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  "type": "article",
  "title": "छत्तीसगढ़ में डॉक्टर के कैमरे और सुई से लीक हुआ एग्रीकल्चर पेपर, प्रोफेसर गिरफ्तार",
  "summary": "छत्तीसगढ़ के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में बीएससी एग्रीकल्चर की परीक्षा का पेपर लीक करने वाले प्रोफेसर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी प्रोफेसर ने मेडिकल कैमरे और सुई की मदद से सीलबंद लिफाफे को बिना फाड़े अंदर का पेपर चुराया था।",
  "content": "देशभर में परीक्षाओं की सुरक्षा को लेकर तमाम दावे किए जाते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ से सामने आए एक हैरान कर देने वाले मामले ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की बीएससी एग्रीकल्चर परीक्षा का पेपर लीक हो गया, जिसके तौर-तरीकों ने पुलिस अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। इस पूरी साजिश के पीछे किसी पेशेवर गिरोह का हाथ नहीं, बल्कि एक कॉलेज के प्रोफेसर का दिमाग था, जिसने मेडिकल उपकरणों और सिलाई के सामान का इस्तेमाल करके इस अनोखे कांड को अंजाम दिया। पुलिस और साइबर सेल ने महज 36 घंटे के भीतर इस हाई-टेक साजिश का पर्दाफाश करते हुए मुख्य आरोपी प्रोफेसर समेत पांच छात्रों को गिरफ्तार कर लिया है।\n\n \n\nडॉक्टरों वाले कैमरे और सुई का खतरनाक इस्तेमाल\n\nइस पूरे मामले का मुख्य आरोपी 38 वर्षीय योगेश सोनकेसरिया है, जो दुर्ग के भारती एग्रीकल्चर कॉलेज में अध्यापन का काम करता है। यूनिवर्सिटी के तय नियमों के अनुसार कॉलेज के प्रोफेसरों को ही मुख्य केंद्र से प्रश्नपत्रों के पैकेट लाने और उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने की जिम्मेदारी मिलती है। घटना 17 अगस्त की है जब योगेश रायपुर के जोरा स्थित एग्रीकल्चर कॉलेज में कॉपियां जमा कराने पहुंचे थे। वहां से लौटते वक्त उन्होंने 20 अगस्त को होने वाली परीक्षा के सीलबंद लिफाफे भी ले लिए। बाकी विषयों के पेपर तो उन्होंने अपने कॉलेज के लॉकर में महफूज रख दिए, लेकिन कीट विज्ञान यानी एंटोमोलॉजी विषय के गोपनीय लिफाफे को वे अपने घर उठा ले गए।\n\n \n\nमहज ढाई हजार के कैमरे से लगाई सेंध\n\nघर पहुंचने के बाद प्रोफेसर योगेश ने शातिर तरीके से लिफाफे से छेड़छाड़ की योजना पर काम शुरू किया। उन्होंने ऑनलाइन बाजार से मात्र 2,500 रुपये कीमत का एक बारीक एंडोस्कोपिक कैमरा खरीदा, जिसका इस्तेमाल अमूमन डॉक्टर शरीर के भीतर के अंगों को देखने के लिए करते हैं। इसके अलावा उन्होंने एक सुई और अन्य नुकीले उपकरणों की मदद से लिफाफे के एक कोने में बेहद सूक्ष्म छेद किया। इसी सुराख के जरिए कैमरे की पतली केबल को अंदर दाखिल किया गया और मोबाइल फोन के कैमरे की मदद से पूरे प्रश्नपत्र के पन्नों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड कर ली गईं। इसके बाद उन्होंने सवालों को अपने हाथ से कागज पर नोट किया और लिफाफे को फेविकॉल से दोबारा इस सफाई से चिपका दिया कि किसी को भी उस पर शक न हो सके।\n\n \n\nमहज 11 हजार रुपये में हुई थी सौदेबाजी\n\nपेपर चोरी करने के बाद इस प्रोफेसर ने उसे अपने ही कॉलेज के एक छात्र अजय नायक के हाथों 11,000 रुपये की नकद कीमत पर बेच दिया। तयशुदा कार्यक्रम के मुताबिक 20 अगस्त की सुबह 10 बजे से प्रदेश के कुल 28 कॉलेजों के लगभग 1,200 छात्र-छात्राओं की परीक्षा आयोजित होनी थी। लेकिन परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले ही सुबह 8:41 बजे कवर्धा एग्रीकल्चर कॉलेज के आधिकारिक ईमेल पर एक गुमनाम संदेश पहुंचा, जिसमें इस बात का दावा किया गया कि परीक्षा का प्रश्नपत्र पहले ही लीक हो चुका है। कुछ ही देर में सोशल मीडिया और विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुप्स पर लीक हुए प्रश्नपत्र के स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल होने लगे, जिससे शिक्षा विभाग और यूनिवर्सिटी प्रशासन में हड़कंप मच गया।\n\n \n\nव्हाट्सएप पर वायरल हुआ पर्चा और एक्शन\n\nयूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने जब वायरल हो रहे प्रश्नपत्र का मिलान मूल प्रश्नपत्र से किया, तो सभी सवाल पूरी तरह से मेल खा गए। बिना किसी देरी के प्रशासन ने फौरन उस परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया और रायपुर के तेलीबांधा थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ आधिकारिक तौर पर एफआईआर दर्ज कराई गई। मामला बहुचर्चित और संवेदनशील होने के कारण पुलिस विभाग ने फौरन कार्रवाई तेज कर दी और रायपुर तथा दुर्ग की साइबर सेल की टीमों को मैदान में उतार दिया गया। इस मिशन की गंभीरता को समझते हुए सौ से अधिक पुलिस कर्मियों और साइबर विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया, जिसने तकनीकी साक्ष्यों को खंगालना शुरू किया।\n\n \n\nसाइबर सेल की टीम और 36 घंटे का ऑपरेशन\n\nजांच के दौरान साइबर विंग ने व्हाट्सएप संदेशों, सोशल मीडिया प्रोफाइल्स और मोबाइल लोकेशन डेटा का तकनीकी विश्लेषण करना शुरू किया। इस डिजिटल सर्विलांस के आधार पर सबसे पहले दुर्ग के एक छात्र अनुज मिंज का सुराग हाथ लगा। पुलिस ने जब छात्र को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो ताश के पत्तों की तरह एक के बाद एक सारे राज खुलकर सामने आ गए और कड़ियों से कड़ियां जुड़ती चली गईं। पुलिस की टीम सीधे इस पूरे षड्यंत्र के मास्टरमाइंड प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया तक जा पहुंची। छापेमारी के दौरान पुलिस ने प्रोफेसर के पास से 11,000 रुपये नकद, छह एंड्रॉइड मोबाइल फोन, एंडोस्कोपिक कैमरा, कनेक्टिंग केबल और सिलाई का सामान बरामद कर लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि अब इस रद्द हो चुकी परीक्षा को सितंबर महीने के पहले हफ्ते में पूरी सुरक्षा के बीच दोबारा आयोजित किया जाएगा।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: यह घटना देश भर के विश्वविद्यालयों और परीक्षा बोर्डों में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और परिवहन के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल उठाती है।\n\nछत्तीसगढ़ में: रायपुर और दुर्ग के छात्रों को रद्द हुई परीक्षा के लिए सितंबर के पहले हफ्ते तक इंतजार करना होगा और नई व्यवस्थाओं के तहत दोबारा परीक्षा देनी होगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. छत्तीसगढ़ में किस यूनिवर्सिटी का पेपर लीक हुआ था?\nरायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की बीएससी एग्रीकल्चर परीक्षा का पेपर लीक हुआ था।\n\n2. पेपर लीक करने के लिए किस मुख्य आरोपी को पकड़ा गया है?\nदुर्ग के भारती एग्रीकल्चर कॉलेज के 38 वर्षीय प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है।\n\n3. प्रोफेसर ने सीलबंद लिफाफा खोलने के लिए किस तकनीक का इस्तेमाल किया था?\nप्रोफेसर ने मेडिकल में इस्तेमाल होने वाले एंडोस्कोपिक कैमरे और सुई की मदद से लिफाफे में सूक्ष्म छेद करके अंदर के पेपर की तस्वीरें ली थीं।\n\n4. लीक हुआ पेपर कितने में बेचा गया था?\nप्रोफेसर ने यह प्रश्नपत्र अपने ही कॉलेज के एक छात्र को 11,000 रुपये में बेचा था।\n\n5. रद्द हुई परीक्षा अब कब आयोजित होगी?\nयह परीक्षा नए सुरक्षा नियमों के तहत सितंबर के पहले हफ्ते में दोबारा कराई जाएगी।",
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  "category": "अपराध",
  "publishedAt": "2026-08-23",
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    "छत्तीसगढ़ पेपर लीक",
    "योगेश सोनकेसरिया",
    "इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय",
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  "site": "TrendKia"
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