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  "title": "दिल्ली कोर्ट से यूट्यूबर अजीत भारती को झटका, एससी/एसटी एक्ट मामले में अग्रिम जमानत याचिका खारिज",
  "summary": "दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सोशल मीडिया वीडियो से जुड़े मामले में यूट्यूबर अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका नामंजूर कर दी है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।",
  "content": "यूट्यूबर अजीत भारती को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से बड़ा कानूनी झटका लगा है। अदालत ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम यानी एससी/एसटी एक्ट से जुड़े एक विवादित मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने सोमवार को इस मामले में अपना फैसला सुनाया और राहत देने से इनकार कर दिया।\n\n \n\nकहाँ और कब दर्ज हुई थी एफआईआर\n\nअजीत भारती के खिलाफ दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन में 23 अगस्त को एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने उनके खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के प्रावधानों के अलावा आईटी एक्ट की धारा 67 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(c) तथा 351(3) के तहत मामला पंजीबद्ध किया था। यह शिकायत आजाद समाज पार्टी कांशीराम के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बालकराम बौद्ध की ओर से कराई गई थी।\n\n \n\nक्या था वीडियो का विवाद\n\nयह पूरा विवाद अजीत भारती के सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर किए गए एक वीडियो से शुरू हुआ था। इस वीडियो का शीर्षक 'एसबी79: रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन नौटंकी एंड मोर | साप्ताहिक बकैती' रखा गया था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि इस वीडियो में जातिसूचक, अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा चंद्रशेखर आजाद और डॉ. भीमराव आंबेडकर को लेकर अनुचित टिप्पणियां करने, महिलाओं के संबंध में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करने और धमकियां देने के भी गंभीर आरोप लगाए गए थे।\n\n \n\nबचाव पक्ष की ओर से क्या दी गईं दलीलें\n\nअजीत भारती की पैरवी के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई अदालत में पेश हुए। बचाव पक्ष ने अदालत के सामने तर्क दिया कि इस मामले के तथ्यों का अध्ययन करने पर एससी/एसटी एक्ट के तहत कोई भी संज्ञेय अपराध नहीं बनता है। वकीलों ने यह भी बिंदु उठाया कि पुलिस ने अभी तक भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35(3) के अंतर्गत कोई नोटिस जारी नहीं किया था।\n\n \n\nबहन को लेकर दिए गए उकसावे का तर्क\n\nअजीत भारती के वकीलों ने अदालत को बताया कि उनकी टिप्पणियां किसी विशेष जाति या समुदाय के विरुद्ध नहीं थीं। उनका पक्ष था कि यह प्रतिक्रिया एक अन्य व्यक्ति द्वारा उनकी विवाहित बहन को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद आई थी। बचाव पक्ष के मुताबिक, वह बयान उनके लिए एक गंभीर उकसावे की स्थिति थी, जिसके जवाब में यह वीडियो बनाया गया था। वकीलों ने जोर देकर कहा कि भारती ने किसी भी समुदाय को अपशब्द नहीं कहे और उनकी बात केवल एक व्यक्ति तक सीमित थी।\n\n \n\nडॉ. आंबेडकर को लेकर वकीलों का स्पष्टीकरण\n\nसुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने डॉ. भीमराव आंबेडकर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोपों को भी पूरी तरह खारिज कर दिया। वकीलों का कहना था कि अजीत भारती ने बाबा साहेब के प्रति हमेशा आदर व्यक्त किया है। उनके बयानों का असली मकसद उनके कुछ अनुयायियों द्वारा की जाने वाली कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों पर सवाल खड़े करना था, न कि उनका अनादर करना।\n\n \n\nपुलिस का रुख और अदालत का फैसला\n\nसुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि केवल एफआईआर दर्ज होने मात्र से यह तय नहीं हो जाता कि आरोपी की गिरफ्तारी अनिवार्य होगी। पुलिस का कहना था कि इतनी भर बात से गिरफ्तारी की आशंका को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। हालांकि, तमाम दलीलों और पक्षों को सुनने के बाद पटियाला हाउस कोर्ट ने अजीत भारती की अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज कर दी। अदालत के विस्तृत आदेश के सामने आने के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा कि किन कानूनी बिंदुओं और आधारों पर कोर्ट ने जमानत देने से मना किया है।\n\nइसका आप पर असर\nइस न्यायिक फैसले का असर उन मामलों पर पड़ सकता है जहाँ सोशल मीडिया बयानों और ऑनलाइन टिप्पणियों को लेकर कानूनी कार्रवाई की जाती है।\n\n• भारत में: डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर कंटेंट बनाने वाले क्रिएटर्स के लिए ऑनलाइन बयानों और डिजिटल पोस्ट में इस्तेमाल होने वाली शब्दावली को लेकर कानूनी जोखिम और जवाबदेही बढ़ जाती है।\n\n• दिल्ली में: स्थानीय स्तर पर राजनीतिक दलों और डिजिटल मीडिया से जुड़े लोगों के बीच ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई और अदालती रुख पर कड़ी नजर रखी जा रही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अजीत भारती के खिलाफ मामला कहाँ दर्ज किया गया था?\nअजीत भारती के खिलाफ दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी।\n\n2. यह मामला किस अदालत में सुना गया?\nयह मामला दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में सुना गया जहाँ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने फैसला सुनाया।\n\n3. शिकायत किसने दर्ज कराई थी?\nशिकायत आजाद समाज पार्टी कांशीराम के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बालकराम बौद्ध द्वारा दर्ज कराई गई थी।\n\n4. अजीत भारती के वकील कौन थे?\nअजीत भारती की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई अदालत में पेश हुए थे।\n\n5. अदालत ने क्या फैसला सुनाया?\nअदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।",
  "url": "https://trendkia.com/crime/delhi-court-rejects-anticipatory-bail-plea-of-youtuber-ajit-bharti-in-sc-st-act-case-28974",
  "category": "अपराध",
  "publishedAt": "2026-09-07",
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    "अजीत भारती",
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