# बिलासपुर जिला अस्पताल की लापरवाही से महिला जिंदगी और मौत के बीच, प्रसव के बाद पेट में हुआ था संक्रमण

> बिलासपुर जिला अस्पताल में डिलीवरी के बाद महिला की तबीयत गंभीर हो गई। परिजनों का आरोप है कि पेट दर्द को गैस बताकर टाल दिया गया, जिससे संक्रमण फैल गया और अब तक 8 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।

**Type:** article · **Category:** अपराध · **Published:** 2026-08-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/crime/bilaspur-jila-aspatal-ki-laparwahi-se-mahila-zindagi-aur-maut-ke-beech-20242 · **Language:** Hindi
**Tags:** बिलासपुर जिला अस्पताल, चिकित्सकीय लापरवाही, ज्योति देवांगन, छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य सेवाएं, तोरवा लाइफ केयर अस्पताल

बिलासपुर के सरकारी अस्पताल में एक प्रसूता की हालत बिगड़ने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। परिजनों ने सीधे तौर पर अस्पताल के प्रबंधन और डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का ठीकरा फोड़ा है। उनका कहना है कि ऑपरेशन के बाद मरीज के पेट में असहनीय दर्द हो रहा था, मगर अस्पताल के अमले ने इसे सामान्य गैस की समस्या मानकर अनदेखा कर दिया। इस गंभीर स्थिति के चलते अब पीड़िता पिछले पच्चीस दिनों से मौत और जिंदगी के बीच संघर्ष कर रही है, जबकि परिवार को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

घटना की शुरुआत सत्ताइस जुलाई को हुई थी, जब ज्योति देवांगन को प्रसव पीड़ा के बाद बिलासपुर जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया था। बच्चे के जन्म के फौरन बाद ही उनके पेट में तेज चुभन और दर्द शुरू हो गया। परिवार के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों को कई बार इस तकलीफ के बारे में बताया, लेकिन किसी ने भी गंभीरता दिखाते हुए अल्ट्रासाउंड या अन्य डीप स्कैन नहीं कराए। डॉक्टरों ने इसे साधारण गैस का दर्द करार दिया और कुछ मामूली गोलियां देकर अस्पताल से छुट्टी दे दी।

अस्पताल से घर लौटने के बाद महिला की तबीयत में सुधार होने के बजाय लगातार गिरावट दर्ज की जाने लगी। जब दर्द असहनीय हो गया और हालात बिगड़ने लगे, तब परिजन उसे आनन-फानन में एक प्राइवेट क्लिनिक ले गए। वहां हुई मेडिकल जांच में जो सच सामने आया, उसने सभी को हैरान कर दिया। परिजनों का दावा है कि डिलीवरी के समय लगाए गए टांकों में गड़बड़ी या ऑपरेशनल कॉम्प्लिकेशन की वजह से अंदरूनी संक्रमण फैल चुका था और पेट में मवाद भर गया था। हालत ज्यादा नाज़ुक होने की वजह से उन्हें तुरंत तोरवा के लाइफ केयर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां अभी भी उनका इलाज चल रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम में परिवार पर आर्थिक बोझ भी बहुत ज्यादा बढ़ गया है। परिजनों के अनुसार पिछले पच्चीस दिनों के इस लंबे और खर्चीले इलाज के दौरान अब तक आठ लाख रुपये से अधिक की रकम खर्च हो चुकी है। लगातार बढ़ रहे मेडिकल बिलों और ज्योति की नाजुक हालत ने परिवार को मानसिक और वित्तीय रूप से तोड़ दिया है।

परिजनों द्वारा की गई औपचारिक शिकायतों के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। कलेक्टर ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा कि यह मामला केवल एक सामान्य मेडिकल कॉम्प्लिकेशन था या फिर डॉक्टरों की तरफ से इलाज में कोई बड़ी चूक हुई थी। इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि यदि समय रहते डॉक्टरों ने पेट के दर्द को गंभीरता से ले लिया होता और सही जांच कर ली जाती, तो क्या ज्योति की स्थिति इतनी ज्यादा गंभीर होती?

## इसका आप पर असर
**छत्तीसगढ़ में:** सरकारी अस्पतालों में प्रसव और पोस्ट-ऑपरेटिव केयर के दौरान बरती जाने वाली सतर्कता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

**बिलासपुर में:** स्थानीय निवासियों और मरीजों के तीमारदारों के बीच जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर चिंता बढ़ गई है, जिससे प्रशासनिक जांच पर नजरें टिक गई हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. ज्योति देवांगन को बिलासपुर जिला अस्पताल में कब भर्ती कराया गया था?
ज्योति देवांगन को 27 जुलाई को प्रसव के लिए बिलासपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

### 2. परिजनों ने जिला अस्पताल के डॉक्टरों पर क्या आरोप लगाया है?
परिजनों का आरोप है कि डिलीवरी के बाद पेट में होने वाले तेज दर्द को डॉक्टरों ने सामान्य गैस बताकर टाल दिया और गंभीर जांच किए बिना ही अस्पताल से छुट्टी दे दी।

### 3. फिलहाल मरीज का इलाज कहां चल रहा है?
हालत बिगड़ने के बाद ज्योति देवांगन का इलाज तोरवा के लाइफ केयर अस्पताल में चल रहा है।

### 4. इस इलाज में अब तक कितना खर्च आ चुका है?
परिजनों के अनुसार पिछले 25 दिनों के निजी अस्पताल के इलाज में अब तक 8 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।

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