बरेली में अग्निवीर अभ्यर्थियों से मेडिकल पास कराने के नाम पर ठगी, फर्जी हवलदार राजेश तिवारी गिरफ्तार बरेली मिलिट्री अस्पताल के बाहर अग्निवीर भर्ती के री-मेडिकल में पास कराने का झांसा देकर अभ्यर्थियों से रुपये ऐंठने वाले आरोपी राजेश तिवारी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उत्तर प्रदेश के बरेली में मिलिट्री अस्पताल के सामने से पुलिस ने अग्निवीर भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों को री-मेडिकल में पास कराने का झूठा आश्वासन देकर ठगी करने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरोपी खुद को भारतीय सेना का रिटायर्ड हवलदार बताकर युवाओं को अपने जाल में फंसाता था। आरोपी की पहचान लखनऊ के सैरपुर निवासी राजेश तिवारी के रूप में हुई है। मिलिट्री इंटेलिजेंस बरेली से मिले सटीक इनपुट के आधार पर थाना कैंट पुलिस और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को रंगे हाथों धर दबोचा। मिलिट्री इंटेलिजेंस के इनपुट पर कैंट पुलिस और एसओजी की कार्रवाई अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया के तहत जिन अभ्यर्थियों को शुरुआती शारीरिक व चिकित्सीय जांच में अनफिट घोषित किया गया था, उनका री-मेडिकल परीक्षण बरेली के मिलिट्री अस्पताल में चल रहा था। इस दौरान मिलिट्री खुफिया इकाई को सूचना मिली कि अस्पताल के बाहर कुछ संदिग्ध तत्व असहाय अभ्यर्थियों को दोबारा मेडिकल में फिट कराने का लालच देकर भारी रकम वसूल रहे हैं। सूचना की पुष्टि होने के बाद थाना कैंट पुलिस और एसओजी की टीम ने मिलिट्री अस्पताल के सामने नाकेबंदी की और राजेश तिवारी को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से कई संदिग्ध दस्तावेज, एक रजिस्टर, जाली मुहर, मोबाइल फोन और आर्मी कैंटीन कार्ड की एक छायाप्रति बरामद हुई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी सेना से जुड़े फर्जी कागजातों का सहारा लेकर अभ्यर्थियों में अपनी साख कायम करता था। जाली मुहर और फर्जी कॉलअप लेटर से बनाता था दबाव राजेश तिवारी का ठगी करने का तरीका बेहद शातिराना था। वह मिलिट्री अस्पताल में री-मेडिकल के लिए आने वाले अभ्यर्थियों से संपर्क साधता था और दावा करता था कि उसकी सेना के उच्च अधिकारियों तक सीधी पहुंच है। अभ्यर्थियों को पूरा भरोसा दिलाने के लिए वह 108 महार रेजिमेंट से संबंधित फर्जी कॉलअप लेटर की छायाप्रतियां दिखाता था। इसके अलावा आरोपी के कब्जे से 155 इन्फैंट्री बटालियन जबलपुर की एक फर्जी रबड़ मुहर भी पाई गई है। आरोपी के पास मौजूद रजिस्टर में उसने अभ्यर्थियों के नाम, उनके रोल नंबर और मेडिकल में फेल होने के विशिष्ट कारणों को दर्ज कर रखा था। रजिस्टर में उसने बकायदा फिट और अनफिट की अलग-अलग श्रेणी बनाई हुई थी। वह इस रजिस्टर की तस्वीरें अभ्यर्थियों को दिखाकर यह दावा करता था कि उसने पहले भी कई फेल अभ्यर्थियों को दोबारा पास कराया है। यूपीआई से ली गई थी 40 हजार रुपये की रकम जांच के दौरान पुलिस को आरोपी के मोबाइल फोन और रजिस्टर से वित्तीय लेनदेन के ठोस प्रमाण मिले हैं। आरोपी राजेश तिवारी ने 21 अगस्त को अंकित सिंह चौहान नाम के एक अग्निवीर अभ्यर्थी को री-मेडिकल में पास कराने का भरोसा दिया था। इसके बदले उसने अभ्यर्थी से यूपीआई के जरिए 40 हजार रुपये की रकम अपने खाते में ट्रांसफर कराई थी। इस लेनदेन का पूरा ब्योरा आरोपी ने अपने रजिस्टर में भी दर्ज किया हुआ था। बरामद मोबाइल फोन की जांच करने पर पुलिस को गजेंद्र सिंह नाम के व्यक्ति के साथ की गई विस्तृत व्हाट्सएप चैट मिली है। इस चैट में अभ्यर्थियों के मेडिकल रेफरल फॉर्म, रोल नंबर और पैसों के लेनदेन की बातचीत दर्ज है। राजेश अभ्यर्थियों से जानकारी जुटाकर व्हाट्सएप के माध्यम से गजेंद्र सिंह को भेजता था और रकम मिलने के बाद अपना हिस्सा काटकर बाकी पैसा गजेंद्र सिंह के बताए बैंक खाते में भेज देता था। जबलपुर से लखनऊ तक का सफर और गिरोह का ताना-बाना एसपी सिटी मानुष पारीक ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि राजेश तिवारी साल 2016 से जबलपुर में एक कोचिंग अकादमी चलाता था, जहां वह युवाओं को सेना भर्ती की तैयारी कराता था। इसके बाद साल 2019-20 में वह लखनऊ शिफ्ट हो गया और वहां से भी इसी तरह की गतिविधियों को अंजाम देता रहा। केंद्र सरकार द्वारा अग्निवीर भर्ती योजना शुरू किए जाने के बाद उसने मेडिकल में फेल अभ्यर्थियों को पास कराने के नाम पर ठगी का नया तरीका अपना लिया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस धोखाधड़ी नेटवर्क के तार उत्तर प्रदेश से बाहर भी जुड़े हुए हैं। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि इस काम में उसका साथी गजेंद्र सिंह मुख्य भूमिका निभाता है। इसके अलावा गिरोह के कुछ अन्य सदस्यों के पंजाब और राजस्थान में सक्रिय होने की जानकारी मिली है। पुलिस की विशेष टीमें इन राज्यों में दबिश देकर अन्य सह-आरोपियों की तलाश में जुटी हैं। तीन सरकारी नौकरियों के नाम पर जालसाजी और बैंक खातों की जांच पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपी राजेश तिवारी केवल अग्निवीर भर्ती तक ही सीमित नहीं था, बल्कि वह युवाओं को तीन अलग-अलग सरकारी नौकरियों का झांसा देकर ठगता था। वह डाक विभाग यानी पोस्ट ऑफिस में नौकरी लगवाने, टेरिटोरियल आर्मी में भर्ती कराने और अग्निवीर परीक्षा के मेडिकल में पास कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूल चुका है। पुलिस ने आरोपी के बैंक खातों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है, जिसमें कई संदिग्ध वित्तीय लेनदेन पाए गए हैं। पुलिस अब इस बात का पता लगा रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने अभ्यर्थियों को अपना शिकार बनाया है और उनके खातों में कितनी अवैध रकम ट्रांसफर की गई है। पुलिस ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे सेना भर्ती के नाम पर किसी भी बिचौलिए या ठग के झांसे में न आएं। इसका आप पर असर • भारत में: सेना और अग्निवीर भर्ती में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को ध्यान रखना चाहिए कि मेडिकल परीक्षण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होती है और इसमें किसी बिचौलिए की कोई भूमिका नहीं होती। - उत्तर प्रदेश और बरेली में: कैंट पुलिस और मिलिट्री इंटेलिजेंस फर्जी भर्ती गिरोह के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, इसलिए ठगी का शिकार हुए पीड़ित छात्र सीधे पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सवाल-जवाब 1. बरेली में पुलिस ने किस आरोप में राजेश तिवारी को गिरफ्तार किया है? राजेश तिवारी को खुद को सेना का रिटायर्ड हवलदार बताकर अग्निवीर भर्ती के मेडिकल में फेल अभ्यर्थियों को पास कराने के नाम पर ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। 2. आरोपी के पास से पुलिस ने क्या-क्या सामान बरामद किया है? पुलिस ने आरोपी के पास से अभ्यर्थियों की सूची वाला रजिस्टर, 155 इन्फैंट्री बटालियन जबलपुर की फर्जी मुहर, 108 महार रेजिमेंट के जाली कॉलअप लेटर, मोबाइल फोन और आर्मी कैंटीन कार्ड की छायाप्रति बरामद की है। 3. ठगी के इस मामले में पैसों का लेनदेन कैसे होता था? राजेश तिवारी अभ्यर्थियों से यूपीआई के माध्यम से पैसे लेता था, जैसे उसने अभ्यर्थी अंकित सिंह चौहान से 40 हजार रुपये लिए थे। इसके बाद वह अपना हिस्सा रखकर बाकी रकम अपने साथी गजेंद्र सिंह के खाते में भेज देता था। 4. आरोपी राजेश तिवारी किन-किन अन्य नौकरियों के नाम पर ठगी करता था? आरोपी अग्निवीर भर्ती के अलावा पोस्ट ऑफिस में नौकरी लगाने और टेरिटोरियल आर्मी में भर्ती कराने के नाम पर भी अभ्यर्थियों से ठगी करता था। 5. इस फर्जी गिरोह के तार किन अन्य राज्यों से जुड़े पाए गए हैं? पुलिस जांच और एसपी सिटी मानुष पारीक के बयान के अनुसार इस गिरोह के तार उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब और राजस्थान से भी जुड़े हुए हैं। https://trendkia.com/crime/bareilly-men-agnivira-abhyarthiyon-se-medikala-pasa-karane-ke-nama-para-thagi-pharji-havaladara-rajesh-tiwari-giraphtara-22503 TrendKia — Har trend, sabse pehle.