नाम की कपड़ों की दुकान की आड़ में 'आईजीएमएस कॉरपोरेशन' फर्म का बैंक खाता खुलवाया था।\n\n4. आरोपी विकास कुमार ठगी की राशि में से कितना कमीशन रखता था?\nविकास कुमार ठगी की राशि का 10 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखता था और बाकी रकम अमृत, आसिफ और अन्य साथियों को भेजता था।\n\n5. खाते के मालिक सूर्यांश को कितना भुगतान किया जाता था?\nफर्जी फर्म का बैंक खाता उपलब्ध कराने के बदले सूर्यांश को प्रतिदिन 500 रुपये दिए जाते थे।",
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  "category": "अपराध",
  "publishedAt": "2026-08-22",
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